love the devil in Hindi Horror Stories by ziya books and stories PDF | शैतान से प्यार

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शैतान से प्यार

शैतान से प्यारप्रस्तावना: अंधेरे का राजकुमारभाग 1: पहली मुलाकातरात के दो बजे थे। मुंबई शहर की चमकती रोशनियां धीरे-धीरे बुझती जा रही थीं। लेकिन एक पेंटहाउस में, जहां शहर की सबसे ऊंची इमारत के आखिरी मंजिल पर, एक आदमी खड़ा था - अपनी शराब के गिलास को घुमाते हुए, शहर को देखते हुए।आदित्य मल्होत्रा। 32 साल। देश के सबसे अमीर और सबसे खतरनाक बिजनेसमैन। लोग उसे "शैतान" कहते थे - क्योंकि उसकी आंखों में वह अंधकार था जो किसी की रूह तक को हिला देता था। उसकी मुस्कान बर्फ से भी ज्यादा ठंडी थी, और उसके दिल में... कोई नहीं जानता था कि वहां क्या था। शायद कुछ भी नहीं।आदित्य मल्होत्रा का नाम सुनते ही बिजनेस जगत में लोग कांप जाते थे। वह निर्दयी था, क्रूर था, और सबसे बढ़कर - वह हमेशा जीतता था। उसने अपना साम्राज्य खून, पसीने, और कई लोगों की बर्बादी पर बनाया था। और उसे इसका कोई अफसोस नहीं था।"सर," उसके पर्सनल असिस्टेंट, विक्रम ने दरवाजा खटखटाया। "वो फाइल आ गई है जो आपने मांगी थी।""रख दो," आदित्य ने बिना पलटे कहा। उसकी आवाज में वही ठंडापन था जो हमेशा रहता था।विक्रम ने फाइल टेबल पर रखी और जाने लगा, लेकिन रुक गया। "सर, एक बात... कल शर्मा जी की बेटी की शादी है। आपको इनविटेशन आया था...""मुझे शादियों से नफरत है," आदित्य ने कहा। "और भी, मुझे प्यार-मोहब्बत की इन बकवास बातों में कोई दिलचस्पी नहीं।""लेकिन सर, शर्मा जी आपके बड़े क्लाइंट हैं..."आदित्य ने अपना गिलास टेबल पर इतनी जोर से रखा कि आवाज गूंज गई। "मैंने कहा ना? मैं नहीं जा रहा। अगर शर्मा को मेरे साथ बिजनेस करना है, तो वो मेरी शर्तों पर करेगा। समझे?"विक्रम ने सिर झुका लिया। "जी सर।" और वह चला गया।आदित्य फिर से अकेला रह गया। उसने अपने गिलास में शराब डाली और एक लंबा घूंट लिया। उसे प्यार पर विश्वास नहीं था। उसने देखा था कि प्यार क्या करता है - वह लोगों को कमजोर बनाता है, उन्हें बर्बाद करता है।उसकी अपनी मां ने प्यार किया था उसके पिता से। और क्या मिला? धोखा, दर्द, और अंत में मौत। आदित्य तब केवल बारह साल का था जब उसकी मां ने आत्महत्या कर ली थी। उसके पिता की बेवफाई ने उसे तोड़ दिया था।उस दिन से, आदित्य ने कसम खाई थी - वह कभी किसी से प्यार नहीं करेगा। प्यार केवल कमजोरी है। और आदित्य मल्होत्रा कभी कमजोर नहीं होगा।दूसरी ओर, उसी शहर में, एक छोटे से अपार्टमेंट में, 26 साल की आरा शर्मा अपने लैपटॉप पर काम कर रही थी। वह एक फ्रीलांस राइटर थी, जो कहानियां लिखती थी - प्यार की कहानियां, रोमांस, खुशी की कहानियां।आरा एक सपनों की दुनिया में रहती थी। उसे विश्वास था कि हर किसी को अपना सच्चा प्यार मिलता है। उसे विश्वास था कि प्यार सबसे बड़ी ताकत है। उसकी कहानियां इसी विश्वास से भरी होती थीं।"आरा!" उसकी रूममेट और बेस्ट फ्रेंड, मीरा ने दरवाजा खोला। "अभी तक काम कर रही हो? रात के तीन बज रहे हैं!""बस, आखिरी पैरा लिख रही हूं," आरा ने मुस्कुराते हुए कहा। उसकी मुस्कान इतनी खूबसूरत थी कि कमरा रोशन हो गया। उसकी बड़ी भूरी आंखों में एक मासूमियत थी, और उसके चेहरे पर एक ऐसी खुशी थी जो दुर्लभ थी।"तुम पागल हो," मीरा ने हंसते हुए कहा। "इतनी मेहनत करती हो, लेकिन तुम्हें कोई पहचानता तक नहीं।""अभी तक नहीं," आरा ने कहा। "लेकिन एक दिन... एक दिन मेरी कहानियां पूरी दुनिया पढ़ेगी। और लोग समझेंगे कि प्यार कितना खूबसूरत है।"मीरा ने सिर हिलाया। आरा का यह आशावाद, यह प्यार में विश्वास - यही उसकी खूबसूरती थी। लेकिन मीरा जानती थी कि दुनिया उतनी भी अच्छी नहीं है जितनी आरा सोचती है।"चलो, सो जाओ," मीरा ने कहा। "कल तुम्हें उस नई प्रोजेक्ट के लिए इंटरव्यू है ना?""हां," आरा की आंखें चमक उठीं। "मल्होत्रा ग्रुप में! अगर मुझे यह प्रोजेक्ट मिल गया, तो यह मेरे करियर के लिए बहुत बड़ा होगा!"मीरा की आंखें फैल गईं। "मल्होत्रा ग्रुप? मतलब... आदित्य मल्होत्रा की कंपनी?""हां, क्यों? कोई प्रॉब्लम है?""आरा, तुम जानती हो उसके बारे में? लोग उसे शैतान कहते हैं। वह बेहद क्रूर है, निर्दयी है। उसके साथ काम करना मतलब नरक में जाना।"आरा ने हंस दिया। "मीरा, ये सब बस अफवाहें हैं। मैं यकीन नहीं करती कि कोई इंसान इतना बुरा हो सकता है। शायद लोग उसे गलत समझते हैं।""तुम्हारी यही मासूमियत एक दिन तुम्हें मुसीबत में डाल देगी," मीरा ने चिंता से कहा।लेकिन आरा को यकीन था। वह हर किसी में अच्छाई देखती थी। और उसे लगता था कि आदित्य मल्होत्रा भी कोई अलग नहीं होगा।अगली सुबह, आरा तैयार होकर मल्होत्रा ग्रुप की इमारत के सामने खड़ी थी। 70 मंजिला इमारत, शीशे और स्टील की बनी। यह शहर की सबसे ऊंची और सबसे शानदार इमारत थी।उसने गहरी सांस ली और अंदर गई। रिसेप्शन पर एक महिला ने उसे 65वीं मंजिल पर भेजा, जहां इंटरव्यू होने वाला था।जब लिफ्ट खुली, तो आरा एक शानदार ऑफिस के सामने खड़ी थी। सब कुछ इतना परफेक्ट था - काले और सफेद रंग का कॉम्बिनेशन, महंगे फर्नीचर, और एक ठंडा माहौल।"मिस शर्मा?" एक आदमी ने उससे पूछा। यह विक्रम था। "आप यहां इंटरव्यू के लिए आई हैं?""जी हां," आरा ने मुस्कुराते हुए कहा।"ठीक है। लेकिन मुझे आपको बता दूं - सर बहुत स्ट्रिक्ट हैं। वो किसी की गलती बर्दाश्त नहीं करते। तो प्लीज, सावधान रहिएगा।"आरा ने सिर हिलाया। वह नर्वस थी, लेकिन excited भी।विक्रम ने एक बड़े दरवाजे को खोला। "सर, मिस शर्मा आई हैं।""भेजो।" आवाज आई - ठंडी, तीखी, कमांडिंग।आरा ने अंदर कदम रखा। और वहां, एक विशाल डेस्क के पीछे, बैठा था वह आदमी जिसके बारे में पूरा शहर बात करता था।आदित्य मल्होत्रा।पहली नजर में ही आरा समझ गई कि लोग उसे क्यों शैतान कहते हैं। उसकी काली आंखें इतनी तीव्र थीं कि जैसे आत्मा तक को देख लें। उसका चेहरा तराशा हुआ, परफेक्ट - लेकिन उसमें कोई गर्माहट नहीं थी। उसके होठों पर एक ठंडी मुस्कान थी जो असल में मुस्कान नहीं थी।