ishq ya junoon 8 in Hindi Love Stories by Anika Ku books and stories PDF | इश्क या जुनून - 8

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इश्क या जुनून - 8

                 "" उदास काजल ""

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                         "सुनीता बच्चों के आगे काजल से कुछ पूछना नहीं चाहती थी। काजल ने हां में सिर हिलाया और बोली......... ठीक है आंटी। दोनों को सुलाकर फिर मैं आपके पास आती हूं।"

" कमरे की लाइट बंद करने पर कमरे में खिड़की से चांद की रोशनी आने लगी थी। बड़े़ से कमरे में एक किंग साइज डबल बेड पर तीन लोग लेटे हुए  थे। काजल और उसके दोनों बच्चे। काजल बेड पर बीच में लेटी थी और उसकी दोनों बाहों पर अपना सिर टिकाए  बच्चे सो रहे थे। दिन भर की थकान की वजह से आज दोनों बच्चे मां का साथ पाकर उससे लिपट कर जल्दी सो गए।"

" वो अपने दोनों बच्चों को अपनी दोनों बाहों पर लिटाए हुए थी। काजल अपने बच्चों को देख रही थी और सोच रही थी।........ कल उसे फिर से मां का सामान लेने के लिए वहां जाना पड़ेगा। उसने सोचा वो ऐसे समय जाएगी जब उसके पापा घर पर हो। उसकी सौतेली मां और बहन भले ही उसे उसकी मां का सामान ना लौटाए  लेकिन उसके पापा उसे जरूर लौटा देंगे। उसने अपने बच्चों को देखा। वो सोते हुए बहुत क्यूट लग रहे थे। अपने बच्चों की वजह से ही तो काजल एक बार फिर मुस्कुरा पाई थी।"

" काजल ने  धीरे से अपनी बाहों पर से बच्चों का सिर उठाकर तकिए पर रखा ताकि उनकी नींद ना खुले। बच्चों को लिटाए - लिटाए उसका एक हाथ सुन् हो गया था। उसने अपने उस हाथ को हिलाया। बेड से नीचे उतर कर एक बार फिर अपने बच्चों को देखा। अभी कोई सपना देख नींद में मुस्कुरा रही थी। काजल ने पास जाकर उसके होंठ को हल्के से चूमा। अभी अपने होठ पर कुछ छूने से टेढ़े-मेढ़े मुंह बनाकर एक बार फिर गहरी नींद में सो गई।"

" जब  काजल ने आंटी के बेडरूम का धीरे से दरवाजा खोला। उसने देखा वो अभी भी जाग रही थी। उनके हाथ  में कोई किताब थी, जिसे वह पढ़ रही थी।"

" काजल को देखकर उन्होंने किताब नीचे रखी और पूछा....... उन्होंने सामान वापस नहीं किया ना?उन्हें भी इस बात पर बहुत गुस्सा आ रहा था। "

"काजल उनके पास बेड पर बैठ गई। उसका चेहरा उस घटना को याद करके उदास हो गया। उसका ध्यान उस हाथ पर गया जिसे उस आदमी ने कसकर पकड़ा था। वो अब भी वहां दर्द महसूस  कर सकती थी।"

" सुनीता........ काजल तुम अपने पिता से मिलो। उनसे बात करो। वो जरूर तुम्हारी मां का सामान तुम्हें वापस कर देंगे। सुनीता उन लोगों की इस हरकत  पर नाराज थी। लेकिन काजल का उदास चेहरा देखकर उसका दिल भर आया।"

" काजल........ आंटी आप मुझे एक  प्रॉमिस करेंगी। किसी को मेरे बच्चों के बारे में मत बताना। खास करके विनोद मेहरा को। उसने आंटी की ओर देखते हुए कहा।"

" सुनीता....... हां तुम बिल्कुल फिक्र मत करो। मैं किसी को नहीं बताऊंगी। अगर किसी ने पूछा तो मैं कहूंगी मैंने पैसे के लिए इन बच्चों की देखभाल का काम हाथ में लिया है। सुनीता जानती थी कि काजल अपने बच्चों की सेफ्टी के लिए ही यह कह रही है। "

"काजल ने हंसते हुए कहा........ थैंक यू आंटी।"

" सुनीता ने महसूस किया कि काजल ऊपर से हंसने की कोशिश कर रही है। उन्होंने काजल से पूछा....... क्या तुम सही में बच्चों का पिता कौन है?नहीं जानती।"

" काजल........ मैं नहीं जानती आंटी और जानना चाहती भी नहीं। काजल इस बारे में कुछ सोचना नहीं चाहती थी।"

" आंटी ने लंबी सांस भर के कहा....... अगर बच्चों के पिता होते तो तुम्हें खुद इतनी मेहनत नहीं करनी पड़ती।"

