इस घर में प्यार मना है in Hindi Drama by Sonam Brijwasi books and stories PDF | इस घर में प्यार मना है - 35

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इस घर में प्यार मना है - 35

घर का माहौल अब पूरी तरह बदल चुका था। अब इस घर में सिर्फ प्यार ही नहीं…दो-दो नन्ही जानों का इंतज़ार भी बस चुका था। 💛
संस्कृति 8 महीने की थी…और पारो की प्रेग्नेंसी अभी शुरुआती महीनों में थी।

सुबह का समय…किचन में पारो कुछ बनाने की कोशिश कर रही थी। तभी पीछे से मोहन दौड़ता हुआ आया ।

मोहन (घबराकर) बोला - 
अरे अरे अरे!! तुम क्या कर रही हो??

पारो बोली - 
खाना बना रही हूँ…

मोहन ने तुरंत चम्मच उसके हाथ से छीन लिया।

मोहन बोला - 
नहीं! अब तुम सिर्फ आराम करोगी!
डॉक्टर ने कहा है ना?

पारो (गुस्से में) बोली - 
डॉक्टर ने ये नहीं कहा कि मैं कुछ कर ही नहीं सकती!

तभी दूसरी तरफ…कार्तिक संस्कृती को पानी दे रहा था।

कार्तिक (नरमी से) बोला - 
धीरे… संभलकर… बैठो।

संस्कृति (हँसते हुए) बोली - 
मैं ठीक हूँ कार्तिक जी… इतनी भी कमजोर नहीं हूँ।

कार्तिक बोला - 
तुम्हारे लिए मैं ओवरप्रोटेक्टिव हूँ… और रहूँगा।

तभी मोहन चिल्लाया —
भैया! आप भी देखो ना! ये काम कर रही है!

कार्तिक तुरंत आया।

कार्तिक (सीरियस होकर) बोला - 
पारो… तुम्हें आराम करना चाहिए।

पारो ने दोनों को घूरा।

पारो बोली - 
वाह! एक मैं प्रेग्नेंट हूँ…और एक भाभी…
पर परेशान हम दोनों को तुम लोग कर रहे हो!

संस्कृति हँस पड़ी।

शाम का समय…चारों हॉल में बैठे थे।

मोहन अचानक बोला —
मुझे लगता है हमारा बच्चा पहले आएगा!

संस्कृति ने भौंह उठाई।

संस्कृति बोली - 
एक मिनट…मैं 8 महीने की हूँ!

कार्तिक (मुस्कुराते हुए) बोला - 
लॉजिक के हिसाब से… पहले हमारा बच्चा आएगा।

मोहन तुरंत बोला —
नहीं! हमारा बच्चा स्पीड में होगा!
सीधा एंट्री मारेगा!

पारो हँसी रोकते हुए बोली —
ये बच्चा है या रेस कार?

संस्कृति ने प्यार से अपने पेट पर हाथ रखा।

संस्कृति बोली - 
हमारा बच्चा शांति से आएगा…जैसे उसकी मम्मी।

कार्तिक मुस्कुराया।

कार्तिक बोला - 
और थोड़ा सा अपने पापा जैसा भी।

मोहन फिर उछला और बोला—
नहीं! हमारा बच्चा पहले आएगा और बोलेगा —
‘पापा हटो, मैं आया!’

पारो ने सिर पकड़ लिया।

पारो बोली - 
हे भगवान…पहले ही इतना ड्रामा… बच्चा आया तो क्या होगा?

रात का समय…दोनों लड़कियाँ आराम कर रही थीं। मोहन और कार्तिक पास में बैठे थे। दोनों एक-दूसरे को देख रहे थे।

मोहन बोला - 
भैया… एक बात बताऊँ?

कार्तिक बोला - 
हम्म?

