Mr. & Ms. Fake
Episode 23 – Dadi's Condition
अगली सुबह...
सिंह हाउस में अजीब-सी खामोशी थी।
वही घर...
जहाँ हर सुबह चिंटू की शरारतों और दादी की आवाज़ से शुरू होती थी, आज वहाँ किसी के पास बोलने के लिए शब्द नहीं थे।
आर्यवीर डाइनिंग टेबल पर बैठा था।
सान्वी भी सामने बैठी थी।
लेकिन दोनों एक-दूसरे से नज़रें नहीं मिला रहे थे।
कबीर ने माहौल हल्का करने की कोशिश की।
"अगर कोई मुझे बताए कि नाश्ता करना है या कोर्ट में पेश होना है, तो बड़ी मेहरबानी होगी।"
चिंटू ने धीरे से कहा,
"मुझे तो लग रहा है दादी का मूड खराब है।"
कबीर ने फुसफुसाकर कहा,
"तुझे अब पता चला?"
चिंटू चुप हो गया।
तभी...
दादी सीढ़ियों से नीचे आईं।
उनके हाथ में एक फाइल थी।
उन्होंने सीधे आर्यवीर के सामने आकर फाइल रख दी।
"इसे पढ़ो।"
आर्यवीर ने फाइल खोली।
उसमें वही पुराना कॉन्ट्रैक्ट था।
जिसे दोनों फाड़ चुके थे।
आर्यवीर हैरान रह गया।
"दादी... ये आपके पास कैसे?"
दादी ने गंभीर स्वर में कहा—
"तुम दोनों ने कागज़ फाड़ दिया था..."
"लेकिन रिश्ते के सच को नहीं फाड़ पाए।"
सान्वी की आँखें झुक गईं।
दादी ने दोनों को देखा।
"मुझे तुम दोनों से गुस्सा है।"
सान्वी की आँखें भर आईं।
"दादी..."
"नहीं बेटा। आज मुझे बोलने दो।"
"तुमने इस घर में कदम रखा..."
"मैंने तुम्हें अपनी पोती समझा।"
"और तुमने मुझे कभी ये नहीं बताया कि तुम्हारा और आर्य का रिश्ता झूठ से शुरू हुआ था।"
सान्वी रोते हुए बोली—
"मुझे डर था..."
"किस बात का?"
"आप मुझे कभी स्वीकार नहीं करेंगी।"
दादी कुछ पल चुप रहीं।
फिर बोलीं—
"और तुम्हें क्या लगा?"
"झूठ बोलकर मैं हमेशा तुम्हें स्वीकार कर लूँगी?"
सान्वी की आँखों से आँसू बहने लगे।
आर्यवीर तुरंत बोला—
"गलती मेरी थी।"
"सान्वी को मैंने इस सब में खींचा था।"
दादी ने उसे देखा।
"मुझे पता है।"
"इसीलिए सज़ा भी तुम्हें ही मिलेगी।"
आर्यवीर चौंका।
"सज़ा?"
दादी ने कुर्सी पर बैठते हुए कहा—
"अगर तुम दोनों का प्यार सच है..."
"तो उसे साबित करो।"
आर्यवीर और सान्वी एक-दूसरे को देखने लगे।
"कैसे?"
दादी बोलीं—
"एक महीने तक..."
"बिना किसी झूठ के।"
"बिना किसी कॉन्ट्रैक्ट के।"
"बिना किसी मजबूरी के।"
"तुम दोनों साथ रहोगे..."
"लेकिन इस बार किसी को गर्लफ्रेंड या बॉयफ्रेंड बनने का नाटक नहीं करना है।"
सान्वी ने हैरानी से पूछा—
"मतलब?"
दादी मुस्कुराईं।
"मतलब..."
"अब अगर आर्य तुम्हारा हाथ पकड़े तो सिर्फ इसलिए क्योंकि उसे पकड़ना है।"
"अगर तुम उसे गले लगाओ तो सिर्फ इसलिए क्योंकि तुम्हारा मन है।"
"और अगर तुम दोनों एक-दूसरे से प्यार करते हो..."
"...तो उसे अभिनय की जरूरत नहीं होनी चाहिए।"
पूरा कमरा शांत हो गया।
आर्यवीर ने धीरे से पूछा—
"और अगर हम असफल हुए?"
दादी की आवाज़ गंभीर हो गई।
"तो तुम दोनों हमेशा के लिए अलग हो जाओगे।"
सान्वी का दिल धक से रह गया।
उसी समय...
बाहर से किसी के आने की आवाज़ आई।
सबने दरवाज़े की तरफ देखा।
अनन्या खड़ी थी।
उसने मुस्कुराते हुए कहा—
"लगता है मैं गलत समय पर आ गई।"
दादी बोलीं,
"नहीं बेटा। तुम बिल्कुल सही समय पर आई हो।"
अनन्या अंदर आई।
उसने आर्यवीर और सान्वी को देखा।
"क्या हुआ?"
