Dil ne Der se Chuna - 1 in Hindi Love Stories by priyanshi bhuva books and stories PDF | दिल ने देर से चुना - 1

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दिल ने देर से चुना - 1

तीन दोस्त, एक लड़की और अधूरा प्यार

स्कूल से शुरू हुई कहानी:

शहर के एक छोटे से लेकिन पुराने स्कूल में उस दिन सुबह बाकी दिनों जैसी ही थी। बच्चे अपनी-अपनी क्लास की तरफ भाग रहे थे, कोई होमवर्क पूरा करने के लिए दोस्त की कॉपी मांग रहा था तो कोई टीचर के आने से पहले आखिरी बार अपना टिफिन खोलकर देख रहा था। लेकिन बारहवीं की A सेक्शन में बैठे तीन लड़कों के लिए वह दिन थोड़ा अलग था। आरव, कबीर और विवान—तीनों बचपन से दोस्त थे। तीनों की दोस्ती इतनी पक्की थी कि स्कूल में लोग उन्हें अलग-अलग नाम से कम और "तीनों बंदर" कहकर ज्यादा जानते थे। आरव शांत और समझदार था, विवान हर चीज को दिमाग से सोचता था और कबीर... कबीर को अगर पांच मिनट के लिए चुप बैठा दिया जाए तो शायद वह खुद ही बीमार पड़ जाए।

उस दिन क्लास में एक नई लड़की आई। लंबे बाल, आंखों में अजीब-सी चमक और चेहरे पर ऐसी सादगी कि पहली नजर में ही कोई भी उसे दोबारा देखने पर मजबूर हो जाए। उसका नाम था आरोही। टीचर ने उसे आखिरी बेंच की तरफ बैठने को कहा, लेकिन बैठते समय उसकी किताबों का पूरा ढेर जमीन पर गिर गया। कबीर तुरंत उठकर उसकी मदद करने पहुंचा और एक किताब उठाकर बोला, "मैडम, आपकी किताबें भी आपसे ज्यादा घबराई हुई लग रही हैं।" आरोही ने उसे घूरकर देखा और बोली, "आप हमेशा ऐसे ही बोलते हैं?" कबीर ने मुस्कुराकर कहा, "नहीं, कभी-कभी इससे भी ज्यादा बोलता हूं।" पूरी क्लास हंस पड़ी। आरव ने अपना सिर पकड़ लिया और विवान ने धीरे से कहा, "बस कर भाई, पहले दिन ही लड़की को स्कूल बदलने पर मजबूर मत कर देना।"

आरोही मुस्कुराई और अपनी सीट पर बैठ गई। शायद उसी पल तीनों दोस्तों की जिंदगी में कुछ ऐसा शुरू हो गया था जिसका उन्हें खुद भी अंदाजा नहीं था।

अगले कुछ हफ्तों में आरोही धीरे-धीरे क्लास का हिस्सा बन गई। पढ़ाई में वह अच्छी थी, लेकिन उसकी सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वह अपने सपनों को लेकर बहुत गंभीर थी। एक दिन क्लास में टीचर ने पूछा, "बड़े होकर क्या बनना चाहते हो?" किसी ने डॉक्टर कहा, किसी ने इंजीनियर, किसी ने सरकारी नौकरी। जब आरोही की बारी आई तो उसने बिना झिझके कहा, "मैं एक बड़ी बिज़नेसवुमन बनना चाहती हूं। मैं अपनी कंपनी बनाऊंगी और उसे इतना बड़ा करूंगी कि लोग मेरे परिवार का नाम मेरे नाम से जानें।" क्लास में कुछ बच्चे हंसने लगे। पीछे से किसी ने कहा, "लड़कियां बिज़नेस नहीं करतीं क्या?" आरोही ने उसकी तरफ देखा और बोली, "लड़कियां क्या करती हैं और क्या नहीं करतीं, इसका फैसला तुम नहीं करोगे।" आरव उस दिन पहली बार उसे सिर्फ खूबसूरत लड़की की तरह नहीं, बल्कि एक मजबूत इंसान की तरह देखने लगा।

