Dwarf Genie in Hindi Short Stories by Deepak Kumar Tiwari books and stories PDF | बौना जिन्न

Featured Books
Categories
Share

बौना जिन्न

बौना जिन्न
अध्याय 1: मिट्टी का पुराना चिराग और एक अजीब मेहमान
गाँव के एक छोटे से और पुराने घर में संजना अपनी बीमार माँ के साथ रहती थी। संजना बहुत ही समझदार और पढ़ने-लिखने की शौकीन लड़की थी। वह आगे कॉलेज जाकर अपनी पढ़ाई पूरी करना चाहती थी, लेकिन उसके परिवार की आर्थिक तंगी और रूढ़िवादी रिश्तेदारों ने उसकी शादी एक ऐसे अमीर घर में तय कर दी थी, जो लड़की की पढ़ाई लिखाई के बिल्कुल खिलाफ थे। संजना रोज रात को अकेले बैठकर अपनी किस्मत पर रोती थी।

एक दिन जब संजना घर की पुरानी कोठरी की सफाई कर रही थी, तो उसे मिट्टी का एक बहुत पुराना और गंदा सा चिराग मिला। उसने सोचा कि इसे साफ कर देती हूँ। जैसे ही उसने अपने आंचल से उस चिराग की धूल को पछाड़ा, उसमें से अचानक नीले रंग का धुआँ निकलने लगा और देखते ही देखते हवा में एक बहुत ही छोटे कद का, गोल-मटोल और अजीब सी टोपी पहने हुए एक बौना जिन्न प्रकट हो गया।

संजना डरकर पीछे हट गई, लेकिन जिन्न ने हाथ जोड़कर कहा, घबराओ मत मालकिन! मैं हजारों सालों से इस चिराग में कैद था। तुमने मुझे इस कैद से आजाद कर दिया है, इसलिए आज से मैं तुम्हारा वफादार दोस्त और सेवक हूँ। हुक्म करो, मेरे लिए क्या सेवा है?



अध्याय 2: जिन्न का अनोखा साथ और पढ़ाई का जुनून
संजना पहले तो हैरान थी, लेकिन जब उसे समझ आया कि यह छोटा सा जिन्न उसकी हर मुश्किल आसान कर सकता है, तो उसने अपनी दिल की बात कह दी। उसने रोते हुए कहा, जिन्ना भाई, मैं शादी नहीं करना चाहती। मैं आगे पढ़ना चाहती हूँ, अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती हूँ, लेकिन घरवाले मेरी बात सुनने को तैयार नहीं हैं।

बौने जिन्न ने अपनी लंबी मूंछों को ताव दिया और अपनी जादुई छड़ी घुमाते हुए कहा, बस इतनी सी बात? तुम्हारी पढ़ाई और तुम्हारे सपनों के बीच में जो भी आएगा, यह बौना जिन्न उसकी अकल ठिकाने लगा देगा। तुम अपनी किताबों पर ध्यान दो!

अगले ही दिन से जिन्न ने अपने जादुई कारनामे शुरू कर दिए। जब भी संजना के रिश्ते वाले घर पर बात पक्की करने आते, जिन्न अदृश्य होकर उनके खाने में नमक की जगह लाल मिर्च मिला देता या उनके घोड़ों को डरा कर भगा देता। इतना ही नहीं, जब भी संजना कॉलेज के फॉर्म भरने बैठती, जिन्न हवा में उड़कर पल भर में उसके सारे नोट्स और किताबें ला देता और चुटकियों में उसके सारे काम पूरे कर देता।



अध्याय 3: शादी की जिद और जादुई रुकावटें
संजना के रिश्तेदारों ने जब देखा कि हर बार शादी की तारीख तय होते वक्त कोई न कोई अजीब और डरावनी सी घटना घट जाती है, तो वे डरने लगे। लेकिन संजना के ताऊजी जिद्द पर अड़े रहे कि शादी तो उसी लड़के से होगी।

शादी की तारीख नजदीक आ गई थी। घर में मेहमानों का आना-जाना शुरू हो चुका था। संजना बहुत परेशान थी कि अब क्या होगा। तभी रात के वक्त खिड़की से अंदर आकर बौने जिन्न ने उसके कंधे पर हाथ रखा और मुस्कुराते हुए कहा, डरो मत संजना! कल जब बारात आएगी, तब देखना मैं क्या तमाशा करता हूँ।

