partner-e-zindagi in Hindi Short Stories by Shree Kriti books and stories PDF | शरीक़-ए- ज़िंदगी

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शरीक़-ए- ज़िंदगी


कॉलेज रियूनियन की पार्टी अपने पूरे शबाब पर थी। पुरानी यादों की महक के बीच घुलने सब आये थे...वाणी भी आई थी...आखिर पुराने दोस्तों से मिलने की बात ही कुछ और होती है। कुछ ही देर बाद उसकी नज़र चुड़ैल तिकड़ी पर पड़ गई जो कॉलेज के दिनों में उसकी सहेलियाँ होने का झूठा दावा करतीं थीं पर हकीकत यह थी कि वो तीनों वाणी से बेतरह जलतीं थीं और हर वक़्त उसे नीचा दिखाने के फिराक में रहतीं थीं। क्योंकि  वाणी जैसी लड़की के व्यक्तित्व में दोष ढूंढ़ना उनके बूते के बाहर था - रूप... गुण... बुद्धि... हृदय...व्यवहार हर तरह से अनुपम... अद्भुत थी वाणी ।। अब तक शायद चुड़ैल तिकड़ी ... मुग्धा - पलक - लावण्या  की नज़र भी उस पर पड़ चुकी थी ; तभी तो उन्होंने वाणी को यूँ घेर लिया जैसे युद्ध में व्यूह रचना कर रहीं हों। वाणी समझ गई कि अब ये सरेआम उसकी बेइज्जती किये बिना उसे अपने चंगुल से निकलने नहीं देंगी क्योंकि यही तो वो कॉलेज में भी किया करतीं थीं। पलक ने अपनी हीरे की अंगूठी फ्लॉन्ट करते हुए इतराकर बेमतलब ही कहने लगी,

"ओह वाणी! तुम बिल्कुल नहीं बदलीं, वही सादगी! वैसे ज़माना बहुत आगे निकल गया है। देखो न, मेरे हस्बैंड एकांश रावत एशिया के टॉप यूट्यूबर हैं। लाखों लोग उन्हें फॉलो करते हैं।"

लावण्या ने तुरंत अपनी रेशमी जुल्फें झटकते हुए बात काटी,

"फॉलोअर्स तो आते-जाते रहते हैं पलक, क्लास तो 'लीजेंड्स' की होती है। मेरे हब्बी मधुर वर्मा को कौन नहीं जानता?  ... ही इज वन ऑफ़ द बेस्ट, मोस्ट पॉपुलर एंड सक्सेसफुल प्लेबैक सिंगर इन हिंदी सिनेमा!"

यह सब सुनकर भला मुग्धा कैसे चुप रह जाती! वह भी ठसक से बोली,

"हुंह ... शोहरत अपनी जगह है, पर पॉवर? पॉवर तो जायसवाल इंडस्ट्रीज के पास है। मेरे पति ध्रुव जायसवाल चाहें तो इस पूरी पार्टी को अभी खड़े - खड़े खरीद ले।"