कबीर ने धीरे से कहा—
"इनका फाइनल टेस्ट शुरू हो गया।"
अनन्या हँस पड़ी।
"तो फिर मैं भी देखना चाहूँगी।"
आर्यवीर ने उसे घूरा।
"तुम भी?"
"हाँ।"
"क्यों?"
अनन्या ने मुस्कुराकर कहा—
"क्योंकि मुझे यकीन है कि तुम दोनों एक-दूसरे से प्यार करते हो।"
सान्वी ने पहली बार हल्की मुस्कान दी।
दादी ने अपनी बात आगे बढ़ाई।
"लेकिन एक और शर्त है।"
आर्यवीर ने सिर उठाया।
"अब क्या?"
दादी बोलीं—
"एक महीने में तुम दोनों को मेरे सामने ये साबित करना होगा कि तुम्हारा रिश्ता सिर्फ़ प्यार नहीं..."
"...बल्कि भरोसे पर भी टिका है।"
"कोई तीसरा इंसान..."
"कोई गलतफ़हमी..."
"कोई पुराना राज़..."
"तुम दोनों के बीच दीवार नहीं बनना चाहिए।"
आर्यवीर ने सान्वी की तरफ देखा।
इस बार सान्वी ने भी उसकी आँखों में सीधे देखा।
"मंज़ूर है।"
आर्यवीर ने तुरंत कहा—
"मुझे भी।"
दादी मुस्कुराईं।
"ठीक है।"
"आज से तुम्हारा असली रिश्ता शुरू।"
कुछ देर बाद...
रिया सिंह हाउस के बाहर खड़ी थी।
वह अंदर की सारी बातें सुन चुकी थी।
उसे लगा था कि कॉन्ट्रैक्ट सामने आने के बाद सब खत्म हो जाएगा।
लेकिन...
अब तो आर्यवीर और सान्वी को अपने प्यार को साबित करने का मौका मिल गया था।
रिया ने गुस्से में फोन निकाला।
तभी उसके फोन पर एक अनजान नंबर से कॉल आया।
"हैलो?"
दूसरी तरफ़ से एक पुरुष आवाज़ आई—
"आपको आर्यवीर और सान्वी को अलग करना है ना?"
रिया चुप रही।
"मेरे पास आर्यवीर के अतीत से जुड़ी ऐसी जानकारी है..."
"...जिसे जानने के बाद सान्वी खुद उससे दूर हो जाएगी।"
रिया की आँखों में चमक आ गई।
"कौन हो तुम?"
आवाज़ आई—
"जिसे आप बहुत जल्द पहचान जाएँगी।"
कॉल कट गया।
रिया कुछ पल मोबाइल को देखती रही।
फिर उसके चेहरे पर धीमी मुस्कान आई।
"शायद..."
"अब मुझे तुम्हारी जरूरत नहीं पड़ेगी, आर्यवीर।"
"तुम्हारा अतीत ही तुम्हारा रिश्ता तोड़ देगा।"
उधर...
बगीचे में आर्यवीर और सान्वी अकेले बैठे थे।
दोनों के बीच कुछ पल खामोशी रही।
फिर सान्वी ने पूछा—
"एक महीने..."
"हाँ।"
"तुम्हें लगता है हम कर पाएँगे?"
आर्यवीर मुस्कुराया।
"हमने इससे मुश्किल चीज़ें की हैं।"
"जैसे?"
"तुम्हें पहली बार कॉफी गिराने के बाद भी दोबारा मिलने का फैसला।"
सान्वी हँस पड़ी।
"और तुम्हें झेलना?"
"वो सबसे मुश्किल था।"
सान्वी ने उसे हल्का-सा धक्का दिया।
दोनों हँस पड़े।
फिर अचानक आर्यवीर गंभीर हो गया।
उसने धीरे से कहा—
"एक बात वादा करो।"
"क्या?"
"आगे से अगर मेरे बारे में कुछ सुनो..."
"...तो किसी और पर भरोसा करने से पहले मुझसे पूछोगी।"
सान्वी ने उसकी आँखों में देखा।
"वादा।"
"और तुम?"
"मैं भी।"
"क्या?"
"तुमसे कुछ नहीं छुपाऊँगा।"
दोनों ने एक-दूसरे की तरफ हाथ बढ़ाया।
इस बार...
उनके हाथों के बीच कोई कॉन्ट्रैक्ट नहीं था।
सिर्फ़ भरोसा था।
लेकिन...
उन्हें पता नहीं था कि उनके इस नए रिश्ते की पहली परीक्षा अगले ही दिन आने वाली है।
क्योंकि सुबह...
सिंह हाउस के दरवाज़े पर एक आदमी आने वाला था।
हाथ में एक पुरानी तस्वीर...
और आर्यवीर के अतीत का ऐसा राज़...
जिसे सान्वी ने कभी सुना तक नहीं था।
क्रमशः...