हैलो फ्रेंड्स ! मैं हूँ विधि आहूजा! ओह ! अच्छा तो आप ये सोच रहे हैं कि मैं आखिर हूँ कौन और अच्छी भली चलती कहानी में यूँ बेतरतीब ढंग से कैसे घुस आई। सही है फ्रेंड्स क्योंकि मैं अपना पूरा परिचय आप लोगों को देना तो भूल ही गई। दरअसल ये कहानी मैं ही आपलोगों को सुना रहीं हूँ, न ... ना ... गलत मत समझिए, मैं इस कहानी की नायिका हरगिज़ नहीं हूँ। मैं तो बस स्टोरी टेलर हूँ और इस कहानी की एक मुख्य पात्र भी, तभी तो मैं पूरी कहानी डिटेल में जानती हूँ। जिस पार्टी का जिक्र कहानी में इतनी गर्मा गर्मी से हुआ था, उसी पार्टी के जरिए कहानी में हमारी एंट्री हुई । अब आप सोच रहे होंगे ये हम कौन, तो हम यानि मैं और मेरी बेस्टी ... शर्लिन डी'क्रूज़ ... हाँ ! अब आप बिल्कुल सही समझे हैं, यही है इस कहानी की नायिका। हालांकि कहानी में आगे तो इस के बारे में आप लोग बहुत कुछ जान जायेंगे पर थोड़ा सा परिचय अपनी बेस्टी से मैं अभी ही करवा देती हूँ ... शर्लिन गोवा के एक अपर मिडिल क्लास कैथोलिक फैमिली से आती है। उसके फादर सेबैस्टियन डी'क्रूज़ एक आर्कियोलॉजिस्ट हैं और मदर कैथरीन एक हाउस वाइफ हैं। जब शर्लिन दस साल की थी तो डी'क्रूज़ फैमिली मुम्बई शिफ़्ट हो गई थी, तब वहाँ उसका एडमिशन उसी स्कूल में हुआ जहाँ मैं पढ़ा करती थी और यही से शुरू हुई हमारी दोस्ती, जो अब तक बदस्तूर कायम है। हाँ ! एक और बात, इसे आप लोग जीसस की भेड़ जैसी लाचार - बेचारी लड़की समझने की भूल तो क़तई न करना क्योंकि ये बेहद स्ट्रांग, डिटर्मन्ड और फ्री-स्पिरिट लड़की है ... एक लेखिका है ... वह भी लाजवाब । शर्लिन की पहली ही किताब ' The Dark Side ' बेस्टसेलिंग रही ... इंडिया के मशहूर न्यूज़पेपर - टाइम्स ऑफ़ इंडिया के लिए वो रेगुलर कॉलम लिखती है। और यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि स्वप्निल देव रॉय को किताबों से बहुत प्यार है, तो हैरानी की बात ही क्या है जो वो एक किताब लिखने वाली पर निसार हो गया। एक्चुअली उस पार्टी में इनवाइट तो मुझे किया गया था क्योंकि मैं एक बड़े बिजनेसमैन की बेटी हूँ लेकिन मेरी वहाँ जाने में कोई दिलचस्पी नहीं थी मगर मेरे डैडी का ऑर्डर पास हो चुका था और मैं इस पार्टी में जा रहीं हूँ, ये सुनते ही मेरा बॉयफ्रेंड मोहित भड़क गया, इसके बाद उसने मुझसे खूब झगड़ा किया । उफ्फ्फ तौबा! बड़ी ही मुश्किल से मैंने उसे शांत किया और झूठ कह दिया कि पार्टी में मैं शर्लिन के साथ जा रहीं हूँ। मैंने झूठ बोल के मोहित को तो मना लिया मगर झूठ को सच करने के लिए शर्लिन को मनाना बाकी था। मैंने जब उससे पार्टी में साथ चलने की बात की तो उसने साफ़ इनकार कर दिया।
" आर यू किडिंग मी ? अगर तुम्हें नहीं जाना है तो मना कर दो, सिम्पल । "
" ट्राय टू अंडरस्टैंड स्वीटी, डैडी मेरी जान ले लेंगे। न जाने का वजह क्या बताऊँगी, मेरे पैरेंट्स मोहित के बारे में नहीं जानते। "
" तो बता दो, यही सही समय है। "
" नहीं ! ये सही समय नहीं है, मेरी मजबूरी समझ न प्लीज। मोहित को मैं इसी शर्त पर मना पाई हूँ कि तू मेरे साथ रहेगी ... आई बेग यू शर्ली ! "
" ओ माय गॉड ! "
" प्लीज ! "
" ओके फाइन ! "
