त्रिशा ने सामने शीशे में दिख रही उस लड़की के चेहरे को देखा और उसे ऐसा लगा जैसे वो लड़की उस पर हंस रही हो और मानो कह रही हो कि "इतना क्या बुरा मान रही है एक थप्पड़ का।।।।
हर बार की तरह इस बार भी बोल दे खुद से कि अरे कोई बात नहीं!! एक थप्पड़ ही तो है!!!!!!"
" वैसे भी आज तक तू हमेशा यही तो करती आई है ना अपने साथ......"
"इस पहले भी तो राजन ने क्या क्या नहीं किया तेरे साथ, आज तक तो तुझे कभी बुरा नहीं लगा फिर आज ऐसा कौन सा पहाड़ टूट पड़ा तेरे ऊपर!!!!!!!!"
" इससे पहले तो कभी नहीं लगा तुझे कि तेरे आत्म सम्मान को ठेस पहुंची है तो फिर आज ऐसा कौन सा नया काम हो गया है जो तू अंदर तक तिलमिला और झटपटा रही है, बता??????"
"पांच साल से ऊपर हो चुके है ना तेरी शादी को और बता दे ऐसा कोई महीना जब राजन ने तुझ पर हाथ ना उठाया हो!!!!!!!! अरे तुझे तो आदत हो जानी चाहिए थी इन सब की अभी तक पागल!!!!!!
और यह बेचारी सूरत अब क्यों बना रही है?????? इस से क्या होगा??????"
" और वैसे भी इतना ही है तो तुझे तभी उस टाईम राजन की आंखों में आंख डालकर बोलना चाहिए था कि गलती मेरी नहीं थी!!!!!!! आपकी थी!!!!!!! क्योंकि कागज सारे आप रखते हो तो बर्थ सर्टिफेकट भी आपके पास होगा!!!!!!! और मैं तो आपके सामने काम में लगी थी पर आप भी तो चैक कर सकते थे ना कि क्या रखा है और क्या नहीं!!!!!!!! तब तो तुझसे बोला नहीं गया तो फिर अब यह अबला वाला चेहरा लेकर यहां क्यों खड़ी है???????"
अपने ही प्रतिबिंब से यह सब सुनकर उसकी आंखों में आंसू झलक पड़े और खुद को संभाल कर वह केवल इतना ही कह पाई कि " मैं..... आखिर..... आखिर... कर ही..... क्या सकती हूं......."
" यही..... मेरी किस्मत में लिखा है........."
वह अपनी आंख से बहते आंसूओं को पोंछते हुए बोली," पर नहीं ऐसा नहीं हो सकता!!!!! राजन नशे में ही आपा खोते है और आजकल वो बहुत ज्यादा परेशान है अपने काम को लेकर इसलिए शायद......
पर देखना वो हर बार की तरह मुझसे माफी मांग लेंगे! और मुझे मना भी लेगे!!!!!! "
सामने शीशे वाली लड़की ने त्रिशा को व्यंगय भरी हंसी देते हुए कहा," कब तक दिल को ऐसे ही बहलाओगी त्रिशा????? सच से कब तक भाग पाओगी????? और जरा खुद के दिल से पु है कर बताओ कि उसके लिए यह सारी दलीलें देती हो, या खुद का मन बहलाने को देती हो????
अरे ऐसे खुद को पागल ही बनाती रहोगी तो अपने जख्मी दिल पर मरहम कब लगाओगी?????"
" ऐसा कुछ नहीं है!!!!!!! राजन ऐसे नहीं है!!!!!!! वो बस गलती से हुआ होगा!!!!!!" त्रिशा ने राजन का बचाव करते हुए अपन ही प्रतिबिंब से कहा पर कही न कही वो भी ये जानती है कि वो बस खुद को दिलासा देने के लिए ये सब बोल रही है।
" वाह त्रिशा!!!!!!! वाह!!!!!
तुम भी कमाल हो!!!!!! मतलब मुझे समझ नहीं आता कि तुम भोली हो या बेवकूफ हो!!!!!!!!!!! आज तक राजन की सफाई में तुम खुद से कहती रही कि वो नशे में था, उसे होश नहीं था, उसे पता नहीं था कि वो क्या कर रहा है और अब जब बिन नशे के पूरे होश में सबके सामने उसने हाथ उठाया तो कह रही हो कि उससे गलती हो गई वो परेशान था नहीं तो ऐसा कभी ना होता!!!!!!!!" त्रिशा के प्रतिबिंब ने उस पर एक व्यंगय बाण छोड़ते हुए कहा।
" हां तो यही सच है!!!!!!!!!! यही सच है!!!!!!! वो नशे में ही होते है और........" त्रिशा ने आईने में खड़ी अपनी प्रतिछाया पर चिल्लाते हुए कहा पर आखिर तक आते आते उसके शब्दों ने उसका साथ छोड़ ही दिया।
" और क्या......... " प्रतिबिंबित त्रिशा ने उसकी आंखों में झांकते हुए पूछा और उस पल में किसी कड़वे सच की स्वीकार करने के डर से अपनी आंखे नीची कर ली और उससे नजरें चुरा कर बोलती," वो बहुत तनाव में है और बस आवेग में आकर उनसे यह गलती हो गई। " त्रिशा के यह शब्द इस समय उसे ही ऐसे लग रहे है जैसे वो खुद को बस तसल्ली दे रही है।
फिर वह वहीं चुपचाप खड़ी आइने में उस लड़की को देखती रही जो उसे दया भरी नजरों से देख रही है और बार बार जगाने की कोशिश कर रही है।
पर त्रिशा ना जाने क्यों अपनी जिद्द पर अड़ी है। शायद वो इस बात को स्वीकार करना नहीं चाहती क्योंकि उसे डर है कि इस सच्चाई को वह सहन नहीं कर पाएगी। फिर वह खुद आइने में देख कर बोली," वो तो बस टेंशन ही थी उनको नहीं तो वो तो मेरा बहुत ख्याल रखते है। मुझसे बहुत प्यार करते है। मेरी हर जरुरत को पूरा करते है।"
"और तुम जाओ यहां से!!!!! तुम होती कौन हो मुझे ज्ञान देने वाली!!!!!! जाओ!!!!! चली जाओ!!!!! मुझे नहीं चाहिए तुम्हारी कोई सलाह या दया!!!!!!!" त्रिशा ने शीशे पल पानी फेंकते हुऐ कहा और उससे बात करने वाला उसका प्रतिबिंब उन पानी की बूंदों में खो गया। और पीछे छोड़ गया उस त्रिशा के प्रतिबिंब को जो टूटी सा, बिखरा सा महसूस कर रही है।
त्रिशा और ज्यादा देर वहां ना रुकी और बाहर आकर अपनी बेटी के पास बैड पर आकर लेट गई और उससे कसकर गले लग कर लेट गई क्योंकि उसे लग रहा है कि यह सब बस एक सपना है और जब वह सो कर उठेगी तो तब सब ठीक हो जाएगा।
अपनी बेटी को गले लगाते ही त्रिशा की तड़पती रुह को मानो सुकून मिल गया हो। उसके नन्हें नन्हें हाथों के स्पर्श ने मानो उसकी तिलमिलाती आत्मा को पूरी तरह से शीतल कर दिया हो। और अपनी बेटी को कसकर लिपटा कर अपनी आंखों से आंसू बहाते हुए त्रिशा आंखे बंद कर गुनगुन से लिपट कर सो गई।