Mr. Ms. Fake in Hindi Comedy stories by kajal jha books and stories PDF | Mr. Ms. Fake - एपिसोड 26

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Mr. Ms. Fake - एपिसोड 26

Mr. & Ms. Fake
Episode 26 – The Girl Who Knew Saanvi
अगली सुबह...
सूरज निकल चुका था, लेकिन सिंह हाउस में किसी के चेहरे पर सुबह की रौनक नहीं थी।
आर्यवीर पूरी रात सो नहीं पाया था।
उसके सामने बार-बार वही तस्वीर घूम रही थी—
नैना जिंदा थी।
और किसी ने उसे इतने सालों से दुनिया से छुपाकर रखा था।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल था...
क्यों?
आर्यवीर अपने कमरे की खिड़की के पास खड़ा बाहर देख रहा था।
तभी दरवाज़ा खुला।
सान्वी अंदर आई।
उसके हाथ में दो कप कॉफी थी।
"पूरी रात सोए नहीं?"
आर्यवीर ने पीछे मुड़कर देखा।
"तुम भी नहीं सोई।"
सान्वी ने एक कप उसकी तरफ बढ़ाया।
"तुम्हारी वजह से।"
आर्यवीर हल्का-सा मुस्कुराया।
"मेरी वजह से?"
"हाँ।"
"क्योंकि अगर तुम अकेले उस जगह चले जाते तो मैं तुम्हें ढूँढ़ने के लिए पुलिस, मीडिया और पूरी दुनिया को पीछे लगा देती।"
आर्यवीर हँस पड़ा।
"तुम इतनी खतरनाक हो?"
"तुमने अभी तक ठीक से देखा ही कहाँ है।"
दोनों कुछ पल हँसते रहे।
फिर माहौल अचानक गंभीर हो गया।
सान्वी ने धीरे से पूछा—
"आज हम सच में वहाँ जाएँगे?"
आर्यवीर ने सिर हिलाया।
"हाँ।"
"और अगर ये जाल हुआ तो?"
"तो साथ में फँसेंगे।"
सान्वी ने उसकी तरफ देखा।
"और अगर नैना सच में वहाँ हुई?"
आर्यवीर की आँखों में बेचैनी उतर आई।
"तो मैं उसे वापस लेकर आऊँगा।"
सान्वी ने उसका हाथ पकड़ लिया।
"और मैं तुम्हारे साथ रहूँगी।"
नीचे...
दादी पहले से उनका इंतज़ार कर रही थीं।
उनके सामने अभय भी बैठा था।
अभय ने कहा—
"तुम दोनों वहाँ नहीं जा सकते।"
आर्यवीर ने तुरंत पूछा—
"क्यों?"
"क्योंकि ये बहुत खतरनाक है।"
"मुझे खतरा मंज़ूर है।"
अभय ने सान्वी की तरफ देखा।
"और उसे?"
आर्यवीर कुछ बोलता, उससे पहले सान्वी ने कहा—
"मैं खुद फैसला कर सकती हूँ।"
अभय कुछ पल उसे देखता रहा।
फिर हल्का-सा मुस्कुराया।
"अब समझ आया..."
"क्या?"
"नैना ने तुम्हें उसके बारे में इतना क्यों बताया था।"
आर्यवीर चौंका।
"क्या मतलब?"
अभय ने जेब से एक पुराना छोटा-सा कागज़ निकाला।
"ये नैना की डायरी का एक पन्ना है।"
आर्यवीर ने उसे ले लिया।
उस पर लिखा था—
"आर्य को हमेशा किसी ऐसे इंसान की जरूरत होगी जो उसकी जिद के पीछे छिपे डर को समझ सके।"
आर्यवीर की आँखें नम हो गईं।
सान्वी ने धीरे से उसका हाथ दबाया।
कुछ देर बाद...
आर्यवीर और सान्वी कार से उस जगह के लिए निकल पड़े जहाँ से नैना का फोन आया था।
शहर से काफी दूर...
एक पुराना बंद पड़ा रिसॉर्ट।
चारों तरफ घने पेड़।
सड़क सुनसान।
सान्वी ने खिड़की से बाहर देखा।
"ये जगह देखकर ही डर लग रहा है।"
आर्यवीर ने कहा,
"तुम वापस जा सकती हो।"
सान्वी ने उसे घूरा।
"फिर शुरू हो गए?"
"क्या?"
"मुझे दूर रखने की कोशिश।"
आर्यवीर मुस्कुराया।
"मैं बस..."
"जानती हूँ।"
सान्वी ने उसकी बात काट दी।
"तुम मेरी चिंता करते हो।"
आर्यवीर ने उसकी तरफ देखा।
"बहुत।"
दोनों कुछ पल एक-दूसरे को देखते रहे।
फिर सान्वी ने मुस्कुराकर कहा—
"तो गाड़ी चलाओ, मिस्टर चिंतित।"
आर्यवीर हँस पड़ा।
रिसॉर्ट के अंदर...
दरवाज़ा आधा खुला था।
आर्यवीर ने धीरे से उसे धक्का दिया।
चर्ररर...
अंदर अंधेरा था।
सान्वी ने उसका हाथ पकड़ लिया।
"आर्य..."
"मैं हूँ।"
दोनों धीरे-धीरे आगे बढ़े।
अचानक...
एक कमरे से आवाज़ आई।
"आर्य..."
आर्यवीर का दिल उछल पड़ा।
"नैना!"
वह आवाज़ की तरफ दौड़ा।
कमरे का दरवाज़ा खोला।
लेकिन अंदर कोई नहीं था।
सिर्फ़ एक टेबल...
