my one day love in Hindi Short Stories by Ubaid ali books and stories PDF | मेरा एक दिन का प्यार

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मेरा एक दिन का प्यार

( मेरा एक दिन का प्यार )

साल 2016 pnb बैंक की लाइन, आपको याद होगा जब हमारे देश में नोटबंदी हुयी थी तो सब लोग नोट बदलवाने के लिए लाइनों में लग रहे थे. इत्तीफाक से मुझे भी पैसे निकालने के लिए जाना पड़ा. लेकिन मुझे इस इस बात की बिलकुल भनक नहीं थी जो आज मेरे साथ होने जा रहा था जो मुझे जिंदगी भर एक खूबसूरत लम्हे के रूप में याद रहेगा, सुबह के करीब 11 बजे में वहाँ पहुंचा उस दिन हल्की सर्दी थी धूप अपनी छटा बिखेर रही थी मैंने देखा के लोग पहले से ही लाइनों में खड़े हैं दो तरह की पंक्तिया बनी हुयी थी एक महिलाओ की दूसरी पुरुषो की, में चुपचाप अपनी लाइन में जाकर खड़ा हो गया और फेसबुक स्क्रॉल करने लगा, बैंक का गार्ड बार बार सबको डांट रहा था कि कोई धक्का मुक्की ना करे. 

तभी मुझे एक लड़की कि मधुर आवाज़ सुनाई दि. आंटी पीछे हटीये दादी गिर जायँगी मेरी. बहुत सुबह से हम लोग यहाँ लाइन में खड़े हैं, मैंने अभी तक उस लड़की को देखा नहीं था बस उस लड़की और दूसरी आंटी के लड़ने कि आवाज़ मुझे आ रही थी में फेसबुक स्क्रॉल करते हुए ये सब सुन रहा था इतने में उन लोगों कि आवाज़ ज़्यादा शोर के साथ बढ़ने लगी, मैंने फोन जेब में रखा और लाइन से झाककर देखा तो, एक खूबसूरत सी लड़की, जिसके सुनहरे बाल, रंग सफ़ेद, गोल बड़ी बड़ी आंखे और गुलाबी होंठ जो उसके बोलने पर ऊपर नीचे हो रहे थे, उसके बाल बार बार उसके चेहरे पर आ रहे थे जिन्हे वो संभाल रही थी तो ऐसा लग रहा था जैसे हवा से पेड़ कि डालियां झुकती है और अगले पल पेड़ उन्हें वापस ऊपर कर देता है ठीक उसी तरह का मनज़र मेरी आँखों के सामने चल रहा था ये सारा सीन मुझे फिल्मो कि तरह लग रहा था जैसे सब शांत हो और बस वो लड़की जो बोल रही है वो सब स्लो मोशन में चल रहा हो, तभी वो लड़की ज़ोर से चिल्लायी अरे पानी है क्या किसी के पास, तभी में अपनी ख्यालो कि दुनिया से वापस आया, वो लड़की फिर से बोली अरे कोई मदद करो मेरी दादी कि तबयत खराब हो रही है पानी लाकर दे दो कोई, अब उन सब लोगों में से किसी में इतनी हिम्मत नहीं थी कि अपनी लाइन छोड़कर उस बेचारी लड़की कि मदद कर सके. मेरे अंदर बचपन से एक आदत रही है कि मुझसे जितना भी हुआ है मैंने लोगों कि मदद कि है, अगले ही क्षण में अपनी लाइन छोड़कर उसके लिए अपनी लाने जा चुका था मैंने दुकानदार से पानी कि बोतल ली और आकर उस लड़की के हाथ में देकर में मुड़ा ही था कि वो लड़की बोली सुनिए, में पीछे वापस मुड़ा मैंने पूछा जी कहिये वो बोली ज़रा मेरी दादी को उठाने में मेरी मदद कीजिये इन्हे यहाँ भीड़ से दूर लेकर चलना है 
हम दोनों ने दादी को उठाया एक तरफ वो थी और दूसरी तरफ में और वो मुझसे पता नहीं क्या क्या बोल रही थी क्युकी मेरा मन कहीं और ही चल रहा था कि ये सुंदरता कि मूरत आज मेरे बगल में चल रही है और उसकी छटा निहार रहा था, इतने में हम लोग पास के पार्क में पहुंच चुके थे वहां हमने दादी को लेटाया और उसने उन्हें पानी पिलाया और मुझे थेंक्स बोला मैंने कहा अरे इसकी क्या ज़रूरत है ये तो मेरा कर्तव्य था 
उसने कहा मेरा नाम प्रिया है प्राइमरी स्कूल में टीचर हूं
मैंने कहा में यश हूं एक प्राइवेट कम्पनी में जॉब करता हूं 

इतने में उसने अपने बाल खोले जो पसीने से भीग चुके थे उनमे से भीनी भीनी खुशबु ा रही थी जो मुझे मदहोश कर रही थी 
उसने बालो से चिमिटी निकाल के मेरे हाथ में रख दि और अपने बाल बाँधने लगी वो 3 चिमटी लगा चुकी थी एक अभी मेरे हाथ में ही थी इतने में दादी उठ गई 
और बोली ये कौन है बेटा 
प्रिया ने जवाब दिया दादी ये वही जिसने हमारी मदद कि फिर दादी मुझे दुआएँ देने लगी 
बोली बेटा तुम्हारा शुक्रिया हम ऐसे अदा नहीं कर सकते किसी दिन हमारे घर आना चाय पिला के अदा करेंगे 
में बस मुस्कुराया 

प्रिया बोली यश हमारे लिए ऑटो बुला दो, मैंने भागकर ऑटो बुलाया, वो ऑटो वाला बड़ी जल्दी कर रहा था जाने कि वो दोनों उसमे बैठ गई प्रिया ने एक स्माइल दि 
और बोली मेरा न. लिख लो कभी फ्री हो तो घर आना 
मैंने न. नोट किया और ऑटो चला गया में उसे आँखों से औझल होने तक ऐसे ही देखता रहा 

में मन ही मन बहुत खुश था और शायद उसे प्यार कर बैठा था इस बीच कब चार बज गये मुझे पता ही नहीं चला 
में घर ा गया मेरे चेहरे पर एक अलग ही ख़ुशी और चमक थी 
घर आकर मम्मी ने पूछा निकलवा लाये पैसे मेरा माथा ठनका कि जिस काम से गया था वो किया ही नहीं 
मैंने मम्मी को बहाना मारा और अपनी जेब में हाथ डाला तो मुझे कुछ लगा जैसे मेरी जेब में है मैंने बाहर निकाला तो वो प्रिया कि चिमटी थी जिसे वो लगाना भूल गई थी 

मैंने सोचा लाओ इसी बहाने उसे कॉल कि जाये मैंने जेब से फोन निकालकर उसे कॉल लगाई रिंग गई 

उधर से कोई शास्त्री जी बात कर रहे थे, मैंने बड़ी विन्रमता से उनसे पूछा क्या प्रिया जी हैं 

उन्होंने बोला प्रिय यहाँ कोई प्रिया नहीं रहती हैं 
मुझे थोड़ा दुख़ हुआ लेकिन मैंने अपने मन को समझाया के शायद ऑटो वाले कि जल्दी में मुझसे नंबर गलत हो गया 

यही मेरा एक दिन का प्यार था 
यही मेरा एक दिन का प्यार था....

#मेरीकलमसे 
Ubaid Ki Baten