Sirf Tumhara - 1 in Hindi Love Stories by InkImagination books and stories PDF | Sirf Tumhara - 1

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Sirf Tumhara - 1

Part 1

"Hii..."
अंश के फोन की स्क्रीन पर नोटिफिकेशन चमक उठा। सुबह की हल्की-सी रोशनी कमरे में फैली हुई थी। अंश ने आँखें मलते हुए फोन उठाया और मैसेज पढ़ते ही उसके होंठों पर अनचाही मुस्कान आ गई।
Good Morning baby ❤️
मैसेज रुद्र का था।
अंश ने घड़ी की तरफ देखा — सुबह के सिर्फ 6:15 बजे थे। उसने हल्का-सा हँसते हुए टाइप किया।
"पागल है क्या ये आदमी? इतनी सुबह?"
रिप्लाई तुरंत आ गया, जैसे रुद्र फोन हाथ में लिए बैठा ही हो।
"खुशी नहीं है।"
अंश की भवें ऊपर उठ गईं।
"फिर?"
"तुम ऑनलाइन आ गए।"
अंश अपनी मुस्कान रोक नहीं पाया। उसने फोन को थोड़ा और करीब लाकर अपने चेहरे पर पड़ी उनींदगी को छुपाने की कोशिश की। तीन साल हो गए थे उनकी रिलेशनशिप को। तीन लंबे, प्यार भरे, कभी-कभी लड़ाई-झगड़े वाले, लेकिन बेहद खूबसूरत साल।
रुद्र प्रताप सिंह — शहर के सबसे बड़े बिजनेस घराने का वारिस। लंबा, चौड़ा कंधा, गहरी आँखें और वो गुस्सैल स्वभाव जो किसी को भी डरा सकता था। लेकिन अंश के लिए वो एकदम अलग था। ओवर पॉसेसिव, ओवर प्रोटेक्टिव और कभी-कभी इतना ओवर ड्रामेटिक कि अंश हँसते-हँसते लोट-पोट हो जाता।
फोन फिर वाइब्रेट हुआ।
"वीडियो कॉल उठाओ।"
अंश ने आँखें घुमाईं और बुदबुदाया, "अभी? अभी तो मैं बेड पर ही हूँ यार।"
फिर भी उसने कॉल रिसीव कर ली।
स्क्रीन पर रुद्र का चेहरा आया — बाल बिखरे हुए, आँखें अभी भी नींद से भरी हुईं, लेकिन होंठों पर वो खास मुस्कान थी जो सिर्फ अंश के लिए रिजर्व थी।
"क्या देख रहे हो?" अंश ने शरमाते हुए पूछा।
"तुम्हें," रुद्र की आवाज़ भारी और गहरी थी। "हर सुबह तुम्हें देखे बिना मेरा दिन शुरू ही नहीं होता।"
अंश हँसा, "मैं कोई म्यूजियम की चीज़ हूँ क्या?"
"हाँ। मेरे पर्सनल म्यूजियम की। सिर्फ मेरी।" रुद्र की आँखों में वही पुरानी चमक थी।
"रुद्राा... बस करो।" अंश ने शर्म से गाल फुला लिए।
"अच्छा सुन," रुद्र अचानक थोड़ा सीरियस हो गया। "आज कॉलेज के बाद सीधा घर जाना। कहीं घूमने-फिरने मत जाना।"
अंश ने भवें चढ़ाईं, "क्यों? क्या प्लान है?"
"बस।"
"बस का क्या मतलब, रुद्र? बताओ ना।"
"मतलब बस। मैं आऊंगा तुम्हें लेने।"
अंश ने साँस छोड़ी। वो जानता था रुद्र कुछ छुपा रहा है, लेकिन जानता था कि ज़िद करने पर भी नहीं बताएगा।
तभी रुद्र का स्वर बदल गया।
"कल जो लड़का तुम्हारे साथ कैंटीन में था... वो कौन था?"
अंश को तुरंत समझ आ गया। उसने हँसते हुए सिर हिलाया।
"अबीर? अरे वो तो मेरा क्लासमेट है। प्रोजेक्ट पर साथ काम कर रहे हैं।"
"बहुत हँस-हँस के बात कर रहे थे तुम दोनों," रुद्र की आवाज़ में स्पष्ट जलन थी। "मुझे अच्छा नहीं लगा।"
अंश ज़ोर से हँस पड़ा, "अरे वाह! जलन हो रही है मिस्टर रुद्र प्रताप सिंह को?"