वह ब्लैक सूट में था, और उसकी पूरी personality इतनी intimidating थी कि आरा को एक पल के लिए सांस लेना भूल गई।"बैठो," आदित्य ने बिना ऊपर देखे कहा। वह कुछ फाइलें देख रहा था।आरा बैठ गई। उसने अपना पोर्टफोलियो टेबल पर रखा।"आरा शर्मा," आदित्य ने फाइल देखते हुए कहा। "26 साल। फ्रीलांस राइटर। कोई बड़ा प्रोजेक्ट नहीं किया अभी तक। तो मुझे बताओ, मैं तुम्हें क्यों hire करूं?"उसकी आवाज में एक ऐसा अहंकार था जो साफ कह रहा था - तुम मेरे लायक नहीं हो।लेकिन आरा ने हिम्मत जुटाई। "सर, मैं जानती हूं कि मेरे पास experience नहीं है। लेकिन मेरे पास passion है। मैं कहानियां लिखती हूं जो लोगों के दिलों को छू जाती हैं। और आपकी कंपनी को ठीक इसी की जरूरत है - ऐसी content जो लोगों से कनेक्ट हो।"पहली बार, आदित्य ने ऊपर देखा। उसकी काली आंखों ने आरा को घूरा। कुछ सेकंड तक, कमरे में सन्नाटा था।"Passion?" आदित्य ने व्यंग्य से कहा। "Business में passion काम नहीं आता। यहां result चाहिए।""तो मुझे एक मौका दीजिए," आरा ने दृढ़ता से कहा। "मैं आपको result दूंगी।"आदित्य ने उसे देखा। इस लड़की में कुछ अलग था। ज्यादातर लोग उसकी आंखों में आंखें डालने से डरते थे। लेकिन यह लड़की... यह सीधे उसकी आंखों में देख रही थी। और उसकी आंखों में कोई डर नहीं था, बल्कि एक अजीब सी चमक थी।"ठीक है," आदित्य ने फैसला सुनाया। "तुम्हें तीन महीने की trial period मिलेगी। अगर तुम्हारा काम पसंद आया, तो permanent position। वरना...""वरना मैं खुद चली जाऊंगी," आरा ने मुस्कुराते हुए कहा।आदित्य की भौंहें तनीं। इस लड़की की हिम्मत... कोई उससे इस तरह बात नहीं करता था।"तुम कल से ज्वॉइन कर सकती हो," उसने कहा। "विक्रम तुम्हें सब detail दे देगा।""Thank you, sir," आरा ने खड़े होते हुए कहा।जैसे ही वह जाने लगी, आदित्य ने कहा, "और हां, मिस शर्मा... यहां काम करना आसान नहीं है। यह जगह उन लोगों के लिए है जो strong हैं। अगर तुम रोने वाली टाइप की हो, तो बेहतर है कि तुम अभी छोड़ दो।"आरा ने पलटकर देखा। "सर, मैं दिखने में भले ही कमजोर लगूं, लेकिन मैं उतनी भी कमजोर नहीं हूं जितना लोग सोचते हैं।"और वह चली गई।आदित्य कुछ देर तक उसी जगह बैठा रहा। यह लड़की... interesting थी। लेकिन वह जानता था कि वह ज्यादा दिन नहीं टिकेगी। कोई नहीं टिकता उसके साथ।अध्याय 1: पहला दिन, पहली टक्करअगली सुबह, आरा ने अपना पहला दिन ऑफिस में बिताया। उसे एक छोटे से केबिन में बैठाया गया, जहां से आदित्य का ऑफिस दिखता था।पूरा दिन भर, वह उसे देखती रही। आदित्य हमेशा busy था - मीटिंग्स, कॉल्स, फाइलें। उसके चेहरे पर हमेशा वही सख्त expression था। वह किसी से मुस्कुराकर बात नहीं करता था, किसी का शुक्रिया नहीं कहता था। बस आर्डर देता था, और लोग उसे follow करते थे।"Scary है ना?" एक लड़की ने आरा के पास आकर फुसफुसाया। उसका नाम था प्रिया, और वह मार्केटिंग डिपार्टमेंट में काम करती थी।"थोड़ा," आरा ने मान लिया।"थोड़ा नहीं, बहुत," प्रिया ने कहा। "पिछले महीने एक लड़की को सिर्फ इसलिए fire कर दिया क्योंकि उसने कॉफी में थोड़ी ज्यादा शुगर डाल दी थी। और एक बार एक guy को इसलिए निकाला क्योंकि वह presentation में एक comma भूल गया था। यहां perfection चाहिए, वरना..."आरा ने gulp किया। शायद मीरा सही थी। यह जगह नरक थी।शाम को, जब सब जाने लगे, आदित्य ने इंटरकॉम पर आरा को बुलाया।"मिस शर्मा, मेरे ऑफिस में आओ।"आरा ने गहरी सांस ली और उसके ऑफिस में गई।"बैठो," आदित्य ने कहा। वह अपनी शराब पी रहा था। "तुम्हारा पहला assignment। मैं चाहता हूं कि तुम हमारी नई luxury hotel chain के लिए content लिखो। Target audience है rich couples जो romantic getaway चाहते हैं। मुझे तीन दिन में एक proposal चाहिए।""तीन दिन?" आरा चौंक गई। "लेकिन सर, इतने कम समय में...""तुमने कहा था कि तुम result दोगी," आदित्य ने उसे काटा। "तो दो। या फिर resign letter दे दो।"आरा ने मुट्ठी बांधी। यह आदमी... इतना अहंकारी, इतना रूखा। लेकिन वह नहीं हारेगी।"मैं कर लूंगी," उसने दृढ़ता से कहा।"Good," आदित्य ने कहा। "अब जाओ।"आरा बाहर निकली। उसका दिल तेजी से धड़क रहा था - गुस्से से, फ्रस्ट्रेशन से। यह आदमी सोचता था कि वह उसे तोड़ सकता है। लेकिन वह गलत था।अगले तीन दिन, आरा ने दिन-रात मेहनत की। उसने research किया, अलग-अलग angles try किए, rewrote कई बार। उसे खुद पर भी doubt होने लगा - क्या वह कर पाएगी?लेकिन तीसरे दिन, जब उसने आखिरी draft पूरा किया, तो उसे लगा कि यह perfect है। उसने romantic descriptions लिखे थे, emotions को capture किया था। यह सिर्फ content नहीं था - यह एक अनुभव था।उसने proposal आदित्य के डेस्क पर रख दिया।दो घंटे बाद, उसे फिर बुलाया गया।"तुमने यह लिखा?" आदित्य ने पूछा, फाइल को घूरते हुए।"जी हां, सर।""यह... acceptable है," आदित्य ने कहा। उसकी आवाज में कोई तारीफ नहीं थी, लेकिन कोई शिकायत भी नहीं थी।आरा को एक अजीब सी खुशी हुई। "Acceptable" आदित्य मल्होत्रा के मुंह से बहुत बड़ी तारीफ थी।"लेकिन," आदित्य ने कहा। "तुमने यहां लिखा है - 'love is the greatest adventure'. यह बेवकूफी है। Love कोई adventure नहीं है। यह एक weakness है, एक भ्रम।"आरा को गुस्सा आ गया। "सर, with all due respect, मैं disagree करती हूं। प्यार weakness नहीं है। यह सबसे बड़ी ताकत है।"आदित्य ने अपनी कुर्सी पर पीछे की ओर झुकते हुए उसे देखा। "तुम वाकई मासूम हो, मिस शर्मा। तुमने real world नहीं देखी। प्यार करो किसी से, और वो तुम्हें तोड़ देगा। Trust करो, और वो तुम्हें धोखा देगा। यह life का truth है।""नहीं," आरा ने सिर हिलाया। "यह आपका truth है, सर। लेकिन हर किसी का नहीं। मैं believe करती हूं कि सच्चा प्यार exist करता है।""तो तुम बेवकूफ हो," आदित्य ने ठंडे से कहा।"शायद," आरा ने कहा। "लेकिन मैं एक खुश बेवकूफ हूं। आपसे बेहतर, जो इतना अमीर होते हुए भी इतना अकेला है।"कमरे में सन्नाटा छा गया। कोई भी, कभी भी, आदित्य मल्होत्रा से इस तरह बात नहीं करता था।