सुबह का वक्त, अमेज़न के घने जंगल के बीचो बीच, विमान का मलबा।
चारों तरफ इतना घना जंगल है कि आसमान के सूरज की धूप भी ज़मीन तक ठीक से नहीं पहुँच पा रही है। हर तरफ अजीबोगरीब जंगली पक्षियों और कीड़े-मकोड़ों की डरावनी आवाज़ें गूंज रही हैं। विमान दो हिस्सों में टूट चुका है। आग बुझ चुकी है, लेकिन मलबे से अब भी काला धुआं निकल रहा है।
सबसे पहले होश आता है लारा को। उसके सिर से खून बह रहा है और उसका पूरा बदन दर्द से टूट रहा है।
लारा ने धीरे-धीरे अपनी आँखें खोलीं। उसे सब कुछ धुंधला दिखाई दे रहा था। उसके कानों में एक अजीब सी सां-सां की आवाज़ गूंज रही थी। उसने कसमसाकर अपने हाथ-पैर हिलाए—खुशकिस्मती से उसकी कोई हड्डी नहीं टूटी थी।
उसने झटके से अपने पास देखा,
"सोफिया! सोफिया, आँखें खोलो!"
सोफिया प्लेन की सीट के नीचे बेहोश पड़ी थी, उसके चेहरे पर खरोंचें थीं। लारा ने घबराकर उसकी नब्ज छुई। नब्ज चल रही थी। लारा ने राहत की सांस ली और उसे हिलाने लगी।
तभी मलबे के दूसरी तरफ से कराहने और रोने की आवाज़ें आईं। लारा ने लड़खड़ाते कदमों से उठकर देखा। बिजनेस क्लास वाला हिस्सा पूरी तरह बिखर चुका था।
मैट एक पेड़ के तने के पास गिरा हुआ था, उसके पैर में गहरी चोट थी और वह दर्द से तड़प रहा था। ऐशली उसके पास बैठी पागलों की तरह रो रही थी, उसके महंगे कपड़े फट चुके थे और हाथ का कीमती ब्रेसलेट कहीं खो गया था।
"रोज़ी! पॉल! टोनी! कोई है?"
बिल एक टूटी हुई सीट को पकड़कर उठने की कोशिश कर रहा था। उसके माथे से खून टपक रहा था।
थोड़ी दूर झाड़ियों में से रोज़ी और पॉल भी बाहर निकले। रोज़ी का वो घमंड अब उसके चेहरे पर कहीं नहीं था, उसकी आँखों में सिर्फ और सिर्फ मौत का खौफ था। टोनी भी मलबे के एक हिस्से से लटक रहा था, उसके कंधे की हड्डी खिसक चुकी थी।
पायलट और को-पायलट का कहीं अता-पता नहीं था, विमान का कॉकपिट वाला हिस्सा पूरी तरह तबाह हो चुका था। यानी इस भयानक और अनजान जंगल में अब ये 8 बच्चे पूरी तरह अकेले थे।
मलबे के पास सब का इकट्ठा होना, पहला टकराव।
सूरज धीरे-धीरे ऊपर चढ़ रहा था, और अमेज़न के जंगल की वो जानलेवा उमस (Humidity) और गर्मी अब बढ़ने लगी थी। अजीब से बड़े-बड़े मच्छर उनके चारों तरफ मंडराने लगे थे।
मैट ने अपने पैर को कसकर पकड़ते हुए लारा की तरफ देखा, जो सोफिया को होश में ला चुकी थी। मैट की आवाज़ कांप रही थी,
"लारा... क्या सब ठीक हैं? पायलट कहाँ हैं? हमारा रेडियो काम कर रहा है क्या?"
लारा ने ठंडे लहजे में कहा,
"पायलट नहीं रहे मैट। और प्लेन के दो टुकड़े हो चुके हैं, रेडियो का नामोनिशान नहीं है।"
यह सुनते ही ऐशली चीख पड़ी,
"क्या मतलब रेडियो नहीं है? तो हमें यहाँ से कौन निकालेगा? मेरे डैड को फोन करो! उन्हें बोलो कि अपना दूसरा प्राइवेट जेट भेजें! मैं इस बदबूदार जंगल में एक सेकंड भी नहीं रह सकती!"
