ये कहानी एक सच्चे हादसे से जुड़ी है। गोपनीयता बनाए रखने के लिए नाम और जगह बदल दी गई हैं। पायल राजपूत एक 21 साल की लड़की जो राजस्थान के एक छोटे से शहर में रहती हैं। वैसे तो वो एक गांव में रहने वाली लड़की है पर अपने पापा के कारोबार के कारण वो 16 साल से शहर में ही रह रही हैं। वो बचपन से ही खुले विचारों की लड़की है वो इन भूत प्रेत जैसी चीजों में कभी विश्वास नहीं करती पर कुछ समय पहले उसके साथ ऐसे हादसे हुए जिनको वो आज तक नहीं भूला पाई।
ये बात हैं तकरीबन 6 साल पहले की जब कोरोना के टाइम में उसकी बड़ी मम्मी की डेथ हो गई थी। उसकी फैमिली के बाकी मेंबर्स अपने काम के कारण राजस्थान के बाहर ही रहते है।कोरोना के कारण हर जगह आना जाना बंद हो गया था इस कारण से उसकी बडी़ मम्मी का अंतिम संस्कार उसके गांव में ही किया गया था। कुछ समय तक तो सब ठीक था पर 2-3 साल बाद से उसके साथ अजीब से हादसे होना शुरू हुए जैसे कि उसे हर समय ऐसा लगता जैसे कोई उसका पीछा कर रहा हो या कोई उसको चुपके से देख रहा हो। उसे हर बार एक डर सा महसूस होने लगा पर उसने उन सब चीजों को अनदेखा कर अपनी पढ़ाई में देना शुरू किया।
कुछ दिनो बाद नवम्बर के महीने में उसके एग्जाम्स थे तो वो देर रात तक पढ़ने लगी। एक रात वो पढ़ते-पढ़ते जल्दी ही सो गई तो उसको उसके पापा ने उसके पलंग पर सुला दिया। उसके घर में उसके फैमिली वाले सब हॉल में ही पलंग लगाकर सोते है जैसे अक्सर गांव के लोग सोया करते है। आधी रात को जब उसकी आंख खुली तो उसने घड़ी में टाइम देखा तो रात के 2:15 बज रहे थे तो वो पानी पीकर वापिस सो गई। जहां वो सोई थी उसके दाहिने तरफ उसके घर का मंदिर था जिसके सामने ही पानी का टांका बना हुआ था। जब वो वापिस जाकर सोई तो कुछ टाइम बाद उसे कुछ अजीब सा महसूस हुआ। उसे ऐसा लगने लगा जैसे कोई उसके पलंग के बगल में बैठा हैं और वो उसके सिर पर अपना हाथ घुमा रहा है। एक बार तो उसे अच्छा महसूस हुआ क्योंकि कई बार उसकी मां उसको सुबह जगाने के लिए उसके सिर पर हाथ घुमाया करती थी तो उसे लगा कि अभी भी उसकी मम्मा ही होगी जो उसे उठाने के लिए ऐसे कर रही है। वो ऐसा महसूस करते हुए अपने दाहिने तरफ मुड़ के सो गई और धीरे से आंख खोली। सामने का नज़ारा देख उसके रोंगटे खड़े हो गए डर के मारे उसके मुंह से आवाज तक नहीं निकल रही थी और आंखों की पुतलियां जैसे बाहर को ही आ गई हो। इतनी कड़कती ठंड में भी उसका शरीर पसीने से लथपथ था। सामने का नज़ारा देख वो कुछ बोल ही नहीं पा रही थी। उसने देखा कि उसके पलंग के पास एक औरत बैठी थी राजपूती पोशाक पहने। बड़े घने खुले बाल, लाल आंखे, हाथो में लाल रंग की चूड़ियां और सिर बिना ओढ़नी के ।वो उसे देख कर मुस्कुरा रही थी और उसके सिर पर अपना हाथ घुमाए जा रही थी।
पायल ने डरे-डरे उससे पूछा - क्क्क्क्कौन हो तुम??
उस औरत ने कोई जवाब नहीं दिया बस मुस्कुराये जा रही थी।
पायल ने वापिस पूछा - कौन हो तुम??
तब वो औरत मुस्कुराते हुए बोली - मैं तुझे लेने आई हूं! चलेगी मेरे साथ तू???
ये सुन कर पायल का डर और ज्यादा बढ़ गया।
पायल - मैं तुम्हे नहीं पहचानती! कौन हो तुम???
वो औरत - तू मुझे नहीं जानती पर मैं तुझे बहुत अच्छे से जानती हूं।
पायल - तुम मुझे जानती हो !??
वो औरत - हां मैं तुझे जानती हूं और मैं तुझे अपने साथ लेने आई हूँ ।
पायल - न्न्न्न्नही! मैं तुम्हारे साथ नहीं चलूंगी।
वो औरत ये सुनकर थोड़े गुस्से में आ गई - तुझे मेरे साथ चलना पड़ेगा अगर तू मेरे साथ नहीं चली तो मैं तुझे भी वैसे ही अपने साथ ले जाऊंगी जैसे तेरी बड़ी मम्मी को अपने साथ लेकर गई थी ।
ये सुनकर पायल के रौंगटे खड़े हो गए।पायल - तुम मेरी बड़ी मम्मी को कैसे जानती हो और तुम उन्हें अपने साथ कहां लेकर गई हो???
वो औरत - मैं तेरे पूरे परिवार को जानती हूं और तेरी बड़ी मम्मी को मैं अपने साथ अपने पास लेकर गई हूँ अब वो मेरे साथ मेरे पास रहती हैं। और अब मैं तुझे भी लेकर जाऊंगी ।
ये सुनते ही पायल तो जैसे वही पर बर्फ की जम गई हो।पायल ने जैसे ही अपनी आंखे झपकाई तो वो औरत वह नहीं थी।
पायल को एक मिनट के लिए ऐसा लगा जैसे कि वो सपना देख रही थी पर एक बार उसे लगा जैसे कि वो सब सच था।
पायल को आज भी कई रातों में सपने में वो औरत दिखती हैं। पायल को आज तक ये समझ नहीं आया कि उस दिन उसके साथ जो हुआ वो सच था या एक सपना ।।।।।।।।