**Sirf Tumhara**
**Part 7**
रात काफी हो चुकी थी, लेकिन अंश की आँखों में नींद नहीं थी। देव और अरमान का चेहरा बार-बार याद आ रहा था। उनका लुक, उनकी मुस्कान और वो अनकही धमकी — सब कुछ अजीब लग रहा था। बगल में विहान सो रहा था, लेकिन अंश उठकर बालकनी में चला गया। फोन पर रुद्र का लास्ट सीन देखा — "सो गए baby? ❤️"
अंश ने रिप्लाई किया: "नींद नहीं आ रही। कल वाले नए लड़के... डर लग रहा है।"
रिप्लाई तुरंत आया। "मैं आ रहा हूँ।"
पंद्रह मिनट बाद रुद्र की गाड़ी घर के बाहर रुकी। अंश नीचे उतरा। रुद्र ने उसे गले लगा लिया। "डरने की ज़रूरत नहीं। मैं हूँ ना।"
दोनों छत पर बैठ गए। रुद्र ने अंश को अपनी गोद में बिठाया और उसकी पीठ सहलाने लगा। "देव नाम का वो लड़का... उसकी पृष्ठभूमि पर मैंने थोड़ा पता किया है। लगता है वो शहर के अंडरग्राउंड बिजनेस से जुड़ा है। अरमान उसके साथ है। दोनों खतरनाक लगते हैं।"
अंश ने सिर उठाकर रुद्र को देखा। "तो हम उनसे दूर रहेंगे ना?"
"हाँ। लेकिन अगर वो हमारे पास आए तो मैं हैंडल कर लूँगा," रुद्र ने दृढ़ता से कहा। उसने अंश के होंठों को चूम लिया। किस नरम था, लेकिन प्यार और सुरक्षा से भरा हुआ। अंश ने रुद्र की शर्ट पकड़ ली और जवाब दिया। कुछ पल के लिए दुनिया रुक गई।
"तुम मेरी सबसे बड़ी ताकत हो," रुद्र ने फुसफुसाया।
अगली सुबह कॉलेज में माहौल पहले से अलग था। देव और अरमान पहले से ही लॉन में बैठे थे। देव ने सिगरेट पीते हुए ग्रुप को देखा और मुस्कुराया। अरमान उसके बगल में खड़ा था, उसकी नज़र देव पर जमी हुई थी — एक गहरी, खतरनाक केमिस्ट्री जो सबको महसूस हो रही थी।
कबीर ने रुद्र से कहा, "ये लोग रोज़ क्यों आ रहे हैं?"
रुद्र ने कंधे उचकाए। "पता नहीं। लेकिन सावधान रहना।"
क्लास के बाद कैंटीन में पूरा ग्रुप जमा हुआ। देव भी आ गया। "मैं तुम लोगों से बात करना चाहता हूँ।"
रुद्र ने सख्ती से कहा, "क्या बात है?"
देव हँसा। "आराम से। मैं दुश्मन नहीं हूँ। मेरी अपनी कुछ बिजनेस है। तुम्हारे पिता की कंपनी से कुछ डील हो सकती है। लेकिन तुम्हारी कमज़ोरी — अंश — उसे सुरक्षित रखो। शहर में बहुत से लोग जान गए हैं।"
अरमान ने देव की तरफ़ देखा। "देव, ज़्यादा मत बोलो।"
देव ने अरमान के कंधे पर हाथ रखा। "चिंता मत करो।"
उन दोनों की केमिस्ट्री देखकर विहान ने फुसफुसाया, "ये लोग भी किसी जोड़ी जैसे लग रहे हैं।"
कबीर ने हँसते हुए कहा, "तुम्हें हर जगह जोड़ी ही दिखती है।"
"क्योंकि तुम अकेले घूमते हो," विहान ने तंज कसा।
अयान ने बीच में शांति बनाई। "देव, अगर तुम मदद करना चाहते हो तो बताओ। लेकिन हमें विश्वास चाहिए।"
देव ने सिर हिलाया। "विश्वास समय के साथ आएगा।" कहकर वो अरमान के साथ चला गया।
दोपहर को रुद्र ने अंश को लाइब्रेरी में ले जाकर अलग से बात की। "मुझे तुम पर बहुत गर्व है। तुम इतना सब सह रहे हो।"
अंश ने मुस्कुराते हुए कहा, "तुम्हारे लिए सब सह सकता हूँ।"
रुद्र ने उसे किताबों की शेल्फ के बीच खींच लिया और गहरा किस किया। अंश की साँसें तेज़ हो गईं। रुद्र की उँगलियाँ उसके कमर पर थीं। "तुम सिर्फ मेरे हो। कोई नहीं छू सकता।"
"हाँ, सिर्फ तुम्हारा," अंश ने शर्माते हुए कहा।
शाम को ग्रुप प्लानिंग मीटिंग रखी गई। रुद्र के घर पर सब जमा हुए। रुद्र के पिता ने भी थोड़ी देर के लिए आकर बात की। "रुद्र, सावधानी बरतना। सिंहानिया ग्रुप बहुत खतरनाक है।"
मीटिंग के बाद विहान और कबीर बालकनी में बहस कर रहे थे।
"तुम हमेशा मेरे खिलाफ क्यों बोलते हो?" कबीर ने पूछा।
"क्योंकि तुम मुझे चिढ़ाते हो," विहान ने जवाब दिया। दोनों एक-दूसरे के करीब आ गए। हवा में तनाव था, लेकिन नया सा आकर्षण भी।
अयान और रेयांश गार्डन में घूम रहे थे। रेयांश ने अयान का हाथ थामा। "सब ठीक हो जाएगा ना?"
"हो जाएगा। हम साथ हैं," अयान ने प्यार से कहा। उनकी कहानी सबसे शांत और सुंदर थी।
रुद्र और अंश छत पर थे। रुद्र ने अंश को पीछे से गले लगाया। "कल से मैं तुम्हें पिकअप और ड्रॉप करूँगा।"
"ठीक है," अंश ने सहमति दी।
रात को रुद्र ने अंश को घर छोड़ा। लेकिन घर पहुँचते ही अंश को एक अनजान मैसेज आया: "रुद्र सिंह की कमज़ोरी... बहुत जल्दी टेस्ट होगी।"
अंश डर गया। उसने रुद्र को कॉल किया।
"रुद्र... मैसेज आया है।"
रुद्र की आवाज़ गुस्से से भरी थी। "मैं आ रहा हूँ। डरो मत।"
अगले दिन कॉलेज में देव फिर से मिला। "मैंने सुना है। अगर चाहो तो मदद कर सकता हूँ। मेरे कनेक्शन हैं।"
रुद्र ने उसे घूरा। "क्यों मदद कर रहे हो?"
देव मुस्कुराया। "क्योंकि मुझे पसंद है तुम्हारी कहानी। और अरमान कहता है कि अच्छे लोग मदद के काबिल होते हैं।"
अरमान ने देव को देखा, उसकी आँखों में गर्व था।
ग्रुप अब और करीब आ गया था। लेकिन खतरा भी बढ़ रहा था।
रुद्र ने अंश को कसकर गले लगाया। "हम इस तूफान से निकलेंगे। साथ में।"
अंश ने हाँ कहा, लेकिन मन में सवाल थे।
**To Be Continued...**
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