kamra no 404 in Hindi Horror Stories by PATEL RJ books and stories PDF | कमरा नम्बर 404

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कमरा नम्बर 404



*कमरा नं. 404*
*Patel RJ*

मीरा एक क्राइम राइटर है। नई बुक के लिए मटेरियल ढूंढने अहमदाबाद के सीजी रोड वाले पुराने होटल द हेरिटेज में रुकती है।

रिसेप्शनिस्ट कहता है:
मैडम सिर्फ 404 खाली है। बाकी सब बुक्ड है।

मीरा : 404?
एरर वाला नंबर?

रिसेप्शनिस्ट हंस कर : यहाँ हर एरर का सॉल्यूशन मिलता है मैडम।

रात 12 बजे। कमरे में अजीब सी ठंड। अलमारी में पुराने अखबार मिले 2014 के।
हेडलाइन: होटल में 4 लोगों का खून। बॉडी मिली नहीं, केस बंद।

उसी रात 3:04 बजे मीरा की नींद खुली। दरवाजे पर नॉक।
हाउसकीपिंग

उसने दरवाजा खोला। बाहर कोई नहीं। सिर्फ फ्लोर पर 4 भीगी मोमबत्तियां जल रही थी, और बीच में एक डायरी।

डायरी 2014 की थी। लिखा था:
Day 1 : हम 4 दोस्त आए हैं। मजाक में खून वाली गेम खेलेंगे
Day 2 : गेम सच हो गया। एक मर गया।
Day 3 : दूसरा गायब।
Day 4 : तीसरा... उसने खुद को...
Day 5 : मैं अकेला बचा। अब मुझे भी आवाज आ रही है। वो कहता है 4 पूरी करनी है।
लास्ट पेज पर लाल इंक से लिखा - तुम 4th हो।

मीरा हंसी। स्टोरी के लिए परफेक्ट है। उसने डायरी अपने लैपटॉप में टाइप करना शुरू किया।

जैसे ही उसने तुम 4th हो टाइप किया, लैपटॉप अपने आप बंद।
लाइट गई, और बाथरूम के शीशे पर पानी से कोई लिख रहा था - 3/ 4 complete.

सुबह पुलिस आई।
रिसेप्शनिस्ट बोला : मैडम कल रात 3 बजे आप चिल्ला रही थी। बोल रही थी मत करो।
मीरा : मैं अकेली थी।

CCTV में देखा : मीरा रात 3 बजे दरवाजा खोल कर अंदर 3 औरतों को ले गई थी। चेहरे ढके हुए थे।

पुलिस ने कमरा चेक किया। अलमारी में 3 सूटकेस मिले। अंदर कोई नहीं। लेकिन मीरा के लैपटॉप में नई फाइल बनी थी आज 3:04 बजे - कमरा नो. 404.
लास्ट लाइन
पहला शिकार : रिसेप्शनिस्ट
दूसरा : वॉचमैन
तीसरा : पुलिस वाली। अब बुक कंप्लीट करने के लिए मुझे एक रीडर चाहिए।

मीरा को कुछ याद नहीं। वो बस इतना जानती है कि उसकी बुक बेस्टसेलर बनने वाली है।

सुबह 6 बजे होटल में चिल्लाहट। लाश! लाश लिफ्ट में है। पुलिस आई इंस्पेक्टर निधि, 35 साल, तेज औरत। लिफ्ट का दरवाजा खुला तो अंदर रमेश बूढ़ा रिसेप्शनिस्ट। गले पर गहरी कतार। खून से फर्श लाल।

निधि ने मीरा से पूछा - रात 3 बजे कहाँ थी?
मीरा रो रही थी - मैं... मैं सोई थी। कसम से।

निधि ने CCTV चलवाया स्क्रीन पर - 3:02 बजे मीरा नाइटी में लिफ्ट में उतर रही है। हाथ में मोमबत्ती। 3:10 बजे वापस आ रही है। हाथ खाली चेहरे पर कोई इमोशन नहीं। आंखें बंद जैसे नींद में चल रही हो।

निधि : स्लीपवॉकिंग करती हैं?
मीरा : नहीं... मुझे याद नहीं।

शाम को मीरा ने लैपटॉप खोला। एक नई फाइल अपने आप बनी थी।
File name : Kamra no. 404 - http://chapter.docx
अंदर लिखा था - 3:02 बजे वो उठी। पैर खुद चल रहे थे। लिफ्ट का बटन खुद दबा। अंदर रमेश सो रहा था। उसने मोमबत्ती उठाई। गर्मी लगी।
3:07 बजे काम खत्म।
3:10 वापस।
मीरा चिल्लाई - ये उसने नहीं लिखा।

