प्राचीन समय की बात है। हिमालय की गोद में बसा एक छोटा सा गाँव था जिसका नाम शिवपुर था। उस गाँव में आरती नाम की एक गरीब लड़की अपनी बूढ़ी माँ के साथ रहती थी। आरती के पिता का देहांत बचपन में ही हो गया था। घर की सारी जिम्मेदारी आरती पर थी। वह दिन भर खेतों में काम करती और शाम को भोले बाबा के मंदिर में दिया जलाने जाती।
आरती का नियम था, चाहे कितनी भी थकान हो, वह बिना मंदिर गए सोती नहीं थी। गाँव के लोग उसकी भक्ति की हंसी उड़ाते थे। कहते थे, पूजा करने से पेट नहीं भरता। लेकिन आरती किसी की बात पर ध्यान नहीं देती थी। उसका विश्वास अटूट था। वह मानती थी कि भोले बाबा सबकी सुनते हैं।
सावन का महीना चल रहा था। लगातार बारिश के कारण आरती की माँ बहुत बीमार पड़ गई। उसे तेज बुखार आ गया। गाँव के वैद्य ने कहा कि दवा के लिए बहुत पैसे लगेंगे और दवा लेने के लिए शहर जाना पड़ेगा। आरती के पास एक रुपया भी नहीं था। वह बहुत रोई और पूरी रात अपनी माँ के पास बैठी रही।
फिर वह दौड़ती हुई भोले बाबा के मंदिर गई। मंदिर खाली था। वह शिवलिंग से लिपटकर रोने लगी और बोली, हे भोले बाबा, आप तो सबके दुख हरते हो, मेरी माँ को ठीक कर दो। मेरे पास आपको देने के लिए कुछ भी नहीं है, बस सच्चे आंसू हैं। अगर मेरी माँ को कुछ हो गया तो मैं अनाथ हो जाऊँगी।
कहते हैं सच्चे दिल से निकली पुकार कभी खाली नहीं जाती। उस रात आरती थक कर मंदिर में ही सो गई। उसे सपने में एक बूढ़े बाबा ने दर्शन दिए। उनकी जटा से गंगा बह रही थी, गले में नाग था और माथे पर चंदन लगा था। उन्होंने कहा, बेटी, मैं तेरी भक्ति से बहुत प्रसन्न हूँ। तू सच्चे मन से मेरी पूजा करती है। सुबह जब तू उठेगी, तेरे घर के आँगन में बेलपत्र के पेड़ के नीचे तुझे कुछ मिलेगा। तू चिंता मत कर।
सुबह आरती की आँख खुली तो वह दौड़कर आँगन में गई। बेलपत्र के पेड़ के नीचे सच में एक छोटी सी पोटली रखी थी। उसमें जड़ी-बूटियाँ और कुछ अशर्फियाँ थीं। साथ में एक कागज पर जड़ी-बूटी का उपयोग कैसे करना है, वह लिखा था। आरती ने उन जड़ी-बूटियों से अपनी माँ का इलाज किया और कुछ ही दिनों में उसकी माँ बिल्कुल ठीक हो गई।
अशर्फियों से उसने अपना जीवन बेहतर बनाया और अपनी माँ का अच्छे डॉक्टर से इलाज करवाया। लेकिन उसने घमंड नहीं किया। उसने गाँव में ही भोले बाबा का एक बड़ा मंदिर बनवाया और हर सावन में गरीबों को भोजन करवाने लगी। आज भी शिवपुर में लोग कहते हैं कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना भोले बाबा जरूर सुनते हैं। आरती की कहानी आज भी हर सावन में सुनाई जाती है और सबको सिखाती है कि भक्ति में बहुत शक्ति होती है।गाँव के लोग अब आरती का बहुत सम्मान करने लगे और उसे शिव की सबसे बड़ी भक्त मानने लगे। उसकी सच्ची श्रद्धा ने पूरे गाँव को सिखा दिया कि भोले बाबा अपने सच्चे भक्तों का साथ कभी नहीं छोड़ते हैं।
सच्ची भक्ति और निस्वार्थ प्रेम से भगवान भी प्रसन्न हो जाते हैं।