आदित्य की आंखें संकरी हो गईं। "तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई...""आपने सच कहा," आरा ने बीच में कहा। "तो मैंने भी सच कहा। आप मुझे fire करना चाहें तो कर सकते हैं। लेकिन मैं अपनी बात पर कायम हूं।"आदित्य कुछ देर चुप रहा। फिर, surprisingly, उसने कहा, "Get out."आरा बाहर निकल गई। उसके हाथ कांप रहे थे। उसने जो किया वह शायद बहुत बड़ी गलती थी। लेकिन उसे अपनी beliefs पर compromise नहीं करना था।लेकिन अगले दिन, जब वह ऑफिस पहुंची, तो उसे एक सरप्राइज मिला। उसका proposal approve हो गया था। आदित्य ने उसे बिना कोई बदलाव किए pass कर दिया था - including वह line जिस पर उन्होंने बहस की थी।"क्यों?" आरा ने विक्रम से पूछा।विक्रम ने कंधे उचकाए। "सर के मूड समझ नहीं आते। लेकिन congratulations। यह पहली बार है कि किसी ने पहली ही बार में उनका approval पाया है।"आरा confusion में थी। आदित्य ने क्यों approve किया जबकि वह disagree कर रहा था? क्या इसका मतलब... नहीं, वह ज्यादा नहीं सोचेगी।लेकिन वह नहीं जानती थी कि आदित्य के दिमाग में क्या चल रहा था।आदित्य अपने ऑफिस में बैठा था, उस proposal को देखते हुए। इस लड़की ने उससे argue किया था। कोई नहीं करता था। और उसने उसे "अकेला" कहा था।वह अकेला था? हां, शायद। लेकिन यह उसकी choice थी। उसे किसी की जरूरत नहीं थी।फिर भी, इस आरा शर्मा में कुछ था जो उसे disturb कर रहा था। उसकी मासूमियत, उसका प्यार में विश्वास, उसकी मुस्कान... यह सब उसे irritate कर रहा था। क्योंकि यह सब उसे वह याद दिला रहा था जो वह कभी था - बचपन में, जब उसकी मां जिंदा थी।"नहीं," उसने खुद से कहा। "मैं उस weakness में नहीं पड़ूंगा।"लेकिन वह नहीं जानता था कि यह सिर्फ शुरुआत थी। आरा शर्मा उसकी जिंदगी में आ चुकी थी। और धीरे-धीरे, वह उसकी दीवारों को तोड़ने वाली थी।अध्याय 2: दिल के करीबअगले कुछ हफ्तों में, आरा और आदित्य के बीच एक अजीब सा relationship develop होने लगा। वे professionally काम करते थे, लेकिन हर बार उनकी बातचीत में एक tension होती थी - कभी बहस, कभी चुप्पी, कभी गुस्सा।आरा ने आदित्य को observe करना शुरू किया। उसने देखा कि वह हमेशा अकेला रहता था। लंच भी अकेले करता था, meetings के बाद भी अकेले अपने ऑफिस में बैठा रहता था। उसका कोई दोस्त नहीं था, कोई करीबी नहीं था।एक दिन, जब आरा late night work कर रही थी, उसने देखा कि आदित्य भी अपने ऑफिस में था। उसने सोचा कि शायद उसे कॉफी offer करनी चाहिए।उसने दो कप कॉफी बनाई और उसके ऑफिस में दस्तक दी।"Come in," आदित्य की आवाज आई।आरा अंदर गई। "सर, मैंने सोचा शायद आपको कॉफी चाहिए..."आदित्य ने उसे देखा। "मैंने नहीं मांगी।""मैं जानती हूं," आरा ने कॉफी उसके desk पर रख दी। "लेकिन आप पिछले 10 घंटे से काम कर रहे हैं। आपको break चाहिए।""मुझे तुम्हारी चिंता की जरूरत नहीं है, मिस शर्मा।""यह चिंता नहीं है, सर। यह बस... courtesy है।"आदित्य ने कॉफी को घूरा, फिर एक sip ली। "Acceptable है।"आरा मुस्कुरा दी। "Thank you."वह जाने लगी, लेकिन आदित्य ने कहा, "तुम क्यों इतनी मेहनत करती हो? तुम्हारी salary भी इतनी ज्यादा नहीं है।"आरा रुक गई। "क्योंकि मुझे मेरा काम पसंद है। पैसे important हैं, लेकिन satisfaction भी important है।""Satisfaction?" आदित्य ने व्यंग्य से कहा। "यह दुनिया satisfaction से नहीं चलती। पैसा, power - यही सब matter करता है।""क्या आप खुश हैं, सर?" आरा ने सीधा सवाल पूछा।आदित्य चौंक गया। "क्या?""आपके पास इतना पैसा है, इतनी power है। तो क्या आप खुश हैं?"आदित्य ने कुछ नहीं कहा। क्योंकि वह जवाब नहीं जानता था।"मैं सोचती हूं कि आप नहीं हैं," आरा ने धीरे से कहा। "और यह बहुत sad है। क्योंकि life सिर्फ काम करने और पैसा कमाने के लिए नहीं है। Life जीने के लिए है, खुशियां ढूंढने के लिए है।""तुम बहुत बोलती हो," आदित्य ने कहा।"और आप बहुत कम," आरा ने जवाब दिया। "शायद कभी किसी से बात करें properly, तो आपको अच्छा लगेगा।"आदित्य ने उसे देखा। इस लड़की की हिम्मत... या शायद बेवकूफी।"Good night, सर," आरा ने कहा और चली गई।उस रात, आदित्य सो नहीं सका। आरा के शब्द उसके दिमाग में घूम रहे थे। क्या वह खुश था? नहीं। लेकिन क्या खुशी matter करती थी? उसने हमेशा सोचा था कि नहीं। लेकिन अब...अगले दिन, कुछ unexpected हुआ। आदित्य की मां की पुण्यतिथि थी। हर साल इस दिन, आदित्य और भी ज्यादा moody हो जाता था। लेकिन इस बार, वह और भी ज्यादा गुस्से में लग रहा था।उसने पूरे दिन staff पर चिल्लाया। किसी की एक भी गलती बर्दाश्त नहीं की। तीन लोगों को fire कर दिया सिर्फ छोटी-छोटी गलतियों के लिए।आरा को समझ नहीं आ रहा था कि क्या हुआ है। उसने विक्रम से पूछा।"आज उनकी मां की death anniversary है," विक्रम ने बताया। "हर साल इस दिन, वो बहुत गुस्से में रहते हैं। Best है कि उनसे दूर रहो।"लेकिन आरा को लगा कि शायद आदित्य को किसी की जरूरत थी। हो सकता है कि वह अकेला नहीं रहना चाहता आज।शाम को, जब सब चले गए, आरा ने फिर से दो कप कॉफी बनाई और आदित्य के ऑफिस में गई।"मैंने कहा था कि मुझे disturb मत करो!" आदित्य ने गुस्से से कहा जब उसने door खोला।"मैं जानती हूं," आरा ने शांति से कहा। "लेकिन मैं सोचती हूं कि आपको कंपनी चाहिए।""Get out!" आदित्य ने चिल्लाया।लेकिन आरा ने कॉफी table पर रखी और बैठ गई। "नहीं।"आदित्य को विश्वास नहीं हो रहा था। "तुमने मेरी बात नहीं सुनी?""सुनी। लेकिन मैं नहीं जाऊंगी। क्योंकि मुझे लगता है कि आज आप किसी के साथ होना चाहते हैं, भले ही आप admit नहीं करते।"आदित्य की मुट्ठियां बंध गईं। "तुम्हें क्या लगता है? तुम मुझे जानती हो? तुम समझती हो मुझे?""नहीं," आरा ने ईमानदारी से कहा। "मैं आपको नहीं जानती। लेकिन मैं देख सकती हूं कि आप hurt हैं। और जब कोई hurt होता है, तो उसे किसी की जरूरत होती है।""मुझे किसी की जरूरत नहीं!" आदित्य ने अपना glass उठाया और wall पर फेंक दिया। Glass टूट गया, pieces everywhere।