Mr. Ms. Fake in Hindi Comedy stories by kajal jha books and stories PDF | Mr. Ms. Fake - एपिसोड 33

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Mr. Ms. Fake - एपिसोड 33

Mr. & Ms. Fake

Episode 33 – The Fake Picture

सिंह हाउस के ड्रॉइंग रूम में हर नजर रिया और आर्यवीर पर टिकी थी।

रिया के चेहरे पर अब भी आत्मविश्वास था।

उसे पूरा भरोसा था कि तस्वीर देखकर सान्वी और आर्यवीर के बीच फिर से गलतफहमी पैदा हो जाएगी।

लेकिन आर्यवीर बिल्कुल शांत था।

उसने एक बार तस्वीर देखी...

फिर रिया की तरफ देखा।

"तुमने ये तस्वीर कहाँ से ली?"

रिया ने सहज बनने की कोशिश की।

"जहाँ से सच मिला।"

"कौन-सा सच?"

"कि तुम कल रात मेरे साथ थे।"

सान्वी कुछ नहीं बोली।

वह सिर्फ आर्यवीर को देख रही थी।

उसके मन में हजार सवाल थे।

आर्यवीर ने धीरे से कहा—

"सान्वी..."

लेकिन सान्वी ने हाथ उठाकर उसे रोक दिया।

"पहले तस्वीर का सच पता कर लेते हैं।"

रिया के चेहरे पर हल्की मुस्कान आई।

"तुम्हें सच में लगता है कि ये तस्वीर झूठी है?"

सान्वी ने उसकी आँखों में देखा।

"मुझे लगता है कि तुम झूठ बोल रही हो।"

रिया का चेहरा कुछ पल के लिए उतर गया।

आर्यवीर ने सान्वी की तरफ देखा।

उसकी आँखों में गर्व था।

आर्यवीर ने फोन निकाला।

"एक मिनट।"

उसने अपने सिक्योरिटी हेड को कॉल किया।

"कल रात की CCTV फुटेज मेरे कमरे में भेजो।"

रिया अचानक असहज हो गई।

"उसकी जरूरत नहीं है।"

आर्यवीर ने फोन नीचे किया।

"क्यों?"

"क्योंकि तस्वीर सबूत है।"

आर्यवीर मुस्कुराया।

"नहीं।"

"तस्वीर सिर्फ तस्वीर होती है।"

"सबूत वो होता है जिसे झूठा साबित करना मुश्किल हो।"

रिया चुप हो गई।

कुछ मिनट बाद आर्यवीर के फोन पर वीडियो आया।

उसने टीवी स्क्रीन पर फुटेज चला दी।

वीडियो में साफ दिखाई दे रहा था—

रात 11 बजे आर्यवीर ऑफिस से निकलता है।

11:20 पर वह सीधे सिंह हाउस पहुँचता है।

11:32 पर वह अपने कमरे में जाता है।

और 11:41 पर...

वह सान्वी के कमरे से बाहर निकलता है।

सान्वी ने स्क्रीन की तरफ देखा।

फिर आर्यवीर की तरफ।

उसके चेहरे पर अचानक मुस्कान आ गई।

"तो तुम सच में मेरे कमरे में थे।"

आर्यवीर ने कहा—

"हाँ।"

"और तुमने मुझे बताया भी नहीं?"

आर्यवीर मुस्कुराया।

"तुमने खुद बुलाया था।"

सान्वी का चेहरा लाल हो गया।

कबीर पीछे से खाँसते हुए बोला—

"हमें शायद ये फुटेज नहीं देखनी चाहिए थी।"

चिंटू ने कहा—

"मैंने तो कुछ देखा ही नहीं।"

दादी ने उसे घूरा।

"तूने सबसे ज्यादा देखा है।"

पूरा माहौल कुछ सेकंड के लिए हल्का हो गया।

लेकिन रिया के चेहरे पर अब परेशानी साफ थी।

आर्यवीर ने तस्वीर को दोबारा देखा।

"अब मेरी बारी।"

रिया ने कुछ नहीं कहा।

आर्यवीर ने तस्वीर को ज़ूम किया।

"ये होटल कौन-सा है?"

रिया बोली—

"तुम्हें पता होना चाहिए।"

"नहीं।"

"क्योंकि मैं कल रात यहाँ था ही नहीं।"

फिर उसने तस्वीर के नीचे तारीख देखी।

Date: 28 August

आर्यवीर मुस्कुराया।

"ये तस्वीर आज से दो दिन पहले की है।"

रिया ने कहा—

"तो?"