लारा ने उसकी तरफ घूरकर देखा,
"अपने दिमाग के जाले साफ़ करो ऐशली! यह तुम्हारा कोई रिसॉर्ट नहीं है। हम अमेज़न के उस रेनफॉरेस्ट (Jungle) में हैं, जो दुनिया का सबसे घना और खतरनाक जंगल माना जाता है। यहाँ किसी का फोन या जेट नहीं आने वाला।"
"तुम हमसे इस तरह बात नहीं कर सकती!" पॉल ने आगे बढ़ने की कोशिश की, लेकिन पैर के दर्द से वह दोबारा गिर पड़ा।
रोज़ी अपने गंदे जूतों को देखकर रोने लगी,
"मेरे इतने महंगे जूते खराब हो गए... चारों तरफ कीचड़ है। लारा, यह सब तुम्हारी वजह से हुआ है! तुम हमारे सफर में पनौती बनकर आई हो!"
लारा को रोज़ी की इस जाहिलियत पर हंसी आ गई। उसने आगे बढ़कर रोज़ी के कॉलर को कसकर पकड़ा, जिससे रोज़ी की चीख निकल गई। लारा की आँखें अंगारे की तरह चमक रही थीं।
लारा ने चबाते हुए कहा, "सुनो रोज़ी, और तुम सब भी कान खोलकर सुन लो! शहर में तुम्हारे बाप का पैसा चलता होगा, लेकिन इस जंगल को तुम्हारे पैसों से कोई मतलब नहीं है। यहाँ ज़िंदा रहना है, तो अपना ये अमीर एटीट्यूड इसी मलबे में दफन कर दो। वरना इस जंगल के खूंखार जानवर तुम्हारी हडिडयाँ तक नहीं छोड़ेंगे।"
मैट ने बीच-बचाव करते हुए कहा,
"लारा सही कह रही है रोज़ी, शांत हो जाओ। हमें मिलकर सोचना होगा कि अब आगे क्या करना है।"
अमेज़न का पहला ख़तरा—द ब्लड-सकर्स (The Threat of Amazon)
जैसे ही वे बहस कर रहे थे, सोफिया को अचानक अपने पैर पर कुछ रेंगता हुआ महसूस हुआ। उसने नीचे देखा और उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं।
"लारा... वो... वो क्या है?"
सोफिया की घिग्गी बंध गई।
लारा ने नीचे देखा। कीचड़ में से हज़ारों की तादाद में बड़े-बड़े, काले और लाल रंग के 'बुलेट आंट्स' (Bullet Ants) और जंगली पिस्सू मलबे की तरफ बढ़ रहे थे। ब्राजील के इस जंगल की ये चींटियां अगर एक बार काट लें, तो इंसान को ऐसा दर्द होता है जैसे उसे गोली लगी हो, और इंसान बुखार से तड़प उठती है।
"सब मलबे से दूर भागो! पेड़ों की सूखी जड़ों की तरफ चलो! जल्दी!"
लारा ने चिल्लाकर सोफिया का हाथ पकड़ा।
मैट चल नहीं पा रहा था, बिल और टोनी ने उसे सहारा दिया। वे सब पागलों की तरह भागने लगे। लेकिन तभी ऐशली का पैर एक दलदली पौधे में फंस गया।
"बचाओ! मैट मुझे बचाओ!" ऐशली चिल्लाई, लेकिन चींटियों का झुंड उसके पैर की तरफ तेजी से बढ़ रहा था। मैट खुद बेबस था। अब पासा पलट चुका था, घमंडी बच्चे जान की भीख मांग रहे थे और जंगल अपना असली रंग दिखा रहा था... (जारी है )
लेखक _समीर खान