आरा डर गई, लेकिन उसने अपनी जगह नहीं छोड़ी।आदित्य उसके पास आया, इतना करीब कि उसकी सांसें उसके चेहरे पर महसूस हो रही थीं। "तुम जाओगी, या मैं तुम्हें निकालूं?""मैं नहीं जा रही," आरा ने कहा, अपनी आवाज steady रखते हुए। "आप मुझे fire कर सकते हैं, लेकिन मैं आज आपको अकेला नहीं छोड़ूंगी।"कुछ seconds के लिए, वे दोनों एक-दूसरे को घूरते रहे। फिर, अचानक, आदित्य ने step back लिया।"क्यों?" उसने पूछा, उसकी आवाज थकी हुई थी। "तुम्हें क्यों फर्क पड़ता है?""क्योंकि हर किसी को किसी की जरूरत होती है," आरा ने कहा। "चाहे वो कितना भी strong होने का दिखावा करे।"आदित्य अपनी chair पर बैठ गया। पहली बार, आरा ने उसे vulnerable देखा।"आज मेरी मां की... death anniversary है," उसने धीरे से कहा। "वो मुझसे बहुत प्यार करती थीं। लेकिन मेरे पिता ने उन्हें धोखा दिया। बार-बार। और एक दिन, वो take नहीं कर सकीं। उन्होंने..."वह रुक गया। उसकी आंखों में pain था जो आरा ने पहले कभी नहीं देखा था।"मैं twelve साल का था," आदित्य ने continue किया। "जब मैंने उन्हें पाया। वो... वो चली गई थीं। और उस दिन मैंने decide किया - मैं कभी किसी से प्यार नहीं करूंगा। क्योंकि प्यार तोड़ता है, बर्बाद करता है।"आरा की आंखों में आंसू आ गए। "मुझे बहुत दुख है, सर। मैं imagine नहीं कर सकती कि यह कितना hard रहा होगा।""Pity मत दिखाओ मुझ पर," आदित्य ने कहा।"यह pity नहीं है," आरा ने कहा। "यह empathy है। आपके साथ जो हुआ वो terrible था। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सारी दुनिया खराब है। आपकी मां ने आपसे प्यार किया, ना? वो प्यार real था।"आदित्य चुप रहा।"आप अपने पिता की वजह से पूरे love को blame कर रहे हैं," आरा ने कहा। "लेकिन problem love में नहीं थी। Problem उस इंसान में थी जिसने उसका respect नहीं किया। True love exist करता है, सर। बस उसे देखने की नज़र चाहिए।""तुम naive हो," आदित्य ने कहा। लेकिन इस बार उसकी आवाज में वो कठोरता नहीं थी।"हो सकता है," आरा ने कहा। "लेकिन मैं खुश हूं। आप हैं?"फिर से वही सवाल। और फिर से, आदित्य के पास कोई जवाब नहीं था।वे कुछ देर चुप बैठे रहे। आरा ने कोई बात नहीं की, सिर्फ वहां बैठी रही। और surprisingly, आदित्य को अच्छा लग रहा था। वो अकेलापन जो हमेशा उसे खाता रहता था, आज कम लग रहा था।"Thank you," आदित्य ने finally कहा। "For... being here."आरा मुस्कुरा दी। "Anytime, सर।"उस रात के बाद, कुछ बदल गया। आदित्य still वैसा ही cold, strict boss था। लेकिन आरा के साथ, कभी-कभी, उसकी walls थोड़ी नीची हो जाती थीं।अध्याय 3: दिल की धड़कनअगले महीने project के लिए, आदित्य को Singapore जाना था। और उसने decide किया कि आरा भी उसके साथ जाएगी - professional capacity में, ताकि वो वहां की luxury hotels देख सके और better content लिख सके।जब आरा को पता चला, वो excited थी लेकिन nervous भी। आदित्य के साथ foreign trip? अकेले?"Relax," मीरा ने कहा जब आरा ने उसे बताया। "यह professional है। और besides, maybe यह अच्छा होगा। तुम और जान पाओगी उसे।""मुझे उसे जानने में interest नहीं है," आरा ने quickly कहा।"Really?" मीरा ने eyebrow raise किया। "तो फिर तुम इतनी बार उसके बारे में क्यों बात करती हो? 'आदित्य ने आज यह किया', 'आदित्य ने वो कहा'...""वो मेरा boss है!" आरा ने defend किया।"Sure," मीरा ने tease किया। "Keep telling yourself that."Singapore में, वे एक luxury hotel में ठहरे - separate rooms, obviously। पहले दो दिन business meetings में बीते। आरा ने notice किया कि business mode में आदित्य और भी impressive था। Confident, authoritative, intelligent।तीसरे दिन evening free था। आदित्य ने कहा, "तुम city explore कर सकती हो। मैं कुछ work complete करूंगा।""आप भी चलिए ना," आरा ने suggest किया। "आप हमेशा work करते हैं। कभी enjoy भी करना चाहिए।""मुझे enjoy करने में interest नहीं है।""Please?" आरा ने insist किया। "Just एक घंटे के लिए। मैं promise करती हूं, आपको अच्छा लगेगा।"आदित्य ने सोचा। वो refuse करना चाहता था। लेकिन आरा की वो hopeful eyes..."ठीक है," उसने finally कहा। "लेकिन सिर्फ एक घंटा।"वे Gardens by the Bay गए। रात का समय था, और पूरी जगह lights से जगमगा रही थी। यह absolutely magical था।आरा की आंखें चमक गईं। "यह... यह बहुत beautiful है!"आदित्य ने उसे देखा। उसकी smile, उसकी excitement - यह सब कुछ इतना... pure था। इस corrupt दुनिया में, यह लड़की अभी भी छोटी-छोटी चीजों में खुशी ढूंढ लेती थी।"आप क्यों घूर रहे हैं?" आरा ने notice किया।"मैं नहीं..." आदित्य ने जल्दी से नज़र हटाई।वे walk करते रहे। आरा non-stop बातें कर रही थी - flowers के बारे में, lights के बारे में, life के बारे में। आदित्य mostly सुनता रहा। और surprisingly, वो irritated नहीं था। Actually, उसे अच्छा लग रहा था।"आप कभी छोटे थे तब कैसे थे?" आरा ने पूछा।"Different," आदित्य ने कहा।"मतलब?"आदित्य ने सोचा। "मैं... happy था। Carefree। मेरी मां से बहुत attached था। उनके साथ time spend करना बहुत अच्छा लगता था। लेकिन फिर...""फिर सब बदल गया," आरा ने softly कहा।"हां।""आप उस time को वापस चाहते हैं?""Nहीं," आदित्य ने quickly कहा। "उस version को वापस नहीं चाहता। Weakness चाहता नहीं।""Happy होना weakness नहीं है," आरा ने कहा। "Actually, खुश रहने के लिए बहुत strength चाहिए। Especially जब life tough हो।"आदित्य ने उसकी ओर देखा। "तुम्हारी life कैसी रही है?"आरा surprised थी। यह पहली बार था जब आदित्य ने उसके बारे में कुछ पूछा था।"Ordinary," उसने कहा। "Middle-class family। Parents बहुत loving थे। Unhappy नहीं हूं। अपनी dreams follow कर रही हूं। यही suff  है मेरे लिए।""तुम्हारा कोई boyfriend नहीं है?" आदित्य ने पूछा। फिर quickly add किया, "मतलब, professionally पूछ रहा हूं।"