MTNL ki ghanti in Hindi Drama by kalpita books and stories PDF | MTNL की घंटी - 34

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MTNL की घंटी - 34

डॉक्टर प्रकाश 22 साल के मरीज की जिम्मेदारी अनन्या को सौंपकर प्रोग्राम मे  चले गए।
रात भर ICU में अनन्या ने पूरी तन्मयता से उसकी हालत पर नज़र रखी।
भोर के करीब पाँच बजे थकान ने उसे घेर लिया। कुर्सी पर बैठे-बैठे ही कब उसकी आँख लग गई, उसे पता ही नहीं चला।

इसी बीच डॉक्टर प्रकाश आ गए। उन्होंने पहले सीधे मरीज को देखा, रिपोर्ट्स चेक कीं, दवाइयाँ बदलीं।
फिर उनकी नज़र अनन्या पर पड़ी। सोई हुई अनन्या की  कुर्सी के हत्थे पर हाथ रखकर  प्रकाश उसके मुँह के पास झुक गए… वह अपना चेहरा उसके  बिल्कुल करीब ले गये।

जैसे ही अनन्या ने अपने चेहरे पर किसी की साँसों की हल्की-सी गर्माहट महसूस की, वह झटके से उठ बैठी।

“सर… आप… आप कब आए?” उसने घबराई आवाज़ में पूछा।

प्रकाश होंठों पर हल्की मुस्कान लिए बोले—
“जब आप नींद की गोद में बैठकर… सपनों के गाँव किसी से मिलने चली गई थीं।”

अनन्या चौंककर बोली—
“वाह, 'श्री', आपको तो शायरी भी आती है!”

प्रकाश का चेहरा अचानक सख़्त हो गया।
“शट अप! तुम्हें ज़िम्मेदारी दी है, उसे निभाना था या सोना था ।”

प्रकाश की आवाज़ कड़ी थी—
“तुम्हें पता था कि मरीज अभी पूरी तरह स्थिर नहीं है… फिर भी ड्यूटी पर सो गई? यह ICU है, यहाँ एक सेकंड की चूक भी जान ले सकती है।”

अनन्या हड़बड़ाई—
“सर… वो ठीक थे। पूरी रात मैंने उनकी देखभाल की है। बस… आख़िर में आँख लग गई।”

प्रकाश ने ठंडी नज़र से उसकी तरफ देखा—
“बहाने मत बनाओ, डॉ. अनन्या। तुम्हारी  ड्यूटी पर सोने की रिकॉर्डिंग मेरे पास है। सब दिख रहा है— तुम कुर्सी पर सो रही थीं।”

अनन्या का चेहरा उतर गया।
“सर, प्लीज़… मैंने जानबूझकर लापरवाही नहीं की। मैं थक गई थी।”

प्रकाश ने सख़्त लहजे में कहा—
“थकान तुम्हारे पेशे का हिस्सा है। लेकिन लापरवाही उसकी कीमत नहीं हो सकती। अब इस पर फैसला डीन करेंगे… तुम्हारी ‘टॉपर’ इमेज के साथ तुम्हारी ज़िम्मेदारी भी तौली जाएगी।”

अनन्या  भी अब  गुस्से में बोली –
“हां, चलिए डीन के पास… जब मैंने कोई गलती ही नहीं की तो डरने की क्या बात है?”

प्रकाश ने शांत लेकिन सख़्त लहजे में कहा –
“डीन इस समय हॉस्पिटल में नहीं हैं।”

अनन्या ने पलटकर जवाब दिया –
“तो ठीक है, अब मेरा घर जाने का टाइम हो गया है।”

प्रकाश ने तुरंत रोकते हुए कहा –
“नहीं… तुम्हारी सज़ा यही है कि आज तुम घर नहीं जाओगी। पूरा दिन यानी सुबह से शाम तक ड्यूटी दोगी।”

अनन्या चौंक गई –
“पर सर…”

प्रकाश ने तीखे स्वर में कहा –
“कह दिया ना! आज शाम की ड्यूटी ख़त्म करने के बाद ही जाओगी।”

अनन्या की आंखों में नमी तैर गई।
“सर… मैंने सच में कोई गलती नहीं की। आप बिना वजह मुझे क्यों रोक रहे हैं? ये सज़ा है या आपकी ज़िद?”

प्रकाश ने गहरी सांस लेते हुए कहा –
“अनन्या, ICU मज़ाक की जगह नहीं है। तुम्हारी ज़रा-सी लापरवाही किसी की जान ले सकती है। तुम डॉक्टर हो, यहां इमोशन्स नहीं, प्रोफेशनलिज़्म चाहिए।”

अनन्या ने होंठ भींच लिए।
“लेकिन सर, पूरी रात ड्यूटी… मेरी भी एक सीमा है। इंसान हूँ मैं…”

प्रकाश ने उसकी ओर सख़्त नज़र डालते हुए कहा –
“और इंसान वही बचेगा, जिसकी ज़िम्मेदारी तुम्हारे कंधों पर है। समझी? आज की ड्यूटी तुम्हारे लिए सज़ा नहीं, सीख है। और तुम जाओगी तभी… जब मैं कहूँगा।”

अनन्या ने सिर झुका लिया। उसकी आंखों से एक आँसू चुपके से गिर पड़ा, मगर उसने अपनी आवाज़ मजबूत कर ली।
“ठीक है सर… मैं रुकूंगी।”

OPD के बाद   डॉक्टर रुद्र ICU में आए तो चौंक कर बोले –
“अरे डॉक्टर अनन्या, आप यहां?घर नही गयी? आपकी तो रात की ड्यूटी नहीं थी न?”

