A Simple Love Story - 3 in Hindi Love Stories by Anamika books and stories PDF | एक आम सी प्रेम कहानी - 3

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एक आम सी प्रेम कहानी - 3

एक आम सी प्रेम कहानी 
भाग-३
लेखिका "अनामिका"
भाग-३: पन्नों की खुशबू और एक खट्टी-मीठी तकरार
​°लड़के का नजरिया (मलय - कॉलेज सेकंड ईयर स्टूडेंट)
​किताबों की उस भीनी-भीनी खुशबू के बीच मैं काउंटर पर अपनी बिलिंग का इंतजार कर रहा था। तभी अचानक कोई मुझसे आकर टकराया। मैं थोड़ा झल्लाकर मुड़ा, लेकिन सामने देखते ही मेरी सारी शिकायत हवा हो गई—यह वही लड़की थी! किस्मत शायद आज मुझ पर कुछ ज्यादा ही मेहरबान थी। इस बार मैंने मौका हाथ से जाने नहीं देने का फैसला किया। जैसे ही उसने काउंटर पर अपनी किताब रखी, मैंने अपनी किताब भी उसके ठीक बगल में टिका दी और मुस्कुराकर कहा, "वैसे, बार-बार इस तरह टकराने को इत्तेफाक कहें या कुछ और? मैं मलय।"
​वह थोड़ी झिझकी, उसने मुझे ऊपर से नीचे तक देखा, और फिर उसके होंठों पर एक प्यारी सी मुस्कान आई, "निहारिका।" आखिरकार, मुझे उस चेहरे का नाम पता चल गया था। बात को आगे बढ़ाने और इस मुलाकात को हमेशा के लिए पक्का करने के लिए मैंने तुरंत जेब से अपना फोन निकाला और कहा, "निहारिका... काफी अच्छा नाम है। वैसे, क्या मैं तुम्हारा नंबर ले सकता हूँ? ताकि अगली बार टकराने के लिए हमें किसी बुकस्टोर का इंतजार न करना पड़े।"
​अनाया ने कुछ सोचते हुए अपनी जींस की जेबें टटोलीं, फिर अपने बैग में हाथ मारा और थोड़ी सी मासूमियत और लाचारी के साथ बोली, "वह... एक्चुअली मेरे पास अभी फोन नहीं है।" मुझे लगा कि यह शायद पीछा छुड़ाने का कोई पुराना पैंतरा है। तो मैंने भी थोड़ा सा ढीठ रुख अपनाया, चेहरे पर एक टेढ़ी सी मुस्कान लाई और हल्के मजाकिया अंदाज में कहा, "ओह, अच्छा! हां, सही भी है... वैसे भी तुम अभी छोटी बच्ची लगती हो, इस उम्र में फोन की क्या जरूरत! कहीं गेम खेलते हुए पकड़ी गई तो मम्मी डांटेंगी ना?"
