Student revolution in Jharkhand in Hindi Magazine by Virendra Devangan books and stories PDF | झारखंड में छात्रक्रांति

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झारखंड में छात्रक्रांति

झारखंड की राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में व्याप्त अनियमितताओं व धांधली के खिलाफ वहां के निष्ठावान छात्रों ने 25 जुलाई 2026 से बड़ा आंदोलन खड़ा कर लिया है।

छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने 7-8 दिन तक भूख हड़ताल करने के बाद हालांकि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के कहने पर पानी पीकर अपना अनशन तोड़ दिया था, परंतु वे फिर अनशन पर बैठ गए और अन्य 6 छात्र उनका साथ देने लगे।

प्रतियोगिता परीक्षाओं में कथित धांधली को लेकर झारखंड के सीआइडी ने जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल, खियांग्यते को गिरफ्तार कर लिया है। विदित हो कि जेपीएससी आफिस में रेड के बाद इस महाभ्रष्ट अध्यक्ष ने इस्तीफा दे दिया था।

उधर ईडी की भी इंट्री हो गई है। उसने जेपीएससी में कथित धांधली के मामले में पीएमएलए के तहत केस दर्ज किया है। जांच के लिए 5 सदस्यीय टीम रांची पहुंच गई है।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार के निर्देश पर ईडी धनशोधन कानून (पीएमएलए) के तहत राजस्थान, हरियाणा, असम, बिहार, कर्नाटक, महाराष्ट्र में दर्ज पेपर लीक के आपराधिक मामलों में पैसे के लेनदेन के एंगल से जांच करने के लिए प्राथमिक मामले (ईसीआईआर) दर्ज कर दी है।

मोटे आकलन के अनुसार, देश में पिछल 12 साल में पेपर लीक के छोटे-बड़े 100 से ज्यादा मामले सामने आए हैं। यही वजह है कि पूरे देश में जेन-जी उबाल पर है। उनमें सरकारों के ढुलमुल रवैये के प्रति गहन असंतोष देखा जा रहा है।

झारखंड छात्र आंदोलन को समर्थन देने के लिए सीजेपी यानी कॉकरोच जनता पार्टी ने पहले ऐलान किया था कि वह अपने आंदोलन का विस्तार झारखंड तक करेगी। 

पार्टी के संस्थापक का कहना है,‘‘वह फिलहाल राजनीतिक दल नहीं बनेगी, बल्कि जन आंदोलन और प्रेशर गु्प के रूप में काम जारी रखेगी।’’

लेकिन, घनघोर आश्चर्य यह भी कि यही तिलचट्टा पार्टी के कर्ताधर्ता पैतरा बदलते हुए अब कह रहे हैं कि हमने क्या सभी छात्र आंदोलनों का ठेका ले रखा है?’’

वाह! क्या कहने तिलचट्टों का? इसे ही कहते हैं-सलेक्टिव पालिटिक्स!

आश्चर्य यह भी कि दिल्ली के छात्र आंदोलन को खुलकर समर्थन देनेवाली कांग्रेस, आप, सपा आदि विपक्षी पार्टियां अभी तक या तो चुप्पी साधी हुई हैं या बेसिरपैर की बयानबाजी कर रही हैं।

सपा प्रमुख का बयान तो और भी हास्यास्पद है। उसने तो झारखंड के छात्र आंदोलन को केंद्र सरकार की नाकामी करारा दे दिया है।

उनसे पूछा जाना चाहिए कि राज्य की प्रतियोगिता परीक्षाओं में धांधलीबाजी, भ्रष्टाचरण, पैसों के लेनदेन के लिए केंद्र की सरकार कैसे दोषी हो सकती है? ऐसी बयानबाजी छिछली राजनीति का उत्कृष्ट उदाहरण कहा जा सकता है।

यही वजह है कि झारखंड की छात्रक्रांति में इंडी गठबंधन का दोहरा चरित्र सामने आ रहा है, जो बेहद सलेक्टिव है। मतलब जहां उनकी सरकारें नहीं है, वहीं हंगामा, होहल्ला और धरना-प्रदर्शन करना है और जहां है, वहां मुख मोड़ लेना है।

इन विपक्षी पाटियों का यही रवैया कर्नाटक, पंजाब में भी देखने को मिल रहा है, जहां छात्र परीक्षा लीक को लेकर आंदोलित हैं।

क्या है झारखंड के छात्रों की मांगे-
1. राज्य भरती परीक्षाओं में कथित धांधलियों की सीबीआइ जांच करे।
2. 2019 के बाद आयोजित जेएसएससी, सीजीएल और पीजीटी परीक्षाएं रद्द किए जाएं।
3. नौकरियों के लिए भरती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए।
4. परीक्षा में गड़बड़ी के दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो।

किस वजह से अटकी है वार्ता का परिणाम-
1. सरकार का कहना है कि कई अभ्यर्थियों को नियुक्ति मिल चुकी है। इसीलिए, इन परीक्षाओं को रद्द करना विधिसम्मत नहीं है।

प्रतिक्रिया-पहले सरकार यही तर्क दे रही थी। जब देखी कि छात्र आंदोलन व्यापक हो रहा है, तब सोरेन सरकार ने यू टर्न लेते हुए आंदोलनकारी छात्रों की उक्त मांगे मान ली है। इससे वे लोग भड़क रहे हैं, जो ईमानदारी व मेहनत से नौकरी हासिल किए थे। ऐसी दशा में सोरेन सरकार फंसती नजर आ रही है।

2. आंदोलनकारी छात्र किसी राज्य स्तरीय एजेंसी की अपेक्षा पूरे मामले की जांच सीबीआइ से कराने पर अड़े हुए हैं।

प्रतिक्रियाएं-
1. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा है, ‘‘विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग गलत है। छात्रों को शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार है। झारखंड सरकार को इन छात्रों की बात सुननी चाहिए।’’

त्वरित टिप्पणी-केंद्रीय शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा होने के बाद संसद परिसर में नारा लगवानेवाले राहुल गांधी-‘‘अभी तो झांकी है; अमित साह बाकी है।’’ का दांव उल्टा पड़ गया है। अब न झारखंड के छात्रक्रांति को निगलते बन रहा है, न उगलते।

नीट पेपर लीककांड पर शिक्षामंत्री के इस्तीफे और कथित पुलिस ज्यादती के लिए गृहमंत्री को घेरे में लेनेवाले राहुल गांधी झारखंड के शिक्षामंत्री, गृहमंत्री, जो मुख्यमंत्री के पास है, उनसे इस्तीफा क्यों नहीं मांग रहे हैं?

उन्हें तो छात्रों के हित में हेमंत सोरेन सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम देना चाहिए था कि छात्रों की सारी मांगे मानो, अन्यथा हम समर्थन वापस लेते हैं। लेकिन, नहीं; उनमें ऐसा धांसू निर्णय लेने का कलेजा कहां है?

विदित हो कि सोरेन सरकार कांग्रेस की बैशाखी पर टिकी हुई है। उसके चार मंत्री कांग्रेसी हैं।

2. आंदोलनकारी छात्र नेता देवेंद्रनाथ महतो का कहना है, ‘‘हमें रोकने के लिए बल प्रयोग किया गया। कई लोग घायल हैं। हमने कोई राजनीतिक बयानबाजी नहीं की। यह जनआंदोलन बन चुका है।’’
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