Pyar ek Ankaha Ahsaas - 4 in Hindi Love Stories by Anita books and stories PDF | प्यार? एक अनकहा एहसास...!! पार्ट 4

The Author
Featured Books
Categories
Share

प्यार? एक अनकहा एहसास...!! पार्ट 4

सुबह विधि कॉलेज के लिए तैयार हो रही थी तब मम्मी ने उसे  बेसन के लड्डु खिलाये। 
विधि के ये फ़ेवरेट हैं उसे बहुत पसन्द 
थे... मगर ये अंश को भी उतने ही पसंद थे तो देख कर मम्मी से कहने लगी.... 

विधि :: अरे,, मम्मी ये कब बनाये आप ने और मुझे अब खिला  रही हो.... 
आप को पता है ना ये मुझे कितने पसन्द है। 

मम्मी : अरे ये मैंने नहीं बनाये तुम्हारी दादी लेकर आयी है। 

विधि : ओह्ह ...!! 

मम्मी : क्या ओह्ह...!! अच्छे नहीं है क्या...?? तुम्हे बहुत पसंद है इसीलिए तो दादी लेकर आयी है... 

विधि : हा.. मम्मी ..!! अगर तुम बनाती तो ज्यादा होते तो अपने सब
दोस्तो को खिलाती उन्हें भी पसन्द है तुम्हारे हाथ के बने बेसन के लड्डू। 

मम्मी : बस, इतनी सी बात... 
तो ये पूरे ले जा मै तेरे लिए और बना दुगी। इतने हो तो जायेंगे ना या पूरी कॉलेज को खिलाना हैं। 

विधि : हा..!! हो जायेंगे आप पैक कर के दो मै निकल रही हु। 

मम्मी : इतनी जल्दी..?? 
थोड़ी देर रुक जा भैया भाभी गाव
वापिस जा रहे है तो उनसे मिल ले। 
इन छुट्टियों मे चलेंगे उनके गाव।। 

विधि : दादा दादी वो कहा है वो नहीं जा रहे। 
नहीं..!! वो अब यही रहेगें जब हम सब जायेंगे तब लेकर चलेंगे उनको। 
तब तक यही है वे दोनों। 

सच में..!! है कहा फिर दादी..? 

बाहर गार्डेन मे है दोनों टहलने के लिए गये थे। 
ओके...!! मै मिल आती हु फिर उनसे, कह कर विधि बाहर गयी और दादी से
लिपट गयी।। 

विधि : दादी अब आप यही रहो कहीं नही जाना हमारे साथ। 

दादी ने भी प्यार से विधि के माथे 
को चूम लिया।। 
हा बेटा अब जब तक तुम्हारी शादी नहीं होती तब तक हम यही है।। 

दादी ने कहा तो विधि शरमा गयी। 

तभी उसे अंश की याद आगयी अरे...!! 

लड्डू लेकर जाने है और मै यही बातों मे लग गयी। वो खुद से ही बोलने लगी। 

दादी : क्यो क्या हुआ..?? 

विधि : कुछ नहीं दादी कॉलेज जाना था देर हो रही हैं। 

दादी : ठीक है बेटा तुम जाओ।। 

विधि दादी के पास से उठ कर अंदर
चली गयी। 

विधि अंदर आयी उसने भैया भाभी 
से थोड़ी देर बाते की और उनको बाय कह कर लड्डू बैग मे रख कर कॉलेज चली गई।। 

वैसे विधि फ्रेंड्स का बहाना बना कर
वो लड्डू अंश को देने गयी थी .. 
कॉलेज नही...
अंश के रूम पर उसे लड्डू देने निकली।। 

आज सबके साथ बातो मे उसे देरी हो गयी थी तो उसने ऑटो लिया और अंश के फ्लैट की तरफ निकल गयी। 

आज थोड़ा मौसम खराब था बारिश
होने के आसार नज़र आरहे थे। 
उसने ऑटो से ही अंश को कॉल किया की वो कॉलेज थोड़ी देरी से जाए क्योकि वो उससे मिलने आरही थी उसके रूम पर। 

गेट के बाहर ही ऑटो रोका और वही गेट के पास ही खड़े होकर विधि ने अंश को नीचे बुलाया। 
लेकिन अंश ने वही बालकनी से उसे उपर आने को कहा लेकिन विधि नहीं मानी।। 

