Honey Doll - Ranjan Kumar Desai (78) in Hindi Love Stories by Ramesh Desai books and stories PDF | शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (78)

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शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (78)

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                 यादों की सहेलगाह - प्रकरण 78

          " जिस तरह वह सुशील भाई से  एडजस्ट पाते थे प. वही नाथालाल उन के बेटो के साथ था. उन्हें तैयार थाली में खाना मिला गया था. धंदे के उत्थान के लिये उन्हों ने क़ोई सक्रिय प्रयास नहीं किया था."

           " उन के दादा ने जो कहां था वह सच ही था."

            " जो महेनत मैंने धंधा जमाने के लिये की थी उस से आधी मेहनत मेरे बेटों ने नहीं की हैं और उन के बेटे का क्या कहना?  तैयार थाली में बैठकर मजे से खाना खा रहे हैं. "

              " सब से छोटा नवनीत राय था जिसे धंधे से बढ़कर फालतू बातो में ज्यादा दिलचस्पी थी. "

               " ओफिस में कौन कितना काम करता हैं, किसी से बात करता हैं, चाय पानी पीता हैं, बाथरूम ज्यादा जाता है ऊस पर विशेष दयान देता था."

                " ओफिस में क़ोई बात करता था तो उसे शिष्ट भंग मानता था. "

                " दादू  फ्लोरा - अपनी कीसी से ज्यादा बात करते थे . उसे नवनीत राय ने  शिस्त भंग का लेबल लगाकर अपनी बुद्धि का एक ओर नमूना पेश किया था. "

              ' कीसी ओफिस के काम के अलावा शुरू की गई लाइब्रेरी का संचालन भी करती थी.  इस लिए  ओफिस के लोग किताब या मेगेजिन बदलने के बहाने घड़ी घड़ी अलग अलग लोग  उस के पास जाकर गप्पे हांकते थे. "

               "यह गलत था. इस लिए मैंने ' कीसी ' को  समजाया था."

              "  कीसी  निश्चित समय पर हीं वह लाइब्रेरी का संचालन करो. "

                "और मेरी बात मानकर ऊस ने 4 से 5 के बीच लेन देन का समय तय किया था."

                " उस की बाजू में रामन्ना बैठता था. उसे शुरू से हीं ' कीसी'  से कुछ प्रोब्लेम था. उस ने ही जाकर नवनीत राय से शिकायत की थी. "

                 " उस के अलावा रामन्ना को ' कीसी ' केथलिक थी, उस बात से भी बड़ा प्रोब्लेम था."

                 "  उस की ऐसी सोच थी. केथलिक लोग जबरन ऐसा मानना था . वह लोग जबरन हर नोन कैथोलिक को कैथोलिक बना देते हैं."

                  "  राघवन ने अपनी मर्जी से केथलिक धर्म  अंगीकार किया था. जाने समजे ऊस ने वह यह नियम बना लिया था.   उस की ऐसी बेबुनियादी सोच को एक बात को बढ़ावा  दिया था.

                   " राघवन. दक्षिण भारतीय था, रामन्ना उस की बिरादरी का था. ' कीसी'  ने राघवन पर कैथोलिक बनने के लिये दबाव नहीं डाला था. उस ने खुद अपनी मर्जी से   केथोलिक धर्म अंगीकार किया था."

                   " फिर भी गलत सोच बना ली थी. और अपनी कजिन बहन को कीसी के बातें करने को मना किया था.

                    " दादू के हिसाब से कैथोलिक बिरादरी सर्वश्रेष्ठ बिरादरी थी. यहाँ लोगो की सोच बड़ी होती है. लोग विशाल हदयी होते हैं. "

                 " यह उन का जातीय अनुभव था.  "

                  "  उस के पहले भी दो तीन कैथोलिक लड़कियां उन के परिचय में आई थी जिस ने दादू को यह बात मानने पर प्रेरित किया था. "

                 " दादू तो मैं तो  बुधवार को चर्च में भी जाते थे. "

                  " लोर्ड क्राइस्ट को बहुत बड़ी किंमत चुकानी पड़ी थी. उन के देह पर खिले मारकर उन्हें लोगो ने दीवाल पर टांग दिया था. उन की कहानी सुनकर दादू का संवेदनशील फट जाता था. जो यहाँ हमारे परम पूज्य महात्मा गाँधीजी की हुई थी वही ऊस से हिंसक कार्य हुआ था. "  

                " उन का क्या अपराध था? उन्हों ने सब को चाहना सिखाया था. विश्व बंधुत्व का संदेशा दिया था. सब को एक धागे में पिरोने का प्रयास किया था. फिर भी उनके साथ एक शत्रु और जानवर से बदतर व्यवहार किया गया था. "

                  "  इतना सब कुछ हो जाने के बाद उन्हों ने केवल इतना हीं कहां था:"

                 " हैं ईश्वर यह लोग क्या कर रहे है?! . उस का पता नहीं. उन को माफ कर देना. "

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              ' कीसी'  का सारा परिवार विशाल सोच रखता था. हर किसी ने सच्चे मन से हमारा रिश्ता स्वीकार लिया था.. उस के सभी भाई दादू को मानते थे, उन का आदर करते थे.. "

              " उस की मम्मी ने भी उन का रिश्ता स्वीकार लिया था. मौसे मौसी ने भी ऊस रिश्ते का सन्मान किया था. "

              " सब से ऊपर ' कीसी की नानी ने भी उन का विशेष ख्याल रखा था.  कभी ' कीसी ' घर में नहीं होती थी. तब भी वह दादू को बिना चाय नास्ते जाने नहीं देती थी."

