एपिसोड 25– आख़िरी राउंड
ऑडिटोरियम की सारी लाइटें हल्की हो गईं।
सभी टीमों की नज़र अब स्टेज पर थी।
डॉ. राजीव मल्होत्रा ने माइक अपने हाथ में लिया और मुस्कुराते हुए बोले,
"अब शुरू होने जा रहा है इस प्रतियोगिता का आख़िरी और सबसे महत्वपूर्ण राउंड..."
पूरा हॉल तालियों से गूँज उठा।
"इस राउंड का नाम है— टीम इमरजेंसी रिस्पॉन्स।"
"आप सभी टीमों को एक काल्पनिक इमरजेंसी मेडिकल केस दिया जाएगा। आपको यह बताना होगा कि ऐसी स्थिति में आपकी टीम किस क्रम में क्या करेगी। याद रखिए, यहाँ सिर्फ़ मेडिकल नॉलेज नहीं, बल्कि टीमवर्क, लीडरशिप और शांत दिमाग भी देखा जाएगा।"
सभी टीमें पूरी तरह तैयार हो गईं।
अर्जुन ने अपनी टीम की तरफ़ देखा।
"दोस्तों, घबराने की ज़रूरत नहीं है। जैसे हॉस्पिटल में काम करते हैं, वैसे ही यहाँ भी करेंगे।"
आयत ने मुस्कुराकर सिर हिलाया।
"यस, टीम लीडर।"
तभी स्क्रीन पर केस दिखाई दिया।
एक साथ कई घायल मरीजों को इमरजेंसी में लाया गया था। हर मरीज की स्थिति अलग थी और टीम को यह तय करना था कि किसकी देखभाल पहले की जाए और किसकी बाद में।
दस मिनट का समय शुरू हुआ।
पूरी टीम चर्चा में लग गई।
गौरव बोला,
"पहले इस मरीज को देखना चाहिए।"
आरिफ ने तुरंत कहा,
"नहीं, इसकी हालत स्थिर है। पहले उस मरीज को देखना ज़रूरी होगा जिसकी साँस लेने में परेशानी है।"
आयत चुपचाप पूरी फाइल पढ़ रही थी।
कुछ पल बाद उसने कहा,
"अगर हम सब एक ही मरीज के पीछे लग गए, तो बाकी मरीजों का समय निकल जाएगा।"
अर्जुन ने उसकी बात ध्यान से सुनी।
"तो तुम्हारा क्या सुझाव है?"
आयत बोली,
"टीम को बाँट देते हैं। हर सदस्य अपनी जिम्मेदारी संभालेगा और टीम लीडर सबको गाइड करेगा।"
अर्जुन मुस्कुराया।
"यही सही रहेगा।"
उसने तुरंत जिम्मेदारियाँ बाँट दीं।
"गौरव और आरिफ पहले मरीज के साथ रहेंगे।"
"रीवा दूसरे मरीज की हिस्ट्री तैयार करेगी।"
"आयत मेरे साथ रहेगी।"
पूरी टीम ने बिना किसी बहस के काम शुरू कर दिया।
दूसरी तरफ़...
रोहन की टीम में बहस शुरू हो चुकी थी।
एक सदस्य कुछ कह रहा था, दूसरा उससे असहमत था।
समर ने कहा,
"पहले फैसला कर लो, फिर जवाब देंगे।"
लेकिन रोहन किसी की बात सुनने को तैयार नहीं था।
"जो मैं कह रहा हूँ, वही होगा।"
इस बहस में उनका काफी समय निकल गया।
कुछ देर बाद समय पूरा हो गया।
सबसे पहले आगरा मेडिकल कॉलेज ने अपना समाधान बताया।
फिर कानपुर मेडिकल कॉलेज की टीम स्टेज पर पहुँची।
अयान ने पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी टीम का प्लान समझाया।
हॉल में तालियाँ गूँज उठीं।
अब बारी थी...
