Love Came as Death - 5 in Hindi Love Stories by sukhvinder Singh Rai books and stories PDF | मौत बनके आया प्यार - 5

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मौत बनके आया प्यार - 5

# एपिसोड 5: जंजीरों की कैद और कर्मों की सजाविक्रम की चिता की आग अभी ठीक से ठंडी भी नहीं हुई थी कि फाजिल्का के उस घर में एक और ज़िंदा इंसान राख बन गया। पिता की मौत के उस गहरे सदमे ने आर्यन के दिमाग की आखिरी नस भी तोड़ दी, जो उसे इस दुनिया की हकीकत से जोड़े रखती थी।अब वो पुराना आर्यन कहीं खो चुका था। उसका मानसिक संतुलन पूरी तरह से बिखर चुका था। वह रात-रात भर जागकर बिना पलक झपकाए घर के बंद दरवाज़े को बस घूरता रहता। फिर अचानक एक दिन, किसी सुधि-बुधि के बिना, वह नंगे पैर पागलों की तरह घर से भाग निकला। वह शहर की सड़कों पर हाँफते हुए भागता और हर आती-जाती लड़की के चेहरे में बस रिया को तलाशता रहता। कभी वह रेलवे स्टेशन के किसी अंधेरे कोने में सिकुड़ा हुआ मिलता, तो कभी बस स्टैंड पर बदहवास घूमता हुआ पाया जाता। सनी और लकी उसे ढूंढ-ढूंढ कर थक जाते और हर बार संभाल कर वापस घर लाते।जब उसका यह बेकाबू होकर भागना और खुद को चोट पहुँचाना हद से ज्यादा बढ़ गया, तो एक दिन रोते हुए सनी और लकी को वो खौफनाक कदम उठाना पड़ा, जिसके बारे में सोचते ही उनकी रूह कांप उठी थी।उन्होंने अपने उसी जिगरी यार के हाथों और पैरों में लोहे की भारी-भरकम जंजीरें (सांकलें) कसकर बांध दीं।उस कमरे का नजारा इतना डरावना और दिल को चीर देने वाला था कि वहां पत्थर भी खून के आंसू रो सकते थे। आर्यन की दाढ़ी और बाल बहुत बढ़ चुके थे, बदन पर कपड़े फटे हुए थे और आँखें पूरी तरह अंदर धंस चुकी थीं। जब होश आता, तो वह उन भारी जंजीरों को जोर-जोर से खींचता, दीवारों पर अपना सिर पटकता और पागलों की तरह चीखते हुए घंटों फूट-फूट कर रोता रहता। "रिया... तू कब वापस आएगी? रिया... बापू मर गए... तू आजा यार, एक बार आ जा!" उसकी वे दर्दनाक चीखें पूरे मोहल्ले का सीना चीरकर रख देती थीं।आर्यन की इस दयनीय और तड़पती हालत को देखकर सनी का कलेजा फट गया। उसने हिम्मत करके एक बार फिर सात समंदर पार रिया के नंबर पर फोन मिलाया।घंटी जाने के बाद जब उधर से फोन उठा, तो सनी की आवाज कांप रही थी, "रिया... भगवान के लिए एक बार वापस आ जा... वो पागल हो चुका है, इस वक्त लोहे की जंजीरों में बंधा तड़प रहा है। सिर्फ तेरी एक झलक उसकी जान बचा सकती है, प्लीज आ जा!"लेकिन सात समंदर पार बैठी रिया के दिल पर जैसे पत्थर की सिल्लियां रखी थीं। उसने बिना एक पल सोचे बेहद बेरहमी से जवाब दिया, "तुम लोग मुझे बार-बार कॉल करना बंद करो सनी। मैंने यहाँ एक रईस एनआरआई (NRI) से शादी कर ली है और अपनी जिंदगी में आगे बढ़ चुकी हूँ। मैं अब किसी आर्यन को नहीं जानती और न ही जानना चाहती हूँ।" और इतना कहकर उसने फोन काट दिया।