काल गढ़ की तारा in Hindi Horror Stories by rakshita pal books and stories PDF | काल गढ़ की तारा

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काल गढ़ की तारा

Aaine me jo dikhi, wo Tara nahi thi... uske piche Kaal khada tha! 😱

Mandap me baithi dulhan Mohini nahi thi toh kaun thi? 
Raat 3:15 baje Tara kahan jaati hai? 
Aur Siya ne khud ko kyu kaid kar liya hai?

Hazaar saal pehle Tara aur Siya kaun thi? Aur unhone Rudra aur us nanhi bacchi ko kyu maara?

Kya Rudra, Siya aur Tara ko bacha payega? Aur Mohini Tara ko kyu bachana nahi chahti?

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कालगढ की रात उस दिन कुछ ज्यादा ही भारी थी. पहाडों के ऊपर बादल ऐसे अटके थे, जैसे आसमान भी नीचे उतरकर महल की दीवारों के बीच कोई राज सुनने आया हो.
टूटा हुआ आईना जमीन पर बिखरा पडा था.
हर टुकडे में तारा का चेहरा था.
लेकिन एक भी चेहरा वैसा नहीं था जैसा असली तारा का होना चाहिए था.
कहीं वह रो रही थी.
कहीं मुस्करा रही थी.
कहीं किसी सिंहासन पर बैठी थी.
और एक टुकडे में उसकी आँखें बंद थीं, मगर होंठ धीरे- धीरे हिल रहे थे.
रुद्र उस आखिरी टुकडे को घूर रहा था.
उसके भीतर Kaal लगातार बेचैन था.
इसे मत छू।
रुद्र ने मन ही मन कहा, तू हर बात पर डराता क्यों रहता है?
क्योंकि तू हर बार बिना सोचे हाथ बढाता है।
मैं bhediyaहूँ।
और अक्ल?
रुद्र कुछ पल चुप रहा.
वो भी है।
Kaal ने सूखे अंदाज में कहा—
कहाँ है?
रुद्र ने आँखें बंद कर लीं.
आज बहुत बोल रहा है।
आज पहली बार तू मेरी सुन भी रहा है।
रुद्र ने टूटे आईने की ओर देखा.
तभी पीछे से मोहिनी की आवाज आई—
उस आईने के पास मत जाना।
रुद्र ने तुरंत पलटकर देखा.
मोहिनी दरवाजे पर खडी थी.
लेकिन जो मोहिनी हमेशा अकडकर चलती थी, आज उसके चेहरे पर घबराहट थी.
रुद्र ने तलवार नीचे नहीं की.
तू यहाँ क्या कर रही है?
मोहिनी ने आईने के टुकडों को देखा.
मैं देखने आई थी कि वह जागा है या नहीं।
तारा ने धीरे से पूछा—
कौन?
मोहिनी ने तारा की ओर देखा.
उसकी आँखों में एक पल के लिए ऐसा डर आया, जिसे वह तुरंत छिपाना चाहती थी.
कोई नहीं।
तारा ने मासूमियत से पूछा—
अगर कोई नहीं है तो आप डर क्यों रही हैं?
मोहिनी के पास जवाब नहीं था.

रुद्र ने मोहिनी के पास जाकर पूछा—
तूने अभी कहा था कि वह जागा है।
?? ??????????????????????????????????????????????????????????????????..................??????.............................. 


अगली सुबह कालगढ के बडे आँगन में बुजुर्गों की सभा लगी.
रुद्र सामने बैठा था.
उसके दोनों तरफ Kabir और बाकी योद्धा खडे थे.
मोहिनी भी वहाँ थी.
तारा दूर खडी सब देख रही थी.
एक बुजुर्ग ने कहा—
रुद्र, अब बहुत हो चुका. पूरे Bhedya समाज में बातें फैल रही हैं. तुम्हें फैसला करना होगा।
रुद्र ने ठंडी आवाज में पूछा—
किस बात का?
तुम्हारे विवाह का।
आँगन में खुसर- पुसर होने लगी.
बुजुर्ग ने आगे कहा—
तुम्हें उच्च कोटि के राजवंश की लडकी से विवाह करना होगा. इससे दो बडे वंश जुडेंगे और तुम्हारा महाराजा बनने का रास्ता साफ होगा।
तारा का चेहरा शांत रहा.
लेकिन उसके भीतर कुछ अनजाना- सा चुभा.
उसे समझ नहीं आया क्यों.
मोहिनी की आँखों में चमक आई.
लेकिन वह चमक ज्यादा देर नहीं टिक पाई.
क्योंकि दूसरे बुजुर्ग ने कहा—
और यह विवाह केवल राजनीति नहीं है. पुराना विधान भी यही कहता है।
रुद्र ने कुर्सी की बाँह पकड ली.
मुझे किसी विधान की जरूरत नहीं।
बुजुर्ग बोला
Bhediya होकर समाज के नियम नहीं तोड सकते।
रुद्र हँस.!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!! 



बुजुर्गों में से एक की नजर तारा पर पडी.
और यह लडकी?
रुद्र ने उसकी ओर देखा.
तारा।
इसे यहाँ से हटाया जाए।
तारा चौंक गई.
क्यों?
बुजुर्ग बोला—
क्योंकि जब से यह आई है, महल में अजीब घटनाएँ बढी हैं।
दूसरे ने कहा—
तीन: पंद्रह पर घडियाँ रुकती हैं।
तीसरा बोला—
आईने टूटते हैं।  और इसके Moon Mark का कोई रिकॉर्ड नहीं।
तारा ने अपना हाथ छिपा लिया.
मोहिनी चुपचाप सब सुन रही थी.
रुद्र ने कहा—
तारा कहीं नहीं जाएगी।
???????.....


उधर मोहिनी अकेली अपने कमरे में पहुँची.
उसने दरवाजा बंद किया.
फिर बिस्तर के नीचे से वही काली शीशी निकाली.
शीशी में पहले से ज्यादा धुंध है ओर???? 
???????????? 
दोनों अलग- अलग कमरों में थे.
फिर भी दोनों को एक ही दृश्य दिखाई दिया.

तारा ने सपने में काँपते हुए पूछा—
तुमने उसे मारा था?
Kaal ने उसकी ओर देखा.
उसकी आँखों में पहली बार क्रोध नहीं, पछतावा था.
उसने कहा—
नहीं।
तारा ने पूछा—
फिर किसने?
Kaal ने पीछे देखा.
अँधेरे में एक आदमी खडा था.
चेहरा दिखाई नहीं दे रहा था.