मोहन (थोड़ा इमोशनल होकर) बोला - 
डर लगता है…कि कहीं इन्हें कोई तकलीफ ना हो…।

कार्तिक ने उसकी तरफ देखा…और हल्का सा मुस्कुराया।

कार्तिक बोला - 
डर मुझे भी लगता है…लेकिन हम दोनों हैं ना…इनका ख्याल रखने के लिए।

मोहन ने सिर हिलाया।

तभी अंदर से संस्कृती की आवाज आई —
कार्तिक जी… पानी…

कार्तिक तुरंत उठ गया।

उसी वक्त पारो बोली —
मोहन जी… मुझे भी चाहिए…

मोहन भी दौड़ पड़ा। दोनों पानी लेकर आए। दोनों लड़कियाँ एक-दूसरे को देखकर हँसने लगीं।

संस्कृति (मजाक में) बोली - 
लगता है हमारे बच्चे नहीं…दोनों पापा पहले ही बिगड़ गए हैं।

पारो बोली - 
हाँ…घर में चार नहीं… अब छह बच्चे हो गए हैं।

सब हँस पड़े। 😄 घर में अब हर दिन मस्ती, चिंता, प्यार और इंतज़ार का खूबसूरत मिश्रण था। दोनों की धड़कनों के साथ
चार दिल और भी ज़्यादा जुड़ गए थे। 💛

दिन धीरे-धीरे बीत रहे थे…अब संस्कृति की डिलीवरी का समय बिल्कुल करीब आ चुका था। उसके चेहरे पर हल्की थकान थी…
लेकिन आँखों में एक अलग ही चमक।
रात का समय… संस्कृति बिस्तर पर बैठी थी…कार्तिक उसके पास।

संस्कृति (धीरे से) बोली - 
कार्तिक जी… अब लगता है… कभी भी समय आ सकता है…

कार्तिक का चेहरा थोड़ा तनाव में आ गया।

कार्तिक बोला - 
सब ठीक होगा… मैं हूँ ना।

संस्कृति मुस्कुराई।

संस्कृति बोली - 
आप तो ऐसे घबरा रहे हैं जैसे आपको डिलीवरी देनी है।

कार्तिक हल्का सा हँस पड़ा…पर उसकी आँखों में डर साफ था।

अगले दिन…संस्कृति को हल्का दर्द शुरू हुआ। घर में हलचल मच गई। मोहन इधर-उधर भाग रहा था —

मोहन बोला - 
भैया! बैग कहाँ है? पानी लिया? गाड़ी तैयार है??

कार्तिक खुद घबरा गया था। उसके हाथ हल्के काँप रहे थे। संस्कृति ने उसका हाथ पकड़ा।

संस्कृति (नरमी से) बोली - 
कार्तिक जी… मेरी तरफ देखिए…

वो उसकी आँखों में देखने लगा।

संस्कृति बोली - 
मैं ठीक हूँ…और हमारा बच्चा भी ठीक होगा…आप डरिए मत।

कार्तिक की आँखें हल्की नम हो गईं। उसने उसका माथा चूमा।

कार्तिक (धीरे से) बोला - 
तुम बहुत मजबूत हो…

संस्कृति मुस्कुराई।

संस्कृति बोली - 
क्योंकि आप मेरे साथ हैं।

हॉस्पिटल पहुँचे…डॉक्टर संस्कृती को अंदर ले गई। कार्तिक बाहर खड़ा था… बेचैन। मोहन इधर-उधर टहल रहा था।

हर नर्स से एक ही सवाल —
मैडम… सब ठीक है ना?
लड़का होगा या लड़की?
रोएगा तो तेज़ रोएगा ना?

नर्स परेशान होकर बोली —
Please.... shutdown...

मोहन अचानक भगवान के सामने हाथ जोड़कर खड़ा हो गया।

मोहन बोला - 
भगवान जी…भाभी और बच्चे को ठीक रखना…मैं रोज मंदिर आऊँगा… कसम से!

पास में खड़े लोग उसे देख रहे थे। कार्तिक सिर पकड़कर बैठ गया।
तभी अंदर से संस्कृती की हल्की चीख सुनाई दी…कार्तिक का दिल जोर से धड़कने लगा। मोहन भी घबरा गया।

मोहन बोला - 
भैया… कुछ करो ना!

कार्तिक बोला —
मैं क्या करूँ?? अंदर जाऊँ??

कुछ देर बाद…डॉक्टर बाहर आई। दोनों एक साथ खड़े हो गए। Indian doctor थीं।

कार्तिक (घबराकर) बोला - 
डॉक्टर… संस्कृती ठीक है ना?