अनन्या ने धीमे स्वर में कहा –
“डॉक्टर प्रकाश ने… punishment दी है।”

रुद्र ने भौंहें चढ़ा लीं –
“क्या? मैं बात करता हूँ अभी उससे ।”

अनन्या ने तुरंत हाथ जोड़ दिए –
“नहीं सर, प्लीज़… कोई बात नहीं। मैं मैनेज कर लूंगी।”

रुद्र ने हल्की मुस्कान के साथ समझाया –
“देखो अनन्या, उसके पेरेंट्स अलग रहते हैं। इस वजह से वो थोड़ा डिस्टर्ब रहता है… और गुस्सा दूसरों पर निकाल देता है।”

अनन्या ने आधी मुस्कुराहट के साथ कहा –
“मतलब… खड़ूस है पूरे!”

दोनों ज़ोर से हँस पड़े।
ICU का भारी-भरकम माहौल भी उस पल कुछ हल्का हो गया।

रुद्र ने अचानक याद करके कहा –
“हाँ, एक बात और… वो दो दिन के लिए जा रहा है देहरादून, अपने चाचा से मिलने। तब तक आराम से रहना।”

अनन्या ने चैन की सांस ली।
“मतलब दो दिन की छुट्टी… खड़ूस सर से।”

दोनों फिर हंस पड़े।
---–-------

लंच टाइम मे प्रकाश और रुद्र कैफ़ेटेरिया आ गये
कैफ़ेटेरिया में चाय की मेज़ पर बैठे रुद्र ने कप उठाते हुए कहा –
“प्रकाश, तुम अनन्या पर थोड़ा नरम रहो। वो नई है, सीखने में टाइम लगेगा।”

प्रकाश ने बिना नज़र उठाए जवाब दिया –
“डॉक्टर है वो, स्टूडेंट नहीं। यहाँ एक गलती किसी की जान ले सकती है।”

रुद्र ने गहरी सांस लेकर कहा –
“जानता हूँ… पर तुम अपना गुस्सा उस पर मत उतारा करो। वो समझदार है, मेहनती है… बस थोड़ी भावुक ज़रूर है। वक्त के साथ सब सीख जाएगी।”

प्रकाश ने कप टेबल पर रखा और कुछ देर चुप रहा।
फिर धीमे से बोला –
“शायद तुम सही कह रहे हो… लेकिन मैं चाहता हूँ कि वो मज़बूत बने। भावनाओं से ऊपर उठकर।”

रुद्र मुस्कुराया –
“मज़बूत बनने के लिए ज़रूरी नहीं कि उसे तोड़ो, प्रकाश। कभी-कभी सपोर्ट भी इंसान को मज़बूत बना देता है।”

प्रकाश ने हल्की मुस्कान दी, लेकिन कुछ बोला नहीं।
कैफ़ेटेरिया की मेज़ पर कुछ देर चुप्पी रही।
रुद्र ने बात को हल्का करने की कोशिश की –
“प्रकाश, कभी-कभी जूनियर्स को मौके देने चाहिए। सब सीख जाते हैं। तुम जितना सख़्त रहोगे, उतना ही वो डरेंगी।”

प्रकाश ने चाय का कप साइड में रखते हुए कहा –
“अच्छा छोड़… मैं कल जा रहा हूँ, देहरादुन्।”

प्रकाश ने गहरी सांस ली और कहा
“हाँ… बाबा जी 407 में भर्ती हैं। उनकी हालत बहुत खराब है। वो मुझे अपने दादा जैसे लगते हैं। दो दिन उनके साथ रहना ज़रूरी है तुम्हारा"

रुद्र ने सिर हिलाया –
“ठीक है, मैं संभाल लूंगा। तुम बेफ़िक्र होकर जाओ।”

प्रकाश ने थोड़ी सख़्ती से कहा –
“लेकिन ध्यान रहे… अनन्या उनके पास भी फटकने न पाए। समझे?”
रुद्र ने ऑंखे सिकोड़ कर कहा
"तुम अनन्या के पीछे पड़ना नही छोड़ोगे..इतनी अच्छी इंसान और डॉक्टर है"

प्रकाश ने कप में आख़िरी घूँट लिया और गंभीर आवाज़ में कहा –
“रुद्र, तुम जानते हो मैं समझौता नहीं करता। अगर अनन्या ने दोबारा कोई गलती की… तो मुझे सख़्त एक्शन लेना पड़ेगा।”

रुद्र ने उसकी तरफ़ गहरी नज़र से देखा –
“सख़्ती और जिद में फर्क होता है, प्रकाश। कहीं ऐसा न हो कि वो गलती से ज़्यादा… तुम्हारे गुस्से से डरने लगे।”

प्रकाश ने नज़रें फेर लीं और बस इतना कहा –
“जो सही होगा, वही करूंगा। बस बाबा का ध्यान रखना।"

क्या रुद अनन्या को ड्यूटी देगा बाबा के पास रुकने की?
क्या अनन्या अपनी ड्यूटी अच्छे से निभा पायेगी?
....to be continued