शहद की गुड़िया - प्रकरण 79
" हर तीसरी लड़की हमारी फ्रेंड शिप रिक्वेस्ट एक्सेप्ट करती हैं. लेकिन क़ोई हकीकत में ना तो फ्रेंड बनती हैं, ना बात करती हैं. फिर भी स्टंट करती रहती हैं."
" मोबाईल का गलत उपयोग हो रहा हैं, जो चिंता का विषय बन रहा हैं."
" मेसेज के जरिये मध्यम वर्गीय महिलाये जाने क्या क्या डिमांड करती हैं? बड़ी रकम देने की ओफर करती रहती हैं!!"
" पहले लाइक करने को बोलती हैं, फिर अपना मेसेज शेयर करने को बोलती हैं, फिर मोबाईल नंबर देने का वादा करती हैं. बाद में कुछ नहीं होता हैं."
" फेस बुक का भी गलत उपयोग हो रहा हैं., "
" ऐसा क्यों करते हैं वह लोग?"
" क्या मिलता हैं ऐसा करने से?"
"'अगर क़ोई जवाब देती हैं? तो फिर आखिर में ब्लैक मेल पर उतर जाती है. "
" इस समस्या का क्या निराकरण हैं? कुछ समझ नहीं आता.."
" बाकी सब छोड़ो लेकिन ज़ब एक बहु अपने ससुर के साथ गंदा व्यवहार करने को तैयार हो जाती हैं. तो क्या कहे? मुंह शर्म से झुकने के बदले बहु खुशी महसूस करती हैं."
"अधिकतर किस्से में महिला को अपने पति से शारीरिक सुख संपन्न नहीं होता हैं. पति काम काज को लेकर दूर रहता हैं. यह एक नग्न सत्य है. ऐसी स्थिति में वह क्या करे? एक ससुर ऐसे मौके का फायदा उठाने के लिये तैयार होता हैं. "
" उस पर एक सवाल उठता हैं."
"क्या हर किस्से में ऐसा होता है? "
"सेक्स ना मिलने पर ऐसे विकल्प की आजमाइश हो सकती हैं लेकिन मोबाईल वीडियो में तो हर क़ोई मा, बहु और बेटी एक धंदे वाली बन जाती है. पाप खुद करती हैं औऱ पकड़े जाने पर पुरुष पर इल्जाम थोपने पर आमादा हो जाती हैं. "
" आज भी नारी ने कई रूप बदले हैं, फिर भी वह ऐसी मान्यता में जीती हैं की लोग उसी की बात मानेगी. कोर्ट क़ानून भी उसी पर भरोसा करेगा. "
"और गुस्सा तब आता हैं ज़ब मा की उम्र की महिला छोटे बच्चों को भी गलत हरकते करने के लिये उकसाती हैं."
" लेकिन बात यहाँ खत्म नहीं होती. लोक प्रिय धारावाहिक के कलाकारों के घिनोने रिश्ते की रिल्स या वीडियो बनाने का एक नया धंधा शुरू हुआ हैं."
" अभी मोबाईल में नया ट्रेंड शुरू हुआ हैं."
" कौन ऐसी रिल्स तैयार करता हैं?"
रक मेहता का उल्टा चस्मा उस का सीधा प्रमाण पत्र हैं. इस धारावाहिक के सभी स्त्री पुरुष का आपस में सेक्स संबंध होने के रिल्स मोबाईल में दिखाये जा रहे हैं.."
" हर क़ोई येन केन प्रकारेण पैसे कमाने की दौट लगा रहा हैं. "
" उसे रोकने की जिम्मेदारी पुलिस की हैं. लेकिन उन्हें तो उस में क़ोई दिलचस्पी नहीं हैं.. उन के पास ऐसा करने का क़ोई समय नहीं हैं. अपना कर्तव्य अभराई पर चढ़ाकर सब लोग पैसा कमाने के पीछे लग गये हैं. उन्हें जनता के हित की क़ोई फ़िक्र, चिंता नहीं होती."
" एक मात्र पत्रकार, अख़बार निवेश ऐसा कर सकते हैं, लेकिन उन के पास जरूरी फंड का अभाव होने की वजह से ऐसे जमेले में पड़ने को तैयार नहीं होते हैं. अब ऐसी स्थिति को दूर करने का क्या उपाय हैं?"
" जातीय सुख पाने के लिये कोल गर्ल या कोल बोय का विकल्प हैं, जिस में बड़ी राशि का खर्चा होता हैं, इस लिये लोग सरल उपाय आजमाते हैं."
" यहाँ भी वही थियरी काम कर रही है. "
" जातीय सुख एक जरूरत हैं लेकिन उसे एक शौक या आदत बनाकर . उसे पाने के लिये तरहह के नुस्खे आजमाये जाते हैं."
