Adhura Pyaar - 9 in Hindi Thriller by iqbal Raj books and stories PDF | अधुरा प्यार - 9

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अधुरा प्यार - 9

शून्य का सिरा और भटकती रूह
भाग एक: वास्तविकता का टूटना (The Glitch)
सगाई वाले घर से अपमानित होकर भागने के ठीक बाद इकबाल एक तंग गली में मुडता है और अचानक सारा शोर थम जाता है. सामने वही सगाई वाला हॉल है, लेकिन वहां सन्नाटा है. कोई मेहमान नहीं, कोई नगाडा नहीं. फर्श पर वही पाँच सौ का नोट पडा है, लेकिन उस पर गांधी जी की जगह इकबाल राज की फोटो छपी है. इकबाल उस नोट को उठाता है, तो उसके हाथ में नोट नहीं, बल्कि राख का एक ढेर रह जाता है. क्या इकबाल की दिमागी हालत बिगड गई है या हकीकत ही किसी ने' डिलीट' कर दी है?
भाग दो: जुबेदा का साया (The Ghostly Presence)
इकबाल हॉल के अंदर कदम रखता है. हर कदम पर फर्श से ऐसी आवाज आ रही है जैसे सूखे पत्तों पर चल रहा हो, जबकि वहां कीमती कालीन बिछा था. वहां जुबेदा बैठी है, पर वह दुल्हन के लिबास में नहीं, बल्कि' AK Service' की यूनिफॉर्म पहने हुए है. वह इकबाल को देखकर मुस्कुराती है और कहती है, सर, आज की डिलीवरी पेंडिंग है। इकबाल अपनी जेब टटोलता है, वहां वह खूनी' I' चाबी नहीं, बल्कि एक पुराने टाइपराइटर का रिबन निकलता है जो सांप की तरह उसकी उंगलियों से लिपट जाता है. जुबेदा का चेहरा अचानक धुंधला होने लगता है, जैसे किसी ने गीली पेंटिंग पर हाथ फेर दिया हो.
भाग तीन: मलबे का संगीत और' AK Service' का भूत
अचानक, हॉल की दीवारें पिघलकर उस पुराने खंडहर में बदलने लगती हैं जहाँ इकबाल का साम्राज्य राख हुआ था. वह देखता है कि फरहान वहां खडा है, लेकिन उसके हाथ में नोट नहीं, बल्कि एक जलती हुई मशाल है. फरहान हंसते हुए कहता है, इकबाल, तुम कहानी के नायक नहीं हो, तुम सिर्फ एक' टाइपिंग मिस्टेक' (Typing Mistake) हो। इकबाल पीछे मुडता है तो उसे अपनी ही लाश एक हाथ- गाडी पर लदी हुई दिखती है. वह लाश नहीं थी, वह उसकी' पत्रकारिता' का शव था जिस पर स्याही के कीडे रेंग रहे थे.
भाग चार: समय का चक्र (The Loop)
अचानक एक तेज अलार्म बजता है. इकबाल की आँख खुलती है. वह अपनी हाथ- गाडी पर सोया हुआ है. दोपहर के चार: शून्य बज रहे हैं. वही टैक्सी वाला हॉर्न बजा रहा है, भैया, रास्ता छोडो! कब तक सोओगे? इकबाल को लगता है कि पिछला सब कुछ सपना था. वह राहत की सांस लेता है और माथे का पसीना पोंछता है. लेकिन जैसे ही वह हाथ- गाडी का हैंडल पकडता है, उसे महसूस होता है कि हैंडल ठंडा नहीं, बल्कि गर्म खून से लथपथ है. और हवा में वही चंदन और मोगरे के फूलों की खुशबू आ रही है—वही फूल जो जुबेदा की सगाई में सजे थे.
भाग पाँच: लेखक का सीधा हस्तक्षेप (The Meta Masterstroke)
इकबाल के पास एक अखबार उडकर आता है. अखबार की हेडलाइन है—" इकबाल राज का दसवां अध्याय: सच या भ्रम? नीचे एक खाली कॉलम है जहाँ लिखा है—" लेखक की उंगली' Shift' बटन पर है, कुछ भी बदल सकता है। इकबाल को अपने पीछे किसी के चलने की आहट सुनाई देती है. वह मुडकर देखता है, तो वहां कोई नहीं है, बस हवा में एक शब्द तैर रहा है—" Backspace" उसे महसूस होता है कि उसके पैरों के नीचे की सडक अब डामर की नहीं, बल्कि सफेद कागज की बनी है और ऊपर आसमान से एक विशाल पेन उसकी तरफ बढ रहा है.
भाग छह: रूह का आखिरी सवाल (The Climax)
इकबाल अपनी हथेली को गौर से देखता है. उसकी हाथों की रेखाएं मिट रही हैं और वहां छोटे- छोटे काले अक्षर उभर रहे हैं. उसे अहसास होता है कि उसका अपमान हुआ है, लेकिन वह अपमान Kiss दुनिया में हुआ है, यह उसे याद नहीं आ रहा. वह जोर से चिल्लाता है, मैं हकीकत हूँ या सिर्फ एक ड्राफ्ट? क्या मेरा दर्द भी किसी की उंगलियों का खेल है? दूर कहीं टाइपराइटर की एक आखिरी आवाज आती है—' टिंग! —जैसे कोई पन्ना खत्म हो गया हो.
भाग सात: डिजिटल नर्क की गलियाँ
