जंगल के उस हिस्से में लोग कदम रखने से डरते थे। उसे “शिकार वन” कहा जाता था। कहा जाता था कि वहाँ एक ऐसा बंदर रहता है जो साधारण जानवर नहीं है, बल्कि किसी पुराने श्राप का जीवित रूप है। लोग फुसफुसाते थे कि वह बंदर जवान औरतों की बलि चढ़ाता है, ताकि जंगल में उसकी शक्ति बनी रहे।
गाँव का नाम था सोनपुर। यह जंगल से सटा हुआ छोटा सा गाँव था, जहाँ शाम होते ही दरवाज़े बंद कर लिए जाते थे। सूरज ढलते ही माताएँ अपनी बेटियों को घर के अंदर खींच लेती थीं। किसी के पास इसका कारण पूछने की हिम्मत नहीं थी, क्योंकि जवाब सबको पता था।
सालों पहले जंगल के भीतर एक तांत्रिक रहा करता था। उसने शक्ति पाने के लिए काले अनुष्ठान किए और जंगल की आत्मा को बाँधने की कोशिश की। जब गाँव वालों को सच्चाई पता चली, तो उन्होंने उसे मार दिया। लेकिन मरते वक्त उसने श्राप दे दिया। उसी रात जंगल में एक भयानक बंदर का जन्म हुआ—इंसानी आँखों वाला, खून से रंगा हुआ, और बलि का भूखा।
अब हर कुछ सालों में कोई न कोई लड़की जंगल के पास से गायब हो जाती।
रीना सोनपुर की रहने वाली थी। वह पढ़ी-लिखी, निडर और सवाल पूछने वाली लड़की थी। उसे इन कहानियों पर भरोसा नहीं था। उसके लिए यह सब डर फैलाने की बातें थीं। शहर से पढ़ाई पूरी करके वह गाँव लौटी थी और उसका मानना था कि हर डर के पीछे कोई इंसानी सच्चाई होती है।
एक शाम उसकी सहेली पायल अचानक लापता हो गई। पायल आख़िरी बार जंगल की ओर जाते हुए देखी गई थी। पूरे गाँव में हड़कंप मच गया। सबको पता था कि इसका मतलब क्या है।
रीना ने तय कर लिया कि वह सच सामने लाएगी।
रात को, जब पूरा गाँव सो गया, रीना ने हाथ में टॉर्च ली और जंगल की ओर चल पड़ी। हर कदम के साथ हवा भारी होती जा रही थी। पेड़ों की शाखाएँ ऐसे हिल रही थीं जैसे किसी की उँगलियाँ उसे बुला रही हों।
अचानक उसे किसी के चलने की आवाज़ सुनाई दी।
पेड़ के पीछे से वह दिखाई दिया।
एक विशाल बंदर, इंसान जितना लंबा, काले बालों से ढका हुआ। उसकी आँखें लाल थीं और चेहरे पर अजीब सी समझ थी, जैसे वह सिर्फ जानवर नहीं, कुछ और हो।
रीना का शरीर काँप उठा, लेकिन उसने खुद को संभाला।
बंदर धीरे-धीरे आगे बढ़ा। उसके हाथ में पत्थर से बना एक पुराना खंजर था। उसके शरीर पर सूखी हुई बलि के निशान थे।
रीना पीछे हटी, लेकिन उसके पैर किसी जड़ से उलझ गए। वह गिर पड़ी।
बंदर उसके पास आया, उसकी आँखों में घूरता रहा। उस नज़र में भूख थी, लेकिन साथ ही दर्द भी।
अचानक जंगल में एक चीख गूँजी।
पायल।
रीना उठकर आवाज़ की दिशा में भागी। वहाँ एक पत्थरों से बना पुराना वेदी स्थल था। पायल बेहोश पड़ी थी और बंदर उसके चारों ओर चक्कर काट रहा था।
रीना चिल्लाई, “रुको!”
बंदर रुक गया। पहली बार किसी इंसान ने उसे चुनौती दी थी।
रीना ने काँपती आवाज़ में कहा, “तुम बलि क्यों चाहते हो? क्या कभी खत्म नहीं होगा?”
बंदर की आँखों में कुछ बदला। उसने ज़मीन पर खंजर फेंक दिया और एक अजीब सी आवाज़ निकाली—जैसे रोना।
रीना को अचानक एहसास हुआ। यह बंदर खुद भी कैद था। बलि उसकी ताक़त नहीं, उसकी मजबूरी थी।
जंगल की आत्मा उसके भीतर बंधी थी। हर बलि उस श्राप को जिंदा रखती थी।
रीना ने पायल को उठाया और वेदी से दूर ले गई। बंदर उन्हें देखता रहा, लेकिन उसने रोका नहीं।
रीना ने गाँव लौटकर सबको सच बताया। पहली बार डर की जगह गुस्सा दिखाई दिया। गाँव वालों ने तांत्रिक की पुरानी किताबें खोज निकालीं और जंगल में जाकर अनुष्ठान को तोड़ने का फैसला किया।
अगली रात पूरा गाँव जंगल में जमा हुआ।
जैसे ही मंत्र पढ़े गए, हवा चीखने लगी। बंदर वेदी पर खड़ा काँप रहा था। उसके शरीर से काला धुआँ निकलने लगा।
एक आख़िरी चीख के साथ वह घुटनों के बल गिर पड़ा।
धीरे-धीरे उसके बाल झड़ने लगे। उसका शरीर सिकुड़ता गया। और फिर वहाँ सिर्फ एक साधारण बंदर रह गया—डरा हुआ, आज़ाद।
जंगल शांत हो गया।
उस रात के बाद कोई लड़की गायब नहीं हुई। “शिकार वन” अब बस जंगल रह गया।
रीना अक्सर उस जंगल के किनारे जाती है। दूर पेड़ों पर एक छोटा सा बंदर बैठा उसे देखता है।
उसकी आँखों में अब भूख नहीं है।
सिर्फ़ शांति है।