यह फोन कॉल आर्यन के लिए वो आखिरी खंजर साबित हुआ, जिसने उसकी दुनिया का बचा-खुचा वजूद भी हमेशा के लिए खत्म कर दिया।...यूँ ही वक्त गुजरता गया और देखते-देखते छह महीने बीत गए।पूरा घर अंदर से पूरी तरह उजड़ चुका था। नेहा की शादी हमेशा के लिए टूट चुकी थी, और माँ सावित्री सांसें लेते हुए भी एक ज़िंदा लाश बनकर रह गई थीं। लेकिन इस भयंकर और वीरान तबाही के बीच भी दो लोग ऐसे थे जो आँधी-तूफान की तरह आर्यन की ढाल बनकर खड़े रहे—सनी और लकी। उन दोनों ने अपनी पढ़ाई, अपना काम-काज और अपनी पूरी जिंदगी छोड़कर सब कुछ दांव पर लगा दिया था। वे अपने हाथों से उन जंजीरों में जकड़े आर्यन को नहलाते, प्यार से अपने हाथों से खाना खिलाते और रात-रात भर उसके पास बैठकर उसके बहते हुए आंसू पोंछते। बहन नेहा और वो दोनों पक्के यार आर्यन की दिन-रात सेवा में जुटे रहे। उन्होंने हर मुश्किल हालात में अपने यार का साथ नहीं छोड़ा।लेकिन कहते हैं न कि ऊपर वाले के घर देर है, अंधेर नहीं। इंसान इस दुनिया में जैसा बीज बोता है, उसे एक न एक दिन वैसा ही फल काटना पड़ता है।रिया ने सिर्फ पैसे, शोहरत और अमेरिका की चकाचौंध के लालच में जिस आदमी से शादी की थी, वह निकला एक नंबर का बड़ा धोखेबाज़। शादी के कुछ ही महीनों बाद उस मतलबी इंसान ने रिया का असली चेहरा देखते ही उसे घर से धक्के मारकर बाहर निकाल दिया और किसी और के साथ अपनी नई जिंदगी बसा ली।आज रिया अमेरिका की सर्द सड़कों पर बिल्कुल अकेली, बेसहारा और पाई-पाई को मोहताज होकर बर्बाद हो चुकी थी। उसे ठीक वही दर्द और धोखा मिला था, जो उसने कुछ समय पहले अपने पैरों तले कुचलकर आर्यन को दिया था। उस भयानक अकेलेपन, लाचारी और ठोकरों के दर्द के बीच अचानक उसे आर्यन का वही सच्चा और बेपनाह प्यार शिद्दत से याद आया, जिसे उसने ठुकरा दिया था।एक दिन अचानक सनी के मोबाइल की घंटी बजी। स्क्रीन पर चमकता हुआ नाम रिया का था।जैसे ही सनी ने फोन की स्क्रीन पर अंगुली फेरकर कॉल रिसीव की, उधर से रिया की फफक-फफक कर रोने की दर्दनाक आवाज गूँजी। "मुझे माफ कर दो सनी... मुझे मेरे बुरे कर्मों की सजा मिल गई है। मेरे पति ने मुझे छोड़ दिया है और मैं पूरी तरह बर्बाद हो गई हूँ... सड़क पर आ गई हूँ। मुझे मेरे आर्यन के पास वापस जाना है... मैं आज ही की पहली फ्लाइट पकड़कर आ रही हूँ... मुझे बचा लो सनी!"सनी ने रिया की एक भी बात पूरी नहीं सुनी। उसने बिना एक शब्द बोले, सीधे फोन काट दिया।अगले दिन अमेरिका से उड़ने वाली फ्लाइट ने दिल्ली एयरपोर्ट पर लैंड किया। रिया की सू सूजी आँखों से पश्चाताप और आंसुओं की बाढ़ आई हुई थी। एयरपोर्ट के बाहर कदम रखते ही उसने फाजिल्का पहुँचने के लिए फौरन एक टैक्सी बुक की। वह कार की पिछली सीट पर गुमसुम बैठी थी, और खिड़की के बाहर पीछे छूटते हुए तेज रफ्तार रास्तों को देख रही थी। उसका दिल इस खौफ से जोर-जोर से धड़क रहा था कि आखिर वह किस मुंह से अपने उस बर्बाद हो चुके आर्यन का सामना करेगी...