"बिल्कुल हो रही है।" रुद्र ने सीधे उसकी आँखों में देखते हुए कहा, "तुम हँसोगे तो सिर्फ मेरे सामने। सिर्फ मेरे लिए।"
अंश का दिल एक पल को धड़क गया। रुद्र की ये पॉसेसिव वाली बातें उसे हमेशा अजीब सा अहसास देती थीं — डर के साथ प्यार का मिश्रण।
"रुद्र तुम इम्पॉसिबल हो," अंश ने प्यार से कहा।
"हाँ, लेकिन सिर्फ तुम्हारे लिए।" रुद्र की आवाज़ नरम हो गई। "तुम सिर्फ मेरे हो, अंश। समझे?"
अंश चुप हो गया। उसकी आँखों में नमक-सा भर आया। तीन साल बाद भी रुद्र की ये वाली बातें उसके दिल को छू जाती थीं।
"समझ गया," अंश ने धीरे से कहा।
तभी कमरे का दरवाज़ा ज़ोर से खुला।
"अंशhhhhh!!!"
अंश का कज़िन विहान कमरे में तूफान की तरह घुस आया। लंबा, फुर्तीला, हमेशा मुस्कुराता रहने वाला विहान।
"अरे तू अभी तक बेड पर है? कॉलेज नहीं जाना क्या? जल्दी उठ!" विहान चिल्लाया। फिर उसकी नज़र अंश के फोन पर पड़ी।
"ओओओह्ह्ह... जीजू!" विहान ने मज़ाकिया अंदाज़ में कहा और स्क्रीन की तरफ हाथ हिलाया। "गुड मॉर्निंग जीजू!"
"चुप कर विहान!" अंश ने शर्माते हुए कहा।
स्क्रीन पर रुद्र का चेहरा तुरंत डार्क हो गया। उसकी भवें सिकुड़ गईं।
"विहान," रुद्र की आवाज़ ठंडी पड़ गई।
"जी जीजू!" विहान ने जानबूझकर और ज़्यादा चिढ़ाते हुए कहा।
"मुझे जीजू मत बोला कर।"
"तो फिर क्या बोलूँ? बॉस?" विहान हँसते-हँसते लोट गया।
"बॉस अच्छा रहेगा," रुद्र ने गंभीरता से कहा, लेकिन उसके होंठों पर हल्की मुस्कान थी।
अंश ने सिर पकड़ लिया। रोज़ का यही ड्रामा था। विहान रुद्र को चिढ़ाने में बड़ा माहिर था और रुद्र भी उसे secretly पसंद करता था, भले ही कभी माने नहीं।
"अब तुम दोनों बस करो," अंश ने हँसते हुए कहा। "विहान, तू बाहर जा, मैं तैयार होकर आता हूँ।"
विहान ने आँख मारकर कहा, "ठीक है जीजू... ओप्स, बॉस!" और हँसता हुआ बाहर निकल गया।
रुद्र ने साँस छोड़ी, "ये लड़का कभी नहीं सुधरेगा।"
"तुम भी तो नहीं सुधरते," अंश ने प्यार से कहा।
"सुधरने की ज़रूरत ही नहीं। मैं जैसा हूँ, वैसा ही तुम्हें पसंद हूँ ना?" रुद्र ने पूछा।
"बहुत ज़्यादा," अंश ने धीरे से कहा।
कुछ देर दोनों एक-दूसरे को देखते रहे। फिर रुद्र ने कहा, "मैं कॉलेज के बाहर मिलता हूँ। लव यू।"
"लव यू टू," अंश ने मुस्कुराते हुए कहा और कॉल डिस्कनेक्ट हो गई।
अंश ने फोन सीने से लगा लिया। दिल में एक अजीब सा सुकून था। लेकिन उसे नहीं पता था कि ये सुकून ज्यादा दिन तक नहीं रहने वाला।
कॉलेज जाते वक्त विहान ने कार चलाते हुए पूछा, "आज भी जीजू का जलन वाला मोड ऑन था क्या?"
"हमेशा की तरह," अंश हँसा।
"तुम दोनों की जोड़ी तो कमाल की है यार।" विहान ने कहा।
दोनों कॉलेज पहुँचे। वहाँ उनका फ्रेंड ग्रुप पहले से ही मौजूद था — कबीर, अयान, रेयांश और बाकी। सबकी अपनी-अपनी बातें चल रही थीं। अंश को देखते ही सबने चिढ़ाना शुरू कर दिया।
लेकिन आज का दिन सचमुच उनका आखिरी नॉर्मल दिन था।
कल से सब कुछ बदलने वाला था — दोस्ती, प्यार, परिवार, और उनकी पूरी जिंदगी।

To Be Continued...

Thank you 🥰🥰...