Mr. Ms. Fake in Hindi Love Stories by kajal jha books and stories PDF | Mr. Ms. Fake - एपिसोड 31

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Mr. Ms. Fake - एपिसोड 31

Mr. & Ms. Fake
Episode 31 – The Last Recording
कमरे में पड़े उस छोटे-से USB ड्राइव को देखकर किसी की भी नजर उससे हट नहीं रही थी।
सान्वी के हाथ काँप रहे थे।
उसकी जिंदगी के इतने सालों से छिपे सवालों का जवाब शायद उसी छोटी-सी चीज़ में था।
उसकी माँ...
उसके पिता...
उसकी बदली हुई पहचान...
और समर मल्होत्रा।
सब कुछ।
आर्यवीर ने USB उठाया।
"इसे अभी देखते हैं।"
सान्वी ने तुरंत उसका हाथ रोक लिया।
"नहीं।"
आर्यवीर ने उसकी तरफ देखा।
"क्यों?"
"क्योंकि अगर इसमें मेरे पिता की मौत का सच हुआ..."
वह रुक गई।
"तो मुझे डर है कि मैं उसे सुन नहीं पाऊँगी।"
आर्यवीर उसके करीब आया।
"तुम्हें अकेले नहीं सुनना पड़ेगा।"
सान्वी ने उसकी आँखों में देखा।
"अगर सच बहुत बुरा हुआ तो?"
"तो हम दोनों मिलकर उसका सामना करेंगे।"
सान्वी की आँखों में आँसू आ गए।
"तुम हर बार मेरे साथ क्यों खड़े रहते हो?"
आर्यवीर मुस्कुराया।
"क्योंकि शायद..."
वह कुछ पल रुका।
"अब तुम मेरी आदत बन चुकी हो।"
सान्वी हल्का-सा मुस्कुरा दी।
"आदत?"
"हाँ।"
"बहुत खराब आदत हूँ मैं।"
"वो तो है।"
सान्वी ने उसे घूरा।
"क्या?"
आर्यवीर हँस पड़ा।
"तुम्हारी वजह से मेरी जिंदगी में चैन नाम की चीज़ खत्म हो गई है।"
"और फिर भी मुझे छोड़ना नहीं चाहते?"
"बिल्कुल नहीं।"
सान्वी की मुस्कान इस बार थोड़ी ज्यादा गहरी थी।
लेकिन दोनों को पता था...
ये हँसी ज्यादा देर टिकने वाली नहीं थी।
कुछ मिनट बाद...
लैपटॉप पर USB लगाया गया।
स्क्रीन पर सिर्फ़ एक वीडियो फाइल दिखाई दी।
"FINAL_RECORDING_15_YEARS_AGO"
आर्यवीर की उंगलियाँ माउस पर रुक गईं।
देवेंद्र भी कमरे में आ चुके थे।
माधवी ने सान्वी का हाथ पकड़ रखा था।
आर्यवीर ने वीडियो प्ले कर दिया।
स्क्रीन पर अंधेरा था।
फिर धीरे-धीरे एक कमरा दिखाई दिया।
एक आदमी कैमरे के सामने बैठा था।
सान्वी ने उसे देखते ही साँस रोक ली।
"पापा..."
वह अमन शर्मा था।
सान्वी की आँखों से आँसू निकल पड़े।
उसने स्क्रीन को छूने की कोशिश की।
जैसे इतने सालों बाद पहली बार अपने पिता को सच में देख रही हो।
अमन कैमरे की तरफ देखकर बोल रहा था—
"अगर ये रिकॉर्डिंग कभी सान्वी तक पहुँचे..."
उसकी आवाज़ भर्रा गई।
"...तो इसका मतलब है कि मैं शायद उसके पास नहीं हूँ।"
सान्वी फूट-फूटकर रो पड़ी।
माधवी ने उसे गले लगा लिया।
वीडियो में अमन आगे बोल रहा था—
"सान्वी, अगर तुम ये देख रही हो तो एक बात याद रखना..."
"तुम्हारे पिता ने तुम्हें कभी नहीं छोड़ा।"
"मैंने तुम्हें दूर इसलिए भेजा क्योंकि तुम्हारी जान खतरे में थी।"
आर्यवीर की आँखें भी नम हो गईं।
फिर अमन ने कहा—
"जिस आदमी से हमें सबसे ज्यादा खतरा है..."
वह कुछ पल रुका।
"वो समर है।"
कमरे में सन्नाटा छा गया।
लेकिन अगले ही पल...
वीडियो में अमन ने एक ऐसा नाम लिया जिसने सबको हिला दिया।
"समर अकेला नहीं है।"
देवेंद्र की नजरें स्क्रीन पर जम गईं।
अमन आगे बोला—
"उसके साथ कोई ऐसा व्यक्ति है जिस पर मैं और आर्यवीर के पिता दोनों भरोसा करते हैं।"
आर्यवीर तुरंत देवेंद्र की तरफ देखने लगा।
देवेंद्र का चेहरा सफेद पड़ गया।
अमन ने कहा—
"मैं उस व्यक्ति का नाम अभी रिकॉर्ड नहीं कर सकता।"
"अगर ये वीडियो गलत हाथों में गया..."
