Single Boy in Hindi Moral Stories by Bikash parajuli books and stories PDF | सिंगल बॉय

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सिंगल बॉय

1. बचपन की परछाइयाँ

राहुल का जन्म एक छोटे कस्बे में हुआ। पिता साधारण नौकरी करते थे और माँ गृहिणी थीं। बचपन से ही राहुल थोड़ा शांत और अकेला रहने वाला बच्चा था। जब बाकी बच्चे गली में क्रिकेट खेलते, वो कोने में बैठकर किताबें पढ़ता या आसमान में बादलों को देखकर अपने-अपने किस्से गढ़ता।

दोस्त तो बनते थे, पर टिकते नहीं। कोई कहता "ये बहुत सीरियस है", कोई कहता "बहुत चुप रहता है"। धीरे-धीरे राहुल को आदत पड़ गई अकेलेपन की।


2. कॉलेज की दुनिया

कॉलेज पहुँचा तो जिंदगी बदलनी चाहिए थी, पर यहाँ भी वही कहानी। क्लास में लड़के-लड़कियाँ ग्रुप बनाकर मस्ती करते, पार्टियों में जाते, घूमने जाते, पर राहुल अक्सर लाइब्रेरी में बैठा रहता।

उसे लोग "सिंगल बॉय" कहकर चिढ़ाते। कोई मज़ाक करता –
"अरे भाई, तेरी गर्लफ्रेंड कब आएगी?"
तो कोई कहता –
"शादी में तो तुझे अकेला ही नाचना पड़ेगा।"

राहुल सिर्फ़ मुस्कुरा देता। दिल में कभी चुभता जरूर था, लेकिन उसने तय कर लिया था कि वो किसी के मज़ाक को अपनी कमजोरी नहीं बनाएगा।


3. एक अनकहा प्यार

कॉलेज में एक लड़की थी – अनन्या।
वो पढ़ाई में होशियार, स्वभाव से खुशमिज़ाज और सबकी दोस्त। राहुल की नज़रें कई बार उस पर टिक जातीं, पर हिम्मत कभी नहीं हुई कुछ कहने की।

कभी-कभी वो सोचता –
"काश, मैं भी अनन्या से बात कर पाता, तो शायद मैं इतना अकेला न रहता।"

एक बार लाइब्रेरी में अनन्या ने उससे कहा –
"तुम हमेशा अकेले क्यों रहते हो? ग्रुप में आ जाया करो।"
राहुल ने मुस्कुराकर जवाब दिया –
"शायद अकेलापन ही मेरा सबसे अच्छा दोस्त है।"

अनन्या हँस दी, लेकिन उसके दिल में राहुल के लिए एक सम्मान पैदा हुआ।


4. करियर की जंग

कॉलेज खत्म हुआ। सबके पास अपने-अपने रिश्ते, दोस्त और यादें थीं। राहुल के पास बस उसकी डिग्री और किताबें।
वो शहर गया और जॉब की तैयारी करने लगा।

कई बार अकेलेपन ने उसे रुलाया। खाना भी अकेले, कमरे में भी अकेले, त्यौहार भी अकेले। लेकिन उसने खुद से वादा किया था –
"मुझे खुद को साबित करना है।"

कड़ी मेहनत के बाद उसे एक बड़ी कंपनी में नौकरी मिल गई।


5. लोगों का नजरिया

जब राहुल सफल हुआ तो वही दोस्त जो उसे "सिंगल बॉय" कहते थे, अब कहते –
"यार, तू तो सच में हीरो निकला।"
"तूने अकेले रहकर इतना बड़ा मुकाम कैसे पा लिया?"

राहुल हंसते हुए कहता –
"जब तुम्हारे पास कोई नहीं होता, तो तुम खुद ही अपने सबसे बड़े साथी बन जाते हो। और वही तुम्हें मजबूत बनाता है।"


6. अनन्या से मुलाकात

एक दिन ऑफिस पार्टी में राहुल की मुलाकात अनन्या से हुई। वो अब उसी शहर में नौकरी कर रही थी।
अनन्या ने कहा –
"तुम अब भी वैसे ही हो, शांत और सिंगल बॉय?"
राहुल मुस्कुरा कर बोला –
"हाँ, लेकिन अब अकेलापन मुझे कमजोर नहीं, बल्कि और मजबूत बना गया है।"

अनन्या ने धीरे से कहा –
"शायद तुम्हें अब हमेशा अकेला रहने की ज़रूरत नहीं।"

राहुल पहली बार हैरान हुआ।
कई सालों से जिसे वो सिर्फ दूर से देखता था, वही अब उसके साथ खड़ी थी।


7. कहानी का मोड़

राहुल और अनन्या की दोस्ती बढ़ी। धीरे-धीरे वो रिश्ता गहराई में बदल गया। राहुल ने सीखा कि अकेलापन बुरा नहीं होता, लेकिन अगर सही इंसान साथ मिल जाए, तो जिंदगी और भी खूबसूरत हो जाती है।


🌟 कहानी की सीख

अकेला रहना कोई अपराध नहीं।

जब तक सही इंसान ना मिले, अकेलापन भी एक सच्चा दोस्त है।

और जब मिल जाए, तो वो रिश्ता पूरी दुनिया बदल देता है।