रात का समय था। बाहर ठंडी हवा चल रही थी और खिड़की के शीशों पर हल्की-हल्की बर्फ जमने लगी थी। घर के अंदर चारों लोग डिनर के बाद बैठकर बातें कर रहे थे। मोहन अभी भी पेट के पास बैठकर बच्चे से बातें कर रहा था।
मोहन बोला —
सुनो छोटे बॉस…जल्दी आना।
तुम्हारा चाचा तुम्हें फुटबॉल सिखाएगा।
पारो ने तुरंत उसके सिर पर हल्का सा चपत मारा।
पारो बोली -
पहले पैदा तो होने दो!
सब हँस पड़े। कुछ देर बाद सब अपने-अपने कमरों में चले गए।
कमरे में हल्की लाइट जल रही थी। संस्कृति बिस्तर पर लेटी हुई थी और कार्तिक उसके पास बैठा लैपटॉप पर कुछ देख रहा था।
संस्कृति धीरे से बोली —
कार्तिक जी…
कार्तिक ने तुरंत उसकी तरफ देखा और बोला -
हाँ?
संस्कृति मुस्कुराई।
संस्कृति बोली -
आज बच्चा बहुत एक्टिव था ना।
कार्तिक हल्का सा मुस्कुराया।
कार्तिक बोला -
बिलकुल अपने चाचा पर गया है।
संस्कृति हँस पड़ी। तभी अचानक…धक! एक जोरदार किक।
संस्कृति का शरीर हल्का सा झटका खा गया। उसकी आँखें फैल गईं।
वो बोली -
कार्तिक जी!
कार्तिक तुरंत घबरा गया।
वो बोला -
क्या हुआ??
संस्कृति घबराकर बोली —
बहुत जोर से किक मारी…
कार्तिक तुरंत उसके पास आ गया।
कार्तिक बोला -
दर्द हो रहा है क्या?
संस्कृति ने पेट पकड़ लिया।
संस्कृति बोली -
अभी… अभी फिर से हुआ!
तभी फिर…धक! दूसरी किक। संस्कृति थोड़ा डर गई।
वो बोली -
ये इतना जोर से क्यों हिल रहा है?
कार्तिक का चेहरा घबराहट से भर गया।
वो बोला -
रुको… मैं अभी डॉक्टर को कॉल करता हूँ।
संस्कृति बोली —
अरे नहीं… शायद नॉर्मल होगा…
लेकिन कार्तिक कहाँ सुनने वाला था। उसने तुरंत फोन उठा लिया।
तभी दरवाजा खुला। मोहन और पारो अंदर आ गए।
मोहन बोला —
क्या हुआ?
इतनी रात को डॉक्टर को क्यों कॉल कर रहे हो?
कार्तिक बोला —
बच्चा बहुत जोर से किक मार रहा है!
मोहन की आँखें चमक उठीं। वो तुरंत बिस्तर के पास आ गया।
वो बोला -
सच में??
तभी फिर…धक! मोहन उछल पड़ा।
वो बोला -
ओहोहो!!!
वो जोर से हँसने लगा।
वो बोला -
भैया! ये बच्चा नहीं… पूरा रेसलर आने वाला है!
पारो हँसी रोकते हुए बोली —
आप चुप रहो।
तभी फोन पर डॉक्टर की आवाज आई। कार्तिक ने जल्दी-जल्दी सब बता दिया।
डॉक्टर हँसते हुए बोली —
मिस्टर कार्तिक…घबराइए मत।
ये बिल्कुल नॉर्मल है।
कार्तिक बोला —
लेकिन इतनी जोर से?
डॉक्टर बोली —
इसका मतलब बच्चा बहुत हेल्दी और एक्टिव है।
कार्तिक ने राहत की साँस ली।
कार्तिक बोला -
ओह…
मोहन फिर पेट के पास झुक गया।
वो बोला -
ओये छोटे पहलवान…
पारो बोली —
बस भी करो।
मोहन बोला —
देख लेना…ये बच्चा पैदा होते ही बोलेगा —
चाचा! रिंग कहाँ है?
सब जोर से हँस पड़े। संस्कृति अब थोड़ा शांत हो गई थी। उसने कार्तिक का हाथ पकड़ा और अपने पेट पर रखा। तभी फिर हल्की सी किक हुई। इस बार कार्तिक मुस्कुरा पड़ा।
वो धीरे से बोला —
शरारती…
संस्कृति भी मुस्कुराई और बोली -
बिलकुल अपने पिता पर गया है।
मोहन तुरंत बोला —
गलत! पूरी तरह अपने चाचा पर गया है!
