Mr. Ms. Fake in Hindi Comedy stories by kajal jha books and stories PDF | Mr. Ms. Fake - एपिसोड 21

Featured Books
Categories
Share

Mr. Ms. Fake - एपिसोड 21

Mr. & Ms. Fake

Episode 21 – The Truth Behind the Video

रात के करीब ग्यारह बजे...

सान्वी अपने कमरे में अकेली बैठी थी।

उसके हाथ में मोबाइल था और स्क्रीन पर वही वीडियो रुका हुआ था।

वीडियो में आर्यवीर और मीरा की पुरानी तस्वीरें थीं।

एक तस्वीर में दोनों कॉलेज के फेस्टिवल में साथ खड़े थे।

दूसरी में मीरा आर्यवीर के कंधे पर हाथ रखकर हँस रही थी।

और आखिरी तस्वीर...

वह देखकर सान्वी की धड़कन जैसे रुक गई।

उसमें आर्यवीर और मीरा एक-दूसरे के बेहद करीब खड़े थे।

नीचे सिर्फ एक लाइन लिखी थी—

"कुछ रिश्ते खत्म होने से पहले अपने असली चेहरे दिखा देते हैं..."

सान्वी ने वीडियो बंद कर दिया।

"क्या आर्यवीर ने मुझसे सच में कुछ छुपाया है?"

उसने खुद से पूछा।

फिर अगले ही पल उसने सिर हिला दिया।

"नहीं... आर्यवीर ऐसा नहीं कर सकता।"

लेकिन दिल...

दिमाग की बात मानने को तैयार नहीं था।

उसी समय...

आर्यवीर का मैसेज आया।

आर्यवीर:
"घर पहुँच गई?"

सान्वी ने स्क्रीन देखी।

वह बहुत कुछ लिखना चाहती थी।

"मीरा कौन है?"

"तुम दोनों के बीच क्या था?"

"तुमने मुझे उसके बारे में कभी क्यों नहीं बताया?"

लेकिन उसने सिर्फ इतना लिखा—

"हाँ।"

कुछ सेकंड बाद आर्यवीर का जवाब आया—

"ठीक है। गुड नाइट।"

सान्वी ने फोन नीचे रख दिया।

"इतना ही?"

उसकी आँखें नम हो गईं।

"क्या तुम्हें पता भी है कि मैं तुमसे क्या सुनना चाहती हूँ?"

अगली सुबह...

आर्यवीर सिंह हाउस की डाइनिंग टेबल पर बैठा था।

वह बार-बार फोन देख रहा था।

कबीर ने पूछा,

"क्या हुआ?"

"कुछ नहीं।"

"सान्वी से बात नहीं हुई?"

आर्यवीर ने उसकी तरफ देखा।

"कल से उसका व्यवहार अजीब है।"

कबीर ने हँसते हुए कहा,

"तो पूछ ले।"

"पूछूँगा क्या?"

"सीधा पूछ—मैडम, आप मुझसे नाराज़ हैं क्या?"

आर्यवीर कुछ कहता, उससे पहले दादी बोल पड़ीं—

"किससे नाराज़ है?"

दोनों एकदम चुप।

कबीर तुरंत बोला,

"दादी... आर्यवीर अपने आप से नाराज़ है।"

दादी ने आर्यवीर को घूरा।

"तो उसे समझाओ।"

कबीर ने धीरे से कहा,

"दादी, यही तो कोशिश कर रहा हूँ।"

आर्यवीर ने उसे कुशन मार दिया।

दोपहर...

सान्वी थिएटर पहुँची।

वहाँ मीरा पहले से मौजूद थी।

सान्वी उसे देखकर रुक गई।

दोनों की नज़रें मिलीं।

मीरा मुस्कुराई।

"सान्वी, हमें बात करनी है।"

सान्वी ने ठंडी आवाज़ में पूछा,

"आर्यवीर के बारे में?"

मीरा समझ गई कि बात कुछ और है।

"हाँ।"

सान्वी ने गहरी साँस ली।

"तुम दोनों के बीच पहले क्या था?"

मीरा कुछ पल चुप रही।

फिर उसने कहा,

"दोस्ती।"

"बस?"

"हाँ।"

सान्वी ने उसकी आँखों में देखा।

"वीडियो में तो कुछ और दिख रहा था।"

मीरा के चेहरे पर अचानक गंभीरता आ गई।

"कौन सा वीडियो?"

सान्वी ने मोबाइल निकालकर उसे दिखाया।

वीडियो देखते ही मीरा समझ गई।

"ये किसने भेजा?"

"मुझे नहीं पता।"

मीरा ने वीडियो दोबारा देखा।

फिर बोली,

"ये तस्वीरें असली हैं..."

सान्वी का दिल बैठ गया।

"...लेकिन कहानी नकली है।"

सान्वी ने हैरानी से पूछा,

"क्या मतलब?"

मीरा ने फोन वापस करते हुए कहा,

"इन तस्वीरों को ऐसे एडिट किया गया है कि लगे हम दोनों के बीच कुछ था।"

"लेकिन ऐसा कुछ नहीं था।"

सान्वी कुछ बोल नहीं पाई।

मीरा ने उसकी तरफ देखा।

"और एक बात..."

