Why Buddha? in Hindi Moral Stories by Minakshi Sharad Ramteke books and stories PDF | Why Buddha?

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Why Buddha?



बहुत समय पहले एक युवक था, जिसका नाम आरव था। उसके पास जीवन में बहुत कुछ था, लेकिन उसके मन में शांति नहीं थी।

वह हर दिन किसी न किसी बात को लेकर परेशान रहता। कभी बीते हुए कल की बातें उसे दुख देतीं, तो कभी आने वाले कल का डर उसे बेचैन करता।

एक दिन उसने सुना कि जंगल के पास एक शांत व्यक्ति रहते हैं, जिन्हें लोग गौतम बुद्ध कहते हैं।

आरव उनके पास पहुँचा और बोला, “बुद्ध, मेरे पास बहुत सारे सवाल हैं। क्या आप मेरे सारे सवालों के जवाब दे सकते हैं?”

बुद्ध ने मुस्कुराकर कहा, “सवाल कितने हैं, यह महत्वपूर्ण नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि तुम्हारा मन उत्तर सुनने के लिए तैयार है या नहीं।”

आरव कुछ देर शांत रहा। फिर उसने पूछा, “मैं खुश क्यों नहीं हूँ?”

बुद्ध ने जमीन से एक सूखा पत्ता उठाया और बोले, “क्या तुम इस पत्ते को फिर से पेड़ पर लगा सकते हो?”

आरव ने कहा, “नहीं।”

बुद्ध बोले, “फिर भी तुम अपने बीते हुए समय को बार बार वापस लाने की कोशिश करते हो। जो चला गया, उसे स्वीकार करना सीखो।”

आरव ने पूछा, “लेकिन भविष्य का क्या? मुझे डर लगता है कि आगे क्या होगा।”

बुद्ध ने शांत स्वर में कहा, “भविष्य अभी आया ही नहीं है। फिर उसके डर में आज क्यों जीते हो?”

आरव ने पूछा, “तो मुझे करना क्या चाहिए?”

बुद्ध ने कहा, “आज को जीना सीखो। आज सही कर्म करो। आज अपने मन को समझो।”

आरव कुछ देर तक बुद्ध के पास बैठा रहा। फिर उसने पूछा, “लोग आपको क्यों मानते हैं? आपमें ऐसा क्या है जो दूसरों में नहीं?”

बुद्ध मुस्कुराए और बोले, “मैंने किसी को अपना अनुयायी बनने के लिए नहीं कहा। मैंने केवल लोगों को अपने भीतर देखने का रास्ता बताया है।”

“जब तुम्हें दुख हो, अपने दुख को समझो। जब क्रोध आए, अपने क्रोध को समझो। जब कोई तुम्हें चोट पहुँचाए, बदला लेने से पहले अपने मन को समझो। और जब तुम्हें सफलता मिले, अहंकार से पहले यह याद रखो कि सब कुछ बदलता रहता है।”

आरव की आँखों में आँसू आ गए।

उसने पूछा, “बुद्ध बनने का अर्थ क्या है?”

बुद्ध ने कहा, “बुद्ध बनने का अर्थ कोई चमत्कार करना नहीं है। बुद्ध बनने का अर्थ है अपने अंधकार को पहचानना और धीरे धीरे प्रकाश की ओर बढ़ना।”

उस दिन आरव अपने घर लौट गया।

उसकी जिंदगी की सारी समस्याएँ खत्म नहीं हुई थीं, लेकिन अब उसके पास उन्हें देखने का एक नया तरीका था।

जब उसे गुस्सा आता, वह खुद से पूछता, “मेरे अंदर अभी क्या चल रहा है?”

जब उसे दुख होता, वह खुद से कहता, “यह भी बदल जाएगा।”

जब भविष्य का डर सताता, वह याद करता, “मेरा काम आज को बेहतर बनाना है।”

धीरे धीरे उसे समझ आने लगा कि बुद्ध ने उसे कोई जादू नहीं दिया था। उन्होंने उसे अपने मन को समझने की शक्ति दी थी।

इसीलिए सवाल सिर्फ यह नहीं है कि “Why Buddha?”

सवाल यह है कि जिसने हमें अपने भीतर झाँकना, दुख को समझना, क्रोध को छोड़ना और करुणा के साथ जीना सिखाया, उससे बेहतर मार्गदर्शक हमें और कहाँ मिलेगा?

शायद इसलिए, जब दुनिया से जवाब मिलना बंद हो जाए, तब बुद्ध की ओर देखना चाहिए।

क्योंकि बुद्ध हमें दुनिया बदलने से पहले खुद को बदलना सिखाते हैं।

और यही है

Why Buddha? 🪷

बुद्धं शरणं गच्छामि।
धम्मं शरणं गच्छामि।
संघं शरणं गच्छामि।