mahavatar in Hindi Drama by Md Siddiqui books and stories PDF | महावतार

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महावतार

यह कहानी पूरी तरह काल्पनिक और मनोरंजन के उद्देश्य से बनाई गई है। इसमें Vishnu यानी भगवान विष्णु का उल्लेख केवल पौराणिक प्रेरणा और सम्मान के रूप में किया गया है

बहुत समय पहले जब धरती पर कई शक्तिशाली राज्यों का राज था तब एक ऐसा समय आया जब अंधकार धीरे-धीरे दुनिया को अपनी गिरफ्त में लेने लगा। पहाड़ों के बीच बसे एक समृद्ध राज्य अमर्वन में लोग खुशहाल जिंदगी जीते थे। खेतों में हरियाली थी नदियाँ साफ बहती थीं और मंदिरों में घंटियों की आवाज हर सुबह लोगों को उम्मीद से भर देती थी।
लेकिन शांति हमेशा के लिए नहीं रहती।
एक दिन उत्तर दिशा से एक रहस्यमयी योद्धा आया। उसका नाम था Raktveer। वह साधारण योद्धा नहीं था। उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी और उसके आसपास एक ऐसी शक्ति महसूस होती थी जो लोगों को डर से भर देती थी।
रक्तवीर ने कई सालों तक अंधेरे जंगलों में तपस्या की थी। कहा जाता था कि उसने एक प्राचीन शक्ति को जगाया था एक ऐसी शक्ति जो डर क्रोध और लालच से जन्म लेती थी। उसी शक्ति की मदद से उसने एक-एक करके आसपास के कई राज्यों को जीत लिया।
जल्द ही अमर्वन भी उसके कब्जे में आ गया।
उसने खुद को राजा घोषित कर दिया और पूरे राज्य में कठोर नियम लागू कर दिए। लोगों से भारी कर वसूला जाने लगा। जो विरोध करता, वह कभी वापस नहीं लौटता।
धीरे-धीरे अमर्वन का खुशहाल राज्य डर और अंधकार में बदल गया।
एक साधारण युवक
उसी राज्य के एक छोटे से गाँव में एक युवक रहता था—Aariv।
आरिव एक साधारण लड़का था लेकिन उसके दिल में न्याय के लिए गहरा भाव था। वह अपने पिता के साथ जंगलों में जड़ी-बूटियाँ खोजने जाता और बीमार लोगों की मदद करता।
आरिव की माँ अक्सर कहती थी,
असली ताकत तलवार में नहीं होती, बेटा असली ताकत दिल में होती है।
लेकिन जब राज्य में अत्याचार बढ़ने लगे तब आरिव के मन में सवाल उठने लगे।
क्यों कोई इस अन्याय के खिलाफ खड़ा नहीं होता
एक दिन सैनिकों ने गाँव पर हमला किया और कई लोगों को पकड़कर ले गए। उस दिन आरिव ने पहली बार महसूस किया कि डर से बड़ी कोई कैद नहीं होती।
उसने तय किया कि वह इस अंधकार का अंत करेगा।
रहस्यमयी मंदिर
सच की तलाश में आरिव जंगलों की गहराई में चला गया। कई दिनों तक भटकने के बाद उसे एक प्राचीन मंदिर मिला, जो आधा टूट चुका था और बेलों से ढका हुआ था।
मंदिर के अंदर एक विशाल मूर्ति थी—एक दिव्य योद्धा की जिसके चारों ओर तेज प्रकाश का आभामंडल था।
वह था भगवान विष्णु।
जैसे ही आरिव उस मूर्ति के पास पहुँचा मंदिर के अंदर एक अजीब ऊर्जा फैलने लगी। दीवारों पर बने प्राचीन चिन्ह चमकने लगे।
