Dil ki Bhool - 3 in Hindi Love Stories by Bikash parajuli books and stories PDF | दिल की भूल - 3

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दिल की भूल - 3

अस्पताल के सफेद कॉरिडोर में अजीब सी खामोशी थी।
चारों तरफ दवाइयों की गंध फैली हुई थी और मशीनों की धीमी आवाज माहौल को और भारी बना रही थी।
आरव वहीं खड़ा रह गया।
उसके कानों में सिर्फ एक ही बात गूंज रही थी —
“सिया पिछले तीन दिनों से अस्पताल में है…”
उसने घबराकर सामने खड़ी महिला की तरफ देखा।
“क्या हुआ है उसे?” उसकी आवाज कांप रही थी।
महिला ने गहरी सांस ली।
“मैं सिया की मां हूं

आरव तुरंत सीधा होकर खड़ा हो गया।
“आंटी… सिया ठीक तो है ना?”
उनकी आंखें भर आईं।

“डॉक्टर कह रहे हैं कि हालत पहले से बेहतर है… लेकिन पिछले कुछ दिन बहुत मुश्किल थे।”
आरव का दिल तेजी से धड़कने लगा।
“लेकिन हुआ क्या?”

कुछ पल चुप रहने के बाद सिया की मां बोलीं —
“सिया बचपन से दिल की बीमारी से लड़ रही है।”
ये सुनते ही आरव जैसे अंदर से टूट गया।
उसे याद आया स्टेशन पर सिया कितनी हंस रही थी… कितनी जिंदादिल लग रही थी।
कोई देखकर ये नहीं कह सकता था कि वो इतनी बड़ी तकलीफ छुपाकर जी रही है।
“उसे अचानक अटैक आया था,” आंटी ने कहा, “उस रात जब वो स्टेशन से निकली… तभी रास्ते में उसकी तबीयत बिगड़ गई।”
आरव की आंखें नम हो गईं।
उसे खुद पर गुस्सा आने लगा।
जब सिया उसके सामने मुस्कुरा रही थी… तब वो अपने दर्द से लड़ रही थी।
“क्या… मैं उससे मिल सकता हूं?” आरव ने धीरे से पूछा।
आंटी कुछ सेकंड उसे देखती रहीं।
शायद वो समझने की कोशिश कर रही थीं कि आखिर ये लड़का सिया के लिए इतना परेशान क्यों है।
फिर उन्होंने धीरे से कहा —
“वो अभी सो रही है… लेकिन तुम मिल सकते हो।”
आरव के कदम धीरे-धीरे सिया के कमरे की तरफ बढ़ने लगे।
उसका दिल बहुत जोर से धड़क रहा था।
कमरे का दरवाजा आधा खुला हुआ था।
जैसे ही उसने अंदर देखा… उसकी सांसें रुक गईं।
सिया बेड पर लेटी हुई थी।
उसके चेहरे की मुस्कान गायब थी। हाथों में ड्रिप लगी हुई थी और मशीनें उसके दिल की धड़कन बता रही थीं।
वो बहुत कमजोर लग रही थी।
आरव की आंखें भर आईं।
उसे विश्वास ही नहीं हो रहा था कि वही लड़की… जो स्टेशन पर बारिश में हंस रही थी… आज इतनी चुप और टूटी हुई दिख रही थी।
वो धीरे से उसके पास जाकर खड़ा हो गया।
कुछ पल तक बस उसे देखता रहा।
फिर बहुत धीरे से बोला —
“तुमने बताया क्यों नहीं…”
सिया की आंखें हल्की सी खुलीं।
उसने धुंधली नजरों से सामने देखा।
“आरव…?”
उसकी आवाज बहुत कमजोर थी।
आरव हल्का सा मुस्कुराया।
“हां… मैं।”
सिया हैरान रह गई।
“तुम यहां कैसे?”
“शायद… किस्मत चाहती थी कि हम फिर मिलें।”
सिया की आंखों में आंसू आ गए।
“तुम्हें नहीं आना चाहिए था…”
“क्यों?” आरव ने पूछा।
सिया ने नजरें झुका लीं।
“क्योंकि जो लोग मेरे करीब आते हैं… उन्हें सिर्फ दर्द मिलता है।”
आरव तुरंत बोला —
“ऐसा मत कहो।”
सिया हल्का सा हंस पड़ी, लेकिन उसकी हंसी में दर्द था।
“सच कह रही हूं… मेरी जिंदगी बहुत छोटी हो सकती है आरव।”
“बस!” आरव की आवाज अचानक भारी हो गई, “ऐसी बातें मत करो।”
सिया चुप हो गई।
कमरे में कुछ पल के लिए सिर्फ मशीनों की आवाज रह गई।
फिर उसने धीरे से पूछा 
“तुम मुझे ढूंढते हुए आए हो?”
आरव मुस्कुराया।

“हां… शायद पहली बार किसी को खोने से डर लगा।”
सिया की आंखें भर आईं।

उसने नजरें फेर लीं ताकि आंसू छुपा सके।
“तुम बहुत अजीब हो

“और तुम बहुत झूठ बोलती हो,” आरव ने कहा।
“मैंने क्या झूठ बोला?

“स्टेशन पर तुमने कहा था कि सब ठीक हो जाएगा…”
सिया हल्का सा मुस्कुराई।

“कभी-कभी खुद को मजबूत दिखाना पड़ता है।”
आरव उसकी बात सुनकर चुप हो गया।

अब वो समझ चुका था कि सिया हमेशा मुस्कुराकर अपने दर्द को छुपाती रही है।
तभी डॉक्टर कमरे में आए।

उन्होंने सिया को चेक किया और फिर उसकी मां की तरफ देखकर कहा 
“अब खतरा कम है… लेकिन इन्हें ज्यादा स्ट्रेस नहीं होना चाहिए।”

आरव ने राहत की सांस ली।
डॉक्टर के जाते ही सिया धीरे से बोली 
“देखा… मैं इतनी जल्दी मरने वाली नहीं हूं।”
आरव तुरंत बोला 
“तुम्हें कुछ नहीं होगा।”
सिया उसकी आंखों में देखने लगी।
उसकी नजरों में पहली बार एक अलग सा एहसास था।


शायद भरोसा।
शायद अपनापन।
या शायद… प्यार की शुरुआत।
शाम होने लगी थी।
बारिश फिर शुरू हो चुकी थी।
आरव खिड़की के पास खड़ा बाहर देख रहा था।
तभी पीछे से सिया की धीमी आवाज आई —
“आरव
“हूं?

“अगर मैं तुमसे एक चीज मांगूं… तो दोगे?”
आरव तुरंत उसकी तरफ मुड़ा।
“क्या?

सिया कुछ सेकंड चुप रही।
फिर धीरे से बोली 
“जब तक मैं ठीक नहीं हो जाती… क्या तुम मेरे साथ रहोगे?

आरव बिना एक पल सोचे मुस्कुरा दिया।
“हमेशा

लेकिन शायद उसे नहीं पता था…
कि आने वाले दिनों में ये रिश्ता सिर्फ साथ नहीं… बल्कि एक बहुत बड़ी परीक्षा बनने वाला था