That Rainy Evening With You in Hindi Love Stories by Mayur Chaudhary books and stories PDF | बारिश, तुम और हमारी वो शाम

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बारिश, तुम और हमारी वो शाम


मौसम में एक अजीब सी कशिश थी। आसमान में काले घने बादल छाए हुए थे और मिट्टी की वो सोंधी-सोंधी महक हवा में घुल चुकी थी। मयूर अपनी बालकनी में खड़ा, बाहर गिरती बारिश की बूंदों को देख रहा था। लेकिन उसका मन उस बारिश में नहीं, बल्कि किसी और के ख्यालों में भीग रहा था—शैली के ख्यालों में।
तभी दरवाज़े पर एक हल्की सी दस्तक हुई। मयूर ने धड़कते दिल के साथ दरवाज़ा खोला। सामने शैली खड़ी थी। बारिश की वजह से वो हल्की सी भीग गई थी। उसकी नीली कुर्ती बारिश की बूंदों से नम हो गई थी और उसके माथे पर पानी की कुछ बूंदें मोतियों की तरह चमक रही थीं। उसकी गहरी, कजरारी आँखें मयूर को देख कर ऐसे मुस्कुराईं, जैसे सदियों का इंतज़ार खत्म हो गया हो।
"तुम बिल्कुल नहीं बदलोगी ना? कहा था छतरी लेकर आना," मयूर ने झूठा गुस्सा दिखाते हुए कहा, पर उसकी आँखों का प्यार छुप नहीं पाया।
शैली ने एक कदम आगे बढ़ाया, सीधे मयूर के बेहद करीब आकर खड़ी हो गई। उसने अपना चेहरा थोड़ा ऊपर उठाया और मयूर की आँखों में गहराई से देखते हुए बोली, "अगर भीगती नहीं, तो तुम्हारे हाथों से बाल पोंछने का ये बहाना कैसे मिलता?"
शैली की इस अदा ने मयूर को निशब्द कर दिया। उसने शैली का हाथ पकड़ा और उसे अंदर ले आया। तौलिया लेकर मयूर बहुत ही नरमी से शैली के बालों को सुखाने लगा। शैली चुपचाप खड़ी थी, बस मयूर के चेहरे को निहार रही थी। मयूर की उंगलियों का वो हल्का सा स्पर्श जब भी शैली के गालों या गर्दन को छूता, शैली के बदन में एक मीठी सी सिहरन दौड़ जाती।
"कॉफी पियोगी?" मयूर ने माहौल की बढ़ती हुई तपिश को थोड़ा कम करने की कोशिश की।
"अगर तुम अपने हाथों से पिलाओ, तो ज़हर भी पी लूँ," शैली ने शरारत से आंख मारते हुए कहा।
कुछ देर बाद, दोनों सोफे पर एक-दूसरे के बिल्कुल करीब बैठे थे। बाहर बारिश और तेज़ हो गई थी, और कमरे के अंदर सिर्फ एक लैंप की मद्धम पीली रोशनी थी, जो एक जादुई और बेहद रूमानी माहौल बना रही थी।
मयूर ने शैली के हाथ से कॉफी का मग लेकर टेबल पर रख दिया। फिर उसने दोनों हाथों से शैली के चेहरे को थाम लिया। शैली की साँसें तेज़ हो गई थीं। मयूर ने अपने अंगूठे से शैली के निचले होंठ को बहुत ही कोमल तरीके से छुआ। उस एक छुअन में इतना प्यार और इतनी कशिश थी कि शैली की आँखें खुद-ब-खुद बंद हो गईं।
"शैली..." मयूर की आवाज़ में एक अजीब सा नशा था, एक भारीपन था जो सीधे शैली के दिल में उतर गया।
"हम्म..." शैली ने अपनी आँखें बंद रखे हुए ही जवाब दिया।
मयूर धीरे-धीरे उसके और करीब आया। दोनों की साँसें आपस में टकराने लगी थीं। मयूर को शैली की वो मीठी सी परफ्यूम और उसकी त्वचा की प्राकृतिक गर्माहट महसूस हो रही थी। मयूर ने अपने होंठ शैली के माथे पर रखे और एक लंबा, गहरा, और बेहद जज़्बाती चुंबन दिया।
फिर उसने शैली को अपनी बाँहों में भर लिया। शैली ने भी अपना सिर मयूर के चौड़े सीने पर रख दिया, जहाँ वो मयूर के दिल की तेज़ धड़कनों को साफ सुन सकती थी। मयूर की बाहों का घेरा शैली के लिए दुनिया की सबसे महफूज़ जगह थी।
"मुझे नहीं पता कि कल क्या होगा," मयूर ने शैली के बालों में उंगलियां फेरते हुए फुसफुसाकर कहा, "लेकिन इस पल में, तुम्हारी इन बाँहों में, मुझे मेरी पूरी कायनात मिल गई है।"
शैली ने मयूर को और कसकर पकड़ लिया। ये आलिंगन, ये खामोशी, ये स्पर्श—सब कुछ इतना गहरा और इतना पवित्र था कि शब्दों की कोई ज़रूरत ही नहीं बची थी। उस बारिश की रात में, मयूर और शैली का वो मिलन किसी कविता से कम नहीं था, जहाँ सिर्फ एक अनकहा आकर्षण, बेइंतहा प्यार और दो धड़कते हुए दिल थे।