मीरा भागने लगी। टैक्सी ली। रेलवे स्टेशन। बस स्टैंड हर बार 11 बजे कुछ ना कुछ हो जाता। टैक्सी का टायर, ट्रेन कैंसल, फोन की बैटरी डेड। और रात 11:30 तक वो वापस होटल के सामने खड़ी होती।

होटल का मालिक, सेठजी, 80 साल के, व्हीलचेयर पर।
सेठजी: बेटा 10 साल पहले भी एक लड़का ऐसा ही भागा था। आरव नाम था। वापस आ गया था।
मीरा : क्यों?
सेठजी: क्योंकि 404 में जो लिखा है, वो सच हो जाता है। और जो सच लिख देता है, वो कमरे का हो जाता है।

उस रात मीरा ने डायरी जलाने की कोशिश की। लाइटर जलाया। डायरी के पन्ने काले हुए पर जले नहीं। उल्टा मीरा के हाथ पर छाले पड़ गए। जैसे डायरी ने काट लिया हो।

रात 3:04 बजे दरवाजे के नीचे से स्लिप आई - दूसरा : वॉचमैन

सुबह वॉचमैन सलीम की बॉडी वाटर टैंक में मिली। मुंह में कपड़ा। पुलिस ने कहा सुसाइड। लेकिन गले पर उंगलियों के निशान थे।

निधि अब मीरा को 24 घंटे वॉच कर रही थी।

निधि ने कहा : आज रात मैं 404 में रुकूंगी। तुम बाहर, रात 3:04 बजे निधि का फोन बजा। Caller ID: Meera
निधि ने उठाया - Hello?
उधर से मीरा की आवाज, बिल्कुल नींद वाली - इंस्पेक्टर दरवाजा खोलो। हाउसकीपिंग।
निधि डर गई। दरवाजा खोला। कॉरिडोर खाली। सिर्फ 2 मोमबत्ती जल रही थी।

सुबह 5 बजे निधि की कार में बॉडी मिली। पार्किंग - 1। सर काट कर डैशबोर्ड पर रखा था। खून से लिखा था: 2/ 4 complete.
मीरा का फोन निधि की मुट्ठी में था। Last dial 3:04 am - मीरा से निधि को। मीरा उस वक्त होटल के बाहर पुलिस स्टेशन में बैठी थी। फिर किसने कॉल किया?

मीरा जेल में थी। सबूत उसके खिलाफ थे। एक दिन पुराने रिकॉर्ड रूम में उसको 2014 की फाइल मिली। उसमें लिखा था, आरव मरा नहीं था। होटल वालों ने उसे पकड़ कर बेसमेंट में बंद कर दिया था। क्यों? क्योंकि आरव ने वो डायरी लिखी थी। पंडित ने कहा था - इस डायरी में एक प्रेत बंद है। जो इसे आगे लिखेगा उसके हाथों खून होगा।
होटल ने डायरी को छुपाया और आरव को श्राप का रक्षक बना दिया
मतलब 10 साल से आरव ही 404 है जब तक कोई उसकी जगह ले। मीरा को समझ आया - जब वो टाइप करती है, आरव उसका शरीर कंट्रोल करता है। 3 खून हो चुके। एक बचा।

आखिरी रात मीरा ने लैपटॉप नहीं छुआ। डायरी भी नहीं। फिर भी 3:04 बजे फाइल अपने आप बनी
Chapter 2
पहली लाइन : लेखिका थक गई है। अब रीडर लिखेगा।

6 महीने बाद मीरा को मानसिक रूप से बीमार बोल कर छोड़ दिया गया। उसने एक किताब लिखी, कमरा नो. 404,

पब्लिशर ने 1 लाख कॉपी छापी। आज तुमने वो किताब खरीदी, रात के 3 बजे पढ़ रहे हो। आखिरी पन्ने पर मीरा का लेटर है।

प्यारे रीडर,
Thanks मेरी किताब पढ़ने के लिए। तुमने मुझे आजाद कर दिया। अब 4 पूरी हो गई।
पहला : रिसेप्शनिस्ट
दूसरा: वॉचमैन
तीसरा: इंस्पेक्टर
चौथा: तुम

3:04 बजे दरवाजा मत खोलना। वो अंदर आ जाएगा।
With love, Meera.

The end -
Patel RJ.