आरा हंस दी। "नहीं, sir। कभी time नहीं मिला। और... मैं believe करती हूं कि जब सही person आएगा, मुझे पता चल जाएगा।""True love में विश्वास?" आदित्य ने mock किया।"हां," आरा ने confidently कहा। "Don't you?""नहीं।""Maybe आपने अभी तक सही person नहीं मिली," आरा ने कहा। "जब मिलेगी, तो आपका opinion बदल जाएगा।""Impossible," आदित्य ने कहा।लेकिन जब वो आरा को देख रहा था, उसकी smile को, उसकी innocence को - एक अजीब सी feeling आई। जैसे उसके दिल में कुछ हिल रहा हो। कुछ जो बहुत समय से frozen था।Nहीं, उसने खुद को रोका। यह नहीं हो सकता। मैं इस trap में नहीं पड़ूंगा।उस रात, hotel में वापस आकर, आदित्य apne room में बैठा रहा। उसका दिमाग mess था। वो क्यों feel कर रहा था यह सब? यह लड़की... आरा... वो उसके thoughts से क्यों नहीं निकल रही थी?उसने शराब का glass भरा। लेकिन पीने से पहले रुक गया। आरा के words याद आए - "आप हमेशा अकेले शराब पीते हैं। क्या यह आपको really खुश करती है?"उसने glass रख दिया।Meanwhile, अगले room में, आरा भी सो नहीं पा रही थी। आज की evening strange थी। आदित्य... उसने पहली बार थोड़ा open up किया था। पहली बार उसने उसे एक human की तरह देखा, not just a scary boss।और जब वो उसे देख रहा था gardens में, उस look में कुछ था... कुछ जो आरा के दिल को तेज़ धड़कने लगा।"Nहीं," उसने खुद से कहा। "Don't be stupid, आरा। वो तुम्हारा boss है। और वो emotionally unavailable है। यह sirf professional है।"लेकिन दिल को समझाना इतना आसान नहीं होता।अध्याय 4: बढ़ती क़रीबीSingapore trip के बाद, चीज़ें धीरे-धीरे बदलने लगीं। आदित्य still strict था, still demanding। लेकिन आरा के साथ, कभी-कभी, छोटे-छोटे moments होते थे जो different थे।जैसे एक दिन, जब आरा की tabiyat खराब थी और वो office नहीं आ पाई, आदित्य ने खुद उसे call किया।"तुम office क्यों नहीं आई?" उसने पूछा।"सर, मेरी तबियत ठीक नहीं है," आरा ने weak voice में कहा।"Doctor के पास गई?""नहीं, बस कुछ rest कर रही हूं।""Stupid," आदित्य ने कहा। "अगर बीमार हो तो doctor को दिखाना चाहिए। Vijay को भेजता हूं तुम्हें लेने के लिए।""नहीं सर, मैं manage कर लूंगी-""यह order है, मिस शर्मा।"और आधे घंटे में, आदित्य का driver आरा को लेने आ गया। उसे best hospital ले जाया गया, जहां check-up हुआ। बस viral fever था।लेकिन आरा surprised थी। आदित्य ने care किया? यह unexpected था।अगले दिन जब वो office आई, तो उसके desk पर medicines रखी थीं, और एक note - "इन्हें properly लो। Main productive employees चाहता हूं, बीमार नहीं। - AM"आरा मुस्कुरा दी। उसका तरीका weird था, लेकिन उसने care की थी।दूसरी incident कुछ हफ्तों बाद हुई। Office party थी - annual function। आरा नहीं जाना चाहती थी क्योंकि उसे यह formal events पसंद नहीं थे। लेकिन attendance compulsory थी।Party में, आरा ने एक simple blue dress पहनी थी। कुछ ज्यादा fancy नहीं, लेकिन उस पर बहुत अच्छी लग रही थी।जब आदित्य ने उसे देखा, वो एक second के लिए रुक गया। उसने उसे पहले कभी Western dress में नहीं देखा था। और वो... वो beautiful लग रही थी। बहुत beautiful।"सर?" Vikram ने उसे distract किया। "आप ठीक हैं?""हां," आदित्य ने quickly कहा।Party चल रही थी। Drinks, music, dancing। आरा एक corner में खड़ी थी, अपने phone पर कुछ देख रही थी।तभी Marketing Head, Mr. Kapoor, जो थोड़ा drunk था, उसके पास आया।"Hey, Aara," उसने उसका नाम गलत pronounce किया। "Alone हो? Dance karogi मेरे साथ?""नहीं thank you, sir," आरा ने politely मना किया।"Come on," Kapoor ने उसकी arm पकड़ली। "Just one dance।"आरा uncomfortable हो गई। "Sir, please..."तभी एक hand आया और Kapoor की wrist पकड़ ली - इतनी tight कि Kapoor ने wince किया।"She said no," आदित्य की cold voice थी। उसकी eyes dangerous थीं।"Sir, मैं बस-" Kapoor ने stammered।"Get out," आदित्य ने quietly कहा। "अभी।"Kapoor भाग गया।आदित्य ने आरा की ओर देखा। "तुम ठीक हो?"आरा ने nod किया। "हां। Thank you, sir।""Come," आदित्य ने कहा। "तुम बाहर fresh air लो।"वे terrace पर गए। रात थी, और city lights चमक रही थीं।"मुझे sorry कहना चाहिए," आदित्य ने कहा। "Kapoor की behavior unacceptable थी।""यह आपकी fault नहीं है," आरा ने कहा।"फिर भी। तुम मेरी company में काम करती हो। तुम्हारी safety मेरी responsibility है।"आरा ने उसकी ओर देखा। "आप वास्तव में care करते हैं, don't you?""मैं सिर्फ-" आदित्य शुरू करने वाला था।"Nहीं," आरा ने interrupt किया। "आप pretend करते हैं कि आपको कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन आप care करते हैं। मेरी medicines, आज का incident... आप दिखाना नहीं चाहते, लेकिन आप एक अच्छे insaan हैं।""तुम मुझे नहीं जानतीं," आदित्य ने defensive tone में कहा।"तो जानने दीजिए," आरा ने कहा। "क्यों इतनी walls बनाकर रखते हैं? क्यों किसी को करीब नहीं आने देते?""क्योंकि," आदित्य ने कहा, और इस बार उसकी voice में pain था। "हर बार जब मैंने किसी को करीब आने दिया, उन्होंने मुझे hurt किया। My father, मेरी ex-girlfriend जो सिर्फ मेरे paise के लिए मेरे साथ थी, मेरे वो friends जो actually rivals थे। सबने betray किया। तो मैंने decide किया - अगर मैं किसी को करीब नहीं आने दूंगा, तो कोई मुझे hurt नहीं कर सकता।"आरा की eyes में tears आ गए। "लेकिन इस process में आपने खुद को hurt करना शुरू कर दिया। Loneliness भी एक तरह का pain है।""मैं अकेला नहीं हूं," आदित्य ने कहा। लेकिन उसकी voice में conviction नहीं थी।"हैं," आरा ने softly कहा। "और मुझे यह देखकर दुख होता है।"आदित्य ने उसे देखा। "तुम्हें क्यों फर्क पड़ता है? मैं सिर्फ तुम्हारा boss हूं।""क्योंकि..." आरा ने pause किया। क्या वो कह सकती थी? क्या वो admit कर सकती थी कि धीरे-धीरे, बिना realize किए, वो उसके लिए कुछ feel करने लगी थी?"