" काजल....... ऐसी कोई बात नहीं है आंटी।  मेरे बच्चे बहुत प्यारे हैं। उन्हें पाकर मैं बहुत खुश हूं। उन्होंने मुझे जिंदगी जीने का एक मकसद दिया है। यह मेरे लिए मेरी पूरी दुनिया है। काजल ने मुस्कुराते  हुए कहा। उसकी मुस्कुराहट किसी बच्ची की तरह एकदम साफ थी।"

" सुनीता  ने काजल के चेहरे की ओर देखकर सोचा। यह अभी भी बच्ची ही है।"

" अगले दिन घड़ी के अलार्म से काजल की नींद खुली। वो जल्दी से बिस्तर से उतरी। बालों को पकड़ कर रबर बैंड से बांधा और बाथरूम की ओर तेज कदमों से भागी।"

" सुनीता........ काजल तुम उठ गई?सुनीता किचन में नाश्ता बनाने में बिजी थी।"

" काजल........ हां आंटी। जल्दी से रेडी हो जाऊँ फिर बच्चों को उठाती हूं। काजल जल्दी से तैयार होकर बच्चों को उठाने आई। पहले उसने आदि को उठाया।"

" काजल....... चलो मम्मी को गुड मॉर्निंग हग दो। आदि की आंखें अभी भी भारी थी। उसकी नींद पूरी नहीं हुई थी। वो आधी नींद में और क्यूट लग रहा था। काजल उसे गोद में उठाकर बाथरूम में ले गई। वहाँ उसे नहलाया और फिर बाहर निकलकर उसे कपड़े पहनाए। कपड़े पहनाते हुए ना जाने कितनी बार उसके गालों को चूमा।"

" काजल........ चलो अब मम्मा को एक किस दो।"

"आदि काजल की हर बात मानता था। उसने हंसते हुए काजल के गालों पर एक चुम्मी दी। काजल आदि के गीले बालों को हल्के-हल्के सुलझा रही थी। आदि के बाल बनाते हुए उसका चौड़ा माथा देखकर उसे कुछ याद आ गया ..... ये कैसे हो सकता है? दोनों में इतनी सिमिलरिटीज कैसे हो सकती हैं?वो बदमाश जो कल मेनका की मदद कर रहा था। उसके बाल भी तो बिल्कुल ऐसे ही थे। अपने बेटे के बने हुए बाल और  शर्ट पट में देखकर काजल को ऐसे लग रहा था जैसे उसके बेटे और उस आदमी को एक ही सांचे से बनाया गया है। बस दोनों की उम्र में फर्क है। कंघी अब भी काजल के हाथ में थी। वो सोच रही थी नहीं। ऐसा नहीं हो सकता। मैं भी पागल हो गई हूं। ऐसा कैसे हो सकता है? मैं भी क्या सोच रही हूं?"

"आदि ने अपनी मां को कुछ सोचते हुए देखकर पूछा....... मम्मी आप क्या देख रही हो? याद है ना? आपको अभी अभी को भी उठाना है वरना लेट हो जाएगा।"

" काजल ने कहा सॉरी बेटा तुम इतने प्यारे लग रहे हो। बस तुम्हें ही देखते रहने का मन कर रहा था। चलो अब तुम जल्दी से सुनीता आंटी के पास जाकर ब्रेकफास्ट करो। मैं तुम्हारी बहन को उठाती हूं। काजल की लाइफ में इतना कुछ चल रहा था कि ऊपर से वह भले ही शांत दिखे पर  अंदर से वो बहुत परेशान थी। उसके दिमाग में अब भी उस आदमी की तस्वीर बनती बिगड़ती रही। उसका प्यारा सा बेटा ही उसे उस आदमी की याद दिला रहा था। जिसके बारे में वह सोचना भी नहीं चाहती थी। काजल अभी को उठाने के लिए चल दी।"

" अभी को नींद से उठाना इतना आसान नहीं था। वो अभी भी गहरी नींद में सो रही थी।"

" काजल........ अभी चलो उठो नाश्ते का टाइम हो गया है। आंटी ने तुम्हारा फेवरेट हॉट चॉकलेट मिल्क और टोस्ट बनाए हैं। और अभी तुम्हें तैयार भी करना है। "

"[रोने की आवाज़]....नहीं ! अभी ने आंखें बंद करके ही बोला।  उसे अभी और सोना था। "

" काजल...... मैं तुम्हें तुम्हारी फेवरेट ग्रीन एप्पल फ्लेवर वाली लॉलीपॉप भी दूंगी। "

"पर लॉलीपॉप भी अभी का मन नहीं जीत पाई।  अभी ने काजल से थोड़ा रूठते हुए कहा....... नहीं, नहीं मम्मी मैं बहुत थकी हुई हूं। मुझे और सोना है।"



आगे की कहानी जानने के लिए पढें भाग........9