​यह सुनते ही उसकी आंखें बड़ी-बड़ी हो गईं। उसके चेहरे की मासूमियत गायब हो गई और उसकी जगह तीखे गुस्से ने ले ली। उसे इस तरह चिढ़ते और पैर पटकते देखना मुझे अंदर ही अंदर बेहद मजेदार लग रहा था।
​°लड़की का नजरिया (निहारिका - 9 विं क्लास)
​अपनी पसंदीदा किताब पाकर मैं हवा में तैर रही थी। मैं जल्दी में काउंटर की तरफ बढ़ी, पर ध्यान न रहने की वजह से एक शख्स से ज़ोर से टकरा गई। मेरी किताब मेरे हाथ से छूटते-छूटते बची। मैंने झिझकते और माफी मांगने के लिए ऊपर देखा, और मेरी धड़कनें पल भर के लिए थम गईं—यह वही लड़का था! इस बार उसने बिना देर किए आगे बढ़कर शुरुआत की, "वैसे, बार-बार इस तरह टकराने को इत्तेफाक कहें या कुछ और? मैं मलय।"
​उसका यह बेबाक और आत्मविश्वास से भरा अंदाज मुझे थोड़ा अच्छा भी लगा और अजीब भी। मैंने भी अपनी झिझक को पीछे छोड़ते हुए अपनी किताब उठाई और कह दिया, "निहारिका।" खुद आगे बढ़कर उसे अपना नाम बताना मुझे एक अलग ही तरह का अहसास दे रहा था, दिल में एक अजीब सी हलचल थी।
​तभी उसने अपनी जेब से फोन निकाला और बेहद कैजुअल होकर मुझसे मेरा नंबर मांग लिया, "क्या मैं तुम्हारा नंबर ले सकता हूँ?" मैं सच में आज हड़बड़ी में अपना फोन घर पर ही भूल आई थी। मैंने पूरी ईमानदारी से उसे सच बताना चाहा और कहा, "वह... एक्चुअली मेरे पास अभी फोन नहीं है।"
​पर इस मलय नाम के लड़के ने जो आगे कहा, उसने मेरा पारा सीधे सातवें आसमान पर पहुंचा दिया! वह एक बेहद अजीब और खिसियानी मुस्कान के साथ बोला, "ओह, अच्छा! हां, सही भी है... वैसे भी तुम अभी छोटी बच्ची लगती हो, इस उम्र में फोन की क्या जरूरत..."।
​बच्ची? उसने मुझे बच्ची कहा! और मम्मी की डांट की धमकी दे रहा है? उसकी इस बदतमीजी और घटिया मजाक पर मुझे इतना गुस्सा आया कि मेरा मन किया मैं अपनी भारी-भरकम हार्डकवर किताब उसके सिर पर दे मारूं। मैंने अपनी भौहें सिकोड़कर उसे एक तीखी नजर से घूरा और कहा, "तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे बच्ची कहने की? अपने पास रखो अपना यह एटीट्यूड!" मैंने काउंटर पर पैसे फेंके, अपनी किताब उठाई और गुस्से में पैर पटकते हुए वहां से बाहर निकल गई। मलय... नाम तो अच्छा था, पर लड़का बेहद बदतमीज निकला!
°लड़के का नजरिया (उत्साह और राहत)
​लड़का इस समय सातवें आसमान पर है। बुक स्टोर की मुलाकात के बाद उसका दिल तेजी से धड़क रहा है। वह इस बात से बेहद खुश और राहत में है कि आखिरकार उसे लड़की का नाम पता चल गया। लड़की का वह थोड़ा सा गुस्सा होना या रूठना उसे बुरा नहीं लगा, बल्कि उसे वह अदा और भी प्यारी लगी। वह घर लौटकर बस उसी पल को याद कर के मुस्कुरा रहा है और आगे की मुलाकातों के सपने बुन रहा है।
°​लड़की का नजरिया (मीठी नाराजगी और छुपा हुआ उत्साह)
​लड़की बाहर से थोड़ी नाराज और गुस्से में दिख रही है—शायद इसलिए क्योंकि लड़के ने नाम पूछने में बहुत देर कर दी या उसका तरीका थोड़ा अजीब था। लेकिन अंदर ही अंदर उसका दिल भी खुशियों से झूम रहा है। उसकी नाराजगी सिर्फ एक मुखौटा है, जिसके पीछे एक गहरी तसल्ली छिपी है कि लड़के ने आखिरकार पहल की। वह घर आकर अपनी इसी 'मीठी नाराजगी' पर खुद ही मुस्कुरा रही है और नाम पता चलने की खुशी को छुपाने की कोशिश कर रही है।
​यह पल दोनों के लिए ही एक नई और खूबसूरत शुरुआत का अहसास है, जहाँ गुस्सा भी पहले प्यार को बढ़ा रहा है।
तीसरा भाग समाप्त, कहानी जारी हे....