जैसे ही इकबाल चिल्लाता है, मुंबई की इमारतें बाइनरी कोड (एक सौ एक) में बदलने लगती हैं. उसे लगता है कि वह हाथ- गाडी नहीं, बल्कि अपनी ही' मेमोरी' खींच रहा है. सगाई वाले घर का वह अपमान अब एक' वीडियो लूप' की तरह उसकी आँखों के सामने बार- बार चल रहा है. फरहान का वह नोट देना, जुबेदा का वह हाथ दबाना—सब कुछ एक कंप्यूटर वायरस की तरह उसके दिमाग को चबा रहा है. उसे समझ आता है कि वह भाग कर भी कहीं नहीं जा सकता, क्योंकि वह जिस सडक पर खडा है, उसका अंत लेखक के' Enter' बटन पर होता है.
भाग आठ: सन्नाटे की आखिरी साजिश
हवा में अचानक बर्फीली ठंडक छा जाती है. इकबाल देखता है कि उसकी हाथ- गाडी पर अब' AK Service' की राख नहीं, बल्कि हजारों कटे हुए पन्ने लदे हैं. ये वो पन्ने हैं जो कभी पढे नहीं गए. सगाई के हॉल से भागते वक्त उसने जो आंसू बहाए थे, वे अब जमीन पर गिरकर' Full Stop' बनते जा रहे हैं. वह खामोश खडा है, क्योंकि उसे पता है कि शोर मचाने से सिर्फ लेखक का मनोरंजन होगा. वह अपनी जेब से वह' I' चाबी निकालता है और उसे अपने सीने में धंसाने की कोशिश करता है, यह देखने के लिए कि क्या उसके अंदर खून है या सिर्फ नीली स्याही.
भाग नौ: जुबेदा का कफन और स्याही का सैलाब
अचानक दूर क्षितिज पर उसे जुबेदा का चेहरा दिखाई देता है, लेकिन वह सगाई के जोडे में नहीं, बल्कि सफेद कफन में लिपटी है. उसकी आँखों से खून नहीं, बल्कि नीली स्याही बह रही है जो धीरे- धीरे पूरी मुंबई को डुबो रही है. वह कुछ कहना चाहती है, पर उसकी आवाज' टाइपिंग एरर' की तरह कट- कट कर आ रही है. इकबाल समझ जाता है कि जुबेदा भी एक मोहरा है, जिसे लेखक ने सिर्फ उसे तडपाने के लिए गढा है. वह स्याही के उस सैलाब में अपनी हाथ- गाडी को एक कश्ती की तरह चलाने लगता है, इस उम्मीद में कि शायद कहीं' Escape' बटन मिल जाए.
भाग दस: आखिरी दलील और अंधकार का पर्दा
सब कुछ धीरे- धीरे सफेद कागज में विलीन हो रहा है. न हाथ- गाडी बची, न सडक. इकबाल हवा में लटक रहा है. उसके सामने एक विशाल कर्सर धक- धक कर रहा है, जैसे किसी राक्षस का दिल धडक रहा हो. वह कर्सर अब इकबाल की यादों को एक- एक करके मिटा रहा है. सगाई का अपमान—मिट गया. AK Service' का गौरव—मिट गया. जुबेदा का नाम—मिट गया. अब सिर्फ इकबाल बचा है और वह अनंत सन्नाटा. तभी एक आवाज गूँजती है—" अगले अध्याय में तुम्हारी रूह का सौदा होगा, तैयार रहना इकबाल राज।
अगर आपको लग रहा है कि आप समझ गए हैं, तो रात नौ: शून्य बजे का इंतजार कीजिए. ग्यारहवां और बारहवां अध्याय आपकी समझ की धज्जियाँ उडा देगा।
चेतावनी:
अगली किश्त पढने से पहले आईने में अपनी आँखें देख लेना, कहीं उनमें' Backspace' तो नहीं चमक रहा? याद रखना, अगर लेखक ने अपनी उंगली हटा ली, तो इकबाल के साथ- साथ आपका वजूद भी इस पन्ने से मिट जाएगा. सन्नाटा गहरा हो रहा है. क्या आप सच में जाग रहे हैं, या आप भी मेरी तरह किसी की स्क्रिप्ट का हिस्सा हैं? घडी की सुइयां अब आपके लिए नहीं, उस' लेखक' के लिए चल रही हैं जो रात नौ: शून्य बजे एक नया कत्लेआम शुरू करेगा।

( क्रमशः)

लेखक की रूहानी पुकार:
दोस्तों, 'IJ अधूरा प्यार' की इस खौफनाक दास्तान में आप भी मेरे साथ उस अंधेरे में भटक रहे हैं, जहाँ इकबाल को ढूंढना नामुमकिन सा लगता है। क्या आप वाकई इकबाल तक पहुँच पाएंगे? सच कहूँ तो, मुझे भी नहीं लग रहा था... लेकिन हार मान लेना इकबाल की फितरत नहीं है।
मैंने आप सभी के लिए एक रास्ता खोल दिया है। जो लोग इस खौफ के सफर में मेरे साथ लाइव रूबरू होना चाहते हैं और जानना चाहते हैं कि इकबाल इस दास्तान में आगे क्या भुगतने वाला है, वे अभी फेसबुक पर सर्च करें— 'IJ Adhura Pyaar'।
देखते हैं, आपमें से कितने लोग मुझे वहां ढूँढ पाते हैं! क्या आप तैयार हैं इस डिजिटल पहेली को सुलझाने के लिए? मैं फेसबुक के उस पन्ने पर आपका इंतज़ार कर रहा हूँ, जहाँ सस्पेंस का असली चेहरा दिखेगा।