Punishment... without fault in Hindi Short Stories by Soni shakya books and stories PDF | सजा.....बिना कसूर की

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सजा.....बिना कसूर की

प्रिया पाठको,,

यह एक  सामाजिक कहानी है ।

जिसे मैंने अपने शब्दों के मोती में पिरोकर माला बनाने की कोशिश की है ।

अपना स्नेह और आशीर्वाद बनाए रखिएगा 🙏🙏

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आकाश ...अब चलो भी और कितना टाइम लगाओगे तैयार होने में  , कहते हुए मीरा आकाश के कमरे में प्रवेश करती है।

बस तैयार हो  ही रहा हूं भाभी,, और मैंनै कितनी बार कहा है भाभी की मेरे कमरे में दरवाजा नौक करके आया करो।

अच्छा बेटा अब तुम्हारे कमरे में नौक करके‌ आऊं भूल गए जब मैं शादी होकर आई थी तो तुम्हें नाक पोछना भी नहीं आता था।

कौन से जमाने की बात कर रही हो भाभी तब मैं कितना छोटा था।

अच्छा और अब इतने बड़े हो गए हो  कि,, भाभी से कह रहे हो कि दरवाजा नौक करके आओ ।

तो ठीक है मैं  चली जाती हूं।

आप तो नाराज़ हो गई भाभी मैं तो बस यूं ही कह रहा था ।

अच्छा बताओ मैं कैसा लग रहा हूं !!

एकदम हीरो  किसी की नजर ना लग जाएं।

सच में भाभी !!

हां,, अब चलो भी देर हो रही है । वह लोग हमारा इंतजार कर रहे हैं ।

भाभी....

अब क्या हुआ। 

थोड़ा नर्वस हो रहा हुं मै।

इतना क्यों सोच रहे हो आकाश अभी तो हम सिर्फ लड़की देखने जा रहे हैं।

तुम चलो बस सब ठीक हो जाएगा।

और हां तुम्हारे मन में जो भी अपेक्षाएं हैं अपनी होने वाली जीवन सगिनी से वह तुम पूछ लेना लेकिन थोड़ा सहज भाव से  और भूमि‌ से कहना कि...

वह भी अपने मन की बात कह सकती है और पूछ भी सकती है। 

जब आप दोनों को थोड़ा टाइम अकेले में बात करने के लिए दिया जाएगा तब । और भी तुम्हारे मन में जो कुछ है पुछ लेना समझ गये,,,अब चलो 

ठीक है भाभी मैं समझ गया ।

मीरा कमरे से बाहर आ जाती है और साथ में आकाश भी !!

आकाश, मम्मी पापा और उसके भाई भाभी सब लोग कार में बैठकर निकल जाते हैं भुमि  को देखने।

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दूसरी तरफ....

ये क्या भूमि तुम अभी तक तैयार नहीं हुई बेटा वो लोग आते ही होंगे।

मां !! तुम ये सब क्यों कर रही हो ,,

तुम तो सब जानती हो‌।

पता है बेटा मुझे पर मैं कुछ भी गलत नहीं कर रही हू।

एक दिन तो तुम्हारी शादी करनी ही है बेटा।

हां मां, मैंने कब मना किया है पर यों किसी को धोखे में रखकर शादी करना ठीक नहीं है ।

आप सच भी तो बता सकते हो ना मां  !!

झूठ की बुनियाद पर बने रिश्ते कभी मजबूत नहीं होते ‌मां .!!

तुम्हारी बात सही है भुमि पर,,

पर क्या मां ?

कौन मानेगा हमारी बात को और यह समाज इतना उन्नत नहीं है बेटा की सच जानकर खुशी-खुशी तुमसे शादी करने को तैयार हो जाए।

कई बे बुनियादी प्रश्न उठेंगे जिनका हमारे पास कोई जवाब नहीं होगा।

फिर भी मां मेरा मन नहीं मानता ।

आप आकाश के घरवलों को सब सच बता दीजिए मुझे फिर शादी से कोई एतराज नहीं अगर वह मान जाते हैं तो ।

बेटा  ,, सतयुग में बिना किसी गलती के माता सीता को अग्नि परीक्षा देनी पड़ी थी फिर यह तो कलयुग है !!

पर मां..  मैं झूठ की जमीन पर अपना घर नहीं बसाना चाहती ।

अब मान भी जाओ भूमि--वह लोग बहुत अच्छे हैं पढ़े-लिखे और सुलझे हुए ।

आकाश भी बहुत अच्छा लड़का है।

तो फिर मां अच्छे लोगों के साथ  झूठ बोलना अच्छी बात है क्या ?

अगर हम किसी के साथ गलत करेंगे तो हमारे साथ सही कैसे होगा मां। 

और फिर ये भी तो सोचो मां अगर शादी के बाद उन्हें पता चला तो कितना गलत होगा ?

कुछ गलत नहीं होगा बेटा और फिर कौन बतायेगा उनको जब यह किसी को पता ही नहीं है तो ।

मां,, भले ही किसी को पता न हो पर हमारे मन को तो पता है ना ।

भूमि इतना मत सोचो बेटा  !!

वो लोग बहुत सुलझे हुए हैं बेटा, और फिर भी कुछ होता है तो हम हैं ना बेटा सब संभाल लेंगे। 

तभी पापा कमरे में प्रवेश करते हैं और कहते हैं --क्या हुआ बेटा कोई परेशानी हे क्या ?

नहीं पापा जी ऐसा कुछ नहीं है 

फिर अभी तक तैयार क्यों नहीं हो बेटा ,जाओ जल्दी तैयार हो जाओ। वह लोग आते ही होंगे। 

भूमि उदास मन से कमरे से बाहर निकल जाती है.....

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