धीरे-धीरे तीनों को आरोही पसंद आने लगी। पहले आरव को। फिर कबीर को। फिर विवान को। सबसे मजेदार बात यह थी कि तीनों एक-दूसरे से अपना राज छिपाने की कोशिश करते रहे, लेकिन तीनों ही इतने खराब झूठे थे कि आखिरकार एक दिन राज खुल ही गया। स्कूल की कैंटीन में तीनों बैठे थे। कबीर ने अचानक पूछा, "तुम दोनों को आरोही कैसी लगती है?" विवान ने तुरंत जवाब दिया, "अच्छी है।" आरव चुप रहा। कबीर ने दोनों को देखा और बोला, "सिर्फ अच्छी?" विवान ने आंखें सिकोड़कर पूछा, "तू क्यों पूछ रहा है?" कबीर ने कहा, "बस ऐसे ही।" आरव ने पहली बार सिर उठाया और बोला, "तू उसे पसंद करता है?" कबीर कुछ सेकंड चुप रहा, फिर बोला, "हां।" विवान ने लंबी सांस ली और कहा, "तो फिर एक और दुख की खबर है... मुझे भी।" तीनों कुछ देर एक-दूसरे को देखते रहे और फिर अचानक हंस पड़े। कबीर ने टेबल पर हाथ मारकर कहा, "कमाल है! तीन दोस्त, एक लड़की। अब दोस्ती गई काम से!" आरव ने मुस्कुराकर कहा, "जिसे आरोही पसंद करेगी, वही उसके साथ रहेगा। लेकिन दोस्ती नहीं टूटेगी।" तीनों ने हाथ मिलाया। उन्हें क्या पता था कि कुछ साल बाद यही वादा उनकी दोस्ती की सबसे बड़ी परीक्षा बनने वाला था।

आरोही को इन तीनों की भावनाओं का अंदाजा था, लेकिन उसने कभी किसी को कोई उम्मीद नहीं दी। फिर भी आरव उसके सबसे करीब होता जा रहा था। दोनों घंटों पढ़ाई, सपनों और जिंदगी के बारे में बातें करते। एक शाम बारिश के बाद स्कूल की छत पर आरोही अकेली खड़ी थी। उसके हाथ में एक पुरानी डायरी थी। आरव वहां पहुंचा तो उसने देखा कि आरोही की आंखों में आंसू थे। उसने पूछा, "क्या हुआ?" आरोही ने डायरी बंद कर दी और बोली, "घर में पैसे की बहुत परेशानी है। पापा चाहते हैं कि मैं पढ़ाई के बाद नौकरी करूं। उन्हें लगता है कि बिज़नेस का सपना हमारे लिए बहुत बड़ा है।" आरव कुछ देर चुप रहा, फिर बोला, "बड़ा सपना देखने में पैसे नहीं लगते। उसे पूरा करने में लगते हैं। और जब तक पैसे नहीं होंगे, तब तक रास्ता ढूंढेंगे।" आरोही ने उसकी तरफ देखा। "तुम हमेशा इतना confidence से कैसे बोल लेते हो?" आरव मुस्कुराया, "क्योंकि तुम्हें रोते हुए देखना मुझे पसंद नहीं।" आरोही कुछ पल उसे देखती रही। उस दिन उसके दिल में आरव के लिए एक अजीब-सा एहसास पैदा हुआ। वह प्यार जैसा लगता था। लेकिन वह प्यार नहीं था। वह एक आकर्षण था—आरव की समझदारी, उसकी care और उसके साथ की वजह से पैदा हुआ आकर्षण।

उधर कबीर को यह बिल्कुल पसंद नहीं था कि आरोही और आरव इतना समय साथ बिताते हैं। लेकिन वह अपना गुस्सा मजाक में छिपा देता। एक दिन उसने आरव से कहा, "भाई, तू आरोही से बात करता है या पूरा customer care center खोल रखा है?" आरव हंसकर बोला, "जलता क्यों है?" कबीर ने तुरंत कहा, "मैं? मैं तो बस उसकी friendship की quality check करता हूं।" विवान पीछे से बोला, "हां, और रोज दो घंटे quality check करता है।" तीनों हंसने लगे। आरोही दूर खड़ी उनकी बातें सुन रही थी और सोच रही थी कि ये तीनों कितने अजीब हैं।

