friendship in Hindi Classic Stories by manu gupta books and stories PDF | दोस्ती

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दोस्ती

आज संदलपुर में रौनक ही रौनक थी क्योंकि आज बहुत ही पहुंचे हुए संत गांव में आए थे। 

विजेंद्र का दोस्त उसके पास आया। 

ओए वीजू आज बाबा महात्मा आए है बड़े ज्ञानी बाबा है उनको सुनने चलेंगे। 

अरे यार रामू तू जानता है न मैं क्या करूंगा वहां जाकर। 
मुझे कुछ समझ में तो आता नहीं। 

अरे बहुत बड़े महात्मा है समझ में न आएगा तो कोई बात नहीं दर्शन तो कर ही लेंगे।  

अब यार मन तो नहीं है पर तू कह रहा है तो चलना तो पड़ेगा ही नहीं तो तू परेशान ही करता रहेगा। 
बह बेमन से रामू के साथ चल दिया। 

दोनों बचपन के दोस्त थे। एक साथ ही रहते दोनों दोस्त कम भाई ज्यादा थे। 
दोनों ज्यादा पढ़े लिखे तो नहीं पर समाज और रिश्ते की बहुत समझ थी उन्हें। 

दोनों बहुत ज्यादा आर्थिक मजबूत भी नहीं थे। दोनों की कमाई का एक ही जरिया था किसानी। 
बह भी अगर धोखा दे जाए तो पूरे साल तंगी हाली। 

पर दोनों एक दूसरे का साथ देते। 

जब दोनों गांव के बाहर लगे पंडाल में पहुंचे तो महात्मा वहां कृष्ण और सुदामा का प्रसंग सुना रहे थे। 

भक्तों कृष्ण भगवान ही नहीं बहुत अच्छे दोस्त भी थे। अपने बचपन के दोस्त के आने का सुना तो सब्र ही नहीं कर पाए। 

बह नंगे पैर दौड़ते हुए अपने दोस्त से मिलने भागे चले गए। उन्होंने अपने मित्र के आने का भी इंतजार नहीं किया। 

बह अपने मित्र को जल्दी से जल्दी देख लेना चाहते थे। 

उनके राज्य के सभी लोग बहुत अचंभित थे। क्योंकि भगवान कृष्ण को कभी किसी ने इस तरह नहीं देखा था। 

राज दरबारी तो बड़े अचंभित थे ऐसा कौन आ गया कि जिसके लिए भगवान भागे चले जा रहे है चप्पलों का भी होश नहीं है।  
भगवान से मिलने के लिए तो बड़े बड़े राजा महाराजा इंतजार करते रहते है। 
देवता भी भगवान के दर्शन के लिए हाजिरी लगाते रहते है। 
ऐसा कौन व्यक्ति आ गया जिससे मिलने के लिए भगवान इतने आतुर हो गए। 

सभी को सुदामा के दर्शन करने थे। सब सोच रहे थे कोई बहुत ही बड़ा आदमी होगा। 

लेकिन जब भगवान कृष्ण वापिस आए तो उनके साथ तो बढ़ा गरीब सा बूढ़ा सा ब्राह्मण था। 
सबको बड़ा अचंभा हुआ कि बह क्या सोच रहे थे ये क्या निकले। 

भगवान ने सुदामा जी बड़े प्रेम से अपने सिंहासन पर बैठाया

यह पहली बार हुआ था कि भगवान की सिंहासन पर कोई और बैठा हो। देवता के राजा इंद्र भी ऐसा दुस्साहस नहीं कर सकते। 

लेकिन सुदामा के भाग्य देखो। 
आज बह भगवान कृष्ण के मित्र होने की वजह से उस सिंहासन पर बैठे है।  

भगवान की रानियां भी आज बहुत ही अचंभित थी जिस भगवान एक एक इशारे पर देवता कुछ भी करने को तैयार रहते है। 

बह भगवान अपने मित्र प्रेम ने अपने मित्र के पैर धो रहे है। 

उसके बाद भगवान ने अपने मित्र के बगल में पोटली दबी देखी जिसको बह बार बार छुपाने की कोशिश कर रहे थे। 

भगवान कृष्ण ने सुदामा जी की पोटली ले ली।  
उसमें कुछ सूखे चावल थे। उसकी वजह से ही सुदामा जी शरमा रहे थे बह सोच रहे थे कि इतने बड़े राजा है चावल भेंट करते हुए अच्छा नहीं लगेगा। 
पर भगवान से कुछ भी छुपता नहीं है। 