डॉक्टर मुस्कुराई।

डॉक्टर बोलीं - 
रिलैक्स… सब ठीक चल रहा है।

मोहन तुरंत बोला —
डॉक्टर मैडम…पहले ये बताइए…मैं चाचा बना या पापा अभी??

डॉक्टर हँस पड़ी।

डॉक्टर बोली - 
अभी आप सिर्फ… बहुत टेंशन देने वाले रिश्तेदार हैं।

दोनों फिर बैठ गए…दिल धड़क रहा था…आँखें दरवाज़े पर टिकी थीं…और ज़िंदगी का सबसे बड़ा पल…बस आने ही वाला था। 💛

हॉस्पिटल के बाहर…समय जैसे थम गया था। कार्तिक की नज़र बस उस दरवाज़े पर थी…जहाँ अंदर उसकी दुनिया थी। अचानक…अंदर से एक नन्ही सी रोने की आवाज गूँजी। पूरा माहौल एक पल में बदल गया। कार्तिक की साँस रुक गई…मोहन उछल पड़ा —

मोहन बोला - 
भैया!! आवाज आई!! बच्चा आ गया!!

दोनों दरवाज़े के पास पहुँच गए। कुछ ही सेकंड बाद डॉक्टर बाहर आई।चेहरे पर मुस्कान थी।

डॉक्टर बोली - 
कांग्रेसुलेशन्स…

कार्तिक की आँखें नम हो गईं।

डॉक्टर (मुस्कुराकर) बोली - 
लक्ष्मी आई है… बेटी हुई है।

एक पल के लिए सब शांत…फिर…

मोहन जोर से चिल्लाया —
मैं चाचा बन गया!!! 😄

कार्तिक वहीं खड़ा रह गया…उसकी आँखों से आँसू बहने लगे।
नर्स ने छोटे से कपड़े में लिपटी बच्ची कार्तिक की तरफ बढ़ाई।
कार्तिक के हाथ हल्के काँप रहे थे। उसने धीरे से अपनी बेटी को गोद में लिया…जैसे कोई सबसे कीमती चीज़ पकड़ रहा हो। उसने बच्ची के छोटे-से चेहरे को देखा…उसकी उँगली पकड़ ली बच्ची ने।
कार्तिक की आँखों से आँसू गिर पड़े।

कार्तिक (फुसफुसाकर) बोला - 
मेरी… बेटी…

वो धीरे से उसके माथे को चूमता है।

कार्तिक बोला - 
थैंक यू… संस्कृती…

तभी पीछे से मोहन की आवाज आई —
भैया!!! अब मुझे भी दो!!!

कार्तिक ने बच्ची को और कसकर पकड़ लिया।

कार्तिक बोला - 
धीरे… ये कोई खिलौना नहीं है।

मोहन मुँह बनाकर बोला—
अरे मैं चाचा हूँ! मेरा भी हक है!

नर्स हँसते हुए बोली —
Coming… You hold it.।

मोहन ने जैसे ही बच्ची को गोद में लिया…उसका पूरा एक्सप्रेशन बदल गया। जो हमेशा मजाक करता था…अब एकदम शांत हो गया।

मोहन (धीरे से) बोला - 
हेलो… मैं तुम्हारा चाचा हूँ…

फिर अचानक बोला —
भैया! ये तो बहुत छोटी है…टूट तो नहीं जाएगी ना?? 😰

सब हँस पड़े। कार्तिक अंदर गया…संस्कृति थकी हुई थी...लेकिन चेहरे पर सुकून था।कार्तिक उसके पास बैठा।

धीरे से बोला —
हमारी… बेटी…

संस्कृति की आँखें चमक उठीं। नर्स ने बच्ची को उसकी माँ के पास लिटा दिया। संस्कृति ने उसे सीने से लगा लिया।

संस्कृति (धीरे से) बोली - 
मेरी गुड़िया…

कार्तिक ने दोनों को गले से लगा लिया। बाहर…

मोहन पारो से बोला —
देखना… हमारी भी एंट्री धांसू होगी 😎

पारो हँसते हुए —
पहले ये संभाल लो… फिर अगली प्लानिंग करना।

घर में अब सच में एक नन्ही परी आ चुकी थी… 💛👶 
और उसके साथ…सबकी ज़िंदगी हमेशा के लिए बदल गई।