"तो उस दिन मैं मुंबई में था।"

"तुम्हें याद नहीं?"

रिया चुप हो गई।

सान्वी ने तुरंत पूछा—

"रिया..."

"तुम्हें ये तस्वीर किसने दी?"

रिया ने नजरें झुका लीं।

आर्यवीर आगे बढ़ा।

"समर ने?"

रिया ने कोई जवाब नहीं दिया।

बस उसकी खामोशी ही काफी थी।

सान्वी ने रिया की तरफ देखा।

"तुम मुझे और आर्यवीर को अलग करना चाहती हो।"

रिया ने कहा—

"मैं सिर्फ तुम्हें सच दिखा रही हूँ।"

सान्वी हँसी।

"सच?"

"तुम्हारे हर 'सच' के पीछे समर क्यों होता है?"

रिया का चेहरा सख्त हो गया।

"तुम कुछ नहीं जानती।"

"तो बताओ।"

"समर तुम्हारे परिवार को बर्बाद करना चाहता है।"

"और तुम उसकी मदद कर रही हो।"

रिया चुप रही।

सान्वी ने कहा—

"क्यों?"

रिया ने उसकी तरफ देखा।

"क्योंकि तुमने मेरी जिंदगी में वो सब पा लिया..."

"...जो मैं चाहती थी।"

सान्वी चौंक गई।

"क्या?"

रिया की आँखें आर्यवीर पर टिक गईं।

"आर्यवीर।"

कमरे में खामोशी छा गई।

रिया ने आगे कहा—

"मैंने उसे सालों से चाहा है।"

"लेकिन जब तुम आई..."

"उसने तुम्हें चुन लिया।"

आर्यवीर ने कठोर आवाज़ में कहा—

"मैंने तुम्हें कभी कोई उम्मीद नहीं दी थी।"

रिया की आँखों में आँसू आ गए।

"लेकिन मुझे उम्मीद थी।"

सान्वी चुप रही।

उसके मन में पहली बार रिया के लिए थोड़ी सहानुभूति आई।

लेकिन अगले ही पल रिया ने कहा—

"और मैं उसे इतनी आसानी से तुम्हारे पास नहीं रहने दूँगी।"

आर्यवीर ने कहा—

"तुम कोशिश कर सकती हो।"

"लेकिन सान्वी मेरा साथ नहीं छोड़ेगी।"

सान्वी ने उसकी तरफ देखा।

आर्यवीर ने उसका हाथ पकड़ लिया।

"है ना?"

सान्वी ने मुस्कुराकर कहा—

"कहीं नहीं।"

रिया वहाँ से चली गई।

लेकिन जाते-जाते उसके चेहरे पर एक रहस्यमयी मुस्कान थी।

क्योंकि उसके पास अभी एक आखिरी चाल बाकी थी।

कुछ घंटे बाद

आर्यवीर ऑफिस में था।

सान्वी उसके कमरे में बैठी थी।

वह लैपटॉप पर पुराने रिकॉर्ड देख रही थी।

तभी उसे एक फाइल मिली।

"Project S-21."

सान्वी ने उसे खोला।

अंदर सिर्फ़ एक लाइन थी—

"Subject transferred under the protection of A. Singh."

सान्वी का दिल तेजी से धड़कने लगा।

"A. Singh?"

उसने तुरंत आर्यवीर को बुलाया।

"आर्यवीर!"

वह अंदर आया।

"क्या हुआ?"

सान्वी ने फाइल दिखाई।

"ये क्या है?"

आर्यवीर ने फाइल देखते ही भौंहें सिकोड़ लीं।

"ये फाइल यहाँ कैसे आई?"

"मुझे नहीं पता।"

आर्यवीर ने पूरा दस्तावेज़ पढ़ा।

फिर अचानक उसकी नजर आखिरी पन्ने पर गई।

वहाँ एक हस्ताक्षर था।

A. Singh

आर्यवीर ने कहा—

"ये मेरे पिता के सिग्नेचर हैं।"

सान्वी स्तब्ध रह गई।

"मतलब मेरे पिता और तुम्हारे पिता..."