क्योंकि?" आदित्य ने push किया। वो करीब आ गया, बहुत करीब।आरा का दिल तेज़ी से धड़क रहा था। "क्योंकि... आप सिर्फ मेरे boss नहीं हैं। आप... आप मेरे friend हैं। कम से कम, मैं ऐसा सोचती हूं।""Friend?" आदित्य ने शब्द को repeat किया। "मेरे कोई friends नहीं हैं।""अब हैं," आरा ने smile किया। "Congratulations।"कुछ seconds के लिए, आदित्य ने कुछ नहीं कहा। फिर, unexpectedly, उसके lips के corners थोड़े उठे। एक छोटी सी smile। Barely visible, लेकिन वहां थी।और आरा की heartbeat और तेज़ हो गई। क्योंकि यह पहली बार था जब उसने आदित्य मल्होत्रा को genuinely smile करते देखा था।(To be continued...)अध्याय 5: ईर्ष्या की आगअगले कुछ हफ्तों में, आरा और आदित्य के बीच की दूरी कम होती गई। अभी भी वे boss-employee थे professionally, लेकिन personally, कुछ बदल रहा था। छोटी-छोटी बातचीत, shared looks, comfortable silences।लेकिन यह सब देख रहा था कोई और भी।निशा मेहता - company की senior manager, जो पिछले दो सालों से आदित्य के साथ काम कर रही थी। उसे हमेशा से आदित्य पर crush था। उसने कई बार try किया था उसे impress करने के लिए, लेकिन आदित्य ने कभी notice नहीं किया।और अब यह नई लड़की, जो कुछ महीने पहले ही आई थी, आदित्य का attention पा रही थी? यह निशा को बर्दाश्त नहीं था।"वो कौन सोचती है खुद को?" निशा ने अपनी friend Priya से कहा। "बस कुछ महीने हुए हैं यहां, और आदित्य sir उसे special treatment दे रहे हैं।""Maybe उसका काम अच्छा है?" प्रिया ने suggest किया।"Please," निशा ने eyes roll कीं। "मैंने उसके proposals देखे हैं। कुछ ख़ास नहीं। वो बस sir को manipulate कर रही है अपनी innocent act से।""तुम ज्यादा सोच रही हो," प्रिया ने कहा।"देखती हूं," निशा ने खतरनाक smile दी। "मैं उसे उसकी औकात दिखा दूंगी।"अगले दिन, एक important client meeting थी। आरा को presentation देनी थी। उसने रात भर मेहनत की थी और एक perfect presentation बनाई थी।लेकिन meeting से ठीक पहले, जब वो अपना laptop open कर रही थी, सब files गायब थीं। सारा data deleted।"क्या?" आरा panic हो गई। "यह कैसे...""Problem क्या है?" आदित्य ने पूछा। Clients already conference room में wait कर रहे थे।"सर, मेरी files... सब delete हो गई हैं। मैं समझ नहीं पा रही कैसे..."आदित्य की jaw tight हो गई। "तुमने backup नहीं लिया?""I... मैंने सोचा..." आरा का मुंह सूख गया।"This is unacceptable," आदित्य की voice cold थी। "तुम्हें पता है यह client कितना important है?""सर, please, मुझे कुछ time दीजिए-""हमारे पास time नहीं है," आदित्य ने कहा। फिर निशा की ओर मुड़ा। "Nisha, तुम backup presentation दे सकती हो?""Of course, sir," निशा ने sweet smile दी। "मैं हमेशा prepared रहती हूं।"Meeting में, निशा ने presentation दी। Clients impressed थे। Deal finalize हो गई।लेकिन आरा devastated थी। उसने इतनी मेहनत की थी, और सब बर्बाद हो गया। और worse, आदित्य उस पर disappointed था।Meeting के बाद, आदित्य ने आरा को अपने office में बुलाया।"यह negligence था," उसने कहा। "मैंने तुम पर trust किया था।""सर, मैं promise करती हूं, मैंने वो files save की थीं। मुझे नहीं पता कैसे-""Excuses," आदित्य ने interrupt किया। "मुझे results चाहिए, excuses नहीं।"आरा की eyes में tears आ गए। "सर, please believe me-""Enough," आदित्य ने hand raise किया। "तुम्हारी trial period लगभग खत्म हो रही है। ऐसी mistakes के साथ, मुझे नहीं लगता कि तुम यहां fit हो।"आरा को लगा जैसे उसका दिल टूट गया। नौकरी का tension तो था ही, लेकिन उससे ज्यादा दुख था कि आदित्य उस पर trust नहीं कर रहा था।"May I go, sir?" उसने धीरे से पूछा।आदित्य ने nod किया। जैसे ही आरा बाहर गई, उसने अपने tears बहने दिए।Washroom में, जब वो खुद को compose कर रही थी, उसने दो लड़कियों की बातचीत सुनी।"Nisha ने अच्छा किया," एक ने कहा।"हां, आरा के laptop में virus डालकर files delete कर दीं। Smart move।"आरा shocked थी। तो यह निशा ने किया था? Deliberately?उसने जल्दी से बाहर जाकर उन लड़कियों को confront किया। "तुमने अभी क्या कहा?"लड़कियां घबरा गईं। "कुछ नहीं-""मैंने सुना," आरा ने firmly कहा। "Nisha ने मेरी files delete कीं?""हम... हमें कुछ नहीं पता..." वे भाग गईं।आरा गुस्से में थी। लेकिन उसे proof चाहिए था। उसने IT department से contact किया और अपने laptop का recovery करने को कहा।दो घंटे बाद, IT guy ने confirm किया। "Ma'am, आपके laptop में deliberately virus डाला गया था। और access निशा मैम के login से हुई थी।"आरा ने वो proof लेकर सीधे आदित्य के office में जाने का plan बनाया। लेकिन तभी उसे realize हुआ - क्या आदित्य उस पर believe करेगा? निशा senior employee थी, trusted। और वो? वो तो सिर्फ...लेकिन नहीं। उसे try करना होगा।वो आदित्य के office गई और दस्तक दी।"Come in," आदित्य की tired voice आई।"सर, मुझे आपसे कुछ बात करनी है," आरा ने कहा।"अगर यह फिर से excuses हैं-""Nहीं," आरा ने उसे रोका। "यह proof है। मेरी files accidentally delete नहीं हुई थीं। उन्हें deliberately delete किया गया था। Nisha ने।"आदित्य की eyes narrow हो गईं। "यह गंभीर आरोप है।""मुझे पता है," आरा ने laptop forward किया। "लेकिन यहां proof है। IT department ने confirm किया है।"आदित्य ने data देखा। उसका expression dark होता गया।"Why would Nisha do this?" उसने पूछा।"मुझे नहीं पता," आरा ने honestly कहा। "शायद... शायद उसे मुझसे कोई problem है।"आदित्य silent था। फिर उसने intercom पर निशा को बुलाया।जब निशा आई, तो उसके चेहरे पर confident smile थी। "Yes, sir?""तुमने आरा की files क्यों delete कीं?" आदित्य ने directly पूछा।निशा का smile फिर गया। "Sir? मैं... मैं समझी नहीं-""Don't lie," आदित्य की voice dangerously low थी। "IT department ने proof दिया है।"