बाक़ी धर्म से कैसे अलग है सनातन?
शैतान सबसे ज़्यादा शैतानी तब करता है जब वह सामाजिक प्रतिष्ठा, नैतिक इज्जत या ईमानदारी के मुखौटो के पीछे छुपा होता है।
ये बात एलिज़ाबेथ बैरेट ने अपनी किताब अरोरा ली में लिखी थी। अब आते है उस सवाल की तरफ़ जो इस लाइनस के बारे में बताएगी।
पश्चिम संस्कृति में सबसे पुराना धर्म कौन सा है? ईसाई? इस्लाम? नहीं। बल्कि यहूदी धर्म सबसे पुराना है। लेकिन कभी आपने सोचा कि इस धर्म से जीतने भी धर्म निकले वो इतने निर्दयी और क्रूर क्यों थे?
जैसे की ईसाई, जब उन्होंने दूसरी दुनिया यानी पूर्व दुनिया पर कब्जा करना शुरू किया तो उन्होंने एक बड़ा नरसंहार किया। भारत में तो आप जानते ही है जलिया वाला बाग हत्या कांड, ऐसे अनगिनत हत्याकांड बाक़ी देशों में हुए जहां ईसाई धर्म पहुँचा।
इस्लाम? अगर इस धर्म की बात करे तो इससे जुड़ी हिंसा का शिकार तो आज तक पूरी दुनिया ही है।
ऐसा कैसे? क्योंकि इन सभी धर्मों में 26 मसीहा हुए जिनमे अच्छाई और बुराई दोनों थी। इस तरह ये हुए 52 और ये नंबर ही पत्तों के कार्ड कि संख्या है और साल में हफ़्तों की संख्या भी।धर्म में माना गया कि अच्छाई और बुराई दोनों सभी इंसानों में है। इसलिए ईसा मसीहा ने ऊपर वाले से माफ़ी माँगने को कहा। इस्लाम में धर्म परिवर्तन करने को कहा। और इससे लोगो को बुरा करने की इजाज़त मिली।
अब सनातन की तरफ़ चलते हैं। तो बताइए हिंदू धर्म से कौन से धर्म अलग हुए? बुद्ध और जैन? सही। हिंदू धर्म जहां हिंसा परमो धर्म यानी अगर धर्म के लिये हिंसा करने पड़े तो कर सकते हैं लेकिन हिंसा आख़िरी विकल्प होगा।
बुद्ध ने इसे और कठिन बनाया। सम्राट अशोक ने भी बाद में बुद्ध धर्म अपनाया उस हिंसा के पश्चाताप में और हिंसा पर पूर्णता रोक लगाई लेकिन जैन धर्म ने सभी जीव जिन्तुओं के लिए हो रही हिंसा चाहें फिर किसी गाय के बच्चे से उसका दूध छीनना हो या धरती के अंदर उगने वाली सब्ज़ियों के बारे में सब मना किया गया।
अब हिंदू धर्म से निकलने वाले सभी धर्म में हिंसा, क्रूरता क्यों ख़त्म हुई ? बल्कि दूसरे धर्मों में उसके विपरीत हुआ। यहूदी जीतने क्रूर थे ईसाई उससे ज़्यादा और इस्लाम उससे ज़्यादा। आख़िर ऐसा क्यों? शायद आपको इसका जवाब मिल गया होगा अगर नहीं तो फिर सोचो।
हिंदू में हिंसा आख़िरी विकल्प है इसलिए बाक़ी धर्मों ने इस विकल्प को हटाना सही समझा। दूसरी तरफ़ यहूदी अपने मसीहा ईसा को किल ठोककर मार सकते हैं तो उनसे निकलने वाले धर्म कैसे होंगे?
हमारे यहाँ जो बुरा करता है उसे मारा जाता है और दूसरी तरफ़ उनके यहाँ जो अच्छा करता है जैसे ईसा, सुकरात उन लोगो को मार दिया जाता है।
इसके अलावा और भी कई अलग अलग दृष्टिकोण हैं जिन पर चर्चा कर सकते हैं जिसमें पहला है विचारधारा।
आप जब पश्चिमी विचारधारा पढ़ते हैं लेकिन वहीं ओशो आपसे अछूते हैं, चाणक्य और विदुर नीति आपसे अछूती है। तो आप उन विचारधाराओं के ग़ुलाम बनते चले जाते हैं जो विचारधाराएँ शायद आपसे करोड़ों वर्ष पीछे हैं।
अब कई लोगो का सवाल होगा की फिर पश्चिम में ही सारे आविष्कार क्यों हुए? भारत में क्यों नहीं? आविष्कार कहाँ होते हैं? वहाँ जहां ज़रूरत होती है। ज़रूरत जो आपकी भौतिक सूखो को पूरा कर सके। लेकिन अगर मैं दो लोगो की तुलना करूँ जैसे की एक आदमी और एक साधु, एक सूफ़ी दूसरा ख़लीफ़ा, एक पादरी और एक नार्मल वैज्ञानिक आपको क्या लगता है हर धर्म में कौन होगा जो आविष्कार करेगा? एक आदमी, एक ख़लीफ़ा और एक वैज्ञानिक सही न? लेकिन आख़िर जब आप गहरी सोच से ये सोचेंगे की आख़िर ऐसा क्यों?
तो जवाब मिलेगा क्योंकि साधु,सूफ़ी या पादरी तीनों ईश्वर और अध्यात्म के मार्ग पर हैं तो उन्हें भौतिक सुख की कोई चाहा नहीं। वैसे ही भारत ने आविष्कार क्यों नहीं किए ये ऐसा ही है जैसे एक साधु से भौतिक सुख की कामना करना।
अगले एपिसोड में हम स्वर्ग को वो दरवाज़ा खोलेंगे जो आपको सच में अमर कर सकता है तो पढ़ते रहिए और बने रहिए।