Incomplete Love: Two Worlds - Part 10 in Hindi Love Stories by sukhvinder Singh Rai books and stories PDF | अधूरी मोहब्बत: दो दुनिया - भाग 10

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अधूरी मोहब्बत: दो दुनिया - भाग 10

**भाग दस: हक़ीक़त का सौदा**"कबीर... हाँ या ना?" पल्लवी की आवाज़ में अपनी आख़िरी उम्मीद को बचाने की एक आखरी तड़प थी। उसकी आँखें कबीर के चेहरे पर जमे उस कटे हुए होंठ के खून को देख रही थीं।कबीर ने अपनी आँखें बंद कीं। बंद आँखों के पीछे उसे नीचे खड़े राजेश के वो तीन थप्पड़ और उनकी वो खौफनाक धमकी सुनाई दी— *'मैं तुझे इसी हवेली के फर्श के नीचे ज़िंदा दफना दूंगा।'* कबीर डरता नहीं था, ना अपनी जान से और ना राजेश की दौलत से। लेकिन वह इस 'छोटे दिमाग वाली' लड़की के उस मासूम भविष्य से डरता था, जो इस शिवाजी कॉलोनी की सीलन भरी दीवारों में दम तोड़ देता।कबीर ने अपनी आँखें खोलीं। उनकी गहराई में अब एक बहुत ही अजीब, ठंडा और हिंसक सा सन्नाटा था। उसने अपनी कलाई को पल्लवी की पकड़ से एक झटके में आज़ाद किया।"नहीं पल्लवी। मेरा जवाब ना है," कबीर की आवाज़ इतनी सपाट थी जैसे उसने कोई पत्थर ज़मीन पर फेंका हो।पल्लवी का चेहरा एकदम से पथरा गया। "कबीर... तुम झूठ बोल रहे हो। तुम्हारी आँखें...""मेरी आँखें सिर्फ ये देख रही हैं कि इस एक नाटक की वजह से मुझे नीचे तीन थप्पड़ खाने पड़े हैं," कबीर ने बहुत ही बेरहमी से अपनी ठुड्डी का खून पोंछते हुए कहा। उसके लहज़े में अचानक आया यह क्रूर बदलाव पल्लवी के लिए किसी तेज़ाब जैसा था। "तू क्या समझती है पल्लवी? ये जो तूने कल से खाना-पीना छोड़ रखा है, ये मेरे लिए प्यार है? नहीं। ये तेरी रईसी का घमंड है, एक ऐसी ज़िद जिसे अपनी मनपसंद चीज़ ना मिले तो वो रोने लगती है। मुझे तेरी इस अमीरज़ादों वाली नौटंकी का हिस्सा नहीं बनना।""कबीर!" पल्लवी एक चीख के साथ वहीं फर्श पर घुटनों के बल बैठ गई। उसका दिल सच में इस बार कांच की तरह टूट कर बिखर चुका था।कबीर ने एक पल भी उसकी तरफ नहीं देखा। वह मुड़ा, उसने कमरे का भारी दरवाज़ा पूरा खोला और पल्लवी को उसी हाल में छोड़कर तेज़ कदमों से सीढ़ियों की तरफ बढ़ गया।नीचे ड्रॉइंग रूम में राजेश, सुमन और रोहन सांस रोके ऊपर देख रहे थे। जैसे ही कबीर के भारी बूट्स की आवाज़ सीढ़ियों पर गूंजी, राजेश का हाथ अनजाने में ही अपनी जेब की तरफ गया।कबीर नीचे आया। उसके चेहरे पर ना कोई शिकन थी, ना डर।"दरवाज़ा खुल चुका है। वो अंदर है," कबीर ने राजेश के ठीक सामने खड़े होकर कहा।सुमन एक पल भी गंवाए बिना रोते हुए ऊपर की तरफ दौड़ीं, "पल्लवी! मेरी बच्ची!" रोहन भी सुमन के पीछे-पीछे ऊपर भागा।