" एक बात जाहिर हैं. हर किसी की दो जिंदगी होती हैं, एक खाजगी और दूसरी पब्लिक- जाहिर : "
" दोनों में आसमान जमीन का फर्क होता हैं. कौन अच्छा हैं, बुरा हैं यह तय करना मुश्किल हो गया हैं."
" कौन क्या हैं? यह पब्लिक लाइफ से पता नहीं चलता. उस के लिये निजी जिंदगी में झांकना जरूरी होता हैं."
" हकीकत में लोगो की निजी जिंदगी में ज्यादा कचरा, ज्यादा गंदगी होती हैं."
" जहाँ तक पकड़ा ना गया तब तक सब लोग शाहूकार होते हैं और पकड़े जाने पर असलियत बाहर आती हैं. क़ोई भी दूसरे शख्स की खाजगी लाइफ से अनजान होता हैं. हर क़ोई दोहरी जिंदगी जीने में माहिर हो गया हैं "
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" सच्चाई उस से भी बड़ी कड़वी होती है. ससुर या उस का रिश्तेदार- दोस्त भी घर की बहु बेटी के साथ गंदा व्यवहार करते हैं.. और वह लोग उसे कह नहीं सकते. इस में भी दो प्रकार होते हैं. कुछ लोग मन से ऐसे रिश्ते बनाते हैं. लिव इन रिश्ते बनाते हैं और पकड़े जाने पर उसे बलात्कार का नाम देकर छूटने की कोशिश करते हैं. "
" जहाँ क़ोई भी स्त्री या पुरुष ज्यादा समय साथ रहते हैं, वहाँ ऐसे रिश्ते आसानी से पनपने लगते हैं."
"और ऐसे रिश्ते ज्यादातर ओफिस में जन्म लेते हैं. "
" एक और सनातन सत्य हैं. क़ोई भी स्त्री यार पुरुष पूरी जिंदगी एक पुरुष और स्त्री के साथ नहीं रह सकता. देखने में भले एक दिखते हो लेकिन अलग जिंदगी जीते हैं. पति दिनभर काम के बहाने बाहर रहता हैं कुछ लोग तो बाहर गांव में ही रहते हैं और महिनो तक बीवी से मिल नहीं पाते. ऐसी स्थिति में उस की शारीरिक भूख का क्या? जो पेट की भूख की तरह उन्हें सताती हैं. और वह भटक जाती हैं. "
" शास्त्र के मुताबिक स्त्री ओर पुरुष एक बार शादी कर सकता हैं और उसे जिंदगीभर निभाने के लिये कर्तव्यबद्ध होना पड़ता हैं, जो एक जटिल समस्या हैं. पेट की भूख की तरह हर किसी दैहिक भूख होती हैं. ऊस के बिना क़ोई भी स्त्री या पुरुष जी नहीं सकता हैं. "
" शास्त्र के बनाये हुए नियम वहाँ किसी काम के नहीं होते हैं."
" इस हालत में क़ोई भी वफादार नहीं रह सकता."
" दादू का एक दोस्त था. जिस का नाम जगत था. उस की शादी मात पिता ने एक लड़की के साथ करवाई थी, जिसे दुनिया दारी से कुछ लेना देना नहीं था. दोनों के बीच में क़ोई ट्यूनिंग नहीं था. इस स्थिति में वह अपनी ओफिस में काम करने वाली स्टेनो टाइपिस्ट से अवैध रिश्ता जोड़ लेता हैं. "
" दोनों रोज शाम को ओफिस छूटने के बाद गेस्ट हाउस में जाते थे और अपनी जरूरत पूरी करते थे."
" रिस्तेदार, परिचित और दोस्तों को घर में बैठे बैठे बातचीत करने का साधन मिल गया था."
" यह भी पोर्न फोटोस ओर पोर्न वीडियोस देखने की आदत की पैदाइश थी."
" वैसे भी ' माधुरी एक्सपोर्ट्स ' में उन के साथ एक लड़का काम करता था, जो शादी के अलावा अपनी जरूरत के लिये दूसरी शादी सुदा लड़की के पास जाता था. "
"और बडे गर्व और गुमान से उस बात का ढिंढोरा पीटता रहता था."
" दादू अखबारी क्षेत्र में काम करते थे . तब एक सब एडिटर ने भी क़ोई लड़की से शारीरिक संबंध होने की बात बताई थी."
" यह सब देखकर, याद कर के ऐसा लगता था की मोबाईल में जो पेश किया जाता था उस में निश्चित रूप से क़ोई सच्चाई थी. "
" वह रोज उस लड़की के घर जाता था. उस का पति घर में नहीं होता था. और वह अपनी भूख मिटाता था."
"और कितने गरुर के साथ अपने अवैध रिश्ते की बात दादू के सामने करता था. "
00000000000 ( क्रमशः)