निशा ने आरा को deadly look दी। फिर आदित्य की ओर देखा। "सर, मैं... मैं आपके लिए अच्छा करना चाहती थी। आरा अभी inexperienced है। वो important client के सामने mistake कर सकती थी। इसलिए मैंने-""इसलिए तुमने sabotage किया?" आदित्य ने गरजते हुए कहा। "तुमने deliberately एक colleague को नुकसान पहुँचाया?""सर, please, मैं सिर्फ company के लिए-""Get out," आदित्य ने कहा। "तुम fired हो। अभी।"निशा shocked थी। "सर, please! मैं दो सालों से यहां काम कर रही हूं-""And इन दो सालों में तुमने company के values को betray किया," आदित्य ने कहा। "Security को call करूं या तुम खुद जाओगी?"निशा ने angry tears के साथ office छोड़ा। But जाने से पहले, उसने आरा से कहा, "तुमने मेरी ज़िंदगी बर्बाद कर दी।""Nहीं," आरा ने शांति से कहा। "तुमने खुद की।"जब निशा चली गई, आरा ने आदित्य की ओर देखा। "Thank you, sir। मुझ पर trust करने के लिए।"आदित्य ने उसे देखा। "मुझे maafi मांगनी चाहिए। मैंने तुम पर unfairly judge किया।""It's okay," आरा ने कहा। "आपको नहीं पता था।""फिर भी," आदित्य ने कहा। "मैंने तुम पर trust नहीं किया जब मुझे करना चाहिए था। तुमने कभी मुझे कोई reason नहीं दिया doubt करने का। लेकिन मैं... मैं लोगों पर trust करना भूल गया हूं।"आरा ने उसके desk के पास जाकर बैठे। "Learning to trust फिर से बहुत मुश्किल है। खासकर जब आपको hurt किया गया हो। लेकिन not everyone is same। कुछ लोग वाकई honest होते हैं।""जैसे तुम?" आदित्य ने softly पूछा।"जैसे मैं," आरा ने confirm किया।कुछ seconds के लिए, उनकी eyes locked थीं। और उस moment में, कुछ unspoken था - एक connection, एक understanding।आदित्य ने first time realize किया - शायद, सिर्फ शायद, वो इस लड़की के लिए कुछ feel कर रहा था। कुछ जो वो नहीं चाहता था feel करना। कुछ dangerous।और आरा... आरा already जानती थी कि वो उसके लिए कुछ feel करती थी। कुछ जो वो नहीं चाहती थी, लेकिन control नहीं कर सकती थी।यह complicated हो रहा था। और दोनों को पता था।अध्याय 6: दिल का इकरारउस incident के बाद, आरा का trial period successfully complete हो गया। उसे permanent position मिल गई। और अब वो company के important projects handle कर रही थी।लेकिन आरा और आदित्य के बीच, चीजें awkward हो गई थीं। वे professionally interact करते थे, लेकिन वो closeness जो develop हो रही थी, वो थोड़ी दूर हो गई थी। Dोनों अपने feelings से scared थे।आदित्य खुद को remind करता रहता था - वो boss है, आरा employee। और उससे भी ज्यादा, वो किसी से प्यार नहीं कर सकता। वो वो weakness afford नहीं कर सकता।आरा खुद को समझाती रहती थी - आदित्य उसकी league से बाहर है। वो अमीर है, powerful है, और emotionally closed off है। वो कभी उससे प्यार नहीं कर सकता। इसलिए बेहतर है कि वो अपने feelings को ignore करे।लेकिन दिल को कोई कैसे समझाए?फिर एक दिन, सब कुछ बदल गया।Company की anniversary party थी। एक grand event, five-star hotel में। सभी employees आए थे, clients भी, press भी।आरा ने एक beautiful red dress पहनी थी। उस पर stunning लग रही थी। When she entered the party, कई लोगों ने notice किया।आदित्य भी notice किया। Actually, वो कुछ और notice नहीं कर पा रहा था। आरा... वो breathtaking लग रही थी।Party में, आरा अपने colleagues के साथ थी, enjoy कर रही थी। आदित्य दूर से उसे देख रहा था, unwillingly।"Sir, आप ठीक हैं?" Vikram ने पूछा।"हां," आदित्य ने quickly कहा, नज़र हटाते हुए।लेकिन Vikram ने notice किया कि boss किस चीज़ को देख रहे थे। And he smiled। शायद finally सर को कोई मिल गया हो जो उनकी ज़िंदगी में खुशी ला सके।Pार्टी के middle में, एक client, Mr. Verma, जो थोड़ा drunk था, आरा के पास आया।"Hey beautiful," उसने कहा। "Dance?""No thank you," आरा ने politely मना किया।"Come on," Verma ने उसका हाथ पकड़ने की कोशिश की। "Just एक dance..."तभी एक strong grip ने Verma की wrist पकड़ ली। आदित्य।"She said no," आदित्य की voice dangerous थी।"मैं बस-" Verma शुरू करने वाला था।"You're drunk," आदित्य ने firmly कहा। "I suggest you leave। अभी।"Verma, आदित्य की reputation जानते हुए, quickly चला गया।आरा ने आदित्य को देखा। "Thank you। लेकिन मैं handle कर सकती थी।""I know," आदित्य ने कहा। "लेकिन तुम्हें नहीं करना पड़ा क्योंकि मैं यहां था।"कुछ seconds के लिए, वे एक-दूसरे को देखते रहे। फिर आदित्य ने अपना हाथ आगे बढ़ाया।"Dance?" उसने पूछा।आरा surprised थी। "Aआप... आप dance नहीं करते।""Apparently मैं आज करता हूं," आदित्य ने कहा।आरा ने hesitantly उसका हाथ पकड़ा। वे dance floor पर गए।एक slow song बज रहा था। आदित्य ने आरा की waist पर हाथ रखा, आरा ने उसके shoulder पर। और वे dance करने लगे।आरा की heartbeat इतनी तेज़ थी कि उसे लग रहा था आदित्य सुन सकता है।"You look beautiful," आदित्य ने quietly कहा।आरा ने उसकी eyes में देखा। "Thank you।"वे silently dance करते रहे। पूरा party hall noise से भरा था, लेकिन उन दोनों के लिए, बस वे दोनों थे।"Aaरा," आदित्य ने कहा।"हां?""I..." आदित्य ने pause किया। What was he about to say? वो खुद नहीं जानता था।तभी song खत्म हुआ। Magic moment break हो गया।"मुझे... मुझे कुछ drinks लेने हैं," आरा ने nervous होकर कहा। "Excuse me।"वो जल्दी से वहां से चली गई। आदित्य वहीं खड़ा रह गया, confused about his own feelings।बाहर terrace पर, आरा fresh air ले रही थी। उसका दिल अभी भी तेज़ धड़क रहा था। वो dance, आदित्य की proximity, उसके words... यह सब बहुत था।"Running away?" एक familiar voice आई।आरा ने पलटकर देखा। आदित्य वहां खड़ा था।"मैं... मैं बस fresh air..." आरा ने stammered।आदित्य उसके पास आया। "तुम uncomfortable हो मेरे साथ?""Nहीं," आरा ने quickly कहा। "मैं बस... confused हूं।""