अब उस विशाल हॉल में सिर्फ राजेश और कबीर आमने-सामने थे। राजेश ने कबीर को ऊपर से नीचे तक देखा, फिर अपनी जेब से एक बहुत ही कीमती, काले रंग का चेकबुक निकाला। उन्होंने उस पर एक बहुत बड़ी रकम लिखी, चेक को फाड़ा और कबीर के सीने पर दे मारा।"ये तुम्हारी कीमत है कबीर। उस बंद दरवाज़े को खोलने की, और मेरी बेटी की जान बचाने की," राजेश की आवाज़ में एक रईस का वही पुराना, घमंडी ज़हर वापस आ चुका था। "इसे लो, और आज के बाद पल्लवी की ज़िंदगी के आस-पास भी मत दिखना। वरना जो मैंने ऊपर कहा था, वो करने में मुझे एक सेकंड भी नहीं लगेगा।"कबीर ने नीचे गिरे उस सफेद कागज़ के टुकड़े को देखा, जिस पर लिखे जीरो किसी आम इंसान की पूरी नस्लें खरीद सकते थे। कबीर के होंठों पर एक बहुत ही खतरनाक, रहस्यमयी मुस्कान आई। उसने झुककर उस चेक को उठाया, उसे मोड़ा और अपनी शर्ट की सामने वाली जेब में रख लिया।"बाप की दौलत बहुत बड़ी चीज़ होती है मिस्टर राजेश," कबीर ने अपनी भूरी आँखों को राजेश की आँखों में गड़ाते हुए कहा। उसकी आवाज़ में अब एक ऐसा सस्पेंस था जो राजेश के रीढ़ की हड्डी में एक ठंडी सिहरन छोड़ गया। "शायद इतनी बड़ी, कि ये कुछ ऐसी हकीकतें भी छुपा सकती है जो आप कभी देखना नहीं चाहेंगे। चेक के लिए शुक्रिया।"कबीर बिना सलाम किए, भारी कदमों से हवेली के मुख्य दरवाज़े से बाहर निकल गया।राजेश वहीं खड़े कबीर की उस आख़िरी लाइन के बारे में सोचकर अंदर तक हिल गए थे। 'कुछ ऐसी हकीकतें जो आप देखना नहीं चाहेंगे...' इस बात का क्या मतलब था? क्या कबीर पल्लवी के बारे में कुछ ऐसा जानता था जो खुद उसके माता-पिता नहीं जानते थे? या कबीर के इस शांत चेहरे के पीछे कोई बहुत बड़ा खेल चल रहा था?तभी ऊपर से सुमन की एक दिल दहला देने वाली चीख गूंजी, "राजेश! जल्दी ऊपर आओ! पल्लवी... पल्लवी ये क्या कह रही है!"राजेश के पैरों के नीचे से ज़मीन खिसक गई। वह पागलों की तरह सीढ़ियों की तरफ दौड़े।ऊपर कमरे के अंदर, पल्लवी बेड के सहारे बैठी थी, उसकी आँखें पूरी तरह खुली थीं और वह बिना पलक झपकाए दीवार के एक खाली कोने को घूरते हुए अजीब तरीके से हंस रही थी। रोहन और सुमन उसे हिला रहे थे, लेकिन वह किसी गहरे सदमे में जा चुकी थी।उधर, हवेली के बाहर, कबीर ने अपनी बुलेट को किक मारी। इंजन की भारी आवाज़ के साथ ही उसने अपनी जेब से वो करोड़ों का चेक निकाला, उसे बीच से दो टुकड़ों में फाड़ा और हवा में उड़ा दिया। बारिश के पानी में भीगता हुआ वो चेक कीचड़ में मिल गया।कबीर ने बुलेट का एक्सीलेटर खींचा और वह अँधेरी सड़क पर गायब हो गया, अपने पीछे एक ऐसा खौफनाक राज़ छोड़कर जिसकी भनक अब पूरी हवेली को लगने वाली थी।**सुखविंदर की कलम से**