               " अगर ऐसा होता जाता था तो ' कीसी' उन्हें  टोकती थी."

                 " नानी मा ने खुद दादू के सामने यह बात कही थी."

                 " मैं आप को चाय नास्ता किये बिना भेज ती हूं  तो फ्लोरा मुझे डांटती हैं. "

                  " कुछ भी हो. लेकिन कुछ ऐसी बातें थी. जो दादू को हर पल हर घड़ी याद आती थी."

                    " ज़ब पहली बार दादू ने उसे राखी बांधने को कहां था."

                     " तब कीसी ने उन्हें  अपने घर बुलाया था."

                      " और उस दिन जों कुछ हुआ था. वह दोनों कभी भूला नहीं पाये थे. "

             "  दादू ऊस दिसमय पर घर भी पहुंच गये थे.. उस वक़्त उस के दरवाजे पर ताला लटक रहा था. यह देखकर वह मायूस हो गये थे. "

              ' प्रथम ग्रास में मक्षिका ' का अनुभव हुआ था.

              ' कीसी ' की तबियत ख़राब हो गई थी.

              , "  पडोसी ने मुझे बताया था:" 

                 " उस की तबियत ख़राब हो गई है. उस का पति उसे मायके ले गया हैं "

                  " वह तुरंत उस की मा के घर पहुंच गये थे उस दिन बुधवार था. उस दिन ' कीसी'  अचूक नोविना के लिये चर्च में जाती थी. लेकिन तबियत ठीक ना होने की वजह से वह घर में हीं होगी. ऐसा सोचकर दादू उस के घर दौड़ गये थे. "

              " लेकिन वह नोविना के लिये चर्च चाली गई थी. उस स्थिति में दादू की भगादौड़ी बेकार हो गईं थी."      

               " वह अपने नियम पालन में बड़ी चुस्त थी. वह कभी नोविना छोड़ती नहीं थी. लेकिन वह  तबियत की वजह से चर्च नहीं गई होगी. यह सोचकर दादू राखी बंधवाने के उत्साह में ऊस के पास गये थे . और उन्हें मायूस होना पड़ा था. "

            " राखी बंधवाने की धुन में कुछ बात उन के दिमाग़ में नहीं आई थी."

            " वह उन का पता लेकर ' कीसी'  की मौसी के घर भीं पहुँच गये थे. 

          " सीढ़ियों पर उन्हें रायजी मिल गया था."

          "वह भी उसी बिल्डिंग में रहता था. दादू को यह बात का पता नहीं था."

        " उस ने दादू को अपने घर में आमंत्रित किया था."

         "लेकिन " मैं जल्दी में हूं! "  कहकर उसे दादू टाल दिया था. उन्हें रायजी की सूरत से भी घिन आती थी और  वह चुपचाप कीसी के मौसी के घर पहुंच ग गये थे.  वह लोग वहाँ पर भी नहीं थे. इस लिए चुपचाप  लौट आने के सिवा दादू के पास क़ोई विकल्प नहीं बचा था."

         " राखी बंधवाने की लगन में दादू ने दोस्त की सगाई को मिस किया था., उस बात का भी उन्हें रंज हुआ था."

         " वह कभी जिंदगी में कभी इतमायूस नहीं हुए थे.  "

           " एक पल मुझे विचार आया था. क्या भगवान नहीं चाहता था की ' कीसी ' उन्हें राखी बांधे!! "

         तीसरे दिन शाम वह उस के घर गये थे.  राखी बंधवाने के लिये उन्होंने कितने पापड़ बेले थे. उन्होंने सब कुछ उन्हें बताया था. जानकर दोनो ने अफ़सोस व्यक्त किया था. दादू की माफ़ी मांगी थी. ' कीसी'  पहली बार उसे राखी बांध रही थी. वह पूरी रस्म से अवगत नहीं थी. दादू ने उसे सब कुछ समजाया था.

          उस ने दादू के कांडे पर राखी बांधी थी. दादू ने उसे आशीर्वाद दिये थे. विरपसली की राशि भी उस के हाथों में थमा दी थी. जिसे लेने का उस ने इन्कार कर दिया था."

          " दादू ने उस का हाथ पकडकर राशि उस के हाथ में थमा दी थी, और समजाया था."

        " यह तो आज के दिन एक बहन का अधिकार हैं, उस को मना नहीं कर सकती. "

         " और उस ने वीर पसली की राशि स्वीकार ली थी. उस ने दादू के लिये चाय नास्ता बनाया था. और पहले रक्षा बंधन की खट्टी मीठी यादें लेकर घर लौट आये थे. ".

                      0000000000000   ( क्रमशः)