अरे सुदामा भाभी ने मेरे लिए ये चावल भेजे है और तुम छुपा रहे हो। 

सुदामा संकोच वश कुछ नहीं कह सके। 

उधर रुक्मणि को।भी बहुत अचंभा हो रहा था कि इस मेहमान को आज तक कभी देखा नहीं। और न ही भगवान ने इसका कभी जिक्र किया। 

भगवान ने एक मुट्ठी चावल लिए और खा लिए। 
अब आप भगवान की माया देखो आप भगवान तीन लोक के स्वामी। 
एक मुट्ठी चावल खाए और एक लोक दे दिया। फिर दूसरी मुट्ठी चावल खाए और और दूसरा लोक सुदामा को दे दिया। 

फिर भगवान जैसे ही तीसरी मुट्ठी चावल खाने को हुए तो उनकी पत्नी रुक्मणि ने उनका हाथ रोक लिया। 

प्रभु क्या कर रहे हो एक लोक तो अपने लिए भी रहने दो। 

प्रभु ने फिर अपनी पत्नी की बात मानते हुए तीसरी मुठ्ठी चावल नहीं खाए। 

अर्थात दो मुठ्ठी चावल के बदले उन्होंने अपने दोस्त को दो लोक दे दिए। 

क्या भगवान के जैसा कोई मित्र हो सकता है। 

बोलो भक्तों क्या कोई भगवान कृष्ण जैसा दोस्त हो सकता है। 
सब एक सुर बोले नहीं। 

तभी बीजू खड़ा हुआ है इनसे भी अच्छा दोस्त इस दुनिया में हुआ है 

रामप्रताप......

उसकी बात सुनकर तो सब उसकी तरफ देखने लगे। 

महात्मा भी उसकी तरफ देखने लगे

अब ये राम प्रताप कौन है उनके सहयोगी उनकी तरफ इशारे से बोले महात्मा को भी खुद न पता था कि रामप्रताप कौन है। 
महात्मा को इतना समय हो गया था कथा करते हुए और बहुत ज्ञानी भी थे बहुत किताबें भी पढ़ रखी थी कही भी राम प्रताप का नाम न पड़ा था। 
न कोई राजा हुए और न ही कोई महात्मा हुए इस नाम के

अब महात्मा भी बगले झांकने लगे। उनके सहयोगी भी बाबा की।तरफ ही देख रहे थे। 
उन्होंने बाबा को इतना असहज कभी नहीं देखा था। 
पंडाल में सन्नाटा हो गया था। 
फिर बाबा की आवाज आई

कौन रामप्रताप...?

विजेंद्र बोला मेरा दोस्त रामू...
बह रामू का हाथ पकड़ के ऊपर करते हुए बोला। 

अरे बीजू क्या कर रहा है में भगवान से बेहतर दोस्त कैसे हो सकता हु रामू भी सकपकाते हुए बोला। 

बाबा के सहयोगी को बहुत गुस्सा आ रहा था क्योंकि उसने उन्हें असमंजस में डाल दिया था और बाबा को असहज कर दिया था। 
पर बाबा बहुत संतोषी आदमी थे। 

उन्होंने कहा तुम्हारा दोस्त रामू भगवान श्रीकृष्ण से बेहतर दोस्त है पर कैसे.......

उसने कहा प्रभु में ज्यादा तो नहीं जानता पर कृष्ण तो भगवान थे और मेरा दोस्त तो किसान है 
बह भगवान थे तब भी उन्होंने अपने लिए एक लोक रोक लिया। 
लेकिन जब में बीमार था तो मेरे दोस्त ने मेरी बीमारी अपने खेत गिरवी रख दिया।  
और अपनी बेटी की शादी के लिए बनाए हुए गहने भी बेच दिए और मुझे मौत के मुंह से बचा लाया। 

जब मैने पूछा तूने ये सब क्यों किया बिटिया के गहने तो बचा लेता। 

मेरा दोस्त बोला .....अब मेरा दोस्त बच गया अब सब बन जाएगा। 

उन्होंने तो भगवान होकर एक लोक बचा लिया पर मेरे दोस्त ने किसान होकर भी मुझे सब कुछ दे दिया तो बताओ अब कौन बढ़िया दोस्त हुआ
आपके भगवान या मेरा दोस्त। 

बाबा के पास उसका कोई उत्तर न था क्यों बह जानते थे कि बह सुनेगा नहीं। 

पर आप लोग भी जरूर कमेंट करके बताएं