Storeys - Part 47 in Hindi Health by Neeraj Sharma books and stories PDF | मंजिले - भाग 47

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मंजिले - भाग 47

-------------------------- कब्ज (2) ----------------"ये भोजन ले जाओ सलमा " खसम ने सिर पकड़े कहा। "पाकिस्तान का वजीर मर जाये " सलमा ने कहा... " "कयो बेगम ---उसने कया कर दिया!” सलमा बोली " एक ढंग का हॉस्पिटल नहीं है, दवाई नहीं है, लोग करोने से मरे, हम कब्ज से मर रहे है। " खूब हसा, हसने वाली बात थी। " कयो हसे " सलमा ने कहा। ये भी पाबंदी है। " फिर वो लटके से मुँह से चले गयी। रात के दस वजे होंगे। बिजली घुल हो चुकी थी। " कया करता अब्दुल दुखी पिता... हुक्म चद के रूम मे गया तो वे बेसुध पड़ा था... बिस्तरे पर... पिता था " उसको चैन कहा " जीते ज़ी ही मर गया था.... धीरे धीरे उसने कमरे चैक किये... नसीबा का कमरा बंद था सदा के लिए... बहुत रोयेया... टिन मिन आँखो से पानी.... फिर सलमा का दरवाजा थोड़ा खुला था, उसने अंदर झाका, वो फोन पे मशरूफ थी... किसी के साथ... पर न न करते भी वो पूछ ही बैठा, " किस से होड़ होड़ कर रही हो। " वो एक दम से चुप होकर गुस्से से बोली ----" अब जासूसी करने लगे हो.... "  उलट जबाब देने की बजाए... "दो दिन भी नहीं हुए, होड़ होड़ कर रही हो, लज्जाहीन महुतरमा " वो ये सुन कर चुप कर गयी...

                            पासा पलट कर फोन को बंद कर बिजली ऑफ़ कर दी। फिर वो डुसकता हुआ आपने कमरे मे चला गया... आज तीसरा दिन था... जुलाब की दवाई लेनी पड़ी थी..." कब्ज़ कमबख्त ऐसे थी जैसे सारा टबर अफीम खाता हो " 

                       सब अब सौ चुकने बाद, कोई दस वजे सवेरे अब्दुल का दरवाजा खुला ही नहीं था। सब चक्र खा गए थे। घर मे है कितने थे आप दो, अफ़सोस वाले कोई पंद्रा को लोग होंगे। लखते जिगर कमरे को खट खटाये ही अंदर गया, तो कया देखा... तो उसने रसी डाल के खुदकशी कर ली थी। इस पर सलमा तो खूब रोयी... बेटा भी खूब चिलयाये हुए माथे पर थपड मारे था.... " पिता ज़ी आपने कया कर लिया --- आप इतने डरपोक होंगे... " पुलिस तुरंत पहुंच गयी। ज़ब उन्होंने सुना, तो वो हैरत मे पड़ गए.. " कया ऐसे भी कोई खुदकशी करता है भला। " सब चुप.. लाहौर शहर मे खबर ऐसे घूम गयी जैसे हवा घूमती है।

                       सब ने दुःख किया " नसीबा का भी पिता का भी। " जैसे सब कुछ टूट गया हो... खाब सपने छोटे छोटे जज्बात। कब्ज एक न मुराद बीमारी पर कल अख़बार मे सारा परिवार ऐसे शामिल किया गया, जैसे कोई आतकवादी हो " कमाल के लोग, आर्टिकल कब्ज पर, टीवी पर भी खूब चर्चे... कब्ज....

"पुलिस का इलज़ाम अफीम खाते होंगे " सलमा इतनी गुस्से मे बोली पुलिस वालो से " इधर खाने को रोटी नहीं रोटी है तो रजवी दाल नहीं, दाल है तो देसी घी नहीं... अफीम पाकिस्तान मे कोई कैसे ले सकती है, सारी आवाम.. " पुलिस को लगा ये इलज़ाम सही नहीं... पोस्टमटम किस चीज का करे गे। " एक मौलाना ने कहा " हम ये हरगिज होने नहीं देंगे... एक तो आदमी भूख से मर गया ऊपर से केस... किस बात का " पुलिस को आपनी जान बचा के भागना पड़ा। जो लिखा था सो हो गया था। भुखमारी थी या सच मे कब्ज ही थी। सच किसी को भी पता नहीं चला।

 --------------------------समाप्ति -------यही पर आशा की जा सकती है, कहानी आप सब को अच्छी लगेगी।

------------- नीरज शर्मा ------144702।