Trisha - 50 in Hindi Women Focused by palvisha books and stories PDF | त्रिशा... - 50

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त्रिशा... - 50

तकरीबन कुछ दो घंटे बाद घर की डोरबैल बजी जिससे त्रिशा की आंख खुली और बिस्तर से उठकर त्रिशा ने जाकर दरवाजा खोला तो अपनी सांस और राजन को बाहर खड़ा पाया।  उसने उनके लिए दरवाजा खोला और अंदर आते ही त्रिशा ने उनके लिए ए० सी चालू किया फिर दोनों को पानी दिया और रसोई में जाकर खाना गर्म करने लगी। 

त्रिशा ने गरम गरम खाना लाकर राजन और अपनी सांस को दिया और फिर रसोई में रोटी गरम करने चली गई। त्रिशा बार बार गरम गरम रोटी लाकर उन्हें दे रही थी और हर बार वह राजन के पास इसी उम्मीद से आती कि वह उस से माफी मांगेगा, उसे मनाएगा और कुछ नहीं तो कम से कम ऐसा कुछ बोलेगा जिससे उसके दुखी मन को थोड़ा सा सुकून मिलेगा। पर हर बार उसे निराश होकर ही रसोई तक जाना पड़ा। 

त्रिशा की आंखों के आगे राजन ने अपना खाना खत्म किया और उसकी ओर एक बार  देखा तक भी नहीं। खान खाने के बाद वह ऑफिस  जाने से पहले अपनी मम्मी की तरफ मुड़ा और बोला," मम्मी मैं ऑफिस जा रहा हूं। मेरी मीटिंग है इसलिए रात में देर से आऊंगा। आप सब मेरा इंतजार मत करना।" 

इसके इलावा राजन ने कुछ नही कहा और अपना सामान लेकर चला गया। राजन के जाते ही उसकी सास भी अपने कमरे में आराम करने चली गई और त्रिशा भी किचन में अपना काम खत्म करने चली गई। 

लेकिन राजन के बर्ताव से पूरी तरह निराश त्रिशा ने उसके बाद ना खाना खाया और ना आराम करा बस खुद को काम में उलझा लिया क्योंकि वह खुद को एक पल भी खाली नहीं रखना चाहती थी। जिससे वह कुछ सोच कर खुद को और दुखी कर ले। वो दिन उसकी जिंदगी का अब तक का सबसे दुख भरा दिन था। इसलिए नहीं कि राजन ने उस पर हाथ उठाया बल्कि इसलिए की आज तक जो बंद कमरे में हुआ वो आज सबके सामने हुआ और उसके आत्म सम्मान के लिए यह असहनीय हो रहा था। 

उस रात राजन देर से आने वाला था इसलिए गुनगुन को सुलाने के बाद त्रिशा बिस्तर पर लेटी लेटी राजन का इंतजार करती रही। रात के बारह बज चुके थे और राजन का अभी तक कोई अता पता नहीं था। त्रिशा भले ही राजन से गुस्सा हो पर उसे उसकी इस समय बहुत चिंता हो रही थी। वह खुद ही इस बात पर खुद से जंग कर रही है कि उसे राजन को फोन करके पूछना चाहिए या नहीं। उसने सोचा था कि वह राजन से तब तक बात नहीं करेगी जब तक वह उससे माफी नहीं मांग लेता। 

पर जब रात एक बजे तक भी राजन नहीं आया तो त्रिशा से रुका नहीं गया। उसके अंदर की औरत उसके अंदर की पत्नी से हार गई और आखिर उसे फोन करना ही पड़ा। त्रिशा ने राजन को फोन किया तो पहली बार फोन की घंटी बजती रही और दूसरी बार में घंटी की आवाज दरवाजे पर से ही आई। त्रिशा ने जाकर दरवाजा खोला तो राजन वहीं खड़ा था। 

दरवाजा खुलते ही राजन घर के अंदर आया ओर त्रिशा भी चुपचाप अंदर आ गई। राजन जाकर हाथ मुंह धोने और कपड़े बदलने लगा और त्रिशा खाना खाना गरम करने लगी और रोटी गरम करने लगी। राजन के आने के बाद त्रिशा ने दोनों के लिए खाना लगाया और राजन फिर खाना खा के सोने चला गया। पर इस बार भी ना तो राजन ने माफी मांगी और ना ही ऐसा कुछ कहा जिस से त्रिशा की यह लगे कि राजन को अपनी गलती का पछतावा है और यही बात त्रिशा को अंदर ही अंदर और गुस्सा दिला रही थी। इसलिए उसने भी ठान लिया कि अब वो राजन से तभी बात करेगी जब वो उस से माफी मांगेगा। 

पर धीरे धीरे एक हफ्ता निकल गया और इस एक हफ्ते में ना ही राजन त्रिशा से बोला और ना ही त्रिशा राजन से बोली। त्रिशा राजन के लिए सब कुछ करती पर उस से बात ना करती पर राजन वो दिन में काम और रात ने शराब के नशे में कुछ बोलता ही नहीं था। त्रिशा नशे में भी उस से कुछ बात नहीं करना चाहती थी इसलिए उसके कमरे में जाते ही कमरा बाहर से बंद कर हाल में सो जाती और गुनगुन को अपनी सास के पास सुला देती। 

उनके बीच का तनाव दिन पर दिन बढ़ रहा था और उसकी सास को भी अब यह दिखाई दे रहा था।  ऐसे  में  एक दिन जब राजन ऑफिस गया था और गुनगुन स्कूल में थी। घर का सारा काम करके त्रिशा और उसकी सांस बैठे थे। तभी उसकी सांस ने उससे पूछा," क्या बात है त्रिशा???? कुछ हुआ है क्या????मै बहुत दिनों से देख रही हूं तू और राजन एक दूसरे से बात क्यों नहीं कर रहे हो??????" 

उस दिन के बाद से राजन‌ ने उससे एक शब्द तक नहीं कहा था  और ऊपर से वह उसेअनदेखा कर उसको यह जताना कि कोशिश कर रहा है कि गलती त्रिशा की है।  उस दिन के हादसे के बाद से त्रिशा अंदर ही अंदर घुट रही थी। पर आज जब उसकी सांस ने उससे यह पूछा तो वो भावुक हो उठी । 

वह अपने मन की बात उनसे कह कर अपना मन हल्का कर लेना चाहती थी। पर वो उन्हें चिंतित भी नहीं करनी चाहती थी इसलिए पहले तो वह बोली," नहीं तो मम्मी जी!!!!!! सब ठीक है हम दोनों में!!!!!!"

"बेटा  बूढ़ी जरुर होने लगी हूं। पर आंखें और कान काम करते है मेरे अभी भी!!!!!! मुझे भी सब दिखता है और सब समझ में आता है।।।। इसलिए बता क्या हुआ?? क्या पता मैं तुझे कोई सही सलाह दे सकूं।।।।।"  त्रिशा की सास ने कहा। 

त्रिशा ने इस बारे में सोचा और उसके मन  ने कहा कि उसकी सास भी तो आखिर एक औरत है और एक औरत ही तो औरत के दिल का दर्द समझ सकती है। तो उसकी सास भी उसका दुख जरुर समझेगी। वो उस टीस को समझेगी जो उसके मन में रह रह कर अपने अपमान के कारण उठ रही है। वो उस माफी की उम्मीद  को समझेगी जो उसे राजन से अभी भी है। वो उसके गुस्से को समझेगी जो उसे राजन से है। और वो राजन से खुलकर बोल नही पाएगी क्योंकि वह फिर गुस्सा हो जाएगा लेकिन उसकी सास तो  उसे समझ सकती है।