सुबह का वही मंदिर…वही सीढ़ियाँ… वही घंटियों की आवाज़…पर आज…कृतिक के चेहरे पर कुछ अलग था…सुनामी पहले से वहाँ खड़ी थी…जैसे उसे उसका इंतज़ार हो…जैसे ही कृतिक आया…उसने मुस्कुराने की कोशिश की…पर आज उसकी मुस्कान… अधूरी थी…दोनों मंदिर के पीछे उसी पीपल के पेड़ के पास बैठ गए… 🌿
कुछ पल…कोई कुछ नहीं बोला…फिर…
कृतिक (धीरे, गंभीर आवाज़ में) बोला -
मुझे… कुछ महीनों के लिए मुंबई जाना पड़ रहा है…
सुनामी का दिल जैसे एकदम रुक गया…
सुनामी (धीरे से) बोली -
मुंबई…? क्यों…?
कृतिक बोला -
एक case है…थोड़ा बड़ा… और risky भी…
उसकी आँखों में वही निडरता थी…पर इस बार… उसके पीछे छुपा खतरा भी साफ दिख रहा था…
सुनामी (घबराहट के साथ) बोली -
मत जाइए ना…
ये शब्द उसके दिल से निकले थे… बिना सोचे..कृतिक थोड़ा चौंक गया…उसने पहली बार उसे इतने डर में देखा…।
कृतिक (धीरे से मुस्कुराते हुए) बोला -
इंजीनियर साहिबा… ये मेरा काम है…
सुनामी (धीरे, टूटती आवाज़ में) बोली -
पर… अगर आपको कुछ हो गया तो…?
कृतिक कुछ पल चुप रहा…
फिर उसने धीरे से कहा—
तो क्या आप मुझे याद करेंगी…?
सुनामी की आँखें भर आईं…
सुनामी बोली -
मैं… रोज़ करती हूँ…
कृतिक उसे देखता रह गया…उसके चेहरे पर पहली बार…गहराई से खुशी आई…।
कृतिक (धीरे से) बोला -
मैं जल्दी वापस आऊँगा…
सुनामी ने सिर हिलाया…पर दिल मान नहीं रहा था…हवा थोड़ी तेज़ चलने लगी… जैसे मौसम भी बदल रहा हो…कृतिक ने अपनी जेब से एक छोटी सी ring निकली…
कृतिक बोला -
ये… मेरे पास था…आप रख लीजिए…
सुनामी ने उसे देखा…
सुनामी बोली -
ये क्या है…?
कृतिक (हल्की मुस्कान के साथ) बोला -
बस… एक वादा…कि मैं वापस आऊँगा…
सुनामी ने धीरे से वो ring ले ली…उसकी उंगलियाँ हल्का-सा कांप रही थीं…
सुनामी (धीरे से) बोली -
और अगर… आप नहीं आए तो…?
कृतिक थोड़ा करीब आया…
कृतिक (धीरे, आँखों में देखते हुए) बोला -
तो… आप मुझे ढूंढने आ जाना…
दोनों कुछ सेकंड बस एक-दूसरे को देखते रहे…मंदिर की घंटी फिर बजी… पर इस बार…उसकी आवाज़ में जुदाई छुपी थी…
अगले दिन…कृतिक चला गया…अब मंदिर वही था…पर सुनामी अकेली खड़ी थी…आँखें बंद थीं…पर दुआ एक ही थी—
Title song -
मंदिर की सीढ़ियों पे अब मैं अकेली हूँ,
तेरी यादों की चादर में हर पल सिमटी हूँ…
हाथों में वही प्रसाद, आँखों में इंतज़ार,
तू जो दूर गया है, सूना लगे संसार… 💔
घंटी की आवाज़ में अब भी तेरा नाम सुनाई दे,
पर तू पास नहीं, ये दिल हर पल रोए रे…
वो बोली -
भगवान… उन्हें सुरक्षित वापस ले आइए…
और उसके हाथ में…वो छोटी-सी ring…अब उसकी सबसे बड़ी उम्मीद बन चुका था… ❤️ अब मंदिर वही था…घंटियाँ वही बजती थीं…हवा भी वैसी ही चलती थी…पर…सुनामी अकेली थी…।
वो रोज़ आती…उसी जगह खड़ी होती…आँखें बंद करती…।
पर अब उसकी दुआ बदल चुकी थी—
भगवान… कृतिक जी को सुरक्षित रखिए…
मंदिर के पीछे वही पीपल का पेड़… 🌿अब भी था…पर वहाँ बैठने वाला…अब सिर्फ एक था…सुनामी कभी-कभी वहीं बैठ जाती…और धीरे से मुस्कुरा देती…
उसे याद आता—
इंजीनियर साहिबा…
Title song -
हर शाम उसी मंदिर में तेरा इंतज़ार करूँ, तेरे लौट आने की मैं हर दिन दुआ करूँ…
दीप जलाऊँ चौखट पे, नाम तेरा लेकर, कब आओगे पिया मेरे, ये पूछूँ मैं रोकर…
तेरे बिना ये शहर भी अब वीरान सा लगे, हर खुशी भी मुझको अब अनजान सी लगे…
उसका दिल हल्का सा भर आता…लेकिन…अब उनकी कहानी रुकी नहीं थी…बस… थोड़ी दूर हो गई थी…रात होते ही…सुनामी का फोन उसके हाथ में होता…
कृतिक का मैसेज—
मंदिर गई थीं…?
सुनामी तुरंत मुस्कुरा देती…
सुनामी बोली -
हां… और आपकी शिकायत भी की भगवान से…
कृतिक बोला -
क्या कहा…?
