शिवाजी जूते पॉलिश कर रहा था। तभी एक गाड़ी आकर रुकी। उसमें से एक नौजवान लड़का उतरा। उसने एक थैली में कुछ जूते पॉलिश करने के लिए शिवाजी की तरफ बढ़ा दिए।
शिवाजी 11 साल का लड़का था। चेहरे पर हमेशा मुस्कान। कम उम्र में बड़ी जिम्मेदारी। पढ़ा लिखा तो था नहीं। पर समाज की बहुत समझ थी।
पैसे की अहमियत समझता था। कोई काम तो था नहीं बस होश संभाला तो हाथ एक जिम्मेदारी थी....
छोटा भाई ....
नाम तो अपना भी नहीं पता था पर महाराज शिवाजी की प्रतिमा देखी। लोगो से उनके बारे में सुना कि बहुत बड़े महाराज है बहुत वीर है तो अपना नाम भी शिवाजी रख लिया।
स्टेशन पर ही मांगकर खाना खाना और वही सो जाना यही जिंदगी थी। न कोई लक्ष्य न कोई समाज से मतलब।
लेकिन जब बच्चों को स्कूल जाते हुए देखा तो लगा कि हमे भी इस तरह करना चाहिए।
और ज्यादा जिज्ञासा हुई तो बराबर में बूढ़े बाबा जो जूता पॉलिश करते थे उनसे और ज्यादा जाना।
बेटा ये सब अच्छे घरों के लड़के है ये पढ़ लिखकर अधिकारी बनेंगे।
बाबा मैं तो नहीं पढ़ सकता पर छोटे को जरूर पढ़ाऊंगा।
बेटा ऐसा तो यहां पर बहुत सोचते है पर आज तक कोई कर नहीं पाया मुझे। यहां जूता पॉलिश करते हुए 50साल से ज्यादा हो गए।
बाबा वो शिवाजी नहीं थे न आप तो शिवाजी महाराज के बारे में जानते है न कितने जिद्दी थे वो।
बेटा वो शिवाजी महाराज थे।
बाबा पर अपने छोटे भाई के लिए में शिवाजी महाराज जैसा जिद्दी ही बनूंगा।
देखते है।
बाबा बस मुझे जूते का काम सिखा दो जिससे अपने भाई को पढ़ा सकू।
अरे पागल ये काम कोई बहुत बढ़िया है जो इससे भाई को पढ़ा लेगा और इज्जत बन जाएगी।
अरे बाबा भीख मांगने से तो अच्छा काम है।
उस बाबा को शिवाजी की मासूम बुद्धि पर बड़ा तरस आ रहा था।
शिवाजी जिसे काम समझ रहा था। बह भी भीख मांगने जैसा ही था।
लोग जूता पॉलिश के बाद ऐसा पैसे फेंक कर देते है जैसे भीख।
पर बह शिवाजी की हिम्मत नहीं तोड़ना चाहता था। उसने उसे जूता पॉलिश का काम सिखा दिया।
उसके बाद शिवाजी ने पास में दूसरी जगह देखकर पॉलिश करना शुरू कर दिया।
उसके सामने जब भी स्कूल जाते बच्चे दिखते बह और ज्यादा उत्साहित हो जाता। इतना तो बह समझ गया था कि कपड़े की बहुत कीमत है।
बह पालिश करने भी सही ढंग से साफ कपड़े पहनकर बैठता।
हंसमुख चेहरा होने की वजह से बहुत ही जल्दी बह फेमस हो गया।
आज उसके पास एक महंगी से गाड़ी में उसका रेगुलर कस्टमर आया। बह एक कॉलेज का छात्र था।
क्या बात भैया नई गाड़ी ले ली क्या आपने।
अरे शिवाजी हां ले ली आजा बैठ में घुमा कर लाऊ।
बह तो पहले से उत्साहित था बैठने के लिए क्योंकि पहली बार बैठ रहा था।
बह झट से गाड़ी में बैठ गया।
उसने उसको आस पास का एक चक्कर लगाकर बैठाया।
आज शिवाजी में अलग ही तरह का घमंड था।
भैया कितने की है यह तो बहुत महंगी होगी। इसके लिए तो बहुत सारे पैसे चाहिए। उसने बहुत सारे सवाल एक साथ कर दिए।
शिवा ये गाड़ी तो मुझे मेरे भैया ने गिफ्ट की है। है तो बहुत महंगी पर हमे क्या भैया ने दिलवाई है।
अब तू सोच रहा होगा तू भी मेरी तरह होता तुझे भी भैया गाड़ी गिफ्ट करते तो तेरा भी मजा आ जाता।
अब शिवाजी चुप हो गया।
उसने उसे उसके अड्डे पर वापिस छोड़ दिया।
शिवाजी ने उसके जूते पालिश किए। और वापिस देने गाड़ी में गया।
जूते देते हुए बोला
भैया अपने बोला था कि तू मेरे जैसा बनना चाहता है है जो तुझे भी बड़ा भाई गाड़ी गिफ्ट करे
हा
नहीं में आपकी तरह नहीं बनना चाहता मैं आपके बड़े भाई की तरह बनना चाहता हूं जो छोटे भाई को गाड़ी गिफ्ट कर सकू और एक दिन में ये करूंगा।
अब इस पर इसका कोई जवाब नहीं था उसने गाड़ी स्टार्ट की और आगे बढ़ गया।