अब इंतज़ार… डर में बदल चुका था…कई दिन बीत गए…ना कोई कॉल… ना कोई मैसेज…सुनामी टूटने लगी थी…एक रात…उसने अचानक फैसला लिया…
वो बोली -
मैं खुद जाऊँगी… मुंबई…
उसके दिल में डर था…पर उससे कहीं ज्यादा…कृतिक को खो देने का खौफ…।
अगले ही दिन…वो मुंबई के लिए निकल गई, भीड़… शोर… भागती हुई ज़िंदगी…सब कुछ नया था उसके लिए…पर उसकी आँखें सिर्फ एक ही चेहरा ढूंढ रही थीं—कृतिक…
काफी पूछताछ के बाद…उसे वो गेस्ट हाउस मिल गया…जहाँ कृतिक ठहरा था…उसका दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था…वो धीरे-धीरे अंदर गई…रिसेप्शन पर जाकर नाम बताया…।
वो बोली -
कृतिक ठाकुर…
रिसेप्शनिस्ट ने उसे देखा…थोड़ा सोचा…
फिर बोला—
वो कई दिनों से नहीं आए…
सुनामी के पैरों तले ज़मीन खिसक गई…
वो बोली -
उनका कमरा…?
कुछ देर बाद…उसे चाबी दे दी गई…उसके हाथ काँप रहे थे…वो धीरे-धीरे उस कमरे तक पहुँची…दरवाज़ा खोला…कमरा खाली था…चारों तरफ सन्नाटा…जैसे कोई अचानक…सब कुछ छोड़कर चला गया हो…सुनामी की आँखों में आँसू भर आए…वो धीरे-धीरे अंदर गई…और फिर…उसकी नजर एक कोने पर पड़ी…कृतिक का सामान....उसका बैग…कुछ कपड़े…टेबल पर बिखरे हुए कागज़…
सुनामी भागकर वहाँ पहुँची…उसने बैग खोला…जैसे…उसमें उसे कृतिक मिल जाएगा…उसके हाथ एक-एक चीज़ को छू रहे थे…जैसे वो उसे महसूस करना चाहती हो…तभी…उसकी नजर एक डायरी पर पड़ी…उसने धीरे से उसे उठाया…पहला पन्ना खोला…
और जैसे ही उसने पढ़ा…उसकी आँखें एकदम से फैल गईं…।
लिखा था -
Case बहुत खतरनाक है…अगर कुछ हो जाए…तो…
उसका दिल तेज़ी से धड़कने लगा…तभी…कमरे के बाहर…किसी के कदमों की आहट आई… 🚶♂️ सुनामी एकदम से सन्न रह गई…
दरवाज़ा धीरे-धीरे खुलने लगा…अब… सच सामने आने वाला था… 😈🔥
दरवाज़ा धीरे-धीरे खुला… 🚪 और…कृतिक अंदर आया…उसकी नजर जैसे ही कमरे में गई…वो ठिठक गया…
वो बोला -
सुनामी…?
उसकी आवाज़ में हैरानी थी....यकीन नहीं हो रहा था…सुनामी ने जैसे ही उसकी आवाज़ सुनी…वो पलटी…कुछ सेकंड…दोनों बस एक-दूसरे को देखते रह गए…जैसे वक्त थम गया हो…और अगले ही पल…सुनामी की आँखों से आँसू बहने लगे…वो भागकर उसके पास आई…
वो बोली -
आप… कहाँ थे…?
उसकी आवाज़ टूट रही थी…गुस्सा… डर… राहत… सब एक साथ…और बिना सोचे…वो कृतिक से लिपट गई… ❤️
कृतिक एकदम सन्न रह गया…उसने कभी उसे ऐसे नहीं देखा था…धीरे-धीरे…उसने भी अपने हाथ उसके चारों तरफ रख दिए…
कृतिक (धीरे से) बोला -
मैं ठीक हूँ… मैं यहीं हूँ…
सुनामी उसके सीने से लगी रो रही थी…
वो बोली -
आपने कॉल क्यों नहीं किया…?
फोन क्यों बंद था…?
आपको पता है मैं कितनी डर गई थी…?
उसके हर सवाल में…प्यार साफ झलक रहा था…कृतिक ने उसकी पीठ पर हल्का-सा हाथ फेरा…
कृतिक (गंभीर होकर) बोला -
Case बहुत खतरनाक हो गया था…”मुझे… कुछ दिन छुपकर रहना पड़ा…।
सुनामी ने थोड़ा पीछे हटकर उसे देखा…
वो बोली -
तो एक बार… बता तो सकते थे…
कृतिक चुप हो गया…
कृतिक (धीरे से) बोला -
अगर मैं आपसे contact करता…तो आपको भी खतरा हो सकता था…।
सुनामी सन्न रह गई…उसने कभी सोचा ही नहीं था…कि वो इतनी बड़ी चीज़ में फंसा है…।
सुनामी (धीरे से) बोली -
तो… आप अकेले सब झेल रहे थे…?
