शीर्षक: वल्चर: मल्टीवर्स ऑफ़ मैडनेस — अराजकता का जन्म
[दृश्य 1 – टूटता हुआ आकाश]
रात के आकाश में असामान्य लहरें उठ रही हैं। शहर के ऊपर आसमान काँच की तरह चटकने लगता है। वल्चर (अर्जुन) एक ऊँची इमारत की छत पर खड़ा है।
वल्चर:
“मैंने हर बार दुनिया को बचाया है… आज क्यों आकाश मुझे दोषी ठहरा रहा है?”
दूर से आर्यव्रत प्रकट होता है, उसके हाथ में आयाम-कोर चमक रहा है।
आर्यव्रत:
“मल्टीवर्स असंतुलित है। अगर कोर को अभी बंद नहीं किया गया… तो अनंत दरवाज़े खुलेंगे।”
वल्चर (आक्रोश में):
“हर बार ‘अभी’! हर बार ‘या तो सब खत्म’!
आज मैं डर से नहीं… अपने भरोसे से उड़ूँगा।”
वल्चर आयाम-कोर को छूता है। कोर फट पड़ता है।
[दृश्य 2 – भूल की कीमत]
आकाश में छह द्वार खुलते हैं। छह अलग-अलग शक्तियाँ एक साथ धरती पर गिरती हैं। समय काँपता है।
आर्यव्रत (चीखकर):
“अर्जुन! तुमने सील तोड़ दी… अब उन्हें कोई नहीं रोक सकता!”
वल्चर स्तब्ध। उसकी आँखों में पहली बार अपराध-बोध।
वल्चर (धीमे स्वर में):
“अगर गलती मेरी है… तो प्रायश्चित भी मेरा होगा।”
छह नए महाविलन
[दृश्य 3 – क्रोनोरेथ (समय का शिकारी)]
घड़ी की सुइयों से बना दैत्य समय को पीछे घुमा देता है।
क्रोनोरेथ: “मैं तुम्हारे हर सही फैसले को गलत कर दूँगा।”
[दृश्य 4 – नेदरक्वीन (अंधकार की रानी)]
छायाएँ जीवित हो उठती हैं।
नेदरक्वीन: “रोशनी झूठ है, अँधेरा ही सत्य है।”
[दृश्य 5 – आयरनबेन (लौह-विनाशक)]
धातु उसकी साँसों से पिघलती है।
आयरनबेन: “शहर मेरी ढाल है, लोग मेरी ईंट।”
[दृश्य 6 – माइंडहॉलर (मन का भक्षक)]
वह स्मृतियाँ चुरा लेता है।
माइंडहॉलर: “तुम्हारा डर… मेरा ईंधन।”
[दृश्य 7 – स्काइवाइपर (आकाश का विष)]
आकाश में ज़हरीली बिजली फैलाता है।
स्काइवाइपर: “तेरी उड़ान… मेरी जंजीर बनेगी।”
[दृश्य 8 – ब्लडटाइड (रक्त की ज्वार)]
समुद्र लाल हो उठता है।
ब्लडटाइड: “हर लहर में युद्ध बहता है।”
प्रेम और टूटन
[दृश्य 9 – मीरा का सच]
मीरा वल्चर के सामने खड़ी है। उसके हाथ काँप रहे हैं।
मीरा:
“तुमने दुनिया बचाने की कोशिश में… दुनिया तोड़ दी, अर्जुन।
क्या मैं भी तुम्हारी किसी भूल का हिस्सा हूँ?”
वल्चर (आँखें झुकी हुई):
“तुम मेरी इकलौती सही चीज़ हो…
और मैं ही तुम्हारे लिए सबसे बड़ा ख़तरा।”
मीरा उसे गले लगाती है।
मीरा (रोते हुए):
“अगर तुम गिरोगे… तो मैं तुम्हें फिर उड़ना सिखाऊँगी।”
दोनों के बीच प्रेम और भय एक साथ धड़कते हैं।
नए नायक का जन्म
[दृश्य 10 – शक्ति का जागरण]
छह विलनों की अराजकता से शहर टूट रहा है। अचानक पाँच साधारण लोग अलग-अलग जगहों पर चमक उठते हैं—
अग्निवीर, नीलकंठ, वज्रकन्या, आकाशपुत्र, प्राणवेग।
अग्निवीर:
“अगर देवता नहीं आए… तो इंसान ही देवता बनेंगे।”
नए थैनोस-जैसे महाविलन का उदय
[दृश्य 11 – शून्यसिंह का अवतरण]
आकाश से काला सिंहासन उतरता है। उस पर बैठा है शून्यसिंह—शून्य का सम्राट। उसके हाथ में अराजक-रत्न चमक रहा है।
शून्यसिंह (शांत, भयानक स्वर):
“तुमने द्वार खोले, वल्चर…
अब संतुलन मैं बनाऊँगा—आधी सृष्टि मिटाकर।”
वल्चर आगे बढ़ता है।
वल्चर (गर्जना):
“संतुलन नरसंहार से नहीं… साहस से बनता है!”
शिखर महायुद्ध
[दृश्य 12 – नायक बनाम छह विलन]
नए नायक अलग-अलग मोर्चों पर लड़ते हैं। शहर में विस्फोट, आकाश में टकराव।
वल्चर स्काइवाइपर से भिड़ता है। दोनों आकाश को फाड़ते हुए टकराते हैं।
स्काइवाइपर:
“तेरी हर ऊँचाई… मेरी गिरफ़्त है!”
वल्चर:
“ऊँचाई मेरी आदत है… गिरना मेरा अंत नहीं!”
वल्चर विष-आकाश को चीर देता है।
[दृश्य 13 – शून्यसिंह बनाम वल्चर]
शून्यसिंह एक उँगली उठाता है, शहर का आधा हिस्सा ध्वस्त हो जाता है।
शून्यसिंह:
“देखो, संतुलन कितना सरल है।”
वल्चर (लहूलुहान):
“सरल नहीं… कायरता है।”
वल्चर आख़िरी गोता लगाता है। टकराव से आकाश सन्न हो जाता है। शून्यसिंह पीछे हटता है, मुस्कराता है।
शून्यसिंह:
“यह तो बस शुरुआत है।”
[दृश्य 14 – हार और उम्मीद]
शून्यसिंह अपने साथ बचे हुए कुछ विलनों को लेकर अंतर्धान हो जाता है। शहर बिखरा है। मीरा घायल वल्चर के पास घुटनों पर बैठती है।
मीरा:
“तुम हारे नहीं हो… तुमने हमें जन्म दिया है।”
नए नायक वल्चर के चारों ओर खड़े हो जाते हैं।
अग्निवीर:
“अब लड़ाई अकेले की नहीं… युग की है।”
[अंतिम दृश्य – शपथ]
वल्चर खड़ा होता है, टूटे पंखों के बावजूद।
वल्चर (दृढ़ स्वर):
“मेरी गलती ने अंधेरा जन्म दिया…
अब मेरी उड़ान एक पूरी पीढ़ी को रोशनी सिखाएगी।”
आकाश में तूफ़ान थमता है। दूर कहीं शून्यसिंह की हँसी गूँजती है—
युद्ध खत्म नहीं हुआ, बस एक नए युग की शुरुआत हुई है।