कॉलेज शुरू हुआ तो उनकी दोस्ती और भी मजबूत हो गई। आरोही ने अपना छोटा-सा online business शुरू करने का सपना देखना शुरू किया। वह handmade products बनाकर बेचने की योजना बना रही थी। तीनों दोस्त उसकी मदद करने लगे। आरव उसका business plan देखता, विवान accounts संभालता और कबीर customers को attract करने के लिए social media पर ऐसे पोस्ट डालता कि कभी-कभी आरोही खुद अपना सिर पकड़ लेती। एक दिन कबीर ने आरोही के business page पर लिखा—"हमारे products खरीदो, नहीं तो हमारी आत्मा तुम्हें माफ नहीं करेगी।" आरोही ने पोस्ट देखकर कहा, "ये क्या लिखा है?" कबीर बोला, "Marketing!" आरोही ने कहा, "ये marketing नहीं, धमकी है!" विवान हंसते-हंसते कुर्सी से गिर गया।

लेकिन हंसी-मजाक के पीछे धीरे-धीरे एक समस्या पैदा हो रही थी। तीनों के मन में आरोही के लिए feelings बढ़ रही थीं। एक रात कॉलेज के annual function के बाद आरव ने आरोही को अपने दिल की बात बताई। उसने कोई फिल्मी dialogue नहीं दिया। सिर्फ इतना कहा, "मुझे नहीं पता ये प्यार है या नहीं, लेकिन जब भी तुम्हें कोई परेशानी होती है तो सबसे पहले मेरा मन तुम्हारे पास आने का करता है। मैं तुम्हें बदलना नहीं चाहता। बस तुम्हारे साथ रहना चाहता हूं।" आरोही ने उसकी बात सुनी, लेकिन जवाब नहीं दिया। अगले दिन कबीर ने भी अपनी feelings बता दीं। विवान ने भी कुछ दिनों बाद साफ कर दिया कि वह भी उसे पसंद करता है।

अब आरोही मुश्किल में थी। वह तीनों को खोना नहीं चाहती थी। उसने एक शाम तीनों को एक जगह बुलाया। "मुझे तुम तीनों की feelings समझ आती हैं," उसने कहा, "लेकिन मैं किसी को भी झूठी उम्मीद नहीं देना चाहती।" कबीर ने हंसते हुए माहौल हल्का करने की कोशिश की, "तो फिर lottery निकाल लेते हैं?" आरोही हंस नहीं पाई। उसने कहा, "यह जिंदगी है कबीर, lottery नहीं।" उस एक वाक्य ने कबीर को चुप कर दिया।

कुछ दिन तक सब ठीक रहा, लेकिन फिर एक छोटी-सी बात ने तीनों की दोस्ती में दरार डाल दी। कॉलेज के एक कार्यक्रम में आरोही को किसी लड़के के साथ देखकर कबीर को गलतफहमी हो गई। उसने आरव पर आरोप लगाया कि वह आरोही को अपने करीब लाने के लिए बाकी दोनों से बातें छिपा रहा है। आरव ने गुस्से में कहा, "तुझे हर चीज में competition क्यों दिखाई देता है?" कबीर ने जवाब दिया, "क्योंकि तू हमेशा खुद को बाकी हम दोनों से बेहतर समझता है!" विवान बीच में आया, लेकिन दोनों नहीं रुके। बात इतनी बढ़ी कि पहली बार तीनों ने एक-दूसरे पर हाथ उठा दिया।