"तो सान्वी भी खतरे में होगी।"
फिर उसने एक फाइल कैमरे के सामने उठाई।
"इस फाइल में सबूत हैं।"
"लेकिन इसे खोलने के लिए..."
वह रुका।
"सान्वी के पास मौजूद एक चीज़ की जरूरत होगी।"
सान्वी चौंक गई।
"मेरे पास?"
वीडियो में अमन ने कहा—
"सान्वी के जन्म के समय मैंने उसकी माँ को एक लॉकेट दिया था।"
माधवी ने अचानक अपना हाथ अपने गले पर रख लिया।
उनके चेहरे का रंग उड़ चुका था।
आर्यवीर ने तुरंत पूछा—
"माधवी जी..."
माधवी ने काँपते हुए अपना लॉकेट बाहर निकाला।
एक छोटा-सा चाँदी का लॉकेट।
सान्वी उसे देखकर स्तब्ध रह गई।
"ये..."
माधवी ने आँसू भरी आँखों से कहा—
"ये तुम्हारे पिता ने मुझे दिया था।"
अमन की रिकॉर्डिंग में आवाज़ आई—
"उस लॉकेट के अंदर एक छोटी-सी चाबी है।"
माधवी ने तुरंत लॉकेट खोलने की कोशिश की।
कई सालों से बंद वह लॉकेट अचानक खुल गया।
अंदर सचमुच एक छोटी-सी चाबी थी।
सबकी आँखें फैल गईं।
वीडियो आगे चल रहा था।
अमन ने आखिरी बार कैमरे की तरफ देखा।
"अगर तुम ये देख रही हो, सान्वी..."
"तो शायद तुम्हें अपने नाम को लेकर भी सवाल होगा।"
सान्वी की साँस रुक गई।
"तुम्हारा असली नाम सिया मल्होत्रा नहीं है।"
"और तुम्हारा जन्म रिकॉर्ड बदलने वाला व्यक्ति..."
अमन कुछ कहने ही वाला था—
तभी वीडियो अचानक बंद हो गया।
स्क्रीन काली हो गई।
सान्वी चीख पड़ी—
"नहीं!"
"आगे क्या था?"
आर्यवीर ने तुरंत लैपटॉप चेक किया।
"वीडियो यहीं खत्म हो रहा है।"
सान्वी ने गुस्से और आँसुओं के बीच कहा—
"किसी ने इसे काटा है।"
देवेंद्र ने धीमे से कहा—
"नहीं।"
सबने उनकी तरफ देखा।
"ये रिकॉर्डिंग जानबूझकर यहीं खत्म की गई है।"
आर्यवीर ने पूछा—
"आपको कैसे पता?"
देवेंद्र ने कहा—
"क्योंकि अमन जानता था कि आखिरी बात वो कैमरे पर नहीं कह सकता।"
"उसे डर था कि अगर रिकॉर्डिंग गलत हाथों में गई तो सब खत्म हो जाएगा।"
आर्यवीर ने चाबी हाथ में ली।
"तो अब ये चाबी हमें उस जगह तक ले जाएगी जहाँ असली सबूत है।"
उसी समय – रिया
रिया अपने कमरे में बैठी थी।
उसके सामने समर का फोन था।
"तुमने कहा था कि सबूत तुम्हारे पास है।"
समर ने कहा—
"था।"
"लेकिन अब वो सिंह परिवार के पास है।"
रिया परेशान हो गई।
"अब क्या करेंगे?"
समर ने कुछ सेकंड चुप रहकर कहा—
"अब तुम आर्यवीर के करीब जाओगी।"
रिया चौंकी।
"मैं?"
"हाँ।"
"लेकिन सान्वी?"
समर की आवाज़ ठंडी थी।
"उसे आर्यवीर से अलग करने की कोशिश मत करो।"
रिया ने पूछा—
"तो?"
"बस उसे शक करने पर मजबूर करो।"
"किस बात पर?"
समर ने कहा—
"तुम्हें ये साबित करना है कि आर्यवीर तुमसे कुछ छुपा रहा है।"
रिया मुस्कुराई।
"इतना आसान?"
"नहीं।"
"लेकिन तुम कर लोगी।"
अगले दिन
सान्वी अपने कमरे में बैठी थी।
उसके सामने वही लॉकेट रखा था।
वह उसे देखते हुए सोच रही थी—
पापा ने माँ को ये क्यों दिया था?
तभी दरवाज़ा खुला।
आर्यवीर अंदर आया।
उसके हाथ में एक फाइल थी।
"क्या हुआ?"
सान्वी ने पूछा।
"मुझे तुम्हारे पिता के पुराने बिजनेस रिकॉर्ड मिले हैं।"
"और?"
"उनमें एक कंपनी का नाम बार-बार आया है।"
सान्वी ने पूछा—
"कौन-सी?"