कृतिक ने हल्का सा मुस्कुराया…
वो बोला -
अब नहीं…
दोनों की नजरें मिलीं…उस पल…दोनों समझ गए…ये रिश्ता अब सिर्फ दोस्ती नहीं रहा…
कृतिक (थोड़ा soft होकर) बोला -
वैसे… इंजीनियर साहिबा…आप यहाँ तक… मुझे ढूंढते हुए आ गईं…?
सुनामी ने हल्का सा सिर झुका लिया…
वो बोला -
डर लग रहा था…
कृतिक ने उसे गौर से देखा…
कृतिक (धीरे से) बोला -
या… मेरी याद आ रही थी…?
सुनामी ने उसकी तरफ देखा…और इस बार…
वो चुप नहीं रही—
दोनों…❤️
कमरे में सन्नाटा था…पर दिलों में बहुत कुछ चल रहा था…और तभी…कृतिक को कुछ याद आया…
कृतिक बोला -
रुको… मैंने आपके लिए कुछ लाया है…
सुनामी ने हैरानी से उसकी तरफ देखा…
वो बोली -
Gift…?
कृतिक मुस्कुराया…
वो बोला -
हाँ… वो special वाला…
अब…ये पल सिर्फ मिलन का नहीं था…कुछ और गहरा होने वाला था… 😏✨ कमरे में हल्की खामोशी थी…पर उस खामोशी में भी एक मीठी-सी हलचल थी…कृतिक ने अपना बैग खोला…और उसमें से एक छोटा-सा डिब्बा निकाला…
कृतिक (मुस्कुराते हुए) बोला -
इंजीनियर साहिबा… आपका special gift…
सुनामी की आँखों में हल्की चमक आ गई… ✨ उसका दिल तेज़ी से धड़क रहा था…
वो बोली -
क्या है इसमें…?
कृतिक बोला -
खुद खोलकर देख लीजिए…
सुनामी ने धीरे-धीरे वो डिब्बा खोला…और जैसे ही उसने अंदर देखा…उसकी आँखें ठहर गईं…कश्मीरी चूड़ियाँ… ❤️ गहरे लाल रंग की…नाजुक डिज़ाइन वाली…जिन पर हल्की-सी सुनहरी कारीगरी थी…वो बस उन्हें देखती रह गई…
सुनामी (धीरे से, भावुक होकर) बोली -
ये… मेरे लिए…?
कृतिक (नज़रें उसी पर टिकाए) बोला -
हाँ… सिर्फ आपके लिए…
सुनामी की आँखें हल्की-सी नम हो गईं…
सुनामी बोली -
इतनी खूबसूरत हैं…
कृतिक (धीरे से) बोला -
आप पर ही अच्छी लगेंगी…
उसका दिल एक पल के लिए रुक-सा गया…कृतिक ने धीरे से एक चूड़ी उठाई…
वो बोला -
पहना दूँ…?
सुनामी ने हल्का सा सिर हिलाया…उसने अपना हाथ आगे बढ़ाया…हाथ हल्का-सा काँप रहा था…कृतिक ने बहुत धीरे से…
वो चूड़ी उसके हाथ में पहना दी…उसका स्पर्श…सुनामी के दिल तक उतर गया…एक-एक करके…उसने सारी चूड़ियाँ पहनाईं…
छनन… छनन… 💫 उसकी कलाई में वो चूड़ियाँ जैसे बोल उठीं…
सुनामी उन्हें देख रही थी…और फिर… कृतिक को…
सुनामी (धीरे से) बोली -
इतना खास… क्यों है ये…?
कृतिक कुछ पल चुप रहा…फिर…वो थोड़ा उसके करीब आया…
कृतिक (धीरे, गहराई से) बोला -
क्योंकि… ये सिर्फ एक gift नहीं है…ये… मेरा एहसास है…
सुनामी की साँसें रुक-सी गईं…
कृतिक बोला -
जब भी ये चूड़ियाँ खनकेंगी…आपको मेरी याद आएगी…
अब उसकी आँखों में सीधे देखते हुए—
क्योंकि… आप मेरे लिए… सिर्फ इंजीनियर साहिबा नहीं रहीं…
सुनामी की आँखों में आँसू आ गए…
कृतिक (धीरे से) बोला -
मैं… आपको पसंद करने लगा हूँ… ❤️
कमरे में सन्नाटा छा गया…सुनामी का दिल जोर से धड़क रहा था…
उसने अपनी कलाई में पहनी चूड़ियों को देखा…फिर… कृतिक को…और
धीरे से बोली -
मुझे भी… 💫
उनकी कहानी…अब एक नए मोड़ पर आ चुकी थी…मंदिर से शुरू हुआ रिश्ता…अब दिल तक पहुँच चुका था… ❤️