अचानक एक गहरी आवाज गूँजी
जिसके दिल में डर से ज्यादा साहस हो वही इस शक्ति को धारण कर सकता है।
आरिव चौंक गया लेकिन वह पीछे नहीं हटा।
उसने कहा
अगर यह शक्ति लोगों की रक्षा के लिए है तो मैं इसे स्वीकार करता हूँ।
जैसे ही उसने मूर्ति को छुआ एक तेज प्रकाश पूरे मंदिर में फैल गया।
आरिव की आँखों के सामने अंधेरा छा गया।
जब उसने दोबारा आँखें खोलीं तो उसे महसूस हुआ कि उसके अंदर कुछ बदल चुका है।
उसके शरीर में असाधारण ताकत थी
उसकी आँखों में एक नई चमक थी।
विष्णु की शक्ति जाग चुकी थी।
शक्ति की परीक्षा
लेकिन यह शक्ति आसान नहीं थी।
जब भी आरिव गुस्से में आता उसके अंदर की शक्ति अनियंत्रित हो जाती। उसे समझ आया कि इस शक्ति को नियंत्रित करने के लिए उसे अपने मन को भी मजबूत बनाना होगा।
कई महीनों तक उसने जंगलों में अभ्यास किया।
धीरे-धीरे उसने अपनी नई शक्ति को समझना शुरू किया।
अब वह सिर्फ आरिव नहीं था।
अब वह एक रक्षक था।
अंधकार का सामना
उधर राजा रक्तवीर को खबर मिली कि जंगलों में कोई अजीब शक्ति जागी है। उसने अपने सबसे खतरनाक योद्धाओं को भेजा।
एक रात जब आरिव गाँव लौट रहा था तब सैनिकों ने उसे घेर लिया।
उनकी तलवारें चमक रही थीं।
लेकिन इस बार आरिव डरा नहीं।
उसकी आँखों में अचानक सुनहरी चमक उभरी
और उसके शरीर के आसपास एक तेज ऊर्जा फैल गई।
उसके भीतर की विष्णु शक्ति जाग चुकी थी।
लड़ाई बहुत भयंकर थी लेकिन कुछ ही मिनटों में सैनिक हार गए।
उस दिन पहली बार लोगों ने एक नई उम्मीद देखी।
अंतिम युद्ध
जब यह खबर राजा रक्तवीर तक पहुँची, तो वह क्रोधित हो गया।
उसने कहा,
कोई भी मेरी शक्ति को चुनौती नहीं दे सकता।
उसने खुद युद्ध करने का फैसला किया।
एक तूफानी रात, महल के सामने विशाल मैदान में दोनों आमने-सामने खड़े थे
एक तरफ अंधकार की शक्ति वाला राजा,
और दूसरी तरफ न्याय की शक्ति वाला योद्धा।
युद्ध शुरू हुआ।
रक्तवीर की शक्ति बहुत भयानक थी। उसकी हर वार से जमीन कांप रही थी।
लेकिन आरिव पीछे नहीं हटा।
लड़ाई लंबी चली
और आखिरकार एक क्षण ऐसा आया जब आरिव को समझ आया कि जीत ताकत से नहीं, बल्कि विश्वास से मिलती है।
उसने अपनी सारी शक्ति एक अंतिम वार में केंद्रित की।
एक तेज प्रकाश आसमान में फैल गया।
जब प्रकाश शांत हुआ तो अंधकार की शक्ति खत्म हो चुकी थी।
रक्तवीर हार चुका था।
नई सुबह
अमर्वन में फिर से शांति लौट आई।
लोगों ने पहली बार डर के बिना साँस ली।
लेकिन जब सब लोग आरिव को ढूंढने लगे तो वह कहीं नहीं मिला।
कुछ कहते हैं कि वह फिर से जंगलों में चला गया।
कुछ कहते हैं कि विष्णु की शक्ति उसे किसी और जगह ले गई।
लेकिन एक बात सब जानते थे
जब भी दुनिया में अंधकार बढ़ेगा,
कहीं न कहीं से एक रक्षक जरूर उठेगा।
और लोग उसे एक ही नाम से पुकारेंगे
महावतार विष्णु।