आर्यवीर ने फाइल उसकी तरफ बढ़ाई।
"Malhotra Holdings."
सान्वी का चेहरा बदल गया।
"समर?"
"हाँ।"
आर्यवीर ने कहा—
"लेकिन बात इससे भी बड़ी है।"
"तुम्हारे पिता ने समर के साथ एक साझेदारी की थी।"
सान्वी हैरान रह गई।
"क्या?"
"लेकिन कुछ महीनों बाद दोनों अलग हो गए।"
"क्यों?"
आर्यवीर ने फाइल का अगला पन्ना खोला।
"यही पता लगाना है।"
सान्वी ने धीरे से पूछा—
"क्या तुम्हें लगता है कि मेरे पिता ने कोई गलती की थी?"
आर्यवीर ने तुरंत कहा—
"नहीं।"
"मैं तुम्हारे पिता को नहीं जानता था..."
"लेकिन तुम्हारी आँखों में उन्हें देखकर मुझे इतना समझ आता है कि वो तुम्हें बचाने के लिए कुछ भी कर सकते थे।"
सान्वी ने उसकी तरफ देखा।
उसकी आँखें नम थीं।
"तुम्हें पता है..."
"क्या?"
"मैंने कभी सोचा नहीं था कि कोई मेरे लिए इतना लड़ेगा।"
आर्यवीर मुस्कुराया।
"अब सोच लिया करो।"
अचानक दरवाज़ा खुला।
रिया अंदर आई।
"आर्यवीर..."
सान्वी का चेहरा तुरंत गंभीर हो गया।
रिया ने कहा—
"मुझे तुमसे अकेले में बात करनी है।"
आर्यवीर ने कहा—
"जो कहना है, यहीं कहो।"
रिया ने सान्वी की तरफ देखा।
"ये बात सान्वी के सामने नहीं कह सकती।"
सान्वी उठ खड़ी हुई।
"मैं बाहर चली जाती हूँ।"
आर्यवीर ने उसका हाथ पकड़ लिया।
"नहीं।"
रिया के चेहरे पर निराशा की हल्की झलक आई।
लेकिन उसने तुरंत एक लिफाफा आर्यवीर की तरफ बढ़ाया।
"ये तुम्हारे पिता की पुरानी फाइल है।"
आर्यवीर ने उसे लिया।
"तुम्हें कहाँ मिली?"
रिया ने कहा—
"समर के पास।"
सान्वी का चेहरा बदल गया।
रिया ने धीरे से कहा—
"इसमें तुम्हारे पिता और मेरी माँ के बीच हुई एक मीटिंग की तस्वीर है।"
आर्यवीर ने लिफाफा खोला।
अंदर एक तस्वीर थी।
उसमें उसके पिता...
समर...
और रिया की माँ खड़ी थीं।
लेकिन तस्वीर के पीछे एक तारीख लिखी थी।
वही तारीख...
जिस दिन सान्वी के पिता की मौत हुई थी।
आर्यवीर स्तब्ध रह गया।
सान्वी ने तस्वीर देखी।
"तो तुम्हारे पिता और मेरे पिता..."
आर्यवीर ने उसकी तरफ देखा।
"शायद उस रात मिले थे।"
रिया ने धीरे से कहा—
"और मुझे लगता है..."
"तुम्हारे पिता की मौत का सच सान्वी के परिवार से जुड़ा हुआ है।"
सान्वी पीछे हट गई।
उसके चेहरे पर अविश्वास था।
आर्यवीर तुरंत उसकी तरफ बढ़ा।
"सान्वी, मेरी बात सुनो—"
सान्वी ने हाथ उठाकर उसे रोक दिया।
"नहीं।"
"मुझे सोचने दो।"
वह कमरे से बाहर चली गई।
रिया ने आर्यवीर की तरफ देखा।
उसकी योजना सफल होती दिखाई दे रही थी।
लेकिन...
उसे नहीं पता था कि बाहर जाते समय सान्वी ने उसके हाथ में पकड़ी फाइल का एक छोटा-सा कोना देख लिया था।
उस पर लिखा था—
"Property of Samer Malhotra."
सान्वी रुक गई।
उसने पीछे मुड़कर देखा।
रिया फाइल छुपाने की कोशिश कर रही थी।
सान्वी की आँखों में शक पैदा हो चुका था।
लेकिन शक आर्यवीर पर नहीं...
रिया पर था।
और अब पहली बार...
सान्वी ने तय कर लिया था कि वह चुपचाप सब नहीं सहेगी।
वह खुद पता लगाएगी—
रिया आखिर किसके लिए खेल रही है?
और उस सवाल का जवाब...
उसे उस रात मिलने वाला था।
क्योंकि आधी रात को सान्वी के फोन पर एक मैसेज आया—
"रिया पर भरोसा मत करना।"
नीचे सिर्फ़ एक नाम लिखा था—
नैना
सान्वी की धड़कन तेज हो गई।
और उसी पल...
उसके कमरे का दरवाज़ा अपने आप बंद हो गया।
क्रमशः...