शादी वाले दिन, दूल्हा अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ बाजे-गाजे के साथ बारात लेकर दरवाजे पर पहुँचा। दूल्हे के चेहरे पर बड़ा घमंड था। जैसे ही द्वारचार की रस्म शुरू होने लगी, बौने जिन्न ने अपनी जादुई ताकत से दूल्हे की शेरवानी का रंग अचानक गुलाबी कर दिया और उसके जूते गायब करके पैरों में घुंघरू बांध दिए।

दूल्हा जैसे ही आगे बढ़ा, उसके पैरों में खुद-ब-खुद ठुमक-ठुमक कर नाचने वाले घुंघरू बजने लगे। सारे बाराती हैरान होकर देखने लगे। माहौल में इतनी हास्य-स्पद स्थिति बन गई कि दूल्हे के पिता गुस्से में लाल हो गए और उन्होंने कहा, यह कैसी बदतमीजी है? हम ऐसे घर में रिश्ता नहीं करेंगे जहाँ अपशकुन होते हों!और गुस्से में आकर बारात बिना शादी किए ही वापस लौट गई। संजना की शादी आखिरकार रुक गई और उसने राहत की सांस ली।



अध्याय 4: असली आज़ादी और विदाई
शादी टूटने के बाद संजना के घरवाले भी समझ गए कि संजना की इच्छा के खिलाफ उसकी जिंदगी बर्बाद करना गलत था। उन्होंने मान लिया कि अब संजना अपनी मर्जी से आगे की पढ़ाई पूरी करेगी। संजना ने चैन की सांस ली और कॉलेज में दाखिला ले लिया।

कुछ महीने बीत गए। संजना अब अपने कॉलेज की परीक्षाओं की तैयारी कर रही थी। एक दिन उसने उस बौने जिन्न को अपने सामने बुलाया। जिन्न हमेशा की तरह हंसते हुए प्रकट हुआ।

संजना ने प्यार से उसके सिर पर हाथ फेरा और कहा, जिन्ना भाई, तुमने मेरी जिंदगी बचा ली, मेरे सपने को टूटने नहीं दिया। लेकिन अब मैं अपने पैरों पर खड़ी हो रही हूँ, और मैं चाहती हूँ कि तुम हमेशा के लिए किसी के गुलाम बनकर मत रहो। मैं तुम्हें आज पूरी तरह से आजाद करती हूँ।

बौने जिन्न की आंखें खुशी और प्यार से नम हो गईं। उसने हाथ जोड़कर कहा, मालकिन, आज तक मुझे किसी ने सिर्फ अपना गुलाम समझा, लेकिन तुमने मुझे आजादी और सम्मान दिया है। मैं तुम्हारी इस नेकी को कभी नहीं भूलूँगा।

अध्याय 5: आखिरी मिलन और विदाई का जश्न
कुछ सालों बाद, संजना अपनी पढ़ाई पूरी करके एक प्रतिष्ठित नौकरी पा चुकी थी। उसकी जिंदगी में एक ऐसा योग्य और समझदार युवक आया जो उसकी कदर करता था, और दोनों ने आपसी रजामंदी से एक साधारण समारोह में शादी करने का फैसला किया।

संजना की शादी के दिन जब सब लोग खुशियां मना रहे थे, अचानक महफिल के बीचों-बीच वही छोटा सा बौना जिन्न प्रकट हुआ। उसने सुंदर से पारंपरिक कपड़े पहन रखे थे।

जैसे ही संगीत और ढोल की आवाज गूंजी, बौने जिन्न ने अपनी जादुई छड़ी लहराई और डीजे फ्लोर पर ऐसा जमकर धांसू डांस किया कि वहाँ मौजूद सारे मेहमान हंसते-हंसते लोटपोट हो गए। उसने हवा में रंग-बिरंगे फूल बरसाए और दूल्हा-दुल्हन को आशीर्वाद दिया।

जैसे ही रस्में खत्म हुईं, संजना और उसका जीवनसाथी जब जिन्न की तरफ देखने लगे, तो वह हवा में मुस्कराते हुए हल्की सी नीली रोशनी में तब्दील हो गया और हमेशा-हमेशा के लिए गायब हो गया। संजना की आँखों में खुशी के आँसू थे, क्योंकि उसे पता था कि उसका सबसे अच्छा जादुई दोस्त हमेशा उसके दिल में जिंदा रहेगा।