शीर्षक: वल्चर: अनंत महासंग्राम – युग 2 (अंतिम प्रभात)
[दृश्य 1 – टूटे हुए आकाश का मैदान]
मीरा की मृत्यु के बाद धरती पर सन्नाटा है। क्षितिज पर फिर से करोड़ों दरारें खुलती हैं। एक करोड़ विलन अपने-अपने लोकों से उतरते हैं। उनके सामने एक करोड़ नायक—हर ब्रह्मांड के रक्षक—युद्ध के लिए तैयार खड़े हैं। आकाश पर गिद्धों के अनगिनत झुंड मंडरा रहे हैं।
वल्चर (आकाश में गरजता हुआ):
“आज मैं किसी से दया नहीं माँगूँगा।
आज न्याय माँगूँगा… अपने घावों के लिए!”
महाविलनों की पुकार (प्रतिनिधि संवाद)
क्रोनोरेथ (समय का शिकारी):
“मैं हर नायक की जीत को बीते कल में फेंक दूँगा!”
नेदरक्वीन (अंधकार की रानी):
“रोशनी आज दफ़न होगी, मेरी छाया में!”
आयरनबेन (लौह-विनाशक):
“शहर मेरी ढाल हैं, लोग मेरी सीढ़ियाँ!”
माइंडहॉलर (मन-भक्षक):
“तुम्हारी यादें… मेरे हथियार बनेंगी!”
स्काइवाइपर (आकाश-विष):
“आज आकाश ही ज़हर बनेगा!”
ब्लडटाइड (रक्त-ज्वार):
“हर लहर आज किसी नायक का नाम लिखेगी!”
अन्य विलन-सेना (एक साथ गर्जना):
“विनाश! विनाश! विनाश!”
महानायकों की प्रतिज्ञा (प्रतिनिधि संवाद)
अग्निवीर:
“अगर दुनिया जलेगी, तो हम राख से उम्मीद उगाएँगे!”
वज्रकन्या:
“बिजली मेरी नसों में है—डर मेरे खून में नहीं!”
नीलकंठ:
“विष मेरा साथी है, पर ज़हर मेरा मालिक नहीं!”
आकाशपुत्र:
“आकाश मेरा घर है—और आज यह घर बचाया जाएगा!”
प्राणवेग:
“जब साँस चलेगी, तब तक युद्ध भी चलेगा!”
मल्टीवर्स नायक-सेना (एक स्वर):
“रक्षा! रक्षा! रक्षा!”
वल्चर का उद्घोष
[दृश्य 2 – शोक से क्रोध तक]
वल्चर मीरा का टूटा कंगन हाथ में पकड़े आगे बढ़ता है।
वल्चर:
“आज हर नायक मेरे दिल की धड़कन सुनेगा…
और हर विलन मेरे दिल का टूटना!”
गिद्धों का महासमूह आकाश को ढक लेता है। हवा में गर्जना फैलती है।
महासंग्राम का विस्फोट
[दृश्य 3 – करोड़ों बनाम करोड़ों]
धरती फटती है। बिजली, अग्नि, समय-तरंगें, मनो-तरंगें—सब एक साथ टकराते हैं।
हर दिशा से अलग-अलग संवाद गूँजते हैं।
एक नायक:
“मेरे पीछे बच्चे हैं, मैं नहीं हटूँगा!”
एक विलन:
“मेरे पीछे अंधेरा है, मैं नहीं रुकूँगा!”
दूसरा नायक:
“आज डर हार जाएगा!”
दूसरा विलन:
“आज दुनिया हारेगी!”
आकाशीय द्वंद्व
[दृश्य 4 – वल्चर बनाम स्काइवाइपर]
आकाश में ज़हरीली बिजली और पंखों का तूफ़ान टकराते हैं।
स्काइवाइपर:
“तेरी उड़ान मेरी क़ैद बनेगी!”
वल्चर:
“मेरी उड़ान क़ैद तोड़ने के लिए पैदा हुई है!”
वल्चर गोता लगाकर स्काइवाइपर को आकाश से नीचे पटक देता है।
भूमि पर प्रलय
[दृश्य 5 – अग्निवीर बनाम आयरनबेन]
आयरनबेन: “धातु मेरा कवच है!”
अग्निवीर: “आग मेरी आत्मा है!”
धातु पिघलती है, अग्नि आकाश तक उठती है।
मन का युद्ध
[दृश्य 6 – वज्रकन्या बनाम माइंडहॉलर]
माइंडहॉलर: “तेरी यादें मेरी कैद हैं!”
वज्रकन्या: “मेरी स्मृति मेरी शक्ति है—कैद नहीं!”
बिजली की गर्जना से माइंडहॉलर पीछे हटता है।
समय का द्वंद्व
[दृश्य 7 – क्रोनोरेथ बनाम प्राणवेग]
क्रोनोरेथ: “मैं तुझे बीते कल में मिटा दूँगा!”
प्राणवेग: “कल में मिटा भी दूँ… आज फिर उठूँगा!”
समय-लहरें टूटती हैं।
अंतिम पुकार
[दृश्य 8 – शून्यसिंह की छाया]
दूर क्षितिज पर शून्यसिंह की परछाईं उभरती है।
शून्यसिंह (गूँजती हँसी):
“लड़ो, मेरे लिए दुनिया को नरम करो…”
वल्चर आकाश की ओर देखकर दहाड़ता है।
वल्चर:
“यह युद्ध तुम्हारे लिए नहीं…
यह मीरा के लिए है!”
समापन – युग की प्रतिज्ञा
[दृश्य 9 – युद्ध के बीच जन्म लेता प्रकाश]
नायक और विलन दोनों ओर से संवाद गूँजते रहते हैं—करोड़ों आवाज़ें एक साथ।
आकाश में गिद्धों का झुंड गोल चक्कर लगाता है।
नायक-सेना:
“हम गिरेंगे, पर टूटेंगे नहीं!”
विलन-सेना:
“हम मिटेंगे, पर झुकेंगे नहीं!”
वल्चर अपने पंख फैलाता है।
वल्चर (अंतिम उद्घोष):
“आज यह युग तय करेगा—
अंधेरा अनंत है या साहस!”
आकाश में टकराव की गर्जना गूँजती है।
महायुद्ध जारी है… और मल्टीवर्स अपनी साँस रोके देख रहा है। खतरा ओर बढ़ रहा था।
Subscrbe kare matru bharti youtube channal ko .like kare follow kare matru bharti ke insta account ko