"आर्यवीर ने तुम्हारे बारे में मुझसे बहुत पहले बात की थी।"

सान्वी चौंक गई।

"मेरे बारे में?"

मीरा मुस्कुराई।

"हाँ।"

"उस दिन जब तुम दोनों पहली बार मिले थे, उसी रात उसने मुझे मैसेज किया था।"

"उसने लिखा था—"

मीरा ने मुस्कुराते हुए कहा—

"आज एक बहुत अजीब लड़की मिली है... लेकिन पता नहीं क्यों, उसके बारे में सोच रहा हूँ।"

सान्वी की आँखें फैल गईं।

उसका दिल अचानक तेज़ धड़कने लगा।

शाम...

आर्यवीर ऑफिस से निकल रहा था कि उसके फोन पर मीरा का मैसेज आया।

"हमें बात करनी है। अभी।"

वह कुछ समझ नहीं पाया।

मीरा ने उसे एक कैफ़े में बुलाया।

वहाँ पहुँचते ही मीरा ने कहा,

"रिया के बारे में तुम क्या जानते हो?"

आर्यवीर का चेहरा गंभीर हो गया।

"क्या हुआ?"

मीरा ने पूरा वीडियो उसके सामने रख दिया।

आर्यवीर की आँखों में गुस्सा उतर आया।

"ये किसने भेजा?"

"सान्वी को।"

आर्यवीर तुरंत उठ खड़ा हुआ।

"रिया!"

मीरा ने उसका हाथ रोक लिया।

"सिर्फ़ शक से कुछ साबित नहीं होगा।"

"हमें सबूत चाहिए।"

आर्यवीर कुछ पल चुप रहा।

फिर उसकी आँखों में दृढ़ता आ गई।

"सबूत भी मिलेगा..."

"...और इस बार मैं सान्वी को अकेले ये सब झेलने नहीं दूँगा।"

उधर...

सान्वी घर लौट रही थी।

रास्ते में उसका फोन बजा।

आर्यवीर का कॉल था।

वह कुछ पल स्क्रीन देखती रही।

फिर कॉल उठा लिया।

"हैलो..."

दूसरी तरफ़ आर्यवीर की आवाज़ आई—

"मुझे तुमसे मिलना है।"

सान्वी चुप रही।

"अभी।"

"आर्यवीर..."

"प्लीज़।"

उसकी आवाज़ में ऐसी बेचैनी थी कि सान्वी मना नहीं कर सकी।

कुछ देर बाद...

दोनों उसी पुराने कैफ़े में मिले जहाँ वे पहली बार साथ बैठे थे।

आर्यवीर उसके सामने आकर बैठ गया।

कुछ सेकंड तक वह कुछ नहीं बोला।

फिर उसने पूछा,

"तुमने मुझसे कल रात कुछ पूछा क्यों नहीं?"

सान्वी की आँखें भर आईं।

"क्योंकि मुझे डर था..."

"किस बात का?"

"कि जो जवाब मिलेगा... वो मुझे पसंद नहीं आएगा।"

आर्यवीर धीरे से उसके सामने झुका।

"मीरा मेरी दोस्त थी। है।"

"लेकिन उसके साथ कभी कोई रिश्ता नहीं था।"

सान्वी ने उसकी आँखों में देखा।

"सच?"

आर्यवीर ने बिना पलक झपकाए कहा—

"सच।"

कुछ पल की खामोशी के बाद...

सान्वी ने धीरे से पूछा,

"और अगर मैं तुम पर विश्वास न करती तो?"

आर्यवीर मुस्कुराया।

"तो मैं तुम्हें मनाता।"

"कितनी बार?"

"जितनी बार जरूरत होती।"

सान्वी की आँखों से एक आँसू गिर गया।

आर्यवीर ने उसे देखकर धीरे से कहा,

"बस एक बात याद रखना..."

"दुनिया चाहे मेरे बारे में कुछ भी कहे..."

"...तुम मुझसे पूछे बिना मुझ पर शक मत करना।"

सान्वी ने सिर झुका लिया।

"सॉरी।"

आर्यवीर मुस्कुराया।

"एक शर्त पर माफ़ करूँगा।"

"क्या?"

"आज मेरे साथ कॉफी पीनी पड़ेगी।"

सान्वी हँस पड़ी।

"बस इतनी-सी सज़ा?"

"अभी तो शुरुआत है।"

दोनों हँस पड़े।

लेकिन...

कैफ़े के बाहर खड़ी एक कार में रिया बैठी सब देख रही थी।

उसने देखा कि उसकी चाल भी नाकाम हो गई।

उसने गुस्से में फोन उठाया।

"अब बहुत हो गया।"

"अगर आर्यवीर और सान्वी को अलग नहीं कर सकती..."

उसकी आँखों में एक खतरनाक चमक आई।

"...तो क्यों न दोनों के सामने उनके रिश्ते की सबसे बड़ी सच्चाई रख दी जाए?"

उसे पता था...

आर्यवीर और सान्वी का कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो चुका था।

लेकिन दुनिया के सामने...

उस नकली रिश्ते की सच्चाई अभी भी एक राज़ थी।

और रिया अब वही राज़ सबके सामने खोलने वाली थी।

क्रमशः...