और उस पर एक पुराना फोटो फ्रेम।
आर्यवीर ने उसे उठाया।
तस्वीर में नैना थी।
उसके साथ एक छोटी बच्ची।
आर्यवीर ने भौंहें सिकोड़ लीं।
"ये बच्ची कौन है?"
सान्वी ने तस्वीर देखी।
उसका चेहरा अचानक बदल गया।
"आर्यवीर..."
"क्या?"
सान्वी ने तस्वीर की तरफ इशारा किया।
"मैं इस लड़की को जानती हूँ।"
आर्यवीर ने उसकी तरफ देखा।
"क्या?"
सान्वी की आवाज़ काँप रही थी।
"ये..."
"ये मेरे बचपन की फोटो है।"
आर्यवीर स्तब्ध रह गया।
"क्या?"
सान्वी ने तस्वीर हाथ में ली।
"मुझे याद नहीं कि ये फोटो कहाँ की है..."
"लेकिन ये मैं हूँ।"
दोनों एक-दूसरे को देखते रह गए।
तभी...
पीछे से दरवाज़ा बंद होने की आवाज़ आई।
धड़ाम!
सान्वी चौंक गई।
आर्यवीर तुरंत उसकी तरफ मुड़ा।
"कौन है?"
कोई जवाब नहीं।
फिर अचानक कमरे की लाइट जल गई।
सामने एक महिला खड़ी थी।
चेहरा आधा दुपट्टे से ढका हुआ।
आर्यवीर ने उसे देखा।
उसकी साँसें रुक गईं।
"नैना..."
महिला ने धीरे-धीरे दुपट्टा हटाया।
वही चेहरा।
वही आँखें।
वही मुस्कान।
नैना।
सान्वी की आँखें भी नम हो गईं।
नैना धीरे-धीरे आर्यवीर की तरफ बढ़ी।
दोनों के बीच सिर्फ़ कुछ कदमों का फासला था।
आर्यवीर की आँखों से आँसू बह निकले।
"तुम सच में जिंदा हो..."
नैना ने मुस्कुराने की कोशिश की।
"हाँ।"
आर्यवीर ने उसे गले लगाने के लिए हाथ बढ़ाया।
लेकिन नैना अचानक पीछे हट गई।
"नहीं!"
आर्यवीर रुक गया।
"क्यों?"
नैना ने डरते हुए दरवाज़े की तरफ देखा।
"क्योंकि हमारे पास ज्यादा समय नहीं है।"
"समर को पता चल गया है कि मैं तुमसे मिली हूँ।"
आर्यवीर का चेहरा सख्त हो गया।
"समर कहाँ है?"
नैना ने कहा—
"यहीं।"
सान्वी ने चारों तरफ देखा।
"कहाँ?"
नैना ने धीरे से कहा—
"हमारे आसपास।"
अचानक बाहर से कई गाड़ियों की आवाज़ आने लगी।
सान्वी ने खिड़की से बाहर देखा।
तीन काली गाड़ियाँ रिसॉर्ट के बाहर आकर रुकी थीं।
दरवाज़े खुलने लगे।
नैना घबरा गई।
"वो आ गए।"
आर्यवीर ने तुरंत सान्वी को अपने पीछे किया।
"तुम दोनों पीछे रहो।"
नैना ने उसका हाथ पकड़ लिया।
"आर्य..."
"समर से लड़ना आसान नहीं है।"
"वो सिर्फ़ बिजनेसमैन नहीं है।"
आर्यवीर ने पूछा—
"तो फिर कौन है?"
नैना की आँखों में डर उतर आया।
"वो तुम्हारे पिता की मौत का कारण है।"
आर्यवीर जैसे जम गया।
"क्या?"
नैना ने आगे कहा—
"तुम्हारे पिता का एक्सीडेंट..."
"...एक हादसा नहीं था।"
सान्वी ने आर्यवीर की तरफ देखा।
उसकी आँखों में दर्द था।
लेकिन इससे पहले कि नैना कुछ और कहती...
बाहर से एक आवाज़ आई—
"बहुत हो गया, नैना।"
तीनों की नजर दरवाज़े पर गई।
दरवाज़ा धीरे-धीरे खुला।
और सामने...
समर मल्होत्रा खड़ा था।
उसके चेहरे पर शांत मुस्कान थी।
"इतने साल बाद..."
उसने आर्यवीर को देखते हुए कहा—
"बिल्कुल अपने पिता जैसा दिखने लगा है।"
आर्यवीर की मुट्ठियाँ भींच गईं।
"मेरे पिता के साथ क्या किया था तुमने?"
समर मुस्कुराया।
"वही सवाल..."
"जिसका जवाब तुम्हारे पिता अपने साथ कब्र में ले गए।"
सान्वी आगे बढ़ी।
"आपने नैना को इतने साल क्यों छुपाया?"
समर की नजर पहली बार सान्वी पर पड़ी।
उसके चेहरे की मुस्कान अचानक गायब हो गई।
वह कुछ सेकंड तक सान्वी को घूरता रहा।
फिर धीरे से बोला—
"तुम..."
सान्वी चौंक गई।
"आप मुझे जानते हैं?"
समर की आँखों में अचानक पहचान की चमक आई।
"तुम्हें देखकर मुझे एक चेहरा याद आ गया।"
"किसका?"
समर ने धीमे से कहा—
"तुम्हारी माँ का।"
सान्वी के पैरों तले जमीन खिसक गई।
आर्यवीर ने उसकी तरफ देखा।
नैना ने घबराकर आँखें बंद कर लीं।
क्योंकि वह जानती थी...
अब सिर्फ आर्यवीर का अतीत नहीं...
सान्वी का अतीत भी सामने आने वाला था।
क्रमशः...