कमरे में फिर से हँसी गूँज उठी। संस्कृति ने पेट पर हाथ रखा। अंदर छोटा सा जीवन धीरे-धीरे अपनी मौजूदगी जता रहा था।
और चारों के दिलों में एक नई खुशी हर दिन थोड़ी और बड़ी हो रही थी। 💛
समय धीरे-धीरे बीतता गया। देखते ही देखते संस्कृति की प्रेग्नेंसी को आठ महीने हो चुके थे। अब उसका बेबी बंप साफ दिखाई देता था। कार्तिक हर वक्त उसका ध्यान रखता था चलते समय हाथ पकड़ना, सीढ़ियों पर संभालना, समय पर खाना देना।
मोहन हमेशा मज़ाक करता —
भाभी… अब आप VIP हो गई हैं।
इस घर में आपकी परमिशन के बिना पंखा भी नहीं घूमेगा!
सब हँस पड़ते। लेकिन पिछले कुछ दिनों से पारो थोड़ी अजीब लग रही थी।नवो अक्सर थकी-थकी रहती। कभी अचानक चुप हो जाती…और कई बार सुबह-सुबह उसे उल्टी भी हो जाती।
संस्कृति ने एक दिन नोटिस किया।
संस्कृति बोली —
पारो… तुम ठीक तो हो?
पारो तुरंत बोली —
हाँ भाभी… बस थोड़ा गैस होगा शायद।
लेकिन उसके चेहरे पर हल्की घबराहट साफ दिख रही थी।
उस रात…मोहन और कार्तिक ऑफिस का काम कर रहे थे। बाहर वाले कमरे में बैठे। संस्कृति अंदर वाले कमरे में बैठी थी। तभी धीरे से दरवाज़ा खुला। पारो अंदर आई। उसका चेहरा थोड़ा घबराया हुआ था।
संस्कृति ने तुरंत पूछा —
क्या हुआ पारो?
पारो ने दरवाज़ा बंद किया…और धीरे से उसके पास बैठ गई। वो कुछ पल चुप रही।
फिर धीरे से बोली —
भाभी… मुझे आपसे एक बात करनी है।
संस्कृति ने उसका हाथ पकड़ लिया।
संस्कृति बोली -
हाँ बोलो।
पारो थोड़ा झिझकी…
फिर धीमे से बोली —
भाभी… मुझे… एक महीने से पीरियड्स नहीं आए।
संस्कृति की आँखें हल्की सी फैल गईं।
वो बोली -
क्या…?
पारो घबराकर बोली —
और… पिछले कुछ दिनों से मुझे भी उल्टियाँ हो रही हैं।
कमरे में कुछ पल के लिए सन्नाटा छा गया। फिर अचानक…संस्कृति के चेहरे पर एक बड़ी मुस्कान आ गई।
वो धीरे से बोली —
पारो… तुम्हें पता है इसका क्या मतलब हो सकता है?
पारो का दिल तेज़ धड़कने लगा।
पारो बोली -
क्या…?
संस्कृति मुस्कुराई।
संस्कृति बोली -
हो सकता है…तुम माँ बनने वाली हो।
पारो की आँखें अचानक भर आईं।
पारो बोली -
सच…?
संस्कृति बोली —
कन्फर्म करने के लिए डॉक्टर के पास चलना पड़ेगा…
लेकिन लक्षण तो वही हैं।
पारो की आँखों से आँसू निकल पड़े।
वो धीरे से बोली —
भाभी… अगर ऐसा हुआ…तो मोहन जी कितना खुश होंगे।
संस्कृति हँस पड़ी।
वो बोली -
देवर जी तो पागल हो जायेंगे!
तभी अचानक…दरवाज़े के बाहर से मोहन की आवाज़ आई —
कौन पागल हो जाएगा?
दोनों चौंक गईं। मोहन दरवाज़े पर खड़ा था…और शक भरी नज़रों से दोनों को देख रहा था।
वो बोला -
आप दोनों क्या छुपा रही हैं?
पारो तुरंत घबरा गई। संस्कृति मुस्कुराने लगी।
मोहन बोला —
भाभी… कुछ तो गड़बड़ है!
संस्कृति ने शरारती मुस्कान के साथ कहा —
हो सकता है…तुम चाचा से सीधे पापा बनने वाले हो।
मोहन की आँखें गोल हो गईं।
मोहन बोला -
क्याआआ???!!!
पारो शर्म से लाल हो गई। मोहन कुछ सेकंड तक बस उन्हें देखता रहा…फिर अचानक उछल पड़ा।
वो बोला -
मतलब…मतलब…हमारा भी बच्चा???
वो खुशी से लगभग नाचने लगा। संस्कृति हँस पड़ी।
वो बोली -
अभी डॉक्टर कन्फर्म करेंगे।
मोहन बोला —
मुझे फर्क नहीं पड़ता!
मैं अभी से पापा बनने की प्रैक्टिस शुरू कर देता हूँ!
तभी बाहर से कार्तिक की आवाज आई —
ये घर में इतना शोर क्यों हो रहा है?
मोहन दौड़कर बाहर गया।
और चिल्लाया —
भैया!!!! लगता है घर में एक नहीं… दो-दो छोटे बॉस आने वाले हैं!!
कार्तिक कुछ सेकंड तक उसे देखता रहा…फिर मुस्कुरा दिया।
घर में फिर से हँसी गूँज उठी। 💛