सुनामी बोली -
कि आपको जल्दी वापस भेज दें…
स्क्रीन के उस पार…कृतिक हल्का सा मुस्कुरा देता…धीरे-धीरे…उनकी chatting बढ़ने लगी…अब सिर्फ “कैसी हो” और “क्या कर रही हो” तक बात नहीं थी…वो उसे अपने दिन की हर छोटी-बड़ी बात बताती…और कृतिक…अपनी risky दुनिया की झलक…पर हमेशा थोड़ा छुपाकर… ताकि वो डर ना जाए…।
फिर…एक दिन…
कृतिक का मैसेज आया—
Call कर लें…?
सुनामी का दिल तेज़ धड़कने लगा…
वो बोली -
हां…
पहली बार…दोनों की आवाज़…एक-दूसरे तक सीधे पहुँची…कुछ सेकंड…दोनों कुछ बोले ही नहीं…
कृतिक (हल्की मुस्कान के साथ) बोला -
इंजीनियर साहिबा… आवाज़ सुनकर अच्छा लगा…
सुनामी (धीरे से) बोली -
मुझे भी… कृतिक जी…
उस दिन…घंटों बात हुई…अब…कॉल्स रोज़ होने लगीं…और फिर…एक रात…
कृतिक बोला -
Video call…?
सुनामी थोड़ा घबरा गई…पर…उसने हां कर दी…स्क्रीन जली…और…दोनों एक-दूसरे के सामने थे…कुछ पल…बस देखते रहे…
कृतिक (धीरे से) बोला -
आप… आज भी उतनी ही खूबसूरत लग रही हैं…
सुनामी शरमा गई...नजरें झुका लीं…
सुनामी बोली -
आप… थके हुए लग रहे हैं…
कृतिक (हल्का सा हँसते हुए) बोला -
आपकी याद में…
दोनों हँस पड़े…अब…दूरी सिर्फ शहरों की थी…दिलों की नहीं…
मंदिर में वो अकेली थी…पर रात में…वो कभी अकेली नहीं होती थी…अब रिश्ता और गहरा हो चुका था…बिना नाम के…पर पूरी तरह अपना… ❤️
Title song -
तेरी मुस्कान जैसे दीपों की रौशनी, तेरे संग लगे हर दिन दिवाली…
तेरा हाथ जब थामा मैंने, लगा खुदा ने लिख दी कहानी…
दिन बीतते गए…और देखते ही देखते… महीने गुजर गए…अब उनकी दुनिया बदल चुकी थी…सुबह मंदिर…और रात कृतिक…
सुनामी हर छोटी-बड़ी बात उसे बताती…कभी हँसती… कभी शिकायत करती…और कृतिक…वो हर बार उसे हँसाना नहीं भूलता था…।
एक रात…वीडियो कॉल पर…
कृतिक (मुस्कुराते हुए) बोला -
इंजीनियर साहिबा…
सुनामी बोली -
हां कृतिक जी…
कृतिक (थोड़ा playful अंदाज़ में) बोला -
जब मैं वापस आऊँगा ना… आपके लिए एक special gift लाऊँगा…
सुनामी की आँखों में चमक आ गई…
सुनामी बोली -
क्या…?
कृतिक बोला -
सरप्राइज है…
सुनामी (हल्का सा रूठते हुए) बोली -
नहीं बताओगे…?
कृतिक बोला -
नहीं… वरना मज़ा नहीं आएगा…
दोनों हँस पड़े…उस रात…सब कुछ बिल्कुल perfect था…पर…किस्मत को शायद कुछ और मंज़ूर था…
अगले दिन…सुनामी ने सुबह उठते ही फोन देखा…कोई मैसेज नहीं…वो मुस्कुराई…
वो बोली -
शायद busy होंगे…
दिन बीत गया…कोई कॉल नहीं…शाम हो गई…फोन still silent…अब…उसका दिल थोड़ा घबराने लगा…उसने खुद कॉल किया…
📞 The number you are trying to call is switched off…
उसका दिल एकदम से बैठ गया…
वो बोली -
शायद network issue होगा…
उसने खुद को समझाया…पर…अगला दिन…फिर अगला…ना कॉल…ना मैसेज…ना कोई खबर…अब मंदिर में उसकी दुआ बदल गई थी—
वो बोली -
भगवान… वो ठीक तो हैं ना…?
उसकी आँखों में डर साफ दिखने लगा…रात को…वो फोन को सीने से लगाकर बैठती…
जैसे वो खुद से कह रही हो—
बस एक बार… call कर दो…
दिन हफ्तों में बदलने लगे…और अब…उसकी मुस्कान…धीरे-धीरे गायब होने लगी…मंदिर के पीछे वही पीपल का पेड़… 🌿
अब भी था…पर वहाँ बैठकर…अब सुनामी की आँखों से आँसू गिरते थे…
वो बोली -
आपने कहा था… वापस आओगे…
उसकी आवाज़ टूट गई…अब कहानी में तूफान आ चुका था… 🌩️
और सवाल सिर्फ एक था—
कृतिक… आखिर है कहाँ…? 😈
Title song -
ये जो "मंदिर वाला प्यार" है,आज तुझ बिन अधूरा है…
तेरे बिना हर दुआ मेरी, आँसुओं में ही पूरा है…
ये जो "मंदिर वाला प्यार" है, अब बस यादों का सहारा है…
तू दूर किसी और शहर में, और यहाँ दिल बेचारा है… 💔