"हाँ।"

आर्यवीर ने कहा—

"शायद तुम्हारी सुरक्षा की जिम्मेदारी मेरे पिता ने ली थी।"

सान्वी की आँखें भर आईं।

"तो क्या हमारे परिवार एक-दूसरे को इतने सालों से जानते थे?"

आर्यवीर ने कहा—

"शायद हमसे भी पहले।"

उसी वक्त...

दादी कमरे में आईं।

उनके चेहरे पर चिंता थी।

"तुम दोनों को ये फाइल कहाँ मिली?"

सान्वी ने पूछा—

"दादी, आप इसके बारे में जानती हैं?"

दादी कुछ पल चुप रहीं।

फिर उन्होंने कहा—

"हाँ।"

आर्यवीर ने पूछा—

"तो आपने हमें कभी क्यों नहीं बताया?"

दादी ने धीरे से कहा—

"क्योंकि तुम्हारे पिता ने मुझे मना किया था।"

"उन्होंने कहा था कि जब तक सही समय न आए..."

"...सान्वी को उसकी पहचान के बारे में कुछ नहीं बताया जाए।"

सान्वी ने पूछा—

"लेकिन सही समय कब था?"

दादी ने उसकी तरफ देखा।

"जब तुम इक्कीस साल की हो जातीं।"

सान्वी चौंकी।

"इक्कीस?"

"हाँ।"

आर्यवीर ने पूछा—

"क्यों?"

दादी ने एक पुरानी तस्वीर निकाली।

उस तस्वीर में माधवी...

अमन...

आर्यवीर के पिता...

और एक चौथा व्यक्ति खड़ा था।

सान्वी ने तस्वीर देखते ही कहा—

"ये कौन है?"

दादी की आवाज़ काँप गई।

"ये वही आदमी है..."

"जिसके कारण तुम्हारी जिंदगी बदली।"

आर्यवीर ने तस्वीर को ध्यान से देखा।

उसका चेहरा अचानक सख्त हो गया।

"ये..."

सान्वी ने पूछा—

"तुम इसे जानते हो?"

आर्यवीर ने धीरे से कहा—

"हाँ।"

"लेकिन ये आदमी..."

"तो फिर ये..."

दादी ने उनकी बात पूरी की—

"समर का पिता है।"

सान्वी के चेहरे का रंग उड़ गया।

"लेकिन समर के पिता तो..."

दादी ने कहा—

"यही सबसे बड़ा झूठ है।"

उधर – रिया

रिया एक सुनसान कैफे में बैठी थी।

उसके सामने समर था।

"तुम्हारी चाल असफल हो गई।"

रिया ने कहा।

"मुझे पता है।"

समर मुस्कुराया।

"लेकिन तुम्हें निराश होने की जरूरत नहीं।"

उसने मेज पर एक पुरानी फाइल रखी।

रिया ने उसे देखा।

"ये क्या है?"

समर बोला—

"सान्वी के असली जन्म का रिकॉर्ड।"

रिया ने फाइल खोली।

पहले पन्ने पर लिखा था—

Mother: Madhavi Sharma

लेकिन पिता के नाम वाले कॉलम में...

नाम देखकर रिया के हाथ काँप गए।

उसने धीरे से पढ़ा—

Father: Aryan Singh.

रिया ने सिर उठाया।

"आर्यवीर के पिता?"

समर ने मुस्कुराकर कहा—

"हाँ।"

रिया स्तब्ध रह गई।

समर ने कहा—

"अब समझी?"

"सान्वी सिर्फ तुम्हारी दुश्मन नहीं है..."

"वो उस परिवार की बेटी है जिसे तुम अपना समझती थीं।"

रिया ने फाइल बंद कर दी।

लेकिन समर ने आखिरी बात कही—

"और अगर ये सच बाहर आया..."

"तो आर्यवीर और सान्वी का रिश्ता सिर्फ टूटेगा नहीं..."

"...पूरे परिवार की नींव हिल जाएगी।"

रिया की आँखों में फिर वही खतरनाक चमक लौट आई।

लेकिन उसे नहीं पता था...

कि इस बार समर ने उसे भी पूरी सच्चाई नहीं बताई थी।

क्योंकि फाइल में एक पन्ना और था।

और उस पन्ने पर लिखा था—

"Father's name: Aryan Singh – FALSE ENTRY."

असल नाम...

किसी ने काले रंग से मिटा दिया था।

और उसके नीचे सिर्फ़ एक अक्षर बचा था—

R

क्रमशः...