Ishq ka Ittefaq - 7 in Hindi Love Stories by Alok books and stories PDF | Ishq ka Ittefaq - 7

The Author
Featured Books
Categories
Share

Ishq ka Ittefaq - 7

मेहरा मेंशन के लिविंग रूम में सन्नाटा इतना भारी था कि वहां खड़ी पुरानी घड़ी के पेंडुलम की आवाज भी किसी हथौड़े की तरह कान में बज रही थी। कबीर अपने सोफे पर बैठा था, उसके पैर मेज पर थे और आंखों में वो खौफनाक चमक थी जो सिर्फ तब आती थी जब कोई उसके साम्राज्य में सेंध लगाने की हिम्मत करता था।उसके सामने सिक्योरिटी हेड शर्मा खड़ा पसीने से नहा रहा था।

शर्मा, मैंने तुमसे सिर्फ दस मिनट मांगे थे। अब आधा घंटा होने को आया है। फुटेज कहाँ है?

कबीर की आवाज इतनी धीमी और ठंडी थी कि सामने वाले की रूह कांप जाए। सर, वो, एक्चुअली... शर्मा की आवाज हकला रही थी। कबीर झटके से अपनी जगह से उठा और सीधा शर्मा के कॉलर के पास पहुँच गया।एक्चुअली क्या?


फुटेज आया या नहीं? सर, सर्वर रूम का लॉक टूटा हुआ है। किसी ने न केवल पिछले दो घंटे का फुटेज डिलीट कर दिया है, बल्कि पूरी हार्ड डिस्क ही गायब कर दी है। सिस्टम पूरी तरह से क्रैश कर दिया गया है सर। शर्मा ने अपनी आँखें बंद करके सच उगल दिया। धड़ाक! कबीर ने पास रखे कांच के गुलदस्ते को लात मारी और वो दीवार से टकराकर चकनाचूर हो गया।"मेरे घर की सिक्योरिटी! मेरा सिस्टम!


और कोई आकर मेरे नाक के नीचे से हार्ड डिस्क ले गया? शर्मा, तुम इसी वक्त यहाँ से गेट आउट! मेहरा मेंशन की सिक्योरिटी टीम के हर एक बंदे को सस्पेंड करो। मुझे तुम सबके चेहरे दोबारा नहीं देखने!" ऊपर की मंजिल के गलियारे में अंधेरे कोने में खड़ी काम्या बुआ ने जब कबीर की ये दहाड़ सुनी, तो उनके चेहरे पर एक शैतानी मुस्कान आ गई।


उनके ब्लाउज के भीतर वो छोटी सी पेनड्राइव दबी हुई थी जिसे उन्होंने अपने भरोसेमंद नौकर के जरिए सर्वर रूम से निकलवाया था।कबीर बेटा, तू सीसीटीवी तो क्या, अब खुदा को भी बुला लेगा तो इस सिया का सच सामने नहीं आएगा। पर अब मुझे बड़े मोहरे उतारने ही होंगे।


काम्या ने फुसफुसाते हुए अपने फोन का लॉक खोला। उन्होंने एक अनजान नंबर डायल किया। वह नंबर दिल्ली का नहीं, बल्कि सिया के उस पुराने शहर का था जहाँ से वो भागकर यहाँ आई थी। हेलो, समर? बहुत दिन हो गए तुम्हें किसी का इंतजार करते हुए। तुम्हारी अमानत मेरे घर में बैठी है।


अगर अपनी सिया को वापस ले जाना चाहते हो, तो कल की पार्टी में तुम्हारा स्वागत है। काम्या ने अपनी आवाज में जहर घोलकर कहा।इधर कबीर गुस्से में पागल होकर अपने कमरे की तरफ जा रहा था, तभी उसकी नजर गेस्ट-हाउस की तरफ जाने वाले रास्ते पर पड़ी। वहां सिया बैठी थी, एक पत्थर के बेंच पर। वह अपने पैर को धीरे-धीरे सहला रही थी।

कबीर ने गौर किया कि सीढ़ियों से फिसलने के दौरान उसके टखने में शायद मोच आ गई थी।


कबीर का सारा गुस्सा एक पल में हवा हो गया। उसकी जगह एक अजीब सी बेचैनी ने ले ली। वह भारी कदमों से सिया की तरफ बढ़ा। सिया ने जैसे ही कबीर की आहट सुनी, उसने तुरंत अपना पैर नीचे रख लिया और खड़ी होने की कोशिश की, पर दर्द के मारे उसकी एक कराह निकल गई।

बैठो! हिले तो टांगें तोड़ दूंगा तुम्हारी। कबीर ने अपने उसी पुराने एटीट्यूड में डांटा, पर उसके हाथ में फर्स्ट-एड बॉक्स था जो उसने रास्ते में अलमारी से उठाया था। मिस्टर मेहरा, मुझे आपकी मदद की जरूरत नहीं है। मैं खुद एक डॉक्टर हूँ। सिया ने अपनी गरिमा बनाए रखने की कोशिश की। कबीर ने उसकी बात को अनसुना कर दिया। वह बिना कुछ बोले सिया के पैरों के पास जमीन पर बैठ गया।