यह कहते-कहते उसके होठों पे एक घमंडी मुस्कान आ गई। तीनों के चेहरे पर एक जैसा ही घमंड था। मगर उन तीनों को यूँ बड़ाई मारते  सुनकर भी वाणी कुछ नहीं बोली, खामोशी से खड़ी रही। जैसे किसी शोर के थमने का इंतज़ार कर रही हो।पर वाणी की खामोशी उन तीनों को कैसे मंजूर होती। पलक ने वाणी से व्यंग्य भरे स्वर में पूछा, 
" क्यों वाणी, तुम चुप क्यों हो? तुम भी अपने हस्बैंड के बारे में कुछ बताओ। "
वाणी थोड़ा सकुचा गई मगर फिर भी मुस्कुराते हुए कहा, 
" अब मैं अपने पति के बारे में क्या तारीफ करूँ। वो तो न कोई सेलिब्रिटी है और ना ही बहुत बड़े बिजनेसमैन। "
लावण्या ने तंज़ कसते हुए पूछा, 
" मगर तुम्हारा पति करता क्या है? कुछ तो करता होगा? "
वाणी कुछ कहती, उससे पहले ही मुग्धा खिल्ली उड़ाते हुए बोली, 
" लगता है निठल्ला है। "
इस बेढब और ओछे उपहास पर तीनों अजीब ढंग से ठहाके लगा के हंसने लगीं...वाणी का चेहरा गुस्से से तमतमा उठा। यूँ तो वो कभी इन तीनों के मुंह नहीं लगती थी पर आज वो अपने पति की बेइज्जती  बरदाश्त नहीं कर पाई। लगभग दांत पीसते हुए धीमे स्वर में बोली, 
" मैंने सिर्फ इतना कहा था कि वो कोई सेलिब्रिटी या बिजनेसमैन नहीं है  .... निठल्ला नहीं कहा मैंने अपने पति को। वह असिस्टेंट प्रोफेसर हैं और एक बेहद इज्जतदार और मेहनती इंसान हैं। "
वाणी को यूँ चिढ़ता देख उन तीनों को और मजा आने लगा। लावण्या ने फिर से खिल्ली उड़ाते हुए कहा, 
" तो क्या मैडम! हमारे पतियों के आगे तो निठल्ला ही हुआ ना। "
मुग्धा ने भी  व्यंग्य से भरे तीखे स्वर में कहा, 
" क्यों वाणी? क्या हुआ? कॉलेज की 'गोल्ड मेडलिस्ट'  एक अदद ढंग का पति भी नहीं ढूंढ पाई?"
वाणी का चेहरा गुस्से से फिर लाल हो गया। वाणी शुरू से ही इन तीनों की बात सुनकर भी अनसुना कर देती थी पर उसकी बेस्ट फ्रेंड आर्या उससे थोड़ा हटकर थी। आर्या को जब मौका मिलता इन्हें अच्छा सबक सिखाती थी। अब तक तो आर्या पीछे खड़ी चुपचाप इनकी बकवाद सुन रही थी क्योंकि वो इनके चक्कर में रियूनियन पार्टी का मज़ा किरकिरा नहीं करना चाहती थी। पर ज्यादा देर तक उससे रहा नहीं गया ; वो मुस्कुरा के आगे आते हुए बोली, 
" हेलो लेडीज ! व्हाट'एस गोइंग ऑन? आह्हा आज तो सब अपने लाइफ़ कम्पैनियन के साथ आये हैं  ... देखो तो! "
इसके बाद वो एक तरफ देखते हुए बोली, 
" अरे पलक! वो तुम्हारा हस्बैंड हैं ना? "
जिधर आर्या ने इशारा किया था सब की निगाहें खुद- ब- खुद उधर उठ गईं। वहाँ एकांश रावत नशे में बिल्कुल धुत होकर बैठा था और वेटर के साथ बेवजह ही गालीगलौज कर रहा था। वो गालियाँ उन गालियों से कहीं ज्यादा गंदी थीं जो उसके यूट्यूब वीडियो पर होतीं थीं। पलक शर्मिंदा होकर नजरें चुराने लगीं पर इससे उसके पति को कोई फर्क नहीं पड़ा। उसने तो  पलक की ओर एक नज़र देखा तक नहीं। एकांश रावत के साथ ही एक और इंसान उनकी नज़र में आ गया था... मधुर वर्मा। उसके इर्दगिर्द फैन्स की भीड़ जरूर थी पर उसे तो मात्र उन सुन्दर कन्याओं में दिलचस्पी थी जो लाज शर्म छोड़कर उससे चिपकी हुईं थीं... वो भी उनसे घिरा उनके साथ रासलीला रचाने में मग्न था ... इतना मग्न कि सामने खड़ी बीवी भी नज़र नहीं आ रही थी उसे। अपने पति की हरकतों को देखकर लावण्या भी पलक की ही तरह नजरें चुराने लगी। आर्या ने होठों पे एक धृष्ट मुस्कान आ ग‌ई, अब उसने मुग्धा को छेड़ते हुए पूछा, 
