RAAZ-E-KHANDAR- SHRAAPIT VIRASAT - 1 in Hindi Horror Stories by Dev Kumar Rawat books and stories PDF | राज-ए-खंडहर: श्रापित विरासत - 1

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राज-ए-खंडहर: श्रापित विरासत - 1

अध्याय 1: स्याही का निमंत्रण

मुंबई की चकाचौंध भरी रोशनियों के बीच, आर्यन का मन कहीं और ही भटक रहा था। वह अपने लैपटॉप की स्क्रीन पर उन पुरानी तस्वीरों को ज़ूम कर रहा था जो उसे उस रहस्यमयी पीले लिफाफे में मिली थीं। बाहर मूसलाधार बारिश हो रही थी, और बिजली की कड़कड़ाहट उसके कमरे की खामोशी को बार-बार चीर रही थी। आर्यन, जो एक मशहूर 'पैरानॉर्मल इंवेस्टिगेटर' और व्लॉगर था, ने अपनी ज़िंदगी में कई पुराने किले, खंडहर और श्मशान देखे थे, लेकिन इस बार कुछ अलग था। वह लिफाफा, वह पुराना खुरदरा कागज़, और उस पर लिखी वे टेढ़ी-मेढ़ी लकीरें—उनमें एक अजीब सी कशिश थी, जैसे कोई उसे सदियों पुराने अंधेरे से पुकार रहा हो।

खत में लिखे 'स्याही' गाँव का नाम उसने पहले कभी नहीं सुना था। जब उसने पुराने नक्शों और सरकारी रिकॉर्ड्स को खंगाला, तो पता चला कि यह गाँव 1950 के दशक के बाद से कागजों से गायब हो चुका था। वहाँ के बारे में सिर्फ एक ही धुंधली जानकारी मिली: "रायचंद हवेली—एक श्रापित विरासत।" आर्यन ने अपने दोस्तों को बताए बिना ही अपनी जीप उठाई और हिमाचल की दुर्गम पहाड़ियों की तरफ निकल पड़ा। उसे लगा था कि यह सिर्फ एक और रोमांचक वीडियो होगा, लेकिन नियति ने उसके लिए कुछ और ही भयानक तय कर रखा था।

तीन दिनों के थकाऊ सफर के बाद, आर्यन की जीप ने एक सुनसान मोड़ पर दम तोड़ दिया। रास्ता इतना पथरीला और संकरा था कि आगे जाना मुमकिन नहीं था। उसने अपना भारी कैमरा बैग उठाया और पैदल ही ऊँचाई की तरफ बढ़ने लगा। जैसे-जैसे वह ऊपर जा रहा था, तापमान तेज़ी से गिरने लगा। हर सांस के साथ उसके मुँह से धुआँ निकल रहा था। अचानक, घने कोहरे को चीरते हुए उसे एक पुराना, झाड़ियों से ढका हुआ बोर्ड दिखा जिस पर धुंधला सा लिखा था— "स्याही में आपका स्वागत है... अगर जान प्यारी है तो लौट जाइये।"

आर्यन ठिठक गया। उसने अपने चारों तरफ देखा। गाँव बिल्कुल खामोश था, जैसे वहाँ परिंदे भी पर मारने से डरते हों। वहाँ की मिट्टी का रंग अजीब सा काला था, जैसे वहाँ की ज़मीन को कभी किसी महायज्ञ या आग में झुलसाया गया हो। घरों की खिड़कियों पर शीशे नहीं थे, बल्कि उन पर काले कपड़े लटके हुए थे जो हवा में धीरे-धीरे हिल रहे थे। गाँव के बीचों-बीच एक विशाल बरगद का पेड़ था, जिस पर सैकड़ों लाल धागे और पुरानी चूड़ियाँ बंधी हुई थीं।

"कोई है यहाँ?" आर्यन की आवाज़ गूँजी। अचानक पेड़ पर बैठे दर्जनों कौवे एक साथ उड़े, उनकी 'काँव-काँव' ने सन्नाटे को और भी डरावना बना दिया। तभी एक टूटे हुए घर का दरवाज़ा चरमराते हुए खुला। एक बूढ़ी औरत, जिसकी आँखें सफेद मोतियाबिंद से ढकी थीं, बाहर आई। उसने आर्यन की तरफ देखा भी नहीं, लेकिन उसकी कांपती हुई उंगली सीधे पहाड़ी के उस छोर की तरफ उठी जहाँ बादलों के बीच 'रायचंद हवेली' एक विशाल काले साये की तरह खड़ी थी। "वह तेरा इंतज़ार कर रही है, बेटा," बुढ़िया की आवाज़ ऐसी थी जैसे सूखे पत्तों पर कोई रेंग रहा हो। "उसने तेरे खून की महक पहचान ली है। आज रात सदियों पुराना कर्ज चुकाया जाएगा।" आर्यन कुछ पूछता, उससे पहले ही वह औरत अंदर चली गई और दरवाज़ा ज़ोरदार आवाज़ के साथ बंद हो गया।