ये सुनते ही मैं खुशी से उछलती हुई उसके गले लग गई। मुझे सच में उस वक़्त बहुत राहत मिली थी क्योंकि अब तक मैं खुद को दो पाटों में बुरी तरह फंसा पा रही थी। एक मिनट कहीं आप लोगों को यह तो नहीं लग रहा कि यह कहानी एक ही सीन में फंस गई है ... नहीं - नहीं ऐसा नहीं है। चलिए सीन शिफ़्ट करके सीधे आप लोगों को उस रॉयल पार्टी में लिए चलती हूँ, जहाँ मैं और शर्लिन थोड़ी देर से ही सही पर पहुँच गए थे। वैसे मैं अपने मुंह मियां मिट्ठू नहीं बन रही पर मैं भी बेहद खुबसूरत हूँ पर अफसोस थोड़ी सी अनचाही जेलसी के साथ कहना पड़ रहा है कि अक्सर ही मैं शर्लिन के सामने फीकी पड़ जाती हूँ। जैसे उस पार्टी में भी वो डार्क ब्लू वन शोल्डर इवनिंग गाउन में कमाल की लग रही थी और उधर ऑफ व्हाइट प्रिंस सूट में प्रिंस चार्मिंग 'स्वप्निल देव रॉय' ने पार्टी में आई फीमेल गेस्ट में तबाही मचा रखी थी। झूठ नहीं कहूँगी मेरी निगाहें भी खु़द-ब-खु़द बारम्बार स्वप्निल को निहारें जा रहीं थीं, मगर साथ ही मोहित को याद कर मेरा दिल गिल्ट से भरा जा रहा था। मेरी छोड़िये, पार्टी में आई बाकी सब लड़कियां अपनी-अपनी तरह से उसे रिझाने में लगीं थीं मगर स्वप्निल देव रॉय के चेहरे से ही ऊब झलक रही थी। वो हाथ में ड्रिंक लिए ... चुप्पी साधे बस एक तरफ इस तरह खड़ा था, जैसे कोई बद मज़ा जिम्मेदारी निभा कर जल्दी से जल्दी छुटकारा पाना चाहता हो। जाहिर सी बात है, यह सब विक्रम देव रॉय के नजरों से छिपा नहीं था और उन्हें अपने पोते का बर्ताव बुरी तरह खटक रहा था। वो स्वप्निल के करीब पहुँचे और धीमे मगर गुस्से से लबरेज़ स्वर में कहा,
" ये किस तरह का बर्ताव है स्वप्निल ? "
" क्यों दादा जी ? क्या खराबी है मेरे बर्ताव में ? "
" खराबी ? ये सारी लड़कियां बेसब्री से आप से मिलना चाहतीं हैं, बातें करना चाहतीं हैं पर आप हैं कि इनमें कोई दिलचस्पी ही नहीं दिखा रहे। शायद आप भूल गए हैं कि ये पार्टी किसलिए रखी गई है। "
" नहीं भूला मगर मुझे इन सब में कोई दिलचस्पी नहीं है। "
विक्रम देव रॉय की आवाज गुस्से से थर्रा उठी,
" बगावती सुर हमें पसन्द नहीं युवराज स्वप्निल, बी इन योर लिमिट्स। "
विक्रम देव रॉय तो वहाँ से चले गए पर स्वप्निल समझ गया कि उसका ये उदासीन रवैया बड़ा बवाल खड़ा कर सकता है। इसलिए उसने नज़र घुमाई ताकि जो पहली लड़की उस के नजरों में आ जाये, वो पार्टी का सारा समय उसके साथ गुजार सके। उसकी नज़र ठहरी शर्लिन पर जो उस वक़्त वहाँ सजाये गए एंटीक पेंटिंग्स देखने में मशगूल थी।
" लगता है एंटीक आर्ट में काफी दिलचस्पी है आपकी? "
शर्लिन ने पलट कर स्वप्निल को यूँ देखा जैसे कोई बिन बुलाए मेहमान को देखता है मगर मेरी वजह से इस पार्टी में बिन बुलाई मेहमान तो वो खुद थी, सामने जो खड़ा था वो तो मेज़बान था। उसे यूँ अपनी तरफ देखता पा कर स्वप्निल फिर बोला,
" वैसे ये पेंटिंग्स लगभग दो सौ साल पुरानी हैं। "
शर्लिन उकताए हुए सुस्त स्वर में बोली,
" एंड हाउ डू यू नो दैट ? "
शर्लिन का बिहेवियर वैसे तो नाराज करने वाला था पर स्वप्निल को उसका बर्ताव बेहद दिलचस्प लगा जो कि पार्टी में आई अमीरजादियों या यूँ कहें पैम्पर्ड विंड-अप डॉल्स से बिल्कुल अलग ... अनूठा था। उसके होठों पे एक दबी- दबी सी मुस्कान खिल उठी,
" बिकॉज़ दिस पैलेस इज माइन ! "
शर्लिन को जैसे झटका लगा, वो जल्दी से बोली,
" ओ माय गॉड ! आई एम सो सॉरी, आइ डिडन्ट रिकॉग्नाइज यू। "
" सो स्ट्रेंज ! "
" एक्चुअली मैं आप की पार्टी की इनवाइटेड गेस्ट नहीं हूँ। मुझे यहाँ मेरी एक फ्रेंड लेकर आई है, विधि आहूजा। "
शर्लिन अपना हाथ बढ़ाती हुई बोली,
" शर्लिन ... शर्लिन डी'क्रूज़ । "
स्वप्निल बड़े ही उमंग से उसका हाथ थामते हुए बोला,
" स्वप्निल देव रॉय एंड यू आर वॉर्म्ली वेलकम टू द पार्टी मिस डी'क्रूज़। "
और इस तरह वो मिले और तब तक यूँ ही बातें करते रहे जब तक की मैं कबाब में हड्डी की तरह टपक नहीं पड़ी। मुझे पार्टी को अब अलविदा कहना था और इसलिए मैं शर्लिन को ढूंढती हुई वहाँ पहुँच गई थी। हमें या ये कहना बेहतर होगा कि शर्लिन को अलविदा करने के लिए स्वप्निल देव रॉय खुद बाहर तक आया ... पार्टी की सारी पैंपर्ड विंड - अप डॉल्स जलकर खाक हो गईं ............
क्रमशः............................