" तुम्हारा हस्बैंड नहीं आया है मुग्धा? "
मुग्धा ने बड़े ही तीखे स्वर में जबाब दिया, 
" ही इज ए वेरी बिजी मैन... ऐसी छोटी-मोटी पार्टी के लिए उसके पास वक्त नहीं होता। "
आर्या ने कटाक्ष करते हुए कहा, 
" पार्टी के लिए वक्त नहीं है या तुम्हारे लिए ही उसके पास वक्त नहीं है। "
मुग्धा गुस्से से उफनते हुए बोली, 
" औकात में रहो आर्या। "
पर आर्या पर रती भर भी फर्क़ नहीं पड़ा। बल्कि इसके उलट वो मुग्धा के जलते रगों पे नमक रगड़ते हुए बोली, 
" ओह! गुस्सा क्यों हो रही हो मुग्धा। अरे मैंने तो वही पुछा जो सवाल सारी दुनिया उठा रही है...आये दिन ध्रुव जायसवाल और मॉडल नताशा शाह की एक से बढ़कर एक तस्वीरें अपलोड होती रहतीं हैं सोशलमीडिया पर.... अब........। "
मुग्धा का चेहरा नताशा शाह का नाम सुनते ही फीका पड़ गया। आर्या आगे कुछ और कहती उससे पहले ही वाणी ने  हाथ दबाकर उसे चुप करा दिया फिर धीरे से उससे बोली, 
" ये कैसी बातें कर रही हो तुम आर्या? "
"  जैसी बातें अभी कुछ देर पहले ये तुम्हारे साथ कर रहीं थीं। "
वाणी ने एकदम स्थिरता से कहा, 
" इनकी तो बकवाद करने की फितरत है , जानती तो हो तुम । पर तुम्हें इस तरह की बातें शोभा नहीं देतीं आर्या। अगर कोई अंधे कुएँ में कूदता है तो क्या हमें भी बिना सोचे समझे उसके साथ अंधे कुएँ में कूद जाना चाहिए... नहीं ना... तो फिर ! "
आर्या ने जबाब देने के लिए मुंह खोला ही था कि तभी पीछे से आवाज़ आई, 
" वाणी! "
वाणी ने जब पलटकर आवाज की ओर देखा तब इक पल में ही उसका मुरझाया मुखड़ा खुशी से दमक उठा। वो कोई सांवला मगर बेहद चित्ताकर्षक व्यक्ति था.... सम्पूर्ण व्यक्तित्व से सज्जनता झलक रही थी। यह उसका पति अमोल वशिष्ठ था। 
" ओह गॉड! यहाँ कितनी ओवरक्राउडिंग है वाणी। मैं कब से तुम्हें ढ़ूंढ़ रहा था। "
" क्यों? "
" तुम्हारी तबीयत कुछ ठीक नहीं थी ना! "
" अब मैं ठीक हूँ। "
" कुछ खाया तुमने? "
वाणी ने मुस्कुरा कर नहीं में सिर हिलाया... अमोल उसका हाथ थामते हुए कहा, 
" चलो न कुछ खा लेते हैं ... मुझे भी भूख लगी है।‌ "
वाणी ने जाने से पहले वहाँ सब से अमोल का परिचय कराया फिर उसके संग चल दी। दोनों एक-दूसरे की बातों में खोए हुए खाने की मेज़ की ओर बढ़ गए। उनके बीच कोई कैमरा नहीं था, कोई लाइमलाइट नहीं थी, पर वाणी - अमोल का अथाह प्रेम साफ़ नज़र आ रहा था।  मुग्धा-पलक-लावण्या बड़े ही हैरानी से उस सादगी भरे जोड़े को देख  रहीं थीं । आर्या से रहा न गया, पास आकर बोली, 
" देखती क्या हो? सही मायने में इसे ही शरीक़-ए- ज़िंदगी कहते हैं। "


🪻इति🪻