लखनऊ मेडिकल कॉलेज की।
अर्जुन माइक के सामने पहुँचा।
"इमरजेंसी में सबसे बड़ी गलती घबराना होती है। इसलिए हमारी टीम ने सबसे पहले जिम्मेदारियाँ बाँटी, ताकि हर मरीज तक समय पर पहुँचा जा सके।"
उसने एक-एक कदम विस्तार से समझाया।
बीच में उसने कहा,
"इस रणनीति का सुझाव हमारी टीम की सदस्य आयत ने दिया था।"
आयत थोड़ी झिझकी, लेकिन फिर आत्मविश्वास के साथ आगे आई।
उसने शांत आवाज़ में पूरी योजना समझाई।
डॉ. मीरा, डॉ. राजीव और बाकी सभी डॉक्टर ध्यान से सुनते रहे।
प्रेज़ेंटेशन खत्म होते ही पूरा ऑडिटोरियम तालियों से गूँज उठा।
डॉ. राजीव मुस्कुराए।
"Excellent."
"एक अच्छे लीडर की पहचान यही है कि वह अपनी टीम की बात सुनता है और सही सुझाव को अपनाता है।"
अर्जुन ने विनम्रता से कहा,
"सर, टीम तभी जीतती है जब हर सदस्य की बात की कद्र की जाए।"
यह सुनकर पूरा हॉल फिर तालियों से गूँज उठा।
उधर रोहन के चेहरे पर साफ़ निराशा दिखाई दे रही थी।
उसे पहली बार महसूस हुआ कि अर्जुन की सबसे बड़ी ताकत सिर्फ़ उसकी पढ़ाई नहीं, बल्कि अपनी टीम पर भरोसा करना भी है।
कुछ देर बाद...
सभी टीमें स्टेज के सामने खड़ी थीं।
डॉ. राजीव ने परिणाम वाला लिफाफा खोला।
पूरा हॉल बिल्कुल शांत हो गया।
"इस वर्ष के इंटर-कॉलेज मेडिकल चैलेंज की विजेता टीम है..."
कुछ सेकंड के लिए उन्होंने रुककर सभी छात्रों की तरफ़ देखा।
"...लखनऊ मेडिकल कॉलेज!"
पूरा ऑडिटोरियम ज़ोरदार तालियों से गूँज उठा।
रीवा खुशी से उछल पड़ी।
"हम जीत गए!"
गौरव ने अर्जुन को गले लगा लिया।
आरिफ खुशी से मुस्कुरा रहा था।
आयत की आँखों में भी खुशी साफ़ दिखाई दे रही थी।
अर्जुन ने सिर्फ़ हल्की-सी मुस्कान के साथ अपनी पूरी टीम की तरफ़ देखा।
उसे अपनी जीत से ज़्यादा खुशी इस बात की थी कि उसकी टीम ने एकजुट होकर यह मुकाम हासिल किया।
डॉ. राजीव ने ट्रॉफी अर्जुन को दी।
अर्जुन ने ट्रॉफी अपने पास रखने के बजाय पूरी टीम के बीच रख दी।
"ये सिर्फ़ मेरी नहीं... हम सबकी है।"
यह देखकर सभी डॉक्टर प्रभावित हो गए।
दूर खड़ा अयान भी मुस्कुराया।
वह आगे आया और अर्जुन से हाथ मिलाते हुए बोला,
"Congratulations... जीत तुम्हारी टीम डिज़र्व करती थी।"
अर्जुन ने भी मुस्कुराकर कहा,
"थैंक यू। अगली बार फिर मुकाबला होगा।"
अयान हँस पड़ा।
"ज़रूर।"
उसी समय रोहन चुपचाप वहाँ से निकल गया।
उसके चेहरे पर हार की निराशा तो थी, लेकिन मन में एक नई चुनौती भी जन्म ले चुकी थी।
"अगर अर्जुन को हराना है... तो अब पहले से ज़्यादा मेहनत करनी होगी।"
उसे पहली बार एहसास हुआ कि सिर्फ़ जलन से कोई जीत नहीं सकता।
लेकिन उसे यह भी नहीं पता था...
कि इस जीत के बाद अर्जुन और आयत की ज़िंदगी में एक ऐसा मोड़ आने वाला है, जो उनके रिश्ते को हमेशा के लिए बदल देगा।