वो पहली बार उसके रूम पर आयी थी तो उसे थोड़ा अजीब लग रहा था अंदर जाने मे। 

अंश उपर से नीचे आया... अरे, 
यहाँ क्यो खड़ी हो उपर आती ना, 
चलो...आओ मेरे साथ। 

विधि : नहीं अंश..!! मुझे कॉलेज भी जाना है पहले ही देर हो गयी है और देर हो जायेगी। 
यह लड्डू तुम्हें पसन्द है इसलिए लेकर आयी थी। ये लो मै चलती हु। 

अंश : ऐसे कैसे मै चली। 
पहली बार आयी हो मेरे घर...कुछ नही तो एक कप कॉफी तो बनती है आओ चलो...वो कह ही रहा था की जोर से बारिश होने लगी।

अंश : देखो मौसम का भी कहना यही है की तुम अंदर आओ अब मेरा नहीं तो इसका तो कहना मानना ही पड़ेगा नहीं तो भीगते हुए कॉलेज जाना पड़ेगा या घर.... अब बोलो कहा जाना है, कम से कम बारिश रुकने तक तो आ ही सकती हो। 
यहाँ रुकना अच्छा नही लगेगा.. 
चलो उपर..!! 


अंश विधि का हाथ पकड़ कर उसे ले गया। 
विधि ना ना करती रही लेकिन अंश के जिद्द के आगे उसकी कुछ ना चली।। 

विधि अंश के कहने पर उसके साथ
चली तो गयी लेकिन उसे बहुत अजीब फिल हो रहा था क्योकि अंश रूम में
अकेला रहता था अब तक बाहर घूमने फिरने मे उसे इतना कुछ नहीं लगा था लेकिन आज पता नहीं क्यों। 

अंश ने रूम का डोर खोला और विधि को अंदर आने को कहा विधि थोड़ा हिचकिचाते हुए अंदर गयी और वही
पास रखे सोफे पर जाकर बैठे गयी।।। 


अंश ने रूम का डोर खोला और विधि को अंदर आने को कहा विधि थोड़ा हिचकिचाते हुए अंदर गयी और वही
पास रखे सोफे पर जाकर बैठे गयी।।

उसने देखा अंश रूम पुरा बिखरा पड़ा था सोफे पर ही कपड़े बाकी सामान भी इधर उधर पड़ा था जिसे देख कर
विधि चुप ना रह सकी और अजीब सा 
मुह बना कर बोल पड़ी।। 

ये.. ये.. क्या हालत बना रखी है रूम की देख कर तो मुझे उल्टी आ रही हैं.. 
याक् ...  
बाहर तो ऐसे सज सवर के आते हो
जैसे कोई हीरो हो और यहाँ देखो तो
पूरे जीरो... 

अंश : अरे टाइम कहा मिलता है इन सब बातो के लिए...सन्डे को पुरा साफ करता हूँ। 
रोज तो पुरा दिन कॉलेज, लायब्ररी या तुम...फिर रात को पुरा थक जाता हूँ तो ये सब ऐसे ही पड़ा रहता हैं। 
वैसे बाते ना करो  जब इतना बुरा लग रहा है तो यह लो झाड़ू और साफ करो सब....वैसे भी ये तुम्हारा भी रूम हैं अकेले मेरा नहीं। 

विधि :  "ओ.. हेल्लो, ये मेरा कैसे हुआ"...?? 
मेरा घर हैं और मै वही रहती हु...!! 

अंश :  तुम्हारा क्यो नही जब मै तुम्हारा हु और फ्यूचर हसबैंड भी..तो आज नहीं तो कल तुम्हारा ही होना हैं ये सब।।


विधि : मै साफ तो कर दूगी लेकिन तुम भी
मेरी हेल्प करोगे... कहते हुए अंश के
हाथों से झाड़ू लेकर सफ़ाई में लग गयी।। 

अंश : मै हेल्प भी करुगा और कॉफी भी बनाऊगा अब तो ठीक है ना।। 

विधि : ओके..!!! जाओ जल्दी बनाओ मै ये सब मिनटो  मे कर लुंगी।। 

विधि ने पूरे हॉल रूम की सफ़ाई कर दी और सोफे पर जाकर बैठे गयी। 

चलो लाओ कॉफी मुझे देर हो रही है..!! 
कहते हुए उसने किचन की तरफ देखा तो अंश वहा था ही नहीं वो बालकनी मे बैठ कर मोबाईल चला रहा था।। 