मेहरा एम्पायर का मालिक, जिसके सामने लोग सिर नहीं उठाते, आज एक मामूली फिजियोथेरेपिस्ट के पैरों के पास बैठा था। उसने बहुत ही नरमी से सिया का टखना अपने हाथ में लिया। सिया का बदन एक पल के लिए कांप उठा। कबीर की उंगलियों का वो स्पर्श इतना गर्म और सुरक्षित था कि सिया की सारी नफरत जैसे पल भर के लिए कहीं खो गई।


तुमसे कहा था ना, ध्यान कहाँ रहता है तुम्हारा? और शर्मा को निकाल दिया है मैंने। अब घर की सिक्योरिटी मैं खुद देखूँगा। कबीर ने स्प्रे छिड़कते हुए कहा। उसकी आवाज में वो कड़वाहट नहीं थी, बल्कि एक अनकही फिक्र थी। सिया ने कबीर के झुके हुए सिर को देखा।


उसके घने काले बाल और वो चौड़े कंधे। पहली बार सिया को लगा कि इस पत्थर दिल इंसान के भीतर भी एक कोमल सा दिल धड़कता है, जो सिर्फ उसे दिख रहा था।आपको मुझ पर भरोसा है? मतलब, सीसीटीवी फुटेज तो गायब हो गया, आप बुआ पर शक कर रहे हैं, पर क्या आप वाकई मानते हैं कि मैं बेगुनाह हूँ? सिया ने दबी आवाज में पूछा। कबीर ने अपनी नजरें ऊपर उठाईं।


दोनों की आँखें फिर से मिलीं। चाँद की हल्की रोशनी में कबीर का चेहरा बहुत ही शांत लग रहा था। फुटेज होता तो सबूत होता सिया, पर मेरी आँखें... वो कभी धोखा नहीं खातीं। उस दिन कॉरिडोर में जब मैंने तुम्हें पकड़ा था, तभी समझ गया था कि तुम चोर या कातिल नहीं हो सकती।


तुम सिर्फ एक सिरफिरी लड़की हो जो अपनी जान दांव पर लगा सकती है, पर किसी का बुरा नहीं कर सकती। कबीर ने पहली बार अपने दिल की बात साफ-साफ कह दी। सिया का दिल जोर से धड़क उठा। ये नफरत की दरार अब सचमुच एक पुल बन चुकी थी।कबीर ने सिया के पैर पर एक हल्की सी पट्टी बांधी और खड़ा हो गया। कल शाम को घर में एक बड़ी पार्टी है।


चैरिटी क्लब की। तुम्हें वहां आना होगा। और घबराना मत, कबीर मेहरा वहां खड़ा होगा। किसी की हिम्मत नहीं होगी तुम्हारी तरफ आँख उठाकर भी देख ले। कबीर ने जेब में हाथ डाला और वापस मेंशन की तरफ मुड़ गया। सिया उसे जाते हुए देखती रही।


उसे नहीं पता था कि कल की उस पार्टी में उसका वो अतीत (Past) खड़ा होने वाला है जिससे वो कोसों दूर भागकर आई थी। काम्या बुआ ने जो समर नाम का तूफान बुलाया था, वो कबीर और सिया के इस पनपते हुए प्यार को उजाड़ने के लिए काफी था।


क्या कबीर कल की पार्टी में सिया का बचाव कर पाएगा जब उसका अतीत सबके सामने आएगा?

क्या समर का आना मेहरा मेंशन में कोई नया खून-खराबा करेगा?

और क्या कबीर सिया के उस पुराने जख्म को भर पाएगा जिसे समर फिर से कुरेदने आ रहा है? क्या होगा इस इश्क के इत्तेफाक का अगला खौफनाक मोड़?

दोस्तों, आपको क्या लगता है? समर कौन हो सकता है और उसका सिया के साथ क्या पुराना रिश्ता होगा?

क्या कबीर अपने एटीट्यूड को साइड में रखकर सिया के पुराने घावों को भर पाएगा, या फिर समर के आने से इनके बीच फिर से गलतफहमियां बढ़ेंगी?

काम्या बुआ की इस नई चाल पर आपकी क्या राय है?

क्या कबीर को सीसीटीवी फुटेज गायब होने का सच कभी पता चल पाएगा?इन सभी का उत्तर कमेंट में बताएं कृपया।

दोस्तों, इस कहानी को सींचने में आपके प्यार और सहयोग की बहुत जरूरत है।

अगर कबीर और सिया का यह सफर आपके दिल को छू रहा है, तो प्लीज फॉलो जरूर करें और एक प्यारा सा कमेंट करके मेरा हौसला बढ़ाएं। आपका एक छोटा सा साथ ही मेरी सबसे बड़ी ताकत है!


एवं जानने के लिए देखिए अगला अध्याय।