तुम और मैं दोनों," आदित्य ने admit किया।"Sसर-""Aआदित्य," उसने कहा। "कम से कम यहां, इस moment में, बस आदित्य।"आरा ने gulp किया। "आदित्य... हमें बात करनी चाहिए। इस बारे में जो हमारे बीच हो रहा है।""And क्या हो रहा है हमारे बीच?" आदित्य ने पूछा। वो करीब आ रहा था, धीरे-धीरे।"मैं... मैं नहीं जानती," आरा ने honestly कहा। "लेकिन यह complicated है। आप मेरे boss हैं-""Forget that," आदित्य ने कहा। "इस moment में, मैं बस एक आदमी हूं। और तुम एक औरत हो। And there's something between us। तुम feel नहीं करतीं?"आरा ने उसकी eyes में देखा। उन काली आंखों में, जो हमेशा इतनी cold थीं, आज कुछ और था। Vulnerability। Need। Maybe... hope?"मैं feel करती हूं," आरा ने whisper किया। "लेकिन मैं डरती हूं।""किस बात से?""इस बात से कि यह काम नहीं करेगा," आरा ने कहा। "हम बहुत different हैं। आप प्यार में believe नहीं करते। आप लोगों को करीब नहीं आने देते। और मैं... मैं सिर्फ कोई project नहीं हूं जिसे आप अपने terms पर control करोगे। अगर यह... अगर हमारे बीच कुछ होना है, तो यह real होना चाहिए। Honest। Equal।"आदित्य ने कुछ नहीं कहा। वो बस उसे देखता रहा।"और मुझे नहीं लगता आप वो de सकते हैं," आरा ने sadly कहा। "इसलिए better है कि हम यह सब भूल जाएं।"She started to walk away। But आदित्य ने उसकी wrist पकड़ ली।"Wait," उसने कहा।आरा ने पलटकर देखा।"तुम सही हो," आदित्य ने कहा। "मैं love में believe नहीं करता। मैं लोगों को करीब नहीं आने देता। मैं emotional intimacy से डरता हूं। लेकिन..."उसने pause किया। यह शायद सबसे मुश्किल बात थी जो उसे कहनी थी।"लेकिन तुम... तुमने कुछ किया है मेरे साथ। तुमने मेरी walls को crack किया है। और मैं डरा हुआ हूं। Terrified। Because मैं नहीं जानता कि यह कैसे handle करना है। लेकिन मैं यह भी नहीं चाहता कि तुम चली जाओ।"आरा की eyes wide हो गईं। "आदित्य...""मैं तुम्हें कोई promises नहीं दे सकता," आदित्य ने continued। "मैं एक perfect boyfriend नहीं हूंगा। मैं probably बहुत सारी mistakes करूंगा। लेकिन... क्या तुम मुझे एक chance दोगी? Us को एक chance दोगी?"आरा का दिल पिघल गया। यह आदमी, जो इतना strong और powerful दिखता था, अभी इतना vulnerable था। And उसने अपने walls को नीचे किया था, उसके लिए।"I..." आरा ने शुरू किया।"बस सोचो," आदित्य ने कहा। "मैं wait करूंगा। जितना भी time चाहिए।"लेकिन आरा को सोचने की जरूरत नहीं थी। क्योंकि despite सारी warnings, despite सारे logical reasons, उसका दिल already decide कर चुका था।"Yes," उसने whisper किया।"क्या?" आदित्य ने confirm किया, उसे believe नहीं हो रहा था।"Yes," आरा ने clearly कहा। "मैं हमें एक chance देना चाहती हूं। क्योंकि... क्योंकि मैं आपको feel करती हूं। And शायद, together, हम figure out कर सकते हैं कि यह कैसे work करेगा।"आदित्य ने उसे देखा, और फिर, पहली बार, उसने genuinely smile किया। एक real, happy smile।और फिर, slowly, very slowly, उसने आरा के face को अपनी hands में लिया और उसे kiss किया।यह gentle था, tender। आरा के दिल ने एक beat skip कर दी। उसने अपनी eyes close कीं और kiss में lost हो गई।When they finally broke apart, दोनों breathless थे।"Wow," आरा ने whisper किया।"Hां," आदित्य agreed।वे कुछ देर बस एक-दूसरे को hold करके खड़े रहे। बाहर party चल रही थी, लेकिन उनके लिए, दुनिया stop हो गई थी।"तो अब क्या?" आरा ने पूछा।"अब," आदित्य ने कहा। "हम यह figure out करते हैं। Together।"आरा ने smile किया। "Together।"और उस moment में, दोनों को लगा कि शायद, सिर्फ शायद, यह work कर सकता है। Love वाकई exist करता है। और शायद, एक "शैतान" भी प्यार कर सकता है।(Continued...)अध्याय 7: प्यार की शुरुआत, समस्याओं की बारिशअगले कुछ हफ्तों में, आरा और आदित्य ने अपने relationship को secretly explore करना शुरू किया। Office में, वे professional थे। लेकिन बाहर... बाहर वे एक normal couple की तरह थे।आदित्य ने आरा को अपने penthouse invite किया। पहली बार, आरा ने देखा कि आदित्य कहां रहता है। यह luxurious था, लेकिन surprisingly impersonal। Jैसे एक hotel room।"Tतुम यहां कैसे रहते हो?" आरा ने पूछा। "यहां कोई personal touch नहीं है। कोई photos, कोई memories... कुछ नहीं।""मुझे memories पसंद नहीं," आदित्य ने कहा। "They remind you of things you've lost।"आरा ने sadly उसे देखा। फिर उसने decide किया। "चलो इसे change करते हैं।""Kया?""चलो इस जगह को एक home बनाते हैं," आरा ने कहा। "Memories create करते हैं। अच्छी memories।"आदित्य hesitant था। लेकिन आरा की enthusiasm infectious थी।अगले कुछ weekends में, आरा ने penthouse को slowly transform किया। कुछ plants, कुछ colorful cushions, कुछ artwork। और सबसे important - उसने एक photo frame रखा, उनकी एक साथ की photo।आदित्य ने जब वो देखा, तो कुछ नहीं कहा। लेकिन secretly, उसे अच्छा लगा। For the first time, उसका घर actually एक घर जैसा feel कर रहा था।वे साथ dinner बनाते। Actually, आरा बनाती और आदित्य "help" करने की कोशिश करता। जो usually इसमें result करता था कि वो कुछ burn कर देता या गलत ingredient मिलाता।"Tतुम terrible cook हो," आरा ने हंसते हुए कहा एक दिन।"मैंने कभी सीखा नहीं," आदित्य ने admit किया। "Hमेशा chefs थे।""Wwell, अब तुम्हारे पास मैं हूं," आरा ने कहा। "मैं तुम्हें सिखाऊंगी।"और धीरे-धीरे, आदित्य बदलने लगा। वो smile करने लगा, हंसने लगा। Vikram ने office में notice किया।"Sसर, आप अलग लग रहे हैं요즘," Vikram ने एक दिन कहा।"Kकैसे?" आदित्य ने पूछा।"Happier," Vikram ने smiled। "Whatever it is, यह आपके लिए अच्छा है।"आदित्य ने कुछ नहीं कहा, लेकिन inside, he knew Vikram was right। आरा उसे खुश कर रही थी। एक ऐसी खुशी जो उसने सालों से feel नहीं की थी।लेकिन सब कुछ perfect नहीं था। अभ