तो विधि भी वही आगयी। 

विधि : कहा है कॉफी यहाँ मोबाईल मे बन रही है..?? 
विधि ने गुस्से मे कहा। 

अंश :.अरे..हो गया तुम्हारा मुझे लगा देर लगेगी और तब तक कॉफ़ी ठंडी हो जायेगी इसलिए नहीं बनायी। 
अब एक काम और करो ना तुम ही बना लो देखु तो कैसे बनाती हो अब
तुम्हारे घर तो आ नहीं सकता चाय, कॉफी पीने तो तुम यही बना कर पिला दो। 

तुम ना बड़े आलसी हो पता नही कैसे अकेले रहते हो और क्या खाते हो। 
कहते हुए विधि अंदर किचन मे गयी और कॉफी बनाने लग गयी। 

तभी अंश वहा आकर विधि की कमर मे बाहे डालकर उसके गालो पर एक
किस कर देता हैं। 
अंश : कितनी अच्छी लग रही हो यहा मेरे साथ मेरे घर मे मेरे लिए...कॉफी बनाते हुए ऐसा लग रहा है जैसे तुम पहली बार नहीं आयी हो।। 

विधि : अब ज्यादा मस्का ना लगाओ
कॉफी बन गयी अपनी कॉफी पियो मै चली बारिश भी शायद रुक गयी है। 

लेकिन अंश ने विधि की बातों को
अनसुना कर दिया और वो विधि के
काँधे के बाल हटा कर उसे किस करने लगा। 

विधि : अंश..!! ये क्या कर रहे हो..?? लो कॉफी। 

अंश : क्या कर रहे हो मतलब..?? 
प्यार कर रहा हु तुम्हें तुम मेरी हो ...प्यार करते है हम दोनों... कुछ गलत नही है इसमें।। 

विधि : नहीं..!! ये सब गलत है अंश, 
माना कि हम प्यार करते हैं मगर शादी तो नहीं हुई ना अब तक... ये सब शादी के बाद ठीक लगता हैं... जाने दो मुझे।। 

लेकिन अंश नही माना.. 
शादी तो करेगे ही मगर अब थोड़ा तो प्यार करने दो..!! कहते हुए वो जिद्द करने लगा। 

विधि को यह सब पसन्द नहीं था तो उसने अंश को जोर से धक्का दिया।। 

बिहेव यौरसेल्फ..!! "एक बार नही कहा तो सुनते क्यों नहीं"। 
क्या इसी लिए मुझे अब तक रोक रखा था।
वो बहुत गुस्से मे बोल रही थी। 
"बाय..!! जा रही हूँ मै"...कहते हुए उसने अपनी बैग उठायी और डोर की तरफ जाने लगी।। 

अंश को इस बात का बुरा लगा तो उसने  भी गुस्से मे उसे दो चार बाते सुना दी। 

"पता नही कोनसी दुनिया मे जीती हैं"..!! 
दुनिया कहा से कहाँ पहुँच गयी और ये अब तक वही दकियानुसी सोच मे पड़ी है दादी अम्मा बन कर 1940 में... 
प्यार करता हूँ तुमसे इसीलिए बस थोड़ा सा....बहक गया  उसमे इतना आसमान सर पे उठाने की जरूरत नहीं थी। 
उस टाइप का लड़का नहीं हु जैसे तुम समझ रही हो। 
अगर ये सब ही करना होता तो बहुत मिलती है मुझे।। 

तो जाओ ना उनके पास आज के बाद मुझसे बात मत करना जा रही हु मैं। 
बाय... और गुस्से मे दरवाजा उसके मुह पर मार के निकल गयी।। 

पता नहीं ख़ुद को क्या समझता है थोड़ा स्मार्ट क्या हुआ उसे लगता हैं सभी लड़कियाँ इसकी दीवानी है ये कुछ भी करे सब मान लेगी। 

हम भी कुछ कम नहीं है हमारे पीछे भी लाईन लगी है। 
खुद से बोलती हुई वो गेट के बाहर निकल गयी।। 

वो सीधा घर गयी और अपने रूम मे जाकर लेट गयी। 

हाथ मे फोन लिए उसकी फोटो देख कर रोने लगी..."कितना प्यार करती हूँ 
तुम्हे अंश"...!! लेकिन तुम्हें उस प्यार की  कद्र नहीं है। 
तुम्हें बस..?? 
क्या समझा था और क्या निकला कहते हुए वह जोर से रोने लगी। 

रोते रोते कब सो गयी उसे पता भी ना चला।। 

शाम को मम्मी ने डिनर के वक़्त विधि को आवाज लगायी।। 

विधि बेटा खाना लग गया है आओ हम सब वेट कर रहे हैं। 



क्रमश:................