आरोही ने जब उन्हें लड़ते देखा तो उसकी आंखों में आंसू आ गए। वह जोर से चिल्लाई, "बस!" तीनों रुक गए। आरोही उनके सामने खड़ी थी। उसने कहा, "तुम तीनों कहते हो कि तुम मुझसे प्यार करते हो? तो फिर मेरे लिए एक-दूसरे को क्यों चोट पहुंचा रहे हो? अगर मैं तुम्हारे साथ रहूं और इसकी कीमत तुम्हारी दोस्ती हो, तो मुझे ऐसा प्यार नहीं चाहिए।" उसकी आवाज कांप रही थी। "तुम लोग मुझे पाना चाहते हो, लेकिन मेरी खुशी नहीं समझना चाहते। प्यार का मतलब किसी इंसान पर अधिकार जमाना नहीं होता। अगर मैं तुममें से किसी एक को चुनूं तो बाकी दो हारेंगे नहीं। और अगर मैं किसी को भी नहीं चुनूं, तब भी तुम्हारा प्यार बेकार नहीं हो जाएगा।"

तीनों चुप थे। पहली बार उन्हें समझ आया कि वे जिस चीज को प्यार समझ रहे थे, उसमें कहीं न कहीं अपनी इच्छा भी शामिल थी।

उस रात तीनों फिर मिले। कबीर ने सबसे पहले कहा, "मैं बेवकूफ हूं।" विवान ने कहा, "ये तो हमें पहले से पता है।" कबीर ने उसे घूरा और बोला, "मैं emotional moment में हूं, मजाक मत कर!" आरव हंस पड़ा। कुछ सेकंड बाद तीनों ने एक-दूसरे को गले लगा लिया। उनकी दोस्ती वापस आ गई, लेकिन इस बार पहले से ज्यादा मजबूत होकर।

इसी बीच आरोही के मन में भी एक सवाल लगातार घूम रहा था—क्या वह सच में आरव से प्यार करती है?

वह आरव के साथ समय बिताती तो उसे अच्छा लगता था। उसकी care अच्छी लगती थी। उसकी बातें अच्छी लगती थीं। लेकिन क्या वह उसके बिना नहीं रह सकती थी?

एक दिन आरव ने खुद उसे जवाब ढूंढने में मदद की। उसने कहा, "आरोही, अगर कभी तुम्हें लगे कि तुम मुझे प्यार नहीं करती, तो मेरे साथ सिर्फ इसलिए मत रहना क्योंकि मैंने तुम्हें प्यार किया है। मुझे दुख होगा, लेकिन झूठे रिश्ते में रहने से ज्यादा अच्छा सच जानना है।"

आरोही ने उस रात पूरी रात सोचा। उसने खुद से पूछा—"अगर आरव मेरी जिंदगी से चला जाए तो क्या मैं टूट जाऊंगी?" जवाब आया—"नहीं। दुख होगा, लेकिन मैं संभल जाऊंगी।" फिर उसने खुद से पूछा—"तो क्या मैं उससे प्यार करती हूं?" उसके अंदर से आवाज आई—"शायद नहीं।"

अगले दिन उसने आरव को सब सच बता दिया। "मुझे लगता था कि मैं तुमसे प्यार करती हूं, लेकिन अब समझ आया कि मुझे तुम्हारा साथ पसंद था। तुम्हारी care पसंद थी। तुम्हारे साथ होने का एहसास पसंद था। शायद वह attraction था, प्यार नहीं।" आरव की आंखों में दर्द था, लेकिन उसने मुस्कुराकर कहा, "तुमने सच बोल दिया, यही काफी है।" आरोही ने पूछा, "तुम नाराज नहीं हो?" आरव ने कहा, "नाराज हूं... खुद से। क्योंकि मैं चाहता था कि तुम्हारा जवाब वही हो जो मैं सुनना चाहता हूं। लेकिन अब समझ आया कि तुम्हारी खुशी मेरे प्यार से ज्यादा जरूरी है।"

उसी समय पीछे खड़े कबीर और विवान ने सब सुन लिया। कबीर ने माहौल हल्का करते हुए कहा, "तो भाई, अब हम तीनों officially friendzone के chairman हैं?" आरोही हंस पड़ी। आरव ने उसे घूरकर देखा और बोला, "तू कभी serious हो सकता है?" कबीर ने कहा, "नहीं। मेरी यही सबसे बड़ी खूबी है।"

समय गुजरने लगा। कॉलेज खत्म होने वाला था। आरोही का सपना अब भी वही था—अपनी कंपनी बनाना। लेकिन उसके घर की आर्थिक स्थिति पहले से भी खराब हो चुकी थी। पिता पर कर्ज था, घर के खर्च मुश्किल से चल रहे थे। आरोही ने फैसला किया कि वह अपना सपना छोड़ देगी और नौकरी करेगी।

जिस दिन उसने तीनों को यह बताया, किसी ने कुछ नहीं कहा। कुछ सेकंड बाद कबीर ने पूछा, "अगर पैसे की वजह से सपना छोड़ना है तो पैसे हम arrange करेंगे।" आरोही ने कहा, "तुम लोग मजाक मत करो।" विवान ने गंभीर होकर कहा, "हम मजाक नहीं कर रहे।" आरव ने उसकी आंखों में देखकर कहा, "तूने स्कूल में कहा था कि एक दिन लोग तेरे परिवार का नाम तेरे नाम से जानेंगे। मुझे वो बात आज भी याद है। अब पीछे मत हट।"

लेकिन उन्हें नहीं पता था कि आरोही की जिंदगी में सिर्फ पैसे की परेशानी आने वाली नहीं थी। उसके सामने एक ऐसा इंसान आने वाला था जो उसकी सफलता से जलता था और उसकी सबसे मजबूत दोस्ती को तोड़ने के लिए कुछ भी करने को तैयार था।

उसका नाम था **राघव**।

राघव कॉलेज के दिनों से ही आरोही को पसंद करता था। लेकिन वह उसे प्यार से ज्यादा अपना अधिकार समझता था। उसे सबसे ज्यादा गुस्सा इस बात पर आता था कि आरोही की जिंदगी में तीन ऐसे लड़के थे जिनके सामने वह हमेशा हार जाता था। वह कई बार आरव, कबीर और विवान के बीच गलतफहमी पैदा करने की कोशिश कर चुका था, लेकिन हर बार असफल हुआ था।

एक शाम उसने दूर से आरोही और तीनों दोस्तों को हंसते हुए देखा और उसके चेहरे पर गुस्सा आ गया।

उसने खुद से कहा, "एक दिन ये चारों अलग होंगे। और उस दिन आरोही को समझ आएगा कि उसके लिए सबसे जरूरी कौन है।"

लेकिन राघव की योजना से भी बड़ी एक और कहानी शुरू होने वाली थी।

क्योंकि आरोही की जिंदगी में जल्द ही ऐसा वक्त आने वाला था जब उसके पास पैसे नहीं होंगे, परिवार उसका साथ नहीं दे पाएगा और उसका बिज़नेस शुरू होने से पहले ही खत्म होने की कगार पर होगा।

और तभी...

उसके तीनों दोस्त पहली बार सिर्फ उसके चाहने वाले नहीं, बल्कि **उसके सपने के सबसे बड़े साथी** बनेंगे।

लेकिन उन्हें यह नहीं पता था कि उस छोटी-सी शुरुआत से नौ साल बाद आरोही देश की सबसे बड़ी बिज़नेसवुमन में से एक बनने वाली थी।

और उस सफर में...

एक ऐसा आदमी भी आएगा जिसे आरोही अपना सच्चा प्यार समझेगी—लेकिन वही उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा धोखा बनेग!


 PART 2

आरोही का पहला बिज़नेस कैसे शुरू होगा?
राघव उसकी दोस्ती तोड़ने के लिए कौन-सी चाल चलेगा?
तीनों दोस्त पैसे जुटाने के लिए क्या-क्या करेंगे?
आरोही और तीनों दोस्तों के बीच आने वाली सबसे बड़ी लड़ाई क्या होगी?
और फिर आएगा  रोहन, जो आरोही की जिंदगी में प्यार बनकर आएगा